Hanuman Bhajan गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki) - HARIHARAN Shree Hanuman Chalisa

आरती कीजै हनुमान लला की सम्पूर्ण लिरिक्स, हरिहरन जी की आवाज़ में भावार्थ और पूजा विधि पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित पावन भक्ति सामग्री।

सनातन धर्म में संकटमोचन श्री हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व है। हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देव हैं, जो अपने भक्तों के सभी कष्टों को क्षण भर में दूर कर देते हैं। "आरती कीजै हनुमान लला की" (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki) श्री हनुमान जी की सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली आरती है। इस पावन आरती का गायन विशेष रूप से संध्याकाल में हनुमान जी की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। प्रसिद्ध गायक हरिहरन जी (Hariharan) द्वारा गाई गई श्री हनुमान चालीसा एल्बम में शामिल यह आरती श्रोताओं को एक परम शांति और भक्तिमय आनंद की अनुभूति कराती है। इस लेख में हम इस पावन आरती के सम्पूर्ण लिरिक्स, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, आरती की शास्त्रीय विधि और इसके चमत्कारी लाभों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics

॥ श्री हनुमान जी की आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सिया सुधि लाये॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्रान उबारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसि बैकुंठ परम पद पावै॥
लंक विध्वंस किये रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

श्री हनुमान जी की यह आरती उनके अद्भुत पराक्रम, निश्छल सेवा भाव और प्रभु श्री राम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति को दर्शाती है। इस आरती का मुख्य भाव यह है कि हनुमान जी महाराज अपने भक्तों के सभी संकटों को हरने वाले और उन्हें अभय प्रदान करने वाले देव हैं।

आरती की शुरुआत में ही हनुमान जी को "रघुनाथ कला" यानी भगवान श्री राम की शक्ति का साक्षात अंश बताया गया है। उनके बल की महिमा ऐसी है कि उनके स्मरण मात्र से बड़े-बड़े पर्वत भी कांपने लगते हैं और कोई भी रोग, शोक या नकारात्मक ऊर्जा साधक के पास नहीं फटक सकती। आरती की प्रत्येक पंक्ति हनुमान जी के जीवन के महान प्रसंगों जैसे- लंका दहन, माता सीता की खोज, लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा के लिए संजीवनी बूटी लाना और पाताल लोक में जाकर अहिरावण का वध करने का स्मरण कराती है। इस आरती का नियमित गान करने से साधक के भीतर साहस, कर्तव्यपरायणता और समर्पण की भावना जाग्रत होती है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ एवं महत्व (Context)
लला (Lala) प्रिय पुत्र या बालक हनुमान जी को माता अंजनी के प्रिय पुत्र के रूप में संबोधित किया गया है।
दुष्ट दलन (Dusht Dalan) दुष्टों का नाश करने वाले नकारात्मक शक्तियों और असुरों का संहार करने वाले।
झांपै (Jhanpai) स्पर्श करना या निकट आना हनुमान जी के भक्तों के पास रोग और दोष नहीं आते।
बीरा (Beera) बीड़ा उठाना या विशेष कार्य का दायित्व प्रभु श्री राम द्वारा माता सीता की खोज का महत्वपूर्ण कार्य सौंपना।
कोट (Kot) किला या परकोटा लंका का अभेद्य और विशाल स्वर्ण किला।
सकारे (Sakare) सुबह-सुबह या शीघ्र ही लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर सुबह से पहले संजीवनी लाना।
जम-कारे (Jam-Kare) यमराज के समान भयंकर रक्षक पाताल लोक के द्वारों और बंधनों को तोड़ना।

आरती में वर्णित देवता की महिमा | Glory of the Deity

इस आरती में श्री हनुमान जी महाराज की बहुआयामी महिमा का गान किया गया है। उन्हें केवल एक बलशाली योद्धा के रूप में ही नहीं, बल्कि संतों के रक्षक और भक्तों के परम हितैषी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हनुमान जी "अष्ट सिद्धि और नौ निधि" के दाता हैं। उनके पास असीमित शक्तियां हैं, परंतु उनका संपूर्ण जीवन केवल और केवल प्रभु श्री राम की सेवा में समर्पित रहा।

आरती में उनके द्वारा किए गए असंभव कार्यों का वर्णन है। जब लंका जैसी अभेद्य नगरी, जिसके चारों ओर समुद्र की गहरी खाई थी, वहां जाने में बड़े-बड़े वीर भी संकोच कर रहे थे, तब पवनपुत्र हनुमान जी ने क्षण भर में उसे पार कर लिया। पाताल लोक में जाकर अहिरावण जैसे मायावी राक्षस का वध करना और लक्ष्मण जी के लिए द्रोणागिरि पर्वत उठा लाना उनकी अतुलनीय शक्ति और बुद्धिमत्ता का परिचायक है।

आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Religious Significance & Traditional Benefits

सनातन परंपरा में आरती को पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया है। मंत्रों और स्तुतियों के पाठ में यदि कोई त्रुटि रह जाती है, तो आरती करने से वह पूर्ण हो जाती है। हनुमान जी की आरती के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • भय और मानसिक तनाव से मुक्ति: हनुमान जी की आरती का श्रवण और गायन करने से मन का भय दूर होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • नकारात्मक शक्तियों का नाश: घर में नियमित रूप से आरती करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह समाप्त होता है और सकारात्मकता का संचार होता है।
  • स्वास्थ्य लाभ: आरती की पंक्तियों के अनुसार, हनुमान जी के स्मरण से शारीरिक व्याधियां और मानसिक रोग दूर रहते हैं।
  • प्रभु राम की कृपा: हनुमान जी की आराधना के बिना भगवान श्री राम की कृपा प्राप्त करना असंभव माना जाता है। हनुमान जी की आरती से साधक को दोनों की संयुक्त कृपा मिलती है।

आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation

हनुमान जी की आरती करते समय शुद्धता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आरती की थाली सजाने और पूजन की शास्त्रीय विधि इस प्रकार है:

  1. थाली की तैयारी: पीतल, तांबे या चांदी की थाली लें। उसमें कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
  2. दीपक और कपूर: थाली में शुद्ध घी का दीपक या कपूर रखें। हनुमान जी की आरती में कपूर का उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है।
  3. पूजन सामग्री: थाली में लाल फूल (विशेषकर गुड़हल या गुलाब), अक्षत (साबुत चावल), रोली और नैवेद्य (बूंदी के लड्डू या गुड़-चना) रखें।
  4. आरती की शुरुआत: हनुमान जी की प्रतिमा के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करें। सबसे पहले तीन बार जल से आचमन करें और फिर आरती का गान प्रारंभ करें।

आरती करने का सही समय, दिशा एवं दीप घुमाने की विधि | Best Time & Movement

आरती करने के भी कुछ विशेष नियम और वैज्ञानिक आधार होते हैं, जिनका पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है:

  • सही समय: हनुमान जी की आरती का सबसे उत्तम समय सुबह सूर्योदय के समय और संध्याकाल (सूर्यास्त के बाद) माना जाता है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को संध्या आरती का अत्यधिक महत्व है।
  • सही दिशा: आरती करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। हनुमान जी की प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • दीप घुमाने की विधि: आरती के दीपक को हनुमान जी के चरणों के पास चार बार, नाभि के पास दो बार, मुखमंडल के पास एक बार और फिर पूरे शरीर के सम्मुख सात बार गोलाकार आकृति (ॐ की आकृति) में घुमाना चाहिए।

आरती के दौरान घंटी, शंख एवं दीप का महत्व | Bell, Conch & Lamp Symbolism

आरती के समय बजने वाली घंटी और शंख केवल ध्वनि उत्पन्न करने के साधन नहीं हैं, बल्कि इनका गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है:

घंटी की ध्वनि से निकलने वाली तरंगें वातावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती हैं। शंख की ध्वनि को विजय और शुभता का प्रतीक माना जाता है। आरती का दीपक ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है, जो हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है। जब हम आरती के बाद दोनों हाथों से आरती की लौ को स्पर्श कर अपनी आंखों और मस्तक पर लगाते हैं, तो वह दिव्य ऊर्जा हमारे शरीर में समाहित हो जाती है।

घर में आरती कैसे करें एवं सावधानियां | Home Aarti & Rules

घर के मंदिर में आरती करते समय कुछ विशेष सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • आरती के समय तन और मन दोनों की शुद्धता अनिवार्य है। स्नान आदि से निवृत्त होकर ही आरती करें।
  • आरती के दौरान परिवार के सभी सदस्यों को एकत्रित होना चाहिए, जिससे घर में सामूहिक सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण हो।
  • आरती की थाली को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, उसे हमेशा किसी आसन, चौकी या थाली स्टैंड पर रखें।
  • आरती समाप्त होने के बाद शंखनाद करें और सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित करें।

आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख | Spiritual Message & Daily Life

"आरती कीजै हनुमान लला की" हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाती, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाती है। हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा दूसरों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए होना चाहिए।

आज के आधुनिक युग में, जहां तनाव और अनिश्चितता बढ़ रही है, हनुमान जी का चरित्र हमें धैर्य और निष्काम कर्म की सीख देता है। हनुमान जी ने कभी भी अपने कार्यों का श्रेय स्वयं नहीं लिया, वे हमेशा स्वयं को प्रभु श्री राम का दास ही कहते रहे। यह परम विनम्रता हमें अपने अहंकार को त्यागने और समाज की सेवा करने की प्रेरणा देती है।

Quick Information Table

विवरण (Field) महत्वपूर्ण जानकारी (Details)
आरती का नाम (Aarti Name) आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki)
आराध्य देव (Deity) श्री हनुमान जी महाराज (Shri Hanuman Ji)
प्रसिद्ध गायक (Singer) हरिहरन (Hariharan) - हनुमान चालीसा पाठ एवं भावार्थ">श्री हनुमान चालीसा एल्बम
मुख्य भाषा (Language) अवधी / ब्रजभाषा मिश्रित हिंदी (Awadhi / Braj)
मुख्य भाव (Bhava) समर्पण, वीरता, दास्य भाव और संकटमोचन भाव
विशेष दिन (Auspicious Days) मंगलवार, शनिवार और हनुमान जन्मोत्सव

मुख्य आध्यात्मिक सीख | Key Takeaways

  • अतुलनीय भक्ति: हनुमान जी की तरह अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पित होना ही सच्ची भक्ति है।
  • संकटों से न डरना: जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा (जैसे लंका की खाई या अहिरावण की माया) क्यों न हो, साहस और बुद्धि से उसे पार किया जा सकता है।
  • परोपकार और सेवा: दूसरों के दुखों को दूर करना और संतों की सहायता करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
  • विनम्रता: असीमित शक्तियों के स्वामी होने के बाद भी हनुमान जी अत्यंत विनम्र और सेवाभावी रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस आरती की रचना महान संत स्वामी रामानंद जी द्वारा की गई थी। कुछ स्थानों पर इसे गोस्वामी तुलसीदास जी की कृतियों से भी जोड़कर देखा जाता है।

वैसे तो हनुमान जी की आरती प्रतिदिन करनी चाहिए, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन इसका विशेष महत्व है। इन दिनों आरती करने से शनि दोष और मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।

हरिहरन जी द्वारा गाई गई यह आरती अत्यंत सुरीली, शांत और शास्त्रीय संगीत के सुरों से सजी है। इसे सुनने से मन को असीम शांति मिलती है और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

हां, महिलाएं पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ हनुमान जी की पूजा, अर्चना और आरती कर सकती हैं। हनुमान जी सभी के संकटों को दूर करने वाले दयालु देव हैं।

कपूर को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। इसकी सुगंध से वातावरण पवित्र होता है, मानसिक शांति मिलती है और घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

इससे भय, रोग, शोक, मानसिक तनाव और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। साधक के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आरती की थाली के चारों ओर जल घुमाने की क्रिया को 'शीतलीकरण' कहा जाता है। यह अग्नि देव को शांत करने और आरती की पवित्रता को सुरक्षित रखने का प्रतीक है।

हां, सुंदरकांड पाठ के समापन पर हनुमान जी की यह आरती करना अनिवार्य माना जाता है। इससे पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों, पारंपरिक पूजा पद्धतियों और संगीत संकलन के आधार पर तैयार किया गया है। इस सामग्री का मुख्य उद्देश्य पाठकों को हनुमान जी की पावन आरती के सही अर्थ और उसकी शास्त्रीय विधि से अवगत कराना है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों के आध्यात्मिक विकास और ज्ञानवर्धन के लिए समर्पित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण एवं श्री रामचरितमानस
  • हनुमान चालीसा एवं आरती संग्रह - गीता प्रेस गोरखपुर
  • हरिहरन जी द्वारा स्वरबद्ध "Shree Hanuman Chalisa" संगीत एल्बम

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 04 Nov 2026

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