gurudev Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये (Mere Guru Ji Karuna Sindhu Karuna Kijiye)

मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये भजन के बोल, अर्थ और महत्व पढ़ें। जानें सद्गुरु और साईं बाबा की कृपा प्राप्ति का यह सुंदर मार्ग।

सनातन भक्ति परंपरा में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊँचा माना गया है, क्योंकि गुरु ही वह दिव्य सेतु हैं जो जीव को भगवान तक पहुँचाते हैं। "मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये" एक अत्यंत हृदयस्पर्शी और लोकप्रिय गुरु भजन है, जिसे विशेष रूप से शिरडी के साईं बाबा तथा सद्गुरु की कृपा के गुणगान हेतु गाया जाता है। यह भजन भक्त और गुरु के बीच के उस गहरे आत्मीय संबंध को प्रकट करता है, जिसमें भक्त पूर्ण समर्पण भाव से अपने गुरु के चरणों में प्रार्थना करता है। इस भजन का मुख्य स्वर करुणा, श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा का जीवन सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता के संदेश का प्रतीक रहा है, और यही भाव इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में झलकता है। भक्त जब इस भजन को भक्ति भाव से गाता है, तो उसका अंतःकरण गुरु की दिव्य करुणा से भर उठता है। यह भजन गुरु पूर्णिमा, साईं बाबा के पर्व, गुरुवार के व्रत, तथा प्रतिदिन की सामूहिक भक्ति सभाओं में विशेष रूप से गाया जाता है। इसकी सरल पंक्तियाँ भक्त को सीधे गुरु के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं, और जीवन की कठिनाइयों में धैर्य एवं विश्वास का बल प्रदान करती हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये

॥ मुखड़ा ॥

मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये,
अपने शरणागत पर दया कीजिये।
मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये।

॥ अंतरा १ ॥

तुम हो दीनानाथ दीन के तारणहार,
भवसागर से पार लगाइये।
मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये।

॥ अंतरा २ ॥

चरणों की शरण में आया हूँ मैं,
अपना दास बनाइये।
मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये।

॥ अंतरा ३ ॥

तुम बिन मेरा कोई नहीं जग में,
अपने चरणों में लगाइये।
मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये।

॥ अंतरा ४ ॥

जन्म-जन्म का संग तुम्हारा,
भव से पार कराइये।
मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये।

॥ अंतरा ५ ॥

साईं कृपा की दृष्टि डालो,
अपना बना लीजिये।
मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये।

॥ समापन ॥

शुक्राना गुरु जी, शुक्राना गुरु जी,
जय गुरु जी, जय गुरु जी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का केंद्रीय भाव गुरु की असीम करुणा और भक्त के पूर्ण समर्पण पर आधारित है। "करुणा सिंधु" शब्द का अर्थ है — करुणा का सागर। भक्त अपने गुरु को करुणा के विशाल सागर के रूप में संबोधित करता है, जो अपने शिष्य के प्रत्येक दुःख, कष्ट और भय को अपने भीतर समाहित कर लेता है। जब भक्त कहता है "करुणा कीजिये", तो वह गुरु से केवल भौतिक सुख की याचना नहीं करता, बल्कि उस दिव्य कृपा की प्रार्थना करता है जो उसे अज्ञान के अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।

भजन के प्रथम अंतरे में भक्त गुरु को "दीनानाथ" और "दीन के तारणहार" कहता है। यह स्मरण कराता है कि गुरु वही हैं जो दीन-दुःखी जीवों को भवसागर से पार लगाते हैं। भवसागर का अर्थ है — जन्म-मरण का चक्र, जिसमें जीव अनंत काल से भटक रहा है। गुरु की कृपा ही वह नौका है जो इस भयावह सागर को पार कराती है।

दूसरे अंतरे में भक्त अपने अहंकार का त्याग करते हुए स्वयं को गुरु का दास कहता है। यह विनम्रता की पराकाष्ठा है। भक्ति का मूल आधार ही विनम्रता है — जो जितना विनम्र होता है, उतना ही गुरु की कृपा का पात्र बनता है। "अपना दास बनाइये" में भक्त की वह तीव्र लालसा छिपी है, जिसमें वह गुरु के चरणों में सदा रहना चाहता है।

तीसरे अंतरे में भक्त कहता है — "तुम बिन मेरा कोई नहीं जग में"। यह पंक्ति उस एकांत और अनाथ भाव को प्रकट करती है, जिसमें जीव संसार के सभी संबंधों से ऊपर उठकर केवल गुरु को अपना सर्वस्व मान लेता है। यह भाव भक्ति की पराकाष्ठा है, जहाँ भक्त और भगवान के बीच कोई तीसरा नहीं रहता।

चौथे अंतरे में भक्त जन्म-जन्म के संग की बात करता है। यह दर्शाता है कि गुरु-शिष्य का संबंध केवल एक जन्म का नहीं, बल्कि अनेक जन्मों की साधना का फल है। भक्त प्रार्थना करता है कि गुरु उसे भव से पार कराएँ, अर्थात् मोक्ष प्रदान करें।

पाँचवें अंतरे में साईं बाबा का स्मरण किया गया है। "साईं कृपा की दृष्टि डालो" — यह पंक्ति शिरडी के साईं बाबा की उस करुणामयी दृष्टि की ओर संकेत करती है, जो भक्त के समस्त पापों और कष्टों को भस्म कर देती है। अंत में भक्त कृतज्ञता व्यक्त करता है — "शुक्राना गुरु जी, जय गुरु जी"। यह कृतज्ञता भाव भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है, जहाँ भक्त गुरु से कुछ माँगता नहीं, बल्कि जो मिला उसके लिए धन्यवाद देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन मुख्य रूप से शिरडी के साईं बाबा तथा सद्गुरु की महिमा को समर्पित है। साईं बाबा का जीवनकाल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। उन्होंने सदा "सबका मालिक एक" का सिद्धांत प्रतिपादित किया और जाति, धर्म, पंथ के भेद को मिटाकर सबको एक ही दृष्टि से देखा। यह भजन उसी सार्वभौमिक प्रेम और करुणा का संगीतमय स्वरूप है।

भजन की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • करुणा का भाव: भजन का केंद्रीय स्वर गुरु की असीम करुणा है, जो भक्त के हृदय को शांति और आश्वासन प्रदान करती है।
  • श्रद्धा और सबूरी: साईं बाबा के दो प्रमुख सिद्धांत — श्रद्धा (विश्वास) और सबूरी (धैर्य) — इस भजन में स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित होते हैं।
  • पूर्ण समर्पण: भक्त स्वयं को गुरु का दास मानकर अहंकार का पूर्ण त्याग करता है।
  • भवसागर से मुक्ति: भजन जन्म-मरण के चक्र से पार लगाने की प्रार्थना करता है।
  • कृतज्ञता: "शुक्राना गुरु जी" के माध्यम से भक्त कृतज्ञता का भाव प्रकट करता है।

इस भजन को श्रद्धा भाव से सुनने और गाने से भक्त के मन से भय, चिंता और नकारात्मकता दूर होती है। गुरु की कृपा से जीवन में धैर्य, विश्वास और आत्मबल का संचार होता है। साईं बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है। बाबा का वचन है कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष समय और पर्व इसे और अधिक फलदायी बनाते हैं —

  • गुरुवार का व्रत: साईं बाबा का दिन गुरुवार माना जाता है। इस दिन यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • गुरु पूर्णिमा: गुरु की महिमा का सर्वोच्च पर्व, जिस दिन यह भजन गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • साईं बाबा पर्व: रामनवमी, विजयादशमी तथा साईं बाबा के महापरिनिर्वाण दिवस पर।
  • प्रातःकालीन एवं सायंकालीन पूजा: नित्य पूजा के समय भजन गाने से मन शांत और एकाग्र होता है।
  • सामूहिक भजन सभा: सत्संग और भजन मंडल में सामूहिक रूप से गाना विशेष फलदायी होता है।

गायन विधि: सर्वप्रथम स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करें और साईं बाबा या अपने गुरु की प्रतिमा के समक्ष बैठें। हाथ में ताली या मृदंग/ढोलक लेकर भक्ति भाव से भजन आरंभ करें। भजन गाते समय मन को गुरु के चरणों में एकाग्र रखें। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "मेरे गुरु जी करुणा सिंधु करुणा कीजिये" भजन किसे समर्पित है?

यह भजन मुख्य रूप से शिरडी के साईं बाबा तथा सद्गुरु की महिमा को समर्पित है। इसमें गुरु की असीम करुणा और भक्त के पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त किया गया है।

प्रश्न 2: यह भजन कब गाना चाहिए?

इस भजन को गुरुवार, गुरु पूर्णिमा, साईं बाबा के पर्वों तथा प्रतिदिन प्रातः और सायं पूजा के समय गाया जा सकता है। सामूहिक भजन सभा में भी यह विशेष रूप से गाया जाता है।

प्रश्न 3: "करुणा सिंधु" का क्या अर्थ है?

"करुणा सिंधु" का अर्थ है — करुणा का सागर। यह गुरु की उस असीम दया को दर्शाता है, जो अपने शिष्य के समस्त दुःख और पापों को हर लेती है।

प्रश्न 4: क्या इस भजन को गाने से कोई विशेष लाभ होता है?

श्रद्धा भाव से इस भजन को गाने और सुनने से मन से भय, चिंता और नकारात्मकता दूर होती है। गुरु की कृपा से धैर्य, विश्वास और आत्मबल का संचार होता है।

प्रश्न 5: क्या यह भजन किसी विशेष धर्म से जुड़ा है?

नहीं, यह भजन सार्वभौमिक है। साईं बाबा ने सदा "सबका मालिक एक" का संदेश दिया। यह भजन हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई — सभी धर्मों के भक्तों द्वारा श्रद्धा से गाया जाता है।

प्रश्न 6: भजन गाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विनम्रता रखें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल को स्वच्छ रखें, और गुरु के चरणों में मन एकाग्र करें। भजन केवल कंठ से नहीं, हृदय से गाना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे सनातन भक्ति परंपरा, साईं साहित्य तथा गुरु-शिष्य परंपरा के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर संकलित किया गया है। भजन के बोल पारंपरिक भक्ति गीतों से लिए गए हैं, जो साईं भजन मालाओं तथा भजन संग्रहों में प्रचलित हैं। भावार्थ एवं व्याख्या में गुरु की करुणा, श्रद्धा-सबूरी तथा समर्पण के सिद्धांतों को सरल हिंदी में समझाया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन को श्रद्धा भाव से गाएँ और गुरु की कृपा का अनुभव करें।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!