Hanuman Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

अंजनी लाल कल्याण कीजिये (Anjani Lal Kalyan Keejiye) - Rajeev Sharma Hanuman Bhajan

हनुमान जी का यह भजन मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्ति हेतु गहन साधना का एक सरल और प्रभावशाली उपाय है।

प्रस्तावना एवं परिचय

हनुमान जी का कल्याणकारी भजन

हनुमान चालीसा का अद्भुत पाठ, संकट से मुक्ति और कल्याण की कामना करता है।

अंजनी लाल कल्याण कीजिये, अंजनी लाल कल्याण कीजिये। हनुमान जी कलेश मिटाइये, अंजनी लाल कल्याण कीजिये। संकट कटे मिटें सब पीरा, जब सुमिरें हनुमत बलबीरा। राम जी के प्यारे भृगुनाथ जी के सहारे, अंजनी लाल कल्याण कीजिये। नमो नमो हनुमान, नमो नमो हनुमान।। जोगी-जोगी चले सब देश, देखे हनुमान की महिम। हरि-हरी के बिन नहीं कोई, गणेश जी के चरण हैं सुमन। अंजनी लाल कल्याण कीजिये, अंजनी लाल कल्याण कीजिये।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में हनुमान जी को 'अंजनी लाल' के रूप में संबोधित किया गया है, जो भक्तों के संकट और दुखों को दूर करने का कार्य करते हैं। भजन की पहली पंक्ति 'अंजनी लाल कल्याण कीजिये' से स्पष्ट है कि भक्त हनुमान जी से उनके कल्याणकारी कार्य की प्रार्थना कर रहा है। हनुमान जी जो संकटों को दूर करने वाले देवता हैं, उनकी महिमा को रेखांकित किया गया है। यहाँ 'हनुमान जी कलेश मिटाइये' से यह निकला है कि भक्त अपने जीवन में चल रहे कष्टों और दुःखदायी स्थितियों से उबरने के लिए उनकी कृपा चाहता है। इस पंक्ति में बलबीर हनुमान जी की शक्ति और सामर्थ्य का वर्णन किया गया है।

इस भजन का भावार्थ विभिन्न भावनाओं और आस्थाओं को उद्घाटित करता है। 'जब सुमिरें हनुमत बलबीरा' में दिखाया गया है कि भक्त अपने हृदय से हनुमान जी का ध्यान करते हैं और इसी ध्यान से उनके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भक्त का मन हनुमान जी की ओर स्थिर होता है, जिससे वह मानसिक शांति और सद्गति की प्राप्ति करता है। इसे और भी गहरा बनाने के लिए 'राम जी के प्यारे भृगुनाथ जी के सहारे' के संदर्भ में भक्त समर्पण और भक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। ऐसे में भक्त अपने दुखों और कठिनाइयों से मुक्ति की कामना करता है।

हनुमान जी के प्रति भक्ति (भक्ति मार्ग) का अनुसरण करना, भक्त का मुख्य उद्देश्य होता है। हनुमानजी के दिव्य स्वरूप और उनके चमत्कारिक कार्यों के प्रति श्रृद्धा जताना ही इस भजन का मूल उद्देश्य है। भजन में 'नमो नमो हनुमान' की पंक्तियाँ, उनकी महिमा को वर्णित करती हैं। इस प्रकार की भक्ति से भक्त केवल भौतिक सुख-संपत्ति की कामना नहीं करता, बल्कि आध्यात्मिक जगत में भी उन्नति की अपेक्षा करता है। यह भक्ति शक्ति, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि करने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी को भगवान राम के अनन्य भक्त के रूप में जाना जाता है। 'हनुमान चालीसा' जैसी प्रार्थनाएँ और भजन हमेशा हनुमान जी के गहन प्रेम और विश्वास को दर्शाते हैं। रामायण में हनुमान जी का उल्लेख उनकी शक्ति और भक्ति के लिए किया गया है। भक्तों का मानना है कि हनुमान जी संकटमोचन हैं और उनका स्मरण करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं। पौराणिक कथाएँ बताती हैं कि संकट के समय हनुमान जी का ध्यान व आशीर्वाद पाने से भक्त अपने प्रयासों में अधिक सफल होते हैं।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। इस भजन के जाप से मानसिक सुकून मिलता है, तथा अस्थिर मन को शांति प्रदान करता है। हनुमान जी की कृपा से भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है और व्यक्ति की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। इसे लगातार गाने से आत्मबल, धैर्य और साहस में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह और शाम को करना सबसे उत्तम रहता है। श्रद्धा एवं भक्ति भाव से दीप जलाकर, पुष्प अर्पित करके इस भजन का पाठ करें। भजन पाठ करते समय एकाग्रता बनाए रखें और मन को हनुमान जी के प्रति समर्पित कर दें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

अंजनी लाल कल्याण कीजिये भजन का पाठ कब करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को सूर्यास्त के बाद करना चाहिए, विशेषकर जब मानसिक शांति एवं कल्याण की आवश्यकता हो।

हनुमान जी की कृपा पाने के लिए इस भजन का पाठ कितना लाभदायक है?

हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह भजन अत्यंत प्रभावशाली है। नियमित पाठ से भक्त संकटों से मुक्त और शक्ति द्वारा भरे अनुभव करते हैं।

क्या इस भजन में विशेष कष्टों का उल्लेख किया गया है?

इस भजन में भक्त अपने कष्टों और पीड़ाओं का उल्लेख कर हनुमान जी से सहायता की प्रार्थना कर रहा है, जिससे विशेषकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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