Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नवरात्री स्पेशल देवी भजन (Jay Ma Katyayani Devi)

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पावन आराधना, भजन, और महिमा का संदर्भ सहित विस्तृत विवरण। पढ़ें और भक्ति का लाभ लें।

नवरात्र विशेष • देवी भजन

जय मां कात्यायनी देवी | नवरात्र का छठा दिन | नवरात्री स्पेशल देवी भजन | Jay Ma Katyayani Devi

शरद एवं वासंतिक नवरात्र के पावन अवसर पर जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना का विशेष महत्व है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री रूप में प्रकट होने वाली भगवती कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी हैं, जिनकी पूजा गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए कात्यायनी घाट पर की थी। यह विस्तृत मार्गदर्शिका एवं पावन भजन आपके भीतर माता के प्रति अगाध भक्ति, समर्पण, तेज और आध्यात्मिक बल का संचार करेगा।

अपडेटेड: चैत्र/शारदीय नवरात्र श्रेणी: Devi Bhajan / Navratri Special पठन समय: 10 मिनट

लेखा संक्षिप्त विवरण (Quick Meta)

  • शीर्षक: जय मां कात्यायनी देवी भजन
  • ूआरएल स्लग: 2022/04/navratri-bhajans-bhaktilok.html
  • देवी स्वरूप: मां कात्यायनी (छठी शक्ति)
  • संबंधित पर्व: नवरात्र षष्ठी तिथि

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मुखड़ा ॥
जय मां कात्यायनी भवानी, तेरी महिमा जग में निराली!
छठे नवरात्रे दर्शन पाके, हर भक्त की झोली भर डाली!

कात्यायन ऋषि के आंगन में, प्रगट भई तुम माता रानी,
त्रिभुवन में गूंजे तेरी जयकारा, अमर भई तेरी कहानी!
सिंह सवार हो कर आई, दुष्टों के प्राण चुराई,
जय मां कात्यायनी भवानी...

चतुर्भुज धारी रूप तुम्हारा, एक हाथ अभय मुद्रा साजे,
दूजे वर मुद्रा से माता, भक्तों के हर दुख भाजे!
खड्ग और कमल विराजे कर में, तेज पुंज से महिषासुर डारे,
जय मां कात्यायनी भवानी...

ब्रज की गोपियों ने पूजी तुमको, यमुना तट पर ध्यान लगाया,
कृष्ण कन्हैया वर रूप में, माता तुमने उन्हें मिलाया!
जो भी व्रत करे सच्चे मन से, उसका भाग जगाती हो,
जय मां कात्यायनी भवानी...

'भक्तलोक' में गूंजे महिमा, चरण तुम्हारे शीश झुकाएं,
कृपा दृष्टि माता कर देना, द्वार तुम्हारे हम सब आएं!
जय मां कात्यायनी भवानी, तेरी महिमा जग में निराली!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह पावन भजन आदिशक्ति मां कात्यायनी के अलौकिक स्वरूप, उनके प्राकट्य और भक्तों पर उनकी अहेतुत कृपा का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण वर्णन करता है। भजन के मुखड़े में कवि या गायक मां के छठे स्वरूप की महिमा का गुणगान करते हुए कहता है कि नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी के दर्शन मात्र से भक्तों के जीवन के सभी संताप और अभाव दूर हो जाते हैं और उनकी झोलियां खुशियों से भर जाती हैं।

अन्तरों में मां के चतुर्भुज रूप का वर्णन है, जिसमें माता के एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का फूल सुशोभित है, तथा अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में भक्तों को निर्भयता और मनोवांछित वरदान प्रदान करते हैं। ब्रज की गोपियों द्वारा कात्यायनी व्रत का प्रसंग यह दर्शाता है कि यह देवी न केवल शक्ति और पराक्रम की प्रतीक हैं, बल्कि अपने भक्तों की पवित्र प्रेम और भक्ति की इच्छाओं को भी पूर्ण करने वाली करुणा मई हैं। इस प्रकार यह भजन साधक के भीतर भक्ति और समर्पण के दीप को प्रज्वलित करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • छठे नवरात्र की दिव्यता: यह भजन विशेष रूप से नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी की पूजा के समय गाने और सुनने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
  • ब्रज संस्कृति का संस्पर्श: भजन में गोपियों द्वारा की गई कात्यायनी पूजा का उल्लेख इसे कृष्ण भक्ति और शक्ति साधना का अनूठा संगम बनाता है।
  • भय मुक्ति और तेजस्विता: मां कात्यायनी की आराधना करने से साधक के भीतर अद्भूत तेज, आत्मबल और निर्भयता का विकास होता है।
  • शीघ्र प्रसन्न होने वाली माता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे भाव से स्मरण करने पर मां अपने भक्तों के विवाह संबंधी बाधाओं और समस्त कष्टों को दूर करती हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस देवी भजन का गायन या श्रवण नवरात्र के छठे दिन ब्रह्म मुहूर्त में अथवा संध्याकालीन बेला में मां दुर्गा की चौकी या मंदिर के समक्ष करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है। गायन से पूर्व मां कात्यायनी के विग्रह या चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं, लाल पुष्प, रोली, अक्षत और मिष्ठान अर्पित करें। धूप-अग्नि प्रज्वलित कर माता का ध्यान करते हुए प्रेम और श्रद्धा के साथ इस भजन का उच्चारण करें। इसे पारिवारिक सत्संग, जागरण या व्यक्तिगत साधना के समय भी गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य अधिष्ठात्री देवी मां कात्यायनी हैं, जो नौ दुर्गाओं में छठी शक्ति हैं। इनका नामकरण महर्षि कात्यायन के गोत्र में उत्पन्न होने के कारण 'कात्यायनी' हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इन्होंने महिषासुर नामक राक्षस का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया था। इसके साथ ही, द्वापर युग में ब्रज की गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में पाने हेतु कात्यायनी माता की पूजा की थी, जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण में विस्तार से मिलता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी/ब्रज-प्रभावित लोकभाषा शैली में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जो इसके काव्य सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं। शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि सामान्य भक्त भी इसे आसानी से समझ सके और लयबद्ध तरीके से गा सके। भजन की पंक्तियों में निहित भाव सीधा हृदय को स्पर्श करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

मां कात्यायनी का यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन में आने वाली हर बाधा और शत्रु (चाहे वह बाहरी हो या हमारे भीतर के दुर्गुण जैसे काम, क्रोध, लोभ) का सामना साहस, संयम और भगवत कृपा से किया जा सकता है। माता का अभय और वरद हस्त यह संदेश देता है कि जो भक्त पूरी निष्ठा से अपने आराध्य की शरण में जाता है, उसे कभी भी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं होती।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री/कुल में उत्पन्न देवी दुर्गा का छठा स्वरूप जो ब्रज की अधिष्ठात्री हैं।
चतुर्भुज चार भुजाओं वाली माता का दिव्य स्वरूप जो समस्त शक्तियों का प्रतीक है।
अभय मुद्रा निर्भय करने वाला हाथ का इशारा भक्तों को सभी प्रकार के भयों से मुक्त करने का आशीर्वाद।
महिषासुर महिष (भैंसे) रूपी असुर अज्ञान, अहंकार और बुराई का प्रतीक राक्षस जिसका माता ने वध किया।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जय मां कात्यायनी भवानी, तेरी महिमा जग में निराली!" - इस पंक्ति में भक्त आदिशक्ति को प्रणाम करते हुए उनकी अलौकिक और अद्वितीय महिमा का बखान कर रहा है।
"कात्यायन ऋषि के आंगन में, प्रगट भई तुम माता रानी" - यह पंक्ति माता के प्राकट्य के पौराणिक इतिहास की ओर संकेत करती है कि कैसे महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री रूप में अवतार लिया था।
"ब्रज की गोपियों ने पूजी तुमको, यमुना तट पर ध्यान लगाया" - यह द्वापर युग के उस प्रसंग को दर्शाती है जब गोपियों ने कात्यायनी व्रत रखकर श्री कृष्ण की प्राप्ति की कामना की थी।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्गूलवरवाहना ।<>कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥

अर्थ: जिनके हाथों में उज्ज्वल चन्द्रहास (तलवार) सुशोभित है, जो सिंह पर सवारी करती हैं तथा जो दानवों का संहार करने वाली हैं, ऐसी मां कात्यायनी हम सबका कल्याण करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जय मां कात्यायनी देवी | नवरात्र का छठा दिन भजन
अधिष्ठात्री देवी मां कात्यायनी (दुर्गा जी का छठा स्वरूप)
संगीत शैली / विधा देवी भजन / नवरात्र स्पेशल गीत
भाषा सरल हिंदी / ब्रज भावयुक्त
मुख्य थीम भक्ति, शक्ति, समर्पण और मनोकामना पूर्ति
उपयुक्त अवसर नवरात्र की षष्ठी तिथि, देवी जागरण, शुक्रवार पूजा
प्लेटफॉर्म Bhaktilok.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मां कात्यायनी की पूजा नवरात्र के छठे दिन (षष्ठी तिथि) को की जाती है। यह दिन साधक के आज्ञा चक्र को जागृत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

माता कात्यायनी को लाल रंग अत्यंत प्रिय है और इस दिन लाल वस्त्र धारण करने का विधान है। भोग के रूप में माता को शहद (मधु) का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है।

माता कात्यायनी की उपासना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेषकर योग्य वर की प्राप्ति और विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इनकी पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।

इस भजन को नवरात्र के छठे दिन माता की आरती या पूजा के समय समूह में अथवा व्यक्तिगत रूप से पूरे भक्ति भाव और लय के साथ गाया जा सकता है।

हाँ, यद्यपि यह नवरात्र विशेष भजन है, परंतु मां दुर्गा की आराधना के लिए शुक्रवार के दिन या किसी भी विशेष अनुष्ठान के समय इस भजन का स्मरण किया जा सकता है।

ब्रज की गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए यमुना के तट पर मां कात्यायनी की कठोर आराधना और व्रत किया था।

मां कात्यायनी का वाहन सिंह (शेर) है, जो उनके अदम्य साहस, शौर्य और शक्ति का प्रतीक है।

आप इस भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics) और इसका विस्तृत भावार्थ Bhaktilok.in की इस मार्गदर्शिका से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म ग्रंथों, पुराणों और पारंपरिक लोकगीत परंपराओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को मां कात्यायनी की महिमा और उनके भजन से जोड़ना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (दसवां स्कंध - कात्यायनी व्रत प्रसंग)
  • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती)
  • पारंपरिक सनातन भजन एवं लोकगाथा परंपरा

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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