Papmochani Ekadashi Vrat Katha बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

माँ शेरावाल?? (Maa Sherawaliye Akshay Kumar)

माँ शेरावाली भजन के बोल, अर्थ और महत्व पढ़ें। सोनू निगम द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय माता भजन का आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

माँ शेरावाली | Maa Sherawaliye  Akshay Kumar | Sonu Nigam Sherawali Mata Bhajan | Chaitra Navratri Special Song - Bhaktilok


जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
दर्द जो होंडे
दर्द मितांडी
माँ चिट्टी पांडि
आपे बुलंदिक
माँ शेरावाली
तेरा शेर आ गया
अपने खून से नहलाने
तेरा बेटा आ गया
माँ शेरावाली
तेरा शेर आ गया
अपने खून से नहलाने
तेरा बेटा आ गया
माँ शेरावाली
माँ ज्योतिवाली
माँ मेहरावली
माँ लातीवलिया
मुझे मिला तेरा संगी
मैं तो हो गया हूं डांग
उथी ऐसी तरंग
चड्ढा भक्ति का रंगी
कहे मन की उमंगी
दिल हुआ है मलंग
झूमे मेरा अंग अंग
मुझे दिया तूने रंगी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
माता तेरी चिट्ठी आ गई है प्यार दी
माता तेरी चिट्ठी आ गई है प्यार दी
जींद मेरी आई है छलंगा मर्दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
देखा जो तुझे देखता ही रह गया
देखा जो तुझे देखता ही रह गया
मेरा हाल ये मैं तेरे पैरी पई गया
भेट चढाने तेरा बेटा आ गया
अपने खून से नहलाने
तेरा बेटा आ गया
माँ शेरावाली
तेरा शेर आ गया
अपने खून से नहलाने
तेरा बेटा आ गया
माँ शेरावाली
माँ ज्योतिवाली
माँ मेहरावली
माँ लातीवलिया
तेरे बजू हैं हजारी
तेरे बज़ू तलवार
काई शुंब निशुंबो
तूने दीये संग हारो
तेरी शक्ति अपार सुन बेटे की पुकार
तेरी शरण में आया
कर बेड़ा मेरा परी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
बिन मांगे पूरी की है तूने आरज़ू
बिन मांगे पूरी की है तूने आरज़ू
जहां देखो आती है नजर मुझे तुम
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जान ये निछावर मैं तुझपे कर दूं
जान ये निछावर मैं तुझपे कर दूं
काम तेरे आजये मेरा ये लहू
कर्ज चुकाने तेरा बेटा आ गया
अपने खून से नहलाने
तेरा बेटा आ गया
माँ शेरावाली
तेरा शेर आ गया
अपने खून से नहलाने
तेरा बेटा आ गया
माँ शेरावाली
माँ ज्योतिवाली
माँ मेहरावली
माँ लातीवलिया
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
हे माँ… शेरावलिये
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "माँ शेरावाली | Maa Sherawaliye Akshay Kumar | Sonu Nigam Sherawali Mata Bhajan | Chaitra Navratri Special Song - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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