Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

दे भक्ति दे शक्ति (De Bhakti De Shakti) - BHARAT KUMAR New Devi Bhajan

भरत कुमार द्वारा गाए गए 'दे भक्ति दे शक्ति' भजन के भावार्थ और भक्तिपूर्ण अर्थ को जानें। आदिशक्ति मां दुर्गा की स्तुति का यह भजन मन को शांति देता है।

"दे भक्ति दे शक्ति (De Bhakti De Shakti)" सुप्रसिद्ध गायक भरत कुमार द्वारा गाया गया एक अत्यंत भावपूर्ण और ऊर्जावान देवी भजन है। यह भजन आदिशक्ति मां दुर्गा के चरणों में पूर्ण समर्पण और आत्म-निवेदन का जीवंत प्रतीक है। सनातन धर्म की शाक्त परंपरा में 'भक्ति' और 'शक्ति' को एक ही सिक्के के दो पहलू माना गया है। जहां भक्ति हृदय को कोमल, करुणामयी और ईश्वर के प्रति समर्पित बनाती है, वहीं शक्ति साधक को आंतरिक बल, तेज और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का साहस प्रदान करती है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी आराध्या मां शेरावाली से प्रार्थना करता है कि वे उसे सांसारिक मोह-माया से मुक्त कर अपनी अनन्य भक्ति प्रदान करें और साथ ही जीवन के संघर्षों का सामना करने के लिए दिव्य शक्ति से अभिसिंचित करें। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी जैसे पावन अवसरों पर भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और इसके श्रवण मात्र से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ दे भक्ति दे शक्ति ॥

(कोरस / मुखड़ा)
दे भक्ति दे शक्ति मुझे हे मां शेरावालिये,
चरणों में अपने रख ले मां मेहरावालिये।
दे भक्ति दे शक्ति मुझे हे मां शेरावालिये,
चरणों में अपने रख ले मां मेहरावालिये॥

(अंतरा - 1)
अंधकार मिटा दे मां, ज्ञान का दीप जला,
भटके हुए इस बालक को, सीधा मार्ग दिखा।
तेरे सिवा न कोई मेरा, ओ जोतावालिये,
दे भक्ति दे शक्ति मुझे हे मां शेरावालिये॥

(अंतरा - 2)
महिमा तेरी अपरम्पार, गाए सारा संसार,
जो भी आए द्वार तेरे, पाए सच्चा प्यार।
दुष्टों का संहार करे, तू ही लाटावालिये,
दे भक्ति दे शक्ति मुझे हे मां शेरावालिये॥

(अंतरा - 3)
भर दे झोली खाली सबकी, हे दुर्गे कल्याणी,
तेरी शरण में जो भी आया, उसकी विपदा टाली।
करुणा की वर्षा कर दे, ओ पहाड़ावालिये,
दे भक्ति दे शक्ति मुझे हे मां शेरावालिये,
चरणों में अपने रख ले मां मेहरावालिये॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल भाव पूर्ण शरणागति और दिव्य याचना है। भक्त अपनी आराध्या मां जगदम्बा से किसी भौतिक सुख या सांसारिक वैभव की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि वह जीवन के परम लक्ष्य यानी 'भक्ति' और 'शक्ति' की कामना कर रहा है।

भक्ति का अर्थ: भक्ति वह दिव्य प्रेम है जो जीव को उसके मूल स्रोत (परमात्मा) से जोड़ता है। जब भक्त मां से भक्ति मांगता है, तो वह वास्तव में अपने अहंकार का विसर्जन कर रहा होता है। वह चाहता है कि उसका मन सदैव मां के चरणों में लगा रहे और वह सांसारिक विकारों जैसे काम, क्रोध, लोभ और मोह से दूर रहे।

शक्ति का अर्थ: शक्ति केवल शारीरिक बल नहीं है, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा है। संसार में रहते हुए मनुष्य को अनेक कठिनाइयों, दुखों और मानसिक द्वंद्वों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए मां की कृपा रूपी शक्ति की आवश्यकता होती है।

इस प्रकार, यह भजन साधक को एक संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जहां हृदय में मां के प्रति कोमल भक्ति हो और कर्म क्षेत्र में चुनौतियों से लड़ने के लिए वज्र जैसी शक्ति हो।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली प्रार्थना है जो साधक के अंतःकरण को झंकृत करती है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति और शक्ति का समन्वय: यह भजन जीवन के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों—समर्पण (भक्ति) और सामर्थ्य (शक्ति)—के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित करता है।
  • सरल और सुबोध भाषा: भजन में प्रयुक्त शब्द अत्यंत सरल हैं, जिससे आम जनमानस भी इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को आसानी से समझ सकता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: सुरिंदर कोहली के संगीत निर्देशन और भरत कुमार की भावपूर्ण आवाज ने इस भजन में एक ऐसा दिव्य प्रभाव पैदा किया है जो श्रोता के मन से अवसाद और भय को दूर कर देता है।
  • शरण्य भाव: भजन की प्रत्येक पंक्ति में मां के प्रति अटूट विश्वास और यह भाव छिपा है कि मां ही अंतिम आश्रय हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि मां की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, क्योंकि मां सदैव अपने बच्चों की पुकार सुनने के लिए तत्पर रहती हैं, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:

  • शुभ समय: इस भजन का गायन सुबह के समय पूजा-आरती के दौरान या संध्या काल में माता की चौकी के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है।
  • विशेष अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों में इस भजन का श्रवण और कीर्तन करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त मंगलवार और शुक्रवार को भी इसका पाठ किया जा सकता है।
  • गायन की विधि: शांत चित्त होकर, माता की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी का दीपक जलाकर, पूर्ण श्रद्धा भाव से इस भजन को गाना चाहिए। यदि संभव हो तो परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर संकीर्तन के रूप में इसका गायन करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Spiritual Context

यह भजन साक्षात आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित है। सनातन दर्शन के अनुसार, मां दुर्गा ही सृष्टि की आदि कारण हैं। वे ही महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के रूप में ब्रह्मांड का संचालन, पोषण और संहार करती हैं।

इस भजन में मां को विभिन्न नामों से पुकारा गया है जैसे—'शेरावालिये' (सिंह पर सवारी करने वाली), 'मेहरावालिये' (कृपा करने वाली), 'जोतावालिये' (अखंड ज्योति के रूप में विराजमान) और 'पहाड़ावालिये' (पर्वतों पर निवास करने वाली)। ये सभी नाम मां के ममतामयी और रक्षक स्वरूप को दर्शाते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त मां के उसी विराट और करुणामयी स्वरूप का ध्यान करता है जो अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन के निर्माण में भारतीय भक्ति संगीत जगत के प्रतिष्ठित कलाकारों का योगदान रहा है:

  • गायक और गीतकार: भरत कुमार ने न केवल इस भजन को अपनी मधुर और ओजस्वी आवाज दी है, बल्कि इसके मर्मस्पर्शी शब्दों की रचना भी स्वयं की है। उनके शब्द सीधे हृदय को छूते हैं।
  • संगीत निर्देशक: सुप्रसिद्ध संगीतकार सुरिंदर कोहली ने इस भजन को पारंपरिक और आधुनिक वाद्यों के सुंदर मिश्रण के साथ संगीतबद्ध किया है, जिससे भजन की लयबद्धता और प्रभावशीलता कई गुना बढ़ गई है।
  • म्यूजिक लेबल: भारत की अग्रणी संगीत कंपनी टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले इसे रिलीज किया गया है, जिसने इसे देश-विदेश के कोने-कोने में बसे भक्तों तक पहुंचाया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन मुख्य रूप से हिंदी भाषा में रचित है, जिसमें पंजाबी भक्ति परंपरा के शब्दों जैसे 'शेरावालिये', 'मेहरावालिये', 'जोतावालिये' और 'पहाड़ावालिये' का अत्यंत सुंदर प्रयोग किया गया है। यह शैली उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के देवी जागरणों की पारंपरिक शैली से मेल खाती है।

काव्य दृष्टि से इसमें 'प्रार्थना शैली' और 'विनय के पद' का प्रभाव दिखाई देता है। पंक्तियों का अंत तुकांत (Rhyming) है, जिससे इसे याद रखना और सामूहिक रूप से गाना अत्यंत सरल हो जाता है। भजन का प्रवाह अत्यंत सहज है और यह श्रोता को आदि से अंत तक बांधे रखता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब हम मां से कहते हैं कि "तेरे सिवा न कोई मेरा", तो हम अपने झूठे सांसारिक संबंधों और अहंकार का त्याग कर रहे होते हैं। यही वास्तविक समर्पण है।
  2. सच्चे मार्ग की खोज: "भटके हुए इस बालक को सीधा मार्ग दिखा" पंक्ति हमें सिखाती है कि जीवन में जब भी हम भ्रमित हों, हमें ईश्वर से सही दिशा और सद्बुद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।
  3. संतुलित जीवन: जीवन में केवल कर्म (शक्ति) या केवल विचार (भक्ति) पर्याप्त नहीं हैं। दोनों का संतुलन ही मनुष्य को पूर्णता की ओर ले जाता है।
  4. सकारात्मकता और आशा: यह भजन हमें सिखाता है कि चाहे कितनी भी बड़ी विपदा क्यों न हो, मां की शरण में जाने से हर संकट का समाधान संभव है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शेरावालिये सिंह की सवारी करने वाली मां सिंह शौर्य और निर्भयता का प्रतीक है, मां हमें भी निर्भय बनाती हैं।
मेहरावालिये कृपा और दया बरसाने वाली मां मां का वह स्वरूप जो अपने बच्चों के अपराधों को क्षमा कर उन पर दया करता है।
जोतावालिये अखंड ज्योति के रूप में प्रकाशित मां हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं।
पहाड़ावालिये पर्वतों (जैसे जम्मू की त्रिकुटा पहाड़ी) पर रहने वाली ऊंचे पर्वतों पर निवास करना मां की सर्वोच्चता और दिव्य स्थिति को दर्शाता है।
विपदा कष्ट, संकट या मुसीबत सांसारिक जीवन में आने वाली बाधाएं जिन्हें मां की कृपा से दूर किया जा सकता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "दे भक्ति दे शक्ति मुझे हे मां शेरावालिये, चरणों में अपने रख ले मां मेहरावालिये।"
भावार्थ: हे सिंहवाहिनी मां! मुझे अपनी अनन्य भक्ति और जीवन जीने की शक्ति प्रदान करें। हे कृपालु मां, मुझे संसार की मोह-माया से बचाकर सदैव अपने पावन चरणों की शरण में स्थान दें।

पंक्ति: "अंधकार मिटा दे मां, ज्ञान का दीप जला, भटके हुए इस बालक को, सीधा मार्ग दिखा।"
भावार्थ: हे मां, मेरे मन में व्याप्त अज्ञान, मोह और भ्रम के अंधकार को दूर कर ज्ञान का दिव्य प्रकाश आलोकित कर दीजिए। मैं इस संसार रूपी चक्रव्यूह में भटक गया हूँ, मुझे सत्य और धर्म का सीधा मार्ग दिखाइए।

पंक्ति: "महिमा तेरी अपरम्पार, गाए सारा संसार, जो भी आए द्वार तेरे, पाए सच्चा प्यार।"
भावार्थ: हे जगत जननी, आपकी महिमा अनंत है, जिसका गुणगान संपूर्ण चराचर जगत करता है। जो भी भक्त निष्कपट भाव से आपके द्वार पर आता है, उसे आपकी ममता और असीम स्नेह प्राप्त होता है।

पंक्ति: "भर दे झोली खाली सबकी, हे दुर्गे कल्याणी, तेरी शरण में जो भी आया, उसकी विपदा टाली।"
भावार्थ: हे कल्याण करने वाली मां दुर्गे! सभी भक्तों की खाली झोलियों को सुख, शांति और समृद्धि से भर दीजिए। इतिहास साक्षी है कि जिसने भी सच्चे मन से आपकी शरण ली, आपने उसके जीवन के सभी संकटों और दुखों का तत्क्षण निवारण कर दिया।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन या श्रवण से पूर्व अथवा पश्चात मां दुर्गा के इन दिव्य मंत्रों का जाप करने से भजन का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो सभी मंगलों में मंगल रूप हैं, कल्याणमयी हैं, पुरुषार्थ को सिद्ध करने वाली हैं, शरण देने वाली हैं, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं, उन नारायणी स्वरूप मां को बारंबार नमस्कार है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन्हें मेरा बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दे भक्ति दे शक्ति (De Bhakti De Shakti)
गायक (Singer) भरत कुमार (Bharat Kumar)
गीतकार (Lyricist) भरत कुमार (Bharat Kumar)
संगीत निर्देशक (Music Director) सुरिंदर कोहली (Surinder Kohli)
मुख्य देवी-देवता मां दुर्गा / आदिशक्ति
भजन का भाव (Bhava) समर्पण, प्रार्थना, करुणा, वीर-भक्ति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, मंगलवार, शुक्रवार, जागरण
म्यूजिक लेबल T-Series

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मुख्य गायक भरत कुमार हैं। उन्होंने अपनी अत्यंत सुरीली और भावपूर्ण आवाज में इस भजन को गाया है।

इस भजन का संगीत निर्देशन सुप्रसिद्ध संगीतकार सुरिंदर कोहली द्वारा किया गया है, जिन्होंने इसे पारंपरिक और आधुनिक धुनों का एक बेहतरीन मिश्रण दिया है।

'भक्ति' मनुष्य के हृदय को शुद्ध और ईश्वर के प्रति समर्पित करती है, जबकि 'शक्ति' उसे जीवन की कठिनाइयों से लड़ने का साहस और आंतरिक बल देती है। दोनों का होना एक संतुलित जीवन के लिए आवश्यक है।

यह भजन आदिशक्ति मां दुर्गा (शेरावाली, जोतावाली, पहाड़ावाली) को समर्पित है, जो शक्ति और करुणा की अधिष्ठात्री देवी हैं।

यद्यपि इसे कभी भी सुना जा सकता है, लेकिन सुबह की पूजा, संध्या आरती, मंगलवार, शुक्रवार और विशेष रूप से नवरात्रि के दिनों में इसे सुनना और गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

हाँ, इसकी लय और ताल अत्यंत सुगम और मनमोहक हैं, जो इसे माता की चौकी, जागरण और सामूहिक संकीर्तन के लिए बेहद उपयुक्त बनाती हैं।

इसका मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने अहंकार को छोड़कर ईश्वर की शरण में जाना चाहिए और अपनी उन्नति के साथ-साथ लोक-कल्याण के लिए सद्बुद्धि और शक्ति की याचना करनी चाहिए।

यह भजन प्रसिद्ध भारतीय म्यूजिक लेबल टी-सीरीज (T-Series) के भक्ति सागर डिवीजन के अंतर्गत आधिकारिक रूप से जारी किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "दे भक्ति दे शक्ति" भजन के आध्यात्मिक, साहित्यिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस सामग्री का संकलन सनातन परंपरा के ग्रंथों, शाक्त दर्शन के सिद्धांतों और संगीत के प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर किया गया है। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों को न केवल भजन के शब्द प्रदान करती है, बल्कि उन्हें इसके अंतर्निहित दिव्य संदेश से भी जोड़ती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - शाक्त दर्शन और मां दुर्गा की महिमा।
  • टी-सीरीज भक्ति सागर - आधिकारिक भजन विवरण और संगीत क्रेडिट।
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय देवी जागरण एवं संकीर्तन पद्धति।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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