Matarani Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

गुरु जी मेहर करो (Guru Ji Mehar Karo)

गुरु जी मेहर करो भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ और महिमा पढ़ें। सतगुरु की कृपा और शांति प्रदान करने वाली इस रचना का आनंद लें। | Bhaktilok

"गुरु जी मेहर करो" केवल एक भजन नहीं, बल्कि एक भक्त की अपने सतगुरु के प्रति अनन्य पुकार है। यह भावपूर्ण रचना गुरु-शिष्य परंपरा की उस अटूट डोर को दर्शाती है, जहाँ भक्त अपने गुरु के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर उनकी करुणा और कृपा की याचना करता है। गुरु जी, जो स्वयं ब्रह्म का स्वरूप हैं, अपने भक्तों के जीवन के अंधकार को मिटाकर उन्हें प्रकाश की ओर ले जाने वाले 'तारणहार' हैं। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो 'जय गुरु जी' की शरण में हैं और अपने जीवन में गुरु जी की मेहर (कृपा) का अनुभव करना चाहते हैं। संजय पासवान द्वारा स्वरबद्ध यह भजन मन को शांति, धैर्य और अटूट विश्वास प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

गुरु जी मेहर करो, मेरे हाल पे नजर करो,
दर पे खड़ा हूँ मैं, अब तो खबर करो।
गुरु जी मेहर करो, मेरे हाल पे नजर करो॥

भटक रहा हूँ मैं, दुनिया के मेले में,
फँसा हुआ हूँ मैं, माया के झमेले में।
मेरी नैया पार करो, अब तो खबर करो,
गुरु जी मेहर करो, मेरे हाल पे नजर करो॥

तुम हो तारणहार, तुम ही सहारा हो,
भटके हुए राही का, तुम ही किनारा हो।
मेरी बिगड़ी संवार करो, अब तो खबर करो,
गुरु जी मेहर करो, मेरे हाल पे नजर करो॥

शुक्राना गुरु जी, तेरा शुक्राना है,
तेरे ही दर पे अब, मुझे ठिकाना है।
अपनी शरण में लो, अब तो खबर करो,
गुरु जी मेहर करो, मेरे हाल पे नजर करो॥

जय गुरु जी, जय गुरु जी, जय गुरु जी, जय गुरु जी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में आत्म-समर्पण का भाव है। भक्त गुरु से प्रार्थना करता है कि वे उसके वर्तमान कष्टों और सांसारिक उलझनों को देखें और अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें। 'मेहर' का अर्थ है गुरु की वह असीम करुणा जो बिना किसी शर्त के भक्त पर बरसती है। भजन का भावार्थ यह है कि संसार एक मायावी चक्र है, जिसमें जीव भटक जाता है। गुरु ही वह प्रकाश पुंज हैं जो इस माया के जाल से बाहर निकालकर मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं। 'शुक्राना' शब्द का प्रयोग गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए किया गया है, जो कि गुरु जी के भक्तों की मुख्य साधना है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन 'शुकराना' (कृतज्ञता) के सिद्धांत पर आधारित है। गुरु जी के भक्तों के लिए 'शुकराना' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है। इस भजन को सुनने और गाने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत प्रभावी है जो मानसिक तनाव, अनिश्चितता या जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को आप अपनी दैनिक पूजा के समय, विशेष रूप से सुबह उठकर या रात को सोने से पहले सुन सकते हैं। इसे 'गुरु जी' के स्वरूप (तस्वीर या स्वरूप) के समक्ष बैठकर शांत मन से गाना अधिक फलदायी होता है। सत्संग के दौरान सामूहिक रूप से इसे गाने से सामूहिक ऊर्जा और भक्ति का वातावरण निर्मित होता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • समर्पण: अपने अहंकार को त्यागकर गुरु के चरणों में झुकना ही भक्ति का प्रथम सोपान है।
  • धैर्य (सबूरी): गुरु की कृपा का समय निश्चित होता है, भक्त को केवल धैर्य रखना चाहिए।
  • कृतज्ञता (शुक्राना): जो कुछ भी जीवन में प्राप्त है, उसके लिए गुरु का धन्यवाद करना चाहिए।
  • माया से मुक्ति: सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्म-कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना।
शब्द अर्थ संदर्भ
मेहर कृपा / दया गुरु की दिव्य दृष्टि
तारणहार पार लगाने वाला भवसागर से मुक्ति देने वाला
शुक्राना कृतज्ञता / धन्यवाद गुरु के प्रति आभार
माया सांसारिक भ्रम संसार का मोह

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम गुरु जी मेहर करो
गायक संजय पासवान
मुख्य भाव समर्पण एवं कृतज्ञता
विषय गुरु महिमा
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: गुरु जी मेहर करो भजन सुनने के क्या लाभ हैं?
    उत्तर: इसे सुनने से मन को शांति मिलती है और गुरु के प्रति विश्वास बढ़ता है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, इसे घर पर श्रद्धापूर्वक कभी भी गाया जा सकता है।
  • प्रश्न: 'शुक्राना' का क्या अर्थ है?
    उत्तर: शुक्राना का अर्थ है गुरु के प्रति आभार व्यक्त करना।
  • प्रश्न: गुरु जी के भजनों का महत्व क्या है?
    उत्तर: ये भजन भक्त को ईश्वर और गुरु से जोड़ने का माध्यम हैं।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को सुनने के लिए कोई विशेष नियम है?
    उत्तर: कोई कठोर नियम नहीं है, बस मन में श्रद्धा और पवित्रता होनी चाहिए।
  • प्रश्न: संजय पासवान के अलावा और कौन गाता है?
    उत्तर: यह भजन कई अन्य कलाकारों द्वारा भी गाया गया है, लेकिन संजय पासवान का संस्करण बहुत लोकप्रिय है।
  • प्रश्न: गुरु जी की शरण में कैसे आएं?
    उत्तर: सच्चे मन से गुरु का स्मरण करना ही उनकी शरण में आना है।
  • प्रश्न: क्या यह भजन किसी विशेष त्यौहार पर गाया जाता है?
    उत्तर: इसे किसी भी दिन गाया जा सकता है, विशेषकर गुरु पूर्णिमा पर।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री गुरु जी के भक्तों के अनुभवों, पारंपरिक भक्ति साहित्य और उपलब्ध भजनों के भावार्थ पर आधारित है।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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