radha bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

चलो शिव शंकर के मंदिर में (Chalo Shiv Shankar Ke Mandir Mein) - SACHDEVA Shiv Aradhana

विपिन सचदेवा द्वारा गाए प्रसिद्ध शिव भजन 'चलो शिव शंकर के मंदिर में' के लिरिक्स, भावार्थ और शिव आराधना का महत्व जानें। महादेव की भक्ति में लीन हों।

चलो शिव शंकर के मंदिर में - विपिन सचदेवा शिव आराधना (Chalo Shiv Shankar Ke Mandir Mein - SACHDEVA Shiv Aradhana)

प्रस्तुत पावन भजन 'चलो शिव शंकर के मंदिर में' सनातन भक्ति परंपरा और शिव आराधना का एक अत्यंत मधुर, कर्णप्रिय और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध रत्न है। भगवान भोलेनाथ की महिमा में रचित इस कृति को प्रसिद्ध भजन गायक विपिन सचदेवा (Vipin Sachdeva) ने अपने अनूठे और भावपूर्ण स्वर से सजाया है, जिसे टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले प्रस्तुत किया गया है। सनातन धर्म में देवाधिदेव महादेव को 'आशुतोष' कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह जो अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले और अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करने वाले करुणा सागर हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शक में हम इस भजन के माध्यम से शिव अराधना के विभिन्न आयामों, इसके दार्शनिक महत्व, और शिव भक्तों के जीवन में इस संकीर्तन की महत्ता पर विस्तार से चर्चा करेंगे। सावन मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सोमवार के पावन दिनों में इस प्रकार के शिव भजन साधकों को आशुतोष की शरण में ले जाने का कार्य करते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखाड़ा (Refrain)

चलो शिव शंकर के मंदिर में, भक्तों, चलो शिव शंकर के मंदिर में,
डमरू वाले की महिमा निराली, चलो शिव शंकर के मंदिर में।
भोले बाबा की जटाओं से बहे गंगा धारा,
चरणों में झुकता है सारा संसारा...

प्रथम अंतरा

गले में सर्प विराजे, हाथ त्रिशूल सुहाए,
नंदी की सवारी पे भोलेनाथ आएं।
जो कोई सच्चे मन से पुकारे ओ भोले,
उसकी किस्मत के खुल जाते हैं ताले।
चलो शिव शंकर के मंदिर में, भक्तों, चलो शिव शंकर के मंदिर में।

द्वितीय अंतरा

कैलाश पर्वत पे डेरा है जिनका निराला,
संसार को बचाने पिया जिसने विष प्याला।
नीलकंठ नाम तुम्हारा, जग के आधार हो,
भक्तों के संकट हरने वाले करुणावतार हो।
चलो शिव शंकर के मंदिर में, भक्तों, चलो शिव शंकर के मंदिर में।

तृतीय अंतरा

भस्म रमिता भोले बाबा, डमरू जो बजाएं,
भूत प्रेत पिशाच सारे चरणों में आएं।
भेद न जाने कोई इनकी माया अपार का,
स्वामी है तू ही तो सारे संसार का।
चलो शिव शंकर के मंदिर में, भक्तों, चलो शिव शंकर के मंदिर में।

अंतिम अंतरा एवं समापन

विपिन सचदेवा गाए महिमा तेरी बारंबार,
दर्शन पाकर धन्य हुआ यह सारा परिवार।
हर हर महादेव बोले जो भी नर और नारी,
उसकी हर एक विपदा टल जाए सारी।
चलो शिव शंकर के मंदिर में, भक्तों, चलो शिव शंकर के मंदिर में।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, अपितु यह एक जीवंत आध्यात्मिक यात्रा है जो साधक को भौतिक संसार से निकालकर देवाधिदेव महादेव के पावन चरणों तक ले जाती है।

मुखाड़ा भावार्थ: गायक सभी भक्तों का आह्वान करते हुए कहते हैं कि हे भक्तों! अपने सभी सांसारिक बंधनों और चिंताओं को छोड़कर चलो शिव शंकर के मंदिर में चलें। उस डमरू वाले की महिमा इस संपूर्ण ब्रह्मांड में सबसे निराली और अलौकिक है। जिनकी पावन जटाओं से माँ गंगा की धारा निरंतर प्रवाहित होती है और जिनके चरणों में यह संपूर्ण संसार शीश झुकाता है, ऐसे भोलेनाथ की शरण में जाने से आत्मा को परम शांति मिलती है।

प्रथम अंतरा भावार्थ: भगवान शिव का स्वरूप वैराग्य और करुणा का अद्भुत संगम है। जिनके गले में विषैला सर्प आभूषण के रूप में सुशोभित है और जिनके हाथ में दुष्टों के संहार और धर्म की रक्षा के लिए त्रिशूल रहता है। जो अपने प्रिय वाहन नंदी की सवारी पर आसीन होकर अपने भक्तों की सुध लेने आते हैं। जो भी मनुष्य सच्चे और निर्मल मन से 'ओ भोले' पुकारता है, उसकी बंद किस्मत के ताले तत्काल खुल जाते हैं और उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

द्वितीय अंतरा एवं नीलकंठ महिमा: शिवजी का निवास हिमालय के सर्वोच्च शिखर कैलाश पर्वत पर है। समुद्र मंथन के समय जब संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष निकला, तो भोलेनाथ ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया और 'नीलकंठ' कहलाए। वे इस जगत के एकमात्र आधार और करुणावतार हैं जो अपने भक्तों के सभी संकटों को हर लेते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • दिव्य स्वरूप का वर्णन: भजन में भगवान शिव के त्रिशूल, डमरू, सर्प, नंदी और गंगा धर स्वरूप का बहुत ही सुंदर सजीव चित्रण किया गया है।
  • आशुतोष भाव: शिवजी के अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले स्वभाव (आशुतोष) को रेखांकित किया गया है, जिससे भक्तों का विश्वास और अधिक दृढ़ होता है।
  • संगीत एवं स्वर: प्रसिद्ध गायक विपिन सचदेवा की मधुर आवाज और टी-सीरीज का संगीत इसे हर वर्ग के श्रोता के लिए अत्यंत कर्णप्रिय बनाता है।
  • मानसिक शांति: इस संकीर्तन के निरंतर श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

शिव भजनों का आनंद और आध्यात्मिक लाभ तब और अधिक बढ़ जाता है जब इन्हें उचित समय और विधि के साथ सुना या गाया जाए:

सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक) या प्रदोष काल (संध्या के समय) में इस भजन को सुनना अत्यंत फलदायी माना गया है।

विशेष अवसर: सावन मास (Sawan Month), महाशिवरात्रि (Mahashivratri), प्रत्येक सोमवार और प्रदोष व्रत के दिनों में इस भजन को घर या मंदिर में बजाने से विशेष शिव कृपा प्राप्त होती है।

पूजा विधि के साथ: शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित करते समय यदि पृष्ठभूमि में यह भजन चलता रहे, तो पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। इसी प्रकार भगवान की आराधना के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवाधिदेव महादेव (शिव शंकर) और माता पार्वती हैं। सनातन परंपरा में शिव को आदि गुरु, योगेश्वर और संहारक के रूप में पूजा जाता है। भगवान शिव के साथ-साथ उनके संपूर्ण परिवार—गणेश जी, कार्तिकेय जी, नंदी और माँ गंगा का स्मरण इस भजन में किया गया है। विपिन सचदेवा जैसे प्रसिद्ध भक्ति गायक ने अपनी कला के माध्यम से इस परंपरा को आधुनिक युग में भी जीवित रखा है और भक्तों को शिव साधना से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी-अवधी मिश्रित शैली है, जिसे भारत का हर आम और खास नागरिक आसानी से समझ सकता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे 'डमरू वाले की महिमा निराली' और 'किस्मत के खुल जाते हैं ताले'। काव्यात्मक लयबद्धता ऐसी है कि एक बार सुनने के बाद श्रोता स्वतः ही इसे गुनगुनाने लगता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी विषम परिस्थितियाँ क्यों न आएं, व्यक्ति को भगवान शिव की तरह धैर्यवान और सहनशील होना चाहिए। जिस प्रकार शिव ने विषपान कर संसार की रक्षा की, उसी प्रकार हमें भी समाज कल्याण के मार्ग पर चलना चाहिए। सच्चा भक्त वही है जो अहंकार का त्याग कर भोलेनाथ की शरण में जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाला शिवजी का विशेष नाम
नीलकंठ नीले कंठ वाला विष पीने के बाद पड़ा नाम
भस्म रमिता शरीर पर भस्म लगाने वाला वैराग्य का प्रतीक
डमरू शिवजी का वाद्य यंत्र सृष्टि की ध्वनि का प्रतीक

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित महामृत्युंजय मंत्र और शिव श्लोक का जाप करने से आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

इसके अतिरिक्त भगवान शिव की महिमा समझने के लिए आप महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ और विधि भी पढ़ सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चलो शिव शंकर के मंदिर में (Chalo Shiv Shankar Ke Mandir Mein)
प्रमुख गायक विपिन सचदेवा (Vipin Sachdeva)
संगीत लेबल टी-सीरीज (T-Series)
मुख्य आराध्य भगवान शिव / भोलेनाथ
भाषा हिंदी
मुख्य विषय शिव आराधना, भक्ति और महिमा
उपयुक्त अवसर सावन मास, महाशिवरात्रि, सोमवार व्रत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन के गायक प्रसिद्ध पार्श्व एवं भक्ति गायक विपिन सचदेवा (Vipin Sachdeva) हैं।

यह भजन टी-सीरीज (T-Series) भक्ति संगीत के बैनर तले प्रस्तुत किया गया है।

प्रातःकाल पूजा के समय, सोमवार के दिन या सावन मास में इस भजन को सुनना अत्यंत आनंददायक और आध्यात्मिक रूप से लाभदायक होता है।

जो भगवान अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और उन्हें मनचाहा वरदान देते हैं, उन्हें 'आशुतोष' कहा जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन धर्म की परंपराओं, शिव महिमा और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। इस सामग्री का उद्देश्य पाठकों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जानकारी प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • 1. शिवमहापुराण - वेदमार्ग प्रकाशन
  • 2. पारंपरिक शिव भजन संकलन एवं ऑडियो अभिलेख
  • 3. टी-सीरीज भक्ति सागर आर्काइव्स

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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