Mahadev Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

हर हर महादेव त्रिपुरारी (Har Har Mahadev Tripurari in Hindi)

हर हर महादेव त्रिपुरारी भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics) और हिंदी भावार्थ पढ़ें। भगवान शिव को समर्पित इस पावन भजन से शिव भक्ति का आनंद लें।

Bhaktilok Devotional Archives • Mahadev Bhajan Series

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स एवं भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह पावन भजन "हर हर महादेव त्रिपुरारी" भगवान शिव के अत्यंत कल्याणकारी, संहारक और वैराग्यपूर्ण स्वरूप का सजीव और अत्यंत मनोहारी चित्रण करता है। सनातन धर्म में भगवान शिव को 'शिव' यानी जिसका अर्थ ही परम कल्याण है, के रूप में पूजा जाता है। इस सुमधुर भजन के माध्यम से साधक और भक्त भगवान शिव की अनंत चेतना, उनकी त्रिशूल धारी मुद्रा, पावन भस्म आरती, डमरू की ब्रह्मांडीय ध्वनि और कैलाश पर्वत पर विराजमान ध्यानमग्न मुद्रा का मानसिक स्मरण करते हैं। शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत और पुनरुत्थान अंततः महाकाल में ही होना है। यह भजन साधक को सांसारिक मोह-माया, राग-द्वेष और भौतिक बंधनों से ऊपर उठाकर आत्मा के शाश्वत और वास्तविक स्वरूप को पहचानने की अत्यंत प्रेरणा देता है। भगवान शिव का नाम स्मरण मात्र से पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का आभास होने लगता है। आज के इस विस्तृत आलेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, गायन की विधि और शिव महिमा का संपूर्ण रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| मुखड़ा (Refrain) ||

हर हर महादेव त्रिपुरारी, भजले बन्दे भोले भंडारी!
डमरू बजे कैलाशी का, गूँजे जयकारा काशी का...
हर हर महादेव त्रिपुरारी, भजले बन्दे भोले भंडारी!

|| प्रथम अंतरा (First Stanza) ||

गले में नाग विराजे, जटा में गंगा साजे,
चंद्रमा मस्तक सोहे, भक्तन का मन मोहे!
भस्म रमे अंगों सारे, संकट सब टारे,
ऐसे आशुतोष स्वामी, जग के पालनहारी...
हर हर महादेव त्रिपुरारी, भजले बन्दे भोले भंडारी!

|| द्वितीय अंतरा (Second Stanza) ||

त्रिशूल हाथ में धारी, तीन लोक के अधिकारी,
नंदी की सवारी सोहे, देव मुनि मन मोहे!
जो भी शरण में आवे, मनवांछित फल पावे,
महिमा अपरम्पार भोला लहरी मतवारी...
हर हर महादेव त्रिपुरारी, भजले बन्दे भोले भंडारी!

|| तृतीय अंतरा (Third Stanza) ||

विष को पान किया जिसने, अमरत्व दान दिया जिसने,
प्रलय का तांडव गाजे, रुंड मुंड माला साजे!
धीरज राणा ध्यावे, दर पे शीश झुकावे,
कृपा करो हे महेश्वर, हे त्रिपुरारी...
हर हर महादेव त्रिपुरारी, भजले बन्दे भोले भंडारी!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि शिव के संपूर्ण विराट व्यक्तित्व का दार्शनिक दस्तावेज है। आइए इस पावन भजन के प्रत्येक चरण के गहरे निहितार्थ को समझें:

मुखड़े का भावार्थ:

भजन के आरंभ में ही रचयिता ने 'हर हर महादेव' का महाघोष किया है। 'त्रिपुरारी' वह नाम है जो त्रिपुरासुर जैसे महाबली असुर का वध करने वाले भगवान शिव की अजेय शक्ति को दर्शाता है। 'भोले भंडारी' का अर्थ है कि भगवान शिव अपने भक्तों पर अत्यंत सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं और उन्हें सब कुछ प्रदान कर देते हैं। कैलाशी के डमरू की ध्वनि ब्रह्मांड की उत्पत्ति (नाद ब्रह्म) का प्रतीक है।

अंतर-विस्तार एवं श्रृंगार का भाव:

शिव का स्वरूप वैराग्य का सर्वोच्च शिखर है। उनके गले में नाग (वासुकी) का होना, जटाओं से मां गंगा का अविरल बहना और मस्तक पर द्वितीया का चंद्रमा सुशोभित होना इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति की समस्त शक्तियां उनके नियंत्रण में हैं। भस्म रमाए रखना इस शाश्वत सत्य की याद दिलाता है कि यह नश्वर शरीर अंततः राख हो जाना है, इसलिए अहंकार का त्याग कर भगवान की शरण में जाना ही मनुष्य का परम कर्तव्य है। विषपान की कथा इस बात की साक्षी है कि लोक कल्याण के लिए अपने ऊपर विष सहने वाला ही सच्चा करुणामय देवता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • देवता प्रसंग: यह भजन देवादिदेव महादेव, महाकाल, आशुतोष और त्रिपुरारी को समर्पित है।
  • भक्ति भाव: इसमें शरणागति, समर्पण, भयमुक्ति और सांसारिक प्रपंचों से मुक्ति का अनूठा भाव निहित है।
  • सांस्कृतिक महत्व: महाशिवरात्रि, सावन मास और सोमवार के पवित्र व्रतों में इस भजन का गायन भक्तों में ऊर्जा भर देता है।
  • आंतरिक शांति: इस भजन के निरंतर श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है और ध्यान में स्थिरता आती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष काल (संध्या समय), ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) और सावन मास का समय अत्यंत उत्तम माना गया है। इस भजन को आप निम्नलिखित अवसरों पर गा या सुन सकते हैं:

  1. प्रतिदिन सुबह स्नान के पश्चात शिव मंदिर में या घर के पूजा गृह में दीपक प्रज्वलित करके।
  2. सावन मास के प्रत्येक सोमवार को विशेष शिव रुद्राभिषेक और पूजन के दौरान।
  3. महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर रात्रि जागरण और सामूहिक संकीर्तन में।
  4. घर में होने वाले किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या रुद्राक्ष धारण करते समय।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु स्वयं भगवान शिव (महादेव) हैं, जिन्हें सनातन परंपरा में त्रिमूर्ति में संहारक और पुनरुत्थान के देवता के रूप में पूजा जाता है। शिव परंपरा (शैव मत) में आदिगुरु शंकराचार्य से लेकर नयनार संतों तक ने शिव महिमा का गान किया है। यह भजन आधुनिक काल के रचनाकारों द्वारा पारंपरिक भक्ति रस में पिरोकर प्रस्तुत किया गया है जो नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ता है। इसी प्रकार अन्य स्तुतियों के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन गीतकार राज कुमार जी द्वारा रचित और गायक धीरज राणा द्वारा स्वरबद्ध यह भजन शिव भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। संगीतकार सुशील गोगी ने इसे सुमधुर धुनों से सजाया है। इस भजन की पृष्ठभूमि शिव के उस परम रूप पर आधारित है जहाँ वे काल के भी महाकाल यानी महाकाल कहलाते हैं। रचनाकार ने सरल शब्दों में गहरी दार्शनिक बातों को पिरोया है ताकि हर आयु वर्ग का व्यक्ति इसे आसानी से गा सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी तथा ब्रज-अवधि मिश्रित लोक शैली है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'डमरू बजे कैलाशी का, गूँजे जयकारा काशी का'। लयबद्धता और तुकबंदी इसे भजन मंडियों और व्यक्तिगत साधना दोनों के लिए उपयुक्त बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: भस्म रमाए रखने वाले शिव हमें सिखाते हैं कि शरीर नश्वर है, अतः इस पर घमंड नहीं करना चाहिए।
  • संकट में धैर्य: भगवान शिव ने विषपान किया किंतु लोकहित नहीं छोड़ा; जीवन में संकट आने पर भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
  • शरणागति का फल: जो पूरी निष्ठा से महादेव की शरण में जाता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
  • समानता और बंधुत्व की भावना (शिव सभी के हैं - भूत, पिशाच, देवता, ऋषि, मनुष्य)।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / भाव
त्रिपुरारी त्रिपुरासुर का वध करने वाले भगवान शिव का एक पराक्रमी नाम
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले भक्तों की छोटी सी पूजा से संतुष्ट होने वाले
भस्म विभूति / राख नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक
डमरू शिव का वाद्य यंत्र ब्रह्मांडीय नाद और सृजन की ध्वनि

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"हर हर महादेव त्रिपुरारी, भजले बन्दे भोले भंडारी!"
हे मनुष्य! तू सांसारिक मोह को छोड़कर उन त्रिपुरारी, भोले भंडारी का भजन कर जो सबका उद्धार करते हैं।

"गले में नाग विराजे, जटा में गंगा साजे..."
जिनकी जटाओं में मोक्षदायिनी गंगा विराजमान हैं और गले में विषधर नाग आभूषण की तरह सुशोभित हैं, वे समस्त चराचर जगत के स्वामी हैं।

"विष को पान किया जिसने, अमरत्व दान दिया जिसने..."
समुद्र मंथन के समय कालकूट विष को अपने कंठ में धारण कर नीलकंठ बने और देवों को अमरता प्रदान की, ऐसे करुणामय शिव की महिमा अपरंपार है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

शिव साधना को पूर्णता प्रदान करने के लिए इस महामृत्युंजय मंत्र का स्मरण अवश्य करना चाहिए:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

अर्थ: हम त्रिनेत्रधारी शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध और पुष्टि भरते हैं। जैसे ककड़ी अपनी बेल से पककर सहज अलग हो जाती है, वैसे ही हमें भी मृत्यु के बंधनों से मुक्त करें, मोक्ष से नहीं।

आप अधिक स्तुतियों के लिए श्री हनुमान चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं, क्योंकि हनुमान जी को रुद्र (शिव) का ही अंशा अवतार माना गया है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नामहर हर महादेव त्रिपुरारी (Har Har Mahadev Tripurari)
आराध्य देवभगवान शिव / महादेव / भोले भंडारी
गायकधीरज राणा (Dheeraj Rana)
गीतकारराज कुमार (Raj Kumar)
संगीतकारसुशील गोगी (Sushil Gogi)
भाषाहिंदी / लोक भाषा
मुख्य भावशिव भक्ति, वैराग्य, शरणागति और आत्म-कल्याण
उपयुक्त अवसरसावन मास, महाशिवरात्रि, सोमवार व्रत एवं सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध शिव भजन के गायक धीरज राणा (Dheeraj Rana) हैं, तथा इसके गीत राज कुमार जी द्वारा लिखे गए हैं।

त्रिपुरासुर नामक मायावी और शक्तिशाली असुर का वध करने के कारण भगवान शिव को 'त्रिपुरारी' कहा जाता है।

यह भजन सावन मास के सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष काल और प्रतिदिन सुबह की पूजा के समय गाने या सुनने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है।

भस्म इस संसार की नश्वरता का प्रतीक है। यह सिखाती है कि शरीर अंततः राख हो जाना है, इसलिए भौतिक मोह को छोड़कर परमात्मा से प्रेम करना चाहिए।

हाँ, यह एक अत्यंत ऊर्जावान और मधुर संकीर्तन भजन है जिसे पारिवारिक अनुष्ठानों और सत्संग में आसानी से गाया जा सकता है।

शिव भक्ति से मन का अहंकार समाप्त होता है, मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति संकटों का सामना धैर्य के साथ करना सीखता है।

भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भावना और सरल पूजा (जल और बेलपत्र) से ही अति शीघ्र प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वरदान दे देते हैं।

यह भजन सांसारिक प्रपंचों से पर परे हटकर महाकाल की शरण में जाने और आत्मा को शुद्ध करने का संदेश देता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख और भजन के बोल सनातन धर्म की शैव परंपरा, लोक संस्कृति और पारंपरिक भक्ति साहित्य के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है।

अंतिम अद्यतन: वर्ष 2026 | Bhaktilok Editorial Board

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण - कोट रुद्र संहिता एवं ईश्वर संहिता
  • भारतीय लोक संगीत एवं पारंपरिक शिव भजन संकलन
  • सनातन धर्म के व्रत, पर्व एवं स्तोत्र ग्रंथ
  • भक्ति दर्शन एचडी एवं संगीतकार अभिलेख

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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