अंजलि भारद्वाज द्वारा स्वरबद्ध 'बाजे पाँव पयजनिया छमा छम' एक अत्यंत मनोहारी, ऊर्जावान और भक्तिरस से ओत-प्रोत देवी गीत है। भारतीय सनातन संस्कृति और लोक-भक्ति परंपरा में आदिशक्ति माँ दुर्गा, माता वैष्णो देवी और विभिन्न शक्तिस्वरूपा देवियों के आगमन की प्रतीक्षा को अत्यंत काव्यात्मक रूप से व्यक्त किया गया है। जब भक्त माता के चरणों में अपनी पूर्ण शरणागति अर्पित करता है, तो उसे साधना की पराकाष्ठा पर माँ के नूपुरों (पायल) की मधुर ध्वनि सुनाई देने लगती है। यह भजन केवल एक कर्णप्रिय गीत नहीं है, बल्कि यह साधक के अंतःकरण में भगवती के साक्षात दर्शन की तीव्र लालसा को जागृत करने वाला एक शक्तिशाली माध्यम है। नवरात्रि के पावन दिनों, माता के जागरण, चौकी अथवा किसी भी मांगलिक अनुष्ठान के समय इस देवी गीत का गायन वातावरण को पूरी तरह से दिव्य, पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थायी (म–खड़ा):
बाजे पाँव पयजनिया छमा छम,
छमा छम, छमा छम, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम।
आओ मेरी मैया, दर्शन दे जाओ,
भक्तों के मन में तुम ज्योत जगाओ।
तेरी महिमा गाएं हम, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम...
अंतरा 1:
लाल चुनरिया ओढ़े मैया, माथे पर बिंदी सोहे,
तेरी सूरत देख के मैया, सारा जग ये मोहे।
तेरी छवि है निराली, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम,
छमा छम, छमा छम, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम।
अंतरा 2:
शेर सवारी करती मैया, दुष्टों का संहार करे,
भक्तों की तू बिगड़ी मैया, पल में ही संवार करे।
तेरी जय हो भवानी, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम,
छमा छम, छमा छम, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम।
अंतरा 3:
घर-घर में माँ जोत जले, गूंजे तेरी जयकारा,
तेरे दर पर आने वाला, पाता जग में उजियारा।
तू है सबकी महारानी, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम,
छमा छम, छमा छम, बाजे पाँव पयजनिया छमा छम।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस प्रेममय संबंध को दर्शाता है जहाँ भक्त अपनी आराध्य देवी माँ जगदम्बा को अपने घर और हृदय में आमंत्रित करता है। 'पयजनिया' (पायल या नूपुर) की छमा छम ध्वनि इस बात का प्रतीक है कि माँ दुर्गा अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनके समीप आ रही हैं। जब साधक का मन शुद्ध होता है, तो उसे हर ओर भगवती के आगमन का आभास होने लगता है।
भजन की पंक्तियों में माता के दिव्य स्वरूप का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। माँ लाल चुनरी धारण करती हैं, उनके माथे पर सुशोभित बिंदी संपूर्ण ब्रह्मांड को सम्मोहित करती है। वह सिंह पर सवार होकर दुष्ट प्रवृत्तियों और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करती हैं तथा अपने सच्चे भक्तों के जीवन की हर उलझन को पल भर में सुलझा देती हैं। यह भाव हमें यह सिखाता है कि जब हम पूर्ण विश्वास के साथ माँ की शरण में जाते हैं, तो जीवन के सभी अंधकार दूर हो जाते हैं और आत्मिक उजियारा फैल जाता है। इस भजन को गाते समय साधक के भीतर का अहंकार समाप्त होता है और समर्पण की भावना प्रबल होती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस लोकप्रिय देवी भजन की विशेषताएं इसे हर आयु वर्ग के भक्तों के बीच प्रिय बनाती हैं:
- भक्ति का सजीव चित्रण: माता के चरणों की पायल की झंकार के माध्यम से उनके साक्षात सामीप्य का अहसास कराना।
- सरल एवं प्रभावशाली शब्द: बोल इतने सहज हैं कि एक बार सुनने मात्र से ही जुबान पर चढ़ जाते हैं और बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक आसानी से गा सकते हैं।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: भजन की लय और ताल मन के विकारों को दूर कर एकाग्रता बढ़ाती है।
- उत्सवधर्मिता: नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी और कन्या पूजन के अवसरों पर विशेष रूप से ऊर्जा का संचार करने वाला गीत।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
देवी भजनों को समर्पित भाव से गाने और सुनने के लिए कुछ विशेष नियम और परंपराएं हैं:
- शुभ समय: ब्रह्म बेला (प्रातःकाल) या संध्या वंदन के समय, विशेषकर नवरात्रि के दिनों में माँ के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके।
- स्थान: घर का पूजा स्थल, मंदिर, जागरण मंच अथवा सत्संग का पवित्र वातावरण।
- मानसिक स्थिति: तन और मन की पवित्रता के साथ-साथ मन में माँ के प्रति अगाध श्रद्धा और प्रेम का भाव होना अनिवार्य है।
- संगीत संयोजन: ढोलक, मंजीरा, और चिमटे के पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ इस भजन को गाने से सामूहिक आनंद और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन प्रत्यक्ष रूप से शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माँ दुर्गा (जगदम्बा, भवानी, शेरवाली) को समर्पित है। सनातन धर्म में माँ दुर्गा को प्रकृति, चेतना, शक्ति और ब्रह्मांड की जननी माना गया है। अंजलि भारद्वाज जैसी प्रसिद्ध भजन गायिका ने अपनी सुमधुर आवाज से इस पारंपरिक देवी गीत को आधुनिक संगीत शैली के साथ पिरोकर नई पीढ़ी तक पहुँचाया है। देवी उपासना के संप्रदाय में आदिशक्ति की कृपा प्राप्ति के लिए नामजप और भजन-कीर्तन को सर्वोच्च साधन माना गया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
पारंपरिक देवी गीतों की यह शैली भारतीय लोक-संस्कृति की अमूल्य थाती है। सदियों से ग्रामीण और शहरी अंचलों में स्त्रियां और भक्तजन माँ के आगमन पर ऐसे गीत गाते रहे हैं। आधुनिक समय में कैसेट और डिजिटल मीडिया के युग में अंजलि भारद्वाज ने इस पारंपरिक भावना को अपने स्वर से सजाकर इसे वैश्विक मंच प्रदान किया है। इस गीत की रचना इस प्रकार की गई है कि यह श्रोता को तुरंत झूमने और भक्ति में लीन होने के लिए विवश कर देता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल हिंदी और लोक-भाषा (ब्रज-अवधि और खड़ी बोली के सुंदर मिश्रण) में रचित है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों की सहज सुंदरता देखने को मिलती है जैसे 'छमा छम' ध्वनि का बार-बार प्रयोग, जो श्रोता के कानों में पायल की गूंज का जीवंत चित्र खींच देता है। काव्य शैली आत्मकथात्मक और प्रार्थनात्मक है, जहाँ भक्त सीधे अपनी मैया से संवाद स्थापित कर रहा है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
इस भजन से हमें निम्नलिखित गहरे आध्यात्मिक संदेश मिलते हैं:
- नियमित प्रार्थना: निरंतर भगवान का स्मरण करने से मन के सभी क्लेश मिट जाते हैं।
- शरणागति का भाव: माँ के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देना ही वास्तविक भक्ति है।
- सकारात्मकता: कठिनाइयों से घबराने के बजाय माँ की शक्ति पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि वह बिगड़ी बनाने वाली हैं।
- सांस्कृतिक एकता: सामूहिक रूप से भजन गाने से समाज में प्रेम और सद्भाव की भावना जागृत होती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| पयजनिया | पायल या नूपुर | देवी के चरणों में पहनने वाले घुंघरू |
| छमा छम | पायल की झंकार की ध्वनि | माता के आगमन का सूचक |
| महारानी | समस्त ब्रह्मांड की स्वामिनी | माँ दुर्गा का संबोधन |
| संहार | नष्ट करना | असुरों और बुराइयों का नाश करना |
| उजियारा | प्रकाश | ज्ञान और भक्ति का प्रकाश |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"बाजे पाँव पयजनिया छमा छम..."
भक्त कहता है कि जब माँ प्रसन्न होकर अपने भक्तों के द्वार पर आती हैं, तो उनके चरणों में बंधी पयजनिया (पायल) से छमा-छम की मधुर ध्वनि गूंज उठती है। यह ध्वनि साधक के हृदय को आनंदित कर देती है।
"आओ मेरी मैया, दर्शन दे जाओ, भक्तों के मन में तुम ज्योत जगाओ।"
यहाँ भक्त की आर्त पुकार है कि हे माता! आप हमारे घर और मन में पधारिए, हमें अपने अलौकिक दर्शन दीजिए और हमारे भीतर भक्ति व ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित कीजिए ताकि हमारा अज्ञान दूर हो सके।
"लाल चुनरिया ओढ़े मैया, माथे पर बिंदी सोहे..."
माता के श्रृंगार का वर्णन करते हुए भक्त कहता है कि माँ ने लाल रंग की पावन चुनरी ओढ़ रखी है और उनके माथे की बिंदी संपूर्ण सृष्टि को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
"शेर सवारी करती मैया, दुष्टों का संहार करे, भक्तों की तू बिगड़ी मैया, पल में ही संवार करे।"
माँ सिंह पर विराजमान होकर अधर्मियों और बुराइयों का नाश करती हैं। वे इतनी दयालु हैं कि अपने हर सच्चे भक्त के बिगड़े हुए कामों को एक ही पल में ठीक कर देती हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के प्रसंग से जुड़ा हुआ अत्यंत प्रसिद्ध पावन श्लोक निम्नलिखित है:
"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"
यह श्लोक माँ दुर्गा के कल्याणकारी और समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले स्वरूप का स्मरण कराता है। इस भजन के साथ इस मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| भजन का नाम | बाजे पाँव पयजनिया छमा छम (Baje Panv Paiyajaniya Chhama Chham) |
| प्रमुख गायिका | अंजलि भारद्वाज (Anjali Bhardwaj) |
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / आदिशक्ति भवानी |
| संगीत शैली | देवी गीत / लोक भजन |
| भाषा | हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | भक्ति, प्रेम, समर्पण और दर्शन की लालसा |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता का जागरण, चौकी, कन्या पूजन |
| संबंधित श्रेणियां | देवी भजन, देवी गीत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख को प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं, लोक-साहित्य और भजन संस्कृति के आधार पर पाठकों की सहज बोधगम्यता के लिए तैयार किया गया है। सभी पंक्तियों और अर्थों का संकलन भक्ति भाव को ध्यान में रखकर किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन देवी भागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती
- पारंपरिक भारतीय लोक-गीत एवं देवी भजन परंपरा
- भक्ति संगीत संग्रह एवं अंजलि भारद्वाज के लोकप्रिय एलबम
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