Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दुर्गा है मेरी माँ (Durga Hai Meri Maa ) - Mahendra Kapoor Devi Bhajan

सुनिए महेंद्र कपूर का प्रसिद्ध देवी भजन दुर्गा है मेरी माँ, अर्थ एवं महिमा सहित। पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स और पाइए माता की कृपा।

भजन परिचय | Bhajan Introduction

"दुर्गा है मेरी माँ" (Durga Hai Meri Maa) एक अमर शक्ति-भजन है, जिसे स्वर-सम्राट महेंद्र कपूर एवं मीनू पुरुषोत्तम की भक्तिपूर्ण आवाज़ में सजाया गया है। यह भजन 1981 की प्रसिद्ध फिल्म "क्रांति" का हिस्सा है, जिसके संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल तथा गीतकार मनोज कुमार हैं। यह भजन आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव प्रकट करता है। सनातन परंपरा में स्त्री-शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है — "या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता" — और यह भजन उसी जगत-जननी की ममतामयी, दुष्टनाशिनी एवं कल्याणकारी स्वरूप का गान करता है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी माँ उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण तथा घर के नित्य पूजन में इसका गायन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

दुर्गा है मेरी माँ | Durga Hai Meri Maa

(फिल्म: क्रांति | स्वर: महेंद्र कपूर, मीनू पुरुषोत्तम)


दुर्गा है मेरी माँ, दुर्गा है मेरी माँ
दुखियों के दुख की दाता, भक्तों की भाग्य विधाता
दुर्गा है मेरी माँ...

जय जय जय अम्बे माँ, जय जय जय अम्बे
तेरी महिमा अपरंपार, तू ही सबकी है दातार
दुर्गा है मेरी माँ...

शेरों पर सवारी तेरी, माँ भवानी अवतार तेरा
दुष्टों का संहार करे तू, भक्तों का उद्धार करे तू
दुर्गा है मेरी माँ...

महालक्ष्मी महासरस्वती, तीनों रूप तेरे हैं माता
जगत जननी जगदम्बे, तेरे चरणों में शीश झुकाता
दुर्गा है मेरी माँ...

संकट में जो तेरा ध्यावे, भय सारे मिट जावें
भक्तों के संग तू सदा है, माँ की महिमा सब गावें
दुर्गा है मेरी माँ...

जय जय जय अम्बे माँ, जय जय जय अम्बे
दुर्गा है मेरी माँ, दुर्गा है मेरी माँ...

नोट: यह भजन फिल्म "क्रांति" (1981) का प्रसिद्ध भक्ति-गीत है। मूल गीत के कुछ अंशों का यहाँ भावानुसार प्रस्तुतीकरण किया गया है।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल स्वर माता के प्रति पूर्ण समर्पण का है। "दुर्गा है मेरी माँ" — यह एक पंक्ति ही भक्त और भगवान के बीच के सबसे गहरे, सबसे मधुर संबंध को उजागर करती है। भक्त माता को केवल देवी नहीं, बल्कि अपनी जन्मदात्री माँ के रूप में स्वीकार करता है। जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चे के दुख-दर्द को अपना दुख मानती है, उसी प्रकार जगत जननी माता दुर्गा अपने भक्तों के कष्टों को स्वयं हर लेती हैं। "दुखियों के दुख की दाता" कहकर भक्त यह स्वीकार करता है कि माता ही सभी दुखों की निवारक हैं और "भक्तों की भाग्य विधाता" कहकर यह कि वह भक्तों के भाग्य को भी बदल सकती हैं।

"जय जय जय अम्बे माँ" का उद्घोष भक्ति की पराकाष्ठा है। यह केवल एक जयकारा नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई से निकली हुई पुकार है। "तेरी महिमा अपरंपार" — माता की महिमा का कोई अंत नहीं, कोई सीमा नहीं। वह अनंत हैं, अपार हैं, अगम हैं। "तू ही सबकी है दातार" — यह पंक्ति माता को सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान और सर्वदाता के रूप में स्थापित करती है।

"शेरों पर सवारी तेरी" — यह माता दुर्गा के सिंहवाहिनी स्वरूप का वर्णन है। सिंह शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक है, और माता उस पर सवार होकर यह दर्शाती हैं कि वह स्वयं शक्ति की अधिष्ठात्री हैं। "दुष्टों का संहार करे तू, भक्तों का उद्धार करे तू" — यह द्वंद्व ही देवी की लीला है। जहाँ अधर्म बढ़ता है, वहाँ माता शक्ति धारण करती हैं और दुष्टों का नाश करती हैं; जहाँ भक्त शरण आता है, वहाँ वह करुणा की मूर्ति बन जाती हैं।

"महालक्ष्मी महासरस्वती, तीनों रूप तेरे हैं माता" — यह पंक्ति त्रिदेवी के एकत्व का सुंदर वर्णन है। महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — ये तीनों आदिशक्ति के ही रूप हैं। जो शक्ति, धन और विद्या की अधिष्ठात्री हैं, वही जगत जननी हैं। "संकट में जो तेरा ध्यावे, भय सारे मिट जावें" — यह भक्ति का सार है। जो भी भक्त संकट के समय माता का स्मरण करता है, उसके सभी भय, चिंताएँ और कष्ट स्वतः ही दूर हो जाते हैं। यह भजन भक्त के हृदय में विश्वास, साहस और शांति का संचार करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

पहलू विवरण
भजन का नाम दुर्गा है मेरी माँ (Durga Hai Meri Maa)
गायक महेंद्र कपूर, मीनू पुरुषोत्तम
संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार मनोज कुमार
फिल्म / एल्बम क्रांति (1981)
भाषा हिंदी
मुख्य देवी माता दुर्गा (आदिशक्ति)
भाव / मूड भक्ति, समर्पण, शक्ति, करुणा
मुख्य अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण, नित्य पूजन

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह शास्त्रीय भक्ति और लोक-भक्ति का अद्भुत संगम है। इसमें देवी के सिंहवाहिनी स्वरूप, त्रिदेवी के एकत्व तथा शरणागति के भाव को सरल, हृदयस्पर्शी शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। भजन का संगीत भी ऐसा है कि श्रोता स्वयं को माता के चरणों में समर्पित अनुभव करता है। यह भजन सुनने मात्र से मन में शक्ति, साहस और पवित्रता का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष समय और अवसर इसे और भी प्रभावी बनाते हैं:

  • नवरात्रि के नौ दिन: यह भजन नवरात्रि में विशेष रूप से गाया जाता है। प्रत्येक दिन माता के एक स्वरूप की आराधना के साथ इसका गायन शुभ माना जाता है।
  • दुर्गा पूजा एवं जागरण: बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब में दुर्गा पूजा और जागरण के अवसर पर यह भजन विशेष रूप से लोकप्रिय है।
  • नित्य पूजन: प्रातःकाल स्नान के बाद माता के मंदिर या घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके इस भजन का गायन किया जा सकता है।
  • संकट के समय: जब मन में भय, चिंता या कष्ट हो, तब इस भजन का श्रवण और गायन मानसिक शांति और साहस प्रदान करता है।
  • शुक्रवार एवं मंगलवार: देवी आराधना के लिए समर्पित ये दिन इस भजन के गायन के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

गायन विधि: सर्वप्रथम माता के चरणों में प्रणाम करें, दीप और धूप प्रज्वलित करें, फिर शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ भजन का गायन करें। गायन के समय मन को एकाग्र रखें और माता के स्वरूप का ध्यान करें। भजन के अंत में माता की आरती अवश्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन 1981 की प्रसिद्ध हिंदी फिल्म "क्रांति" का हिस्सा है। इसके गायक महेंद्र कपूर और मीनू पुरुषोत्तम हैं, संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का है और गीत मनोज कुमार ने लिखा है।

इस भजन में आदिशक्ति माता दुर्गा की स्तुति की गई है। भजन में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — तीनों स्वरूपों को एक ही आदिशक्ति का रूप बताया गया है।

हाँ, यह भजन नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से गाया जाता है। इसके अतिरिक्त दुर्गा पूजा, जागरण, शुक्रवार और मंगलवार के व्रत में भी इसका गायन शुभ माना जाता है।

इस भजन के श्रवण और गायन से मन में शक्ति, साहस, शांति और पवित्रता का संचार होता है। भक्तों का विश्वास है कि माता की कृपा से संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

हाँ, इस भजन को घर के पूजा स्थल पर शुद्ध भाव और श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है। गायन से पहले दीप प्रज्वलित करें और माता का ध्यान करें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) की संपादकीय टीम द्वारा तैयार किया गया है। इसमें भजन के मूल भाव, शास्त्रीय संदर्भ, देवी उपासना की परंपरा तथा भक्ति-साहित्य के प्रमाणिक स्रोतों का समावेश किया गया है।

संदर्भ: देवी भागवत पुराण, मार्कंडेय पुराण (दुर्गा सप्तशती), तथा भारतीय भक्ति-संगीत परंपरा। भजन के बोल फिल्म "क्रांति" (1981) से लिए गए हैं।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!