bholenath bhajan lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

भोलेनाथ शुक्रिया (Bholenath Shukriya)

भगवान शिव को समर्पित भावपूर्ण भजन 'भोलेनाथ शुक्रिया' (Bholenath Shukriya Lyrics in Hindi) के बोल, अर्थ एवं महिमा पढ़ें। | Bhaktilok

भोलेनाथ शुक्रिया | Bholenath Shukriya Lyrics in Hindi

प्रकाशित तिथि: 2022-07-15 | अद्यतन तिथि: 2026-03-30 | लेखक: भक्तलोक संपादकीय टीम | श्रेणी: Bholenath Bhajan

देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित अत्यंत भावुक, मधुर और हृदयस्पर्शी भजन "भोलेनाथ शुक्रिया" (Bholenath Shukriya Lyrics in Hindi) साधकों के बीच असीम शांति और कृतज्ञता का भाव जागृत करने वाला एक विशिष्ट भक्ति गीत है। सौरभ गुप्ता द्वारा स्वरबद्ध और प्रचारित यह भजन उस सर्वोच्च शक्ति के प्रति आभार व्यक्त करता है, जो सृष्टि के कण-कण में विद्यमान रहकर हर परिस्थिति में अपने भक्तों की रक्षा करती है। शिव भक्ति का मूल आधार केवल मांगना नहीं, अपितु जीवन में प्राप्त हर सुख-दुख, श्वास और आनंद के लिए देवाधिदेव के प्रति कृतज्ञता (Gratitude) ज्ञापित करना है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले इसके सकारात्मक प्रभावों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

शीघ्र जानकारी (Quick Bhajan Overview)

यदि आप भगवान शिव के इस पावन भजन को अपने दैनिक स्मरण या सत्संग में शामिल करना चाहते हैं, तो इसके मुख्य तथ्य निम्नलिखित हैं:

विषय विवरण
भजन का नाम भोलेनाथ शुक्रिया (Bholenath Shukriya)
समर्पित देवता देवादिदेव भगवान शिव (महादेव, आशुतोष, भोलेनाथ)
स्वर / कलाकार सौरभ गुप्ता (Saurav Gupta)
भाषा सरल हिंदी एवं अवधी मिश्रित भावुक बोल
मुख्य भाव कृतज्ञता (Gratitude), समर्पण, भक्ति और आत्म-अनुभूति
उपयुक्त अवसर सोमवार व्रत, शिवरात्रि, रुद्राभिषेक, दैनिक संध्या वंदन एवं सत्संग

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और अनन्य भक्ति भाव के साथ स्मरण करने हेतु 'भोलेनाथ शुक्रिया' भजन के संपूर्ण बोल देवनागरी लिपि में नीचे प्रस्तुत हैं:

(मुखड़ा) सांसों की हर एक डोर पे, तेरा ही पहरा है, तूने मुझे जो बख्शा, वो जीवन सुनहरा है। कांटों भरे सफर में, तूने फूल बिछाए हैं, हे मेरे भोले बाबा, हम तुझको मनाए हैं। भोलेनाथ शुक्रिया, मेरे भोलेनाथ शुक्रिया, तेरी रहमत का मेरे दिल पर, उपकार बड़ा भारी है। (अंतरारा 1) जब दुनिया ठुकराती है, तू गले लगाता है, तू आशुतोष बनकर हर दर्द मिटाता है। विष पान किया तूने, संसार बचाने को, हम आए हैं तेरे दर, शीश झुकाने को। तेरी जटा से बहती, पावन गंगा धारा है, इस डूबती नैया का, तू ही तो सहारा है। भोलेनाथ शुक्रिया, मेरे भोलेनाथ शुक्रिया... (अंतरा 2) डमरू की डम-डम से, गूंजे दिशाएं सारी, कैलाश पर्वत पर है, महिमा तेरी न्यारी। नंदी की सवारी और भस्म रमाने वाले, बिगड़ी हुई किस्मत को, पल में बनाने वाले। हर हर महादेव का, जो जाप लगाते हैं, वो भवसागर से आसानी से तर जाते हैं। भोलेनाथ शुक्रिया, मेरे भोलेनाथ शुक्रिया... (समापन / आंगिक भाव) तू ही आदि अनादि है, तू ही तो अंत है, तेरे चरणों की धूल ही, मेरे लिए संत है। जीवन की हर घड़ी में, बस तेरा नाम रहे, मेरे भोलेनाथ, मेरे दिल में तेरा धाम रहे। भोलेनाथ शुक्रिया, मेरे भोलेनाथ शुक्रिया, तेरी कृपा बिन बाबा, पत्ता भी न हिलता है।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल कुछ शब्दों का समुच्चय नहीं है, अपितु एक साधक की उस आत्मिक अवस्था का सजीव दस्तावेज है जब वह अपने आराध्य के सम्मुख पूरी तरह नतमस्तक हो जाता है। आइए इस भजन के मर्म को गहराई से समझें।

श्वासों और जीवन पर शिव का आधिपत्य

भजन की आरंभिक पंक्तियाँ "सांसों की हर एक डोर पे, तेरा ही पहरा है" मनुष्य को यह स्मरण कराती हैं कि मनुष्य का जीवन उसकी अपनी इच्छा से नहीं चल रहा है। चिकित्सा विज्ञान चाहे जो कहे, किंतु आध्यात्मिक दृष्टि से प्रत्येक श्वास उस परम चेतना (शिव) की अनुकंपा पर आधारित है। जब साधक यह महसूस करता है कि उसके जीवन का हर सुनहरा पल महादेव की भेंट है, तो उसके भीतर अहंकार स्वतः समाप्त हो जाता है और कृतज्ञता का जन्म होता है। जीवन के संघर्षों (कांटों भरे सफर) में जब भगवान अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करते हैं, तो भक्त का हृदय अनायास ही आभार से भर उठता है।

आशुतोष का शरणदायक स्वरूप

जब समाज और दुनिया व्यक्ति को अस्वीकार कर देती है अथवा संकटों से घेर लेती है, तब केवल भगवान शिव ही ऐसे आशुतोष हैं जो बिना किसी शर्त के अपने भक्तों को गले लगाते हैं। समुद्र मंथन के समय संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा के लिए विषपान करने वाले नीलकंठ ने यह सिद्ध किया कि भक्त के कष्टों को हरने के लिए वे स्वयं महाकाल बन जाते हैं। भजन में यही भाव प्रबल रूप से उभरता है कि इस संसार रूपी भवसागर में डूबती हुई मानव आत्मा के लिए केवल शिव का नाम ही एकमात्र नौका और सहारा है।

डमरूनाद और ब्रह्मांडीय ऊर्जा

कैलाशवासी शिव की जटाओं से प्रवाहित गंगा और उनके डमरू की डिम-डिम ध्वनि संपूर्ण ब्रह्मांड में ऊर्जा का संचार करती है। नंदी की सवारी और भस्म रमाने वाले वैरागी भगवान यह संदेश देते हैं कि भौतिकता की नश्वरता से ऊपर उठकर ही शाश्वत शांति को प्राप्त किया जा सकता है। जो मनुष्य निरंतर महामृत्युंजय मंत्र अथवा 'हर हर महादेव' का स्मरण करते हैं, वे जीवन की सभी बाधाओं को आसानी से पार कर लेते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

"भोलेनाथ शुक्रिया" भजन की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सादगी, गहरा संगीत संयोजन और हृदय को स्पर्श करने वाले बोल हैं। शिव पुराण और हिंदू सनातन परंपरा में महादेव को शीघ्र प्रसन्न होने वाला देवता माना गया है।

  • कृतज्ञता का भाव: यह भजन साधक को शिकायत करने के बजाय हर स्थिति में भगवान को धन्यवाद देने की प्रेरणा देता है।
  • मानसिक शांति: तनावपूर्ण आधुनिक जीवन शैली में इस भजन को सुनने से मानसिक स्थिरता और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।
  • भक्ति रस का संचार: इसका संगीत और लय इतनी मधुर है कि यह श्रोता को मंत्रमुग्ध कर गहरे ध्यान की स्थिति में ले जाता है।
  • सार्वभौमिक अपील: इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग आसानी से गा सकते हैं, जिससे यह सामूहिक सत्संग और भजन संध्याओं का केंद्र बिंदु बन जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान शिव की आराधना के लिए वैसे तो किसी विशेष समय की पाबंदी नहीं होती, किंतु इस प्रकार के भावपूर्ण भजनों को गाने और सुनने के लिए कुछ विशेष समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातः काल

सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर, शिव मंदिर में अथवा घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।

प्रदोष काल एवं सोमवार

प्रत्येक प्रदोष काल (संध्या समय) और सावन मास के सोमवार के दिन इस भजन का सामूहिक गायन या श्रवण विशेष रूप से मनोवांछित फल प्रदान करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

भजन में प्रयुक्त कुछ विशिष्ट शब्दों के आध्यात्मिक और साहित्यिक अर्थ नीचे सारणी में दिए गए हैं:

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान शिव का वह स्वरूप जो अपने भक्तों की छोटी सी पूजा से भी संतुष्ट हो जाते हैं।
रहमत कृपा, अनुकंपा ईश्वर द्वारा भक्त पर बरसाई जाने वाली अहैतुत दया।
आदि अनादि जिसका कोई आदि या अंत न हो शिव ही इस ब्रह्मांड के रचयिता और संहारक, शाश्वत सत्य हैं।
भवसागर जन्म-मृत्यु का संसार माया और मोह से युक्त यह भौतिक जगत जिससे तरना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति साधक के मन की गहराइयों को छूती है:

  • "सांसों की हर एक डोर पे, तेरा ही पहरा है" – जीवन की एक-एक श्वास पर केवल ईश्वर का नियंत्रण है, इसलिए अहंकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
  • "जब दुनिया ठुकराती है, तू गले लगाता है" – सांसारिक दुखों और उपेक्षाओं के समय केवल शिव ही एकमात्र आश्रयदाता हैं।
  • "तू ही आदि अनादि है, तू ही तो अंत है" – शिव समय और काल से परे हैं; वे ही सृष्टि के प्रारंभ और समापन के केंद्र हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ भगवान शिव के निम्नलिखित महामंत्रों का स्मरण करना साधना को और अधिक पुष्ट करता है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

-- महामृत्युंजय मंत्र (अमृत संजीवनी मंत्र)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥

-- शिव ध्यान मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय भजन प्रसिद्ध गायक सौरभ गुप्ता (Saurav Gupta) द्वारा स्वरबद्ध और प्रस्तुत किया गया है, जिसे शिव भक्तों द्वारा अत्यधिक पसंद किया जाता है।

इस भजन को प्रातः काल पूजा के समय, प्रदोष काल में अथवा सोमवार के दिन शिव साधना के दौरान गाना या सुनना सबसे अधिक फलदायी माना गया है।

कृतज्ञता का भाव मनुष्य के अहंकार को गला देता है। जब साधक हर परिस्थिति के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करता है, तो उसका मन शांत और स्थिर हो जाता है।

हाँ, इसके सरल और मधुर बोलों के कारण इसे किसी भी पारिवारिक अनुष्ठान, जागरण, शिवरात्रि उत्सव या सत्संग में आसानी से गाया जा सकता है।

'आशु' का अर्थ होता है शीघ्र और 'तोष' का अर्थ है संतुष्ट होने वाला। भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची निष्ठा देखकर अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलोक पोर्टल पर प्रकाशित यह सामग्री पारंपरिक धार्मिक ग्रंथों, शिव पुराण के उपदेशों और लोक-भक्ति परंपराओं के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार की गई है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, प्रामाणिक और प्रेरणादायक devotional content पहुँचाना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण - कोट रुद्र संहिता एवं विधिवत आराधना पद्धति।
  • पारंपरिक भारतीय संगीत एवं लोक भजन संकलन।
  • वैदिक सनातन धर्म के दार्शनिक और आध्यात्मिक सिद्धांत।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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