की दम दा भरोसा | Ki Dam Da Bharosa | Puneet khurana | Jai Guru Ji | Taranhar
द्वारा: संपादकीय टीम | अपडेटेड: 2026
सनातन संस्कृति और विशेष रूप से गुरु भक्ति परंपरा में संकीर्तन का अत्यंत ऊंचा स्थान है। "की दम दा भरोसा | Ki Dam Da Bharosa" पुनीत खुराना द्वारा गाया गया एक ऐसा ही अत्यंत पावन, मन को झकझोर देने वाला और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण गुरु भजन है जो जगत के नश्वर स्वरूप और गुरु चरणों की शाश्वत शरण का जीवंत संदेश देता है। 'जय गुरु जी' और 'तारणहार' की असीम कृपा से ओतप्रोत यह भजन साधਕ को क्षणभंगुर जीवन की वास्तविकता से अवगत कराते हुए पूर्ण शरणागति (Surrender) का मार्ग दिखाता है। पंजाबी और हिंदी के मधुर सम्मिश्रण से सजा यह संकीर्तन हर गुरु भक्त के अंतःकरण में भक्ति और वैराग्य का अद्भुत संचार करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थाई (मखड़ा):
की दम दा भरोसा यार, की दम दा भरोसा!
साँसों की डोरी टूटे, पल भर में छूटे नाता सारा संसार...
की दम दा भरोसा यार, की दम दा भरोसा!
अंतरा 1:
माया के पीछे पगले, तू क्यों है भागा जाता,
दो दिन का मेला जग में, फिर खाली हाथ है जाता।
गुरु चरणों में लग जा बंदे, कट जाए आवागमन की धारा,
वही है सच्चा तारणहार, वही है खेवनहार हमारा...
की दम दा भरोसा यार, की दम दा भरोसा!
अंतरा 2:
जय गुरु जी की महिमा गा ले, जीवन सफल बना ले,
पलकों पे बिठा ले गुरु को, अपना इन्हें बना ले।
जो शरण गुरु की आया, उसने सब कुछ पाया,
भवसागर से पार उतर कर, धाम अमर है पाया...
की दम दा भरोसा यार, की दम दा भरोसा!
समापन / विश्राम:
श्वास-श्वास गुरु नाम उचारो, बिसारो मत पल भर प्यारे,
पुनीत कहे गुरु चरण ही जीवन, बाकी सब सपने हैं सारे...
की दम दा भरोसा यार, की दम दा भरोसा!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन मनुष्य को उसकी सबसे बड़ी भूल यानी नश्वर शरीर और झूठे संसार के प्रति मोह से जगाने का एक दिव्य प्रयास है। भजन की पहली पंक्ति "की दम दा भरोसा यार, की दम दा भरोसा" इस महान सत्य को रेखांकित करती है कि इस मानव जीवन और हर एक श्वास का कोई भरोसा नहीं है। मृत्यु कब आ जाए, इसका किसी को ज्ञान नहीं है, इसलिए जीवन के प्रत्येक पल का सदुपयोग प्रभु और गुरु के स्मरण में करना चाहिए।
आगे गायक पुनीत खुराना जी समझाते हैं कि मनुष्य माया और धन-دولت के पीछे दिन-रात भागता रहता है, जबकि यह संसार केवल कुछ दिनों का एक मेला है। अंत में हर व्यक्ति को खाली हाथ ही इस संसार से जाना होता है। ऐसे में यदि किसी का सहारा है, तो वे केवल हमारे सतगुरु हैं जो हमें इस भवसागर से पार उतारने वाले 'तारणहार' हैं। गुरु चरणों की शरण ही इस जीवन का एकमात्र परम सत्य और लक्ष्य है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन विशेष रूप से उन साधकों के लिए मार्गदर्शक है जो गुरु जी की संगति में आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- वैराग्य और भक्ति का संगम: यह भजन साधक के मन से संसार की असारता का बोध कराकर गुरु के प्रति अनन्य प्रेम जागृत करता है।
- सरल एवं प्रभावी भाषा: आम बोलचाल की भाषा और पंजाबी शब्दों का सहज प्रयोग इसे हर वर्ग के श्रोता के हृदय तक पहुँचाता है।
- पूर्ण शरणागति का संदेश: यह सिखाता है कि अहंकार छोड़कर गुरु चरणों में समर्पित होने से ही मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस प्रकार के संकीर्तन और गुरु भजन को सुनने या गाने के लिए कोई सख्त नियम नहीं हैं, किंतु इनका अत्यधिक लाभ निम्नलिखित अवसरों पर मिलता है:
- प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर ध्यान या पूजा के समय इसे सुनने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
- सांध्यकालीन बेला में जब मन दिनभर की भागदौड़ से अशांत हो, तब यह भजन सुनने से चित्त को शांति मिलती है।
- गुरु पूर्णिमा, सत्संग सभाओं और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान सामूहिक रूप से इस भजन का गायन किया जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से सतगुरु और 'जय गुरु जी' (शिव रूपी गुरु महाराज) की महिमा को समर्पित है। सनातन धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर से भी उच्च स्थान दिया गया है क्योंकि वही अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले एकमात्र माध्यम हैं। गुरु जी के पावन स्वरूप का स्मरण करते हुए भक्त अपनी समस्त चिंताओं को उनके चरणों में अर्पित कर देते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
युवा और ऊर्जावान गायक पुनीत खुराना द्वारा स्वरबद्ध यह भजन आधुनिक गुरु भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे पारंपरिक सूफी और संतों की वाणी के तर्ज पर गढ़ा गया है, जिसमें जीवन की नश्वरता और गुरु की महत्ता का शाश्वत संदेश निहित है। सोशल मीडिया और सत्संग के माध्यम से यह भजन लाखों भक्तों के दिलों में विशेष स्थान बना चुका है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा हिंदी और पंजाबी का सुमधुर मिश्रण है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे 'साँसों की डोरी' और 'भवसागर'। यह शैली श्रोता को बिना किसी कठिन प्रयास के सीधे आत्मीय स्तर पर जोड़ लेती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- समय की अनिश्चितता: जीवन बहुत छोटा है, इसे व्यर्थ की चिंताओं और अहंकार में न गंवाएं।
- गुरु कृपा का महत्व: बिना गुरु के ज्ञान और भवसागर से पार पाना असंभव है।
- नाम स्मरण: श्वास-श्वास में ईश्वर और गुरु का स्मरण ही सबसे बड़ा पुरुषार्थ है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| दम दा भरोसा | श्वास का विश्वास | जीवन की क्षणभंगुरता |
| तारणहार | पार लगाने वाला | सतगुरु / भगवान |
| खेवनहार | नाव को खेने वाला | जीवन नैया पार लगाने वाला गुरु |
| आवागमन | जन्म-मृत्य का चक्र | संसार के बंधन |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"साँसों की डोरी टूटे, पल भर में छूटे नाता सारा संसार..."
इस पंक्ति का गहरा दार्शनिक अर्थ है कि मनुष्य जिस परिवार, धन और पद-प्रतिष्ठा को अपना मानकर अहंकार करता है, वे सभी रिश्ते केवल इस शरीर और श्वास के साथ जुड़े हैं। जैसे ही प्राण छूटते हैं, यह सारा संसार और मोह-माया छूट जाती है। इसलिए जीते-जी केवल गुरु के चरणों से नाता जोड़ना ही बुद्धिमानी है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
"अखंडमंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्। तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥"
— गुरु स्तोत्र
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | की दम दा भरोसा (Ki Dam Da Bharosa) |
|---|---|
| गायक | पुनीत खुराना (Puneet Khurana) |
| संबंधित परंपरा | जय गुरु जी (सतगुरु भक्ति धारा) |
| भाषा | हिंदी / पंजाबी मिश्रित |
| मुख्य थीम | वैराग्य, गुरु महिमा और शरणागति |
| भाव | भक्ति, विनय और आत्म-बोध |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिलोक पर प्रस्तुत यह लेख प्रामाणिक धार्मिक भाव, श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं और आध्यात्मिक ग्रंथों के सार के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों और श्रोताओं के भीतर गुरु भक्ति और आत्म-जागरण का भाव प्रबल करना है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
स्रोत एवं संदर्भ
- पारंपरिक गुरुवाणी एवं संकीर्तन साहित्य
- सनातन गुरु परंपरा और वेदांत के दार्शनिक सिद्धांत
- भक्ति संगीत संग्रह एवं सत्संग परंपरा
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