Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चाही नहीं सोना चांदी धवन (Chahi nahi sona chaandi dhawan) - pawansingh Devigeet

माँ माया को समर्पित यह भजन भक्तों की आस्था को और उनका ध्यान केंद्रित करने का अद्भुत साधन है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ माया का भजन: भक्तों की भावनाओं का अद्भुत संगम

इस भजन में माँ माया की आराधना और उनकी कृपा की प्राप्ति की गहराई में जाना है।

चाही नहीं सोना चांदी धवन चाही नहीं सोना चांदी धवन चाही नहीं सोना चांदी धवन चाही नहीं सोना चांदी धवन हे माया रानी, तुम हो प्यारी हमको चाहिए तेरा ध्यान हे माया रानी, तुम हो प्यारी समस्त संकट मिटे, हो सबका कल्याण सुख-दुख सब लेकर हम आते तुम्हारी भक्ति में लीन हो जाते दुःख में तुम सहारा हो सुख में तुम सारा हो हे माया रानी, तुम हो प्यारी हमको चाहिए तेरा ध्यान हे माया रानी, तुम हो प्यारी समस्त संकट मिटे, हो सबका कल्याण चाही नहीं सोना चांदी धवन चाही नहीं सोना चांदी धवन
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का विषय वस्तु माता माया की अनुकंपा प्राप्ति है। 'चाही नहीं सोना चांदी धवन' की पंक्तियां स्पष्ट करती हैं कि भक्त को सांसारिक संपत्ति या भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता नहीं है। वे केवल माँ माया का ध्यान और उनकी कृपा के इच्छुक हैं। यह भक्त की भक्ति और उनके समर्पण को दर्शाता है। भक्त मानते हैं कि यदि माँ उनके साथ हैं, तो सभी विपत्तियां उनके ऊपर से गुजर जाएंगी। इस प्रकार, यह भजन भक्ति के सर्वोच्च स्तर को प्रदर्शित करता है, जिसमें भक्त का ध्यान केवल ईश्वर पर होता है।

भजन की अगली पंक्तियों में भक्त माँ से उनका ध्यान प्राप्त करने की प्रार्थना कर रहे हैं। जब भक्त कहते हैं कि 'सुख-दुख सब लेकर हम आते', तो वे यह स्पष्ट करते हैं कि सभी प्रकार के अनुभव - सुख और दुःख - माँ द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं। यह पंक्ति भक्तों के मन में यह विश्वास जगाती है कि दुख का सामना भी भगवती की कृपा से संभव है। साथ ही, भक्त कहते हैं कि यदि हम माँ की भक्ति में लीन हो जाएं, तो हर संकट का समाधान हो सकता है। यह भावार्थ यह बताता है कि हर स्थिति में माँ की उपासना जरूरी है।

भक्ति मार्ग का मुख्य तत्व है श्रद्धा और समर्पण। इस भजन में हम देखते हैं कि भक्त केवल भौतिक वस्तुओं की चाह नहीं रखता, बल्कि आत्मिक संतोष व माँ की कृपा की आकांक्षा करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति का लक्ष्य केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और दीर्घकालिक शांति प्राप्त करना है। माँ माया की प्राप्ति में एक गहरी आस्था दिखाई देती है, जो भक्ति के मार्ग को आसान बनाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का एक गहन धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ है। यह भारतीय पौराणिक ग्रंथों के अनुसार माँ दुर्गा और अन्य शक्तियों की शक्ति का प्रतीक है। देवी के प्रति यह भक्ति का भाव पूराणों में वर्णित है, विशेषकर दुर्गा सप्तशती और कालिका पुराण में। ये ग्रंथ माँ की कृपा की महिमा को वर्णित करते हैं और इस प्रकार यह भजन उन सन्देशों का यथार्थ रूप है। पूजा के समय भक्तों की श्रद्धा से माँ का ध्यान करना हमारे भीतर आंतरिक शक्ति और कामना को पैदा करता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन को गाने या सुनने से मानसिक शांति, शारीरिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। भक्तों की भावना और भक्ति से दीक्षा प्राप्त होती है, जिससे जीवन के उतार-चढ़ाव में स्थिरता आती है। यह भजन आत्मा को ऊंचा उठाने और जीवन में संतोष लाने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है। पूजन करते समय एक दीया जलाना और फूल-मालाएं अर्पित करना चाहिए। अनुशासन के साथ बैठ कर ध्यान के साथ इस भजन का पाठ करना अति लाभदायक होता है। इसे श्रद्धा और संतोष के भाव से गाकर या सुनकर किया जाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य माँ माया की कृपा की प्राप्ति और भक्तों की आस्था को प्रकट करना है। इसमें भौतिक वस्तुओं के स्थान पर दिव्य कृपा की इच्छा की जाती है।

क्या यह भजन किसी विशेष त्योहार से संबंधित है?

यह भजन विशेष रूप से दुर्गा पूजा और अन्य देवी पूजा के अवसर पर गाया जाता है, जब भक्त माता से सुरक्षा और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।

क्या इसका कोई विशेष प्रभाव होता है?

इस भजन का प्रभाव भक्तों के मन में शांतिपूर्ण भावना और सकारात्मक आचार-विचार विकसित करने में मदद करता है। इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति और समर्पण की भावना में वृद्धि होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!