Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

गौरी के लाडले करता है सबसे पहले पूजा तेरी जहान (Gauri Ke Laadle Karta Hai Sabase Pahale Puja Teri Jahan)

गौरी के लाडले भजन के माध्यम से माता गौरी की कृपा और भक्ति का अद्भुत अनुभव प्राप्त करें।

प्रस्तावना एवं परिचय

गौरी का दिव्य स्वरूप: भक्तों का मंगलकारी स्तुतिपाठ

इस भजन के माध्यम से हमें माता गौरी की कृपा और आशीर्वाद का अनुभव होता है।
गौरी के लाडले करता है सबसे पहले पूजा तेरी जहान।
सर्वजन की हितकारी, जाहि सदा रहे तन्मय।
हरिनाम के गुन गाने, बनके तेरा कृष्ण।

जो भक्ति में लीन हो, वो पावे सच्चा सुख।
तू है माता जगदंबा, तेरा नाम जपते हैं।
ध्यान सदा तेरा करें, सुख में दुख में तेरा सहारा।
पूजते हैं तुझे हम सब, हो सदैव बनकर सारा।

संकट में तेरा नाम लें, मिटे हर शोक का भंवरा।
तेरी कृपा से जग में, हर एक हो सुखधारा।
जय जय माता दी, माता जी का कृपा धारा।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ इस भजन में माता गौरी की स्तुति की गई है, जो सृष्टि की सृष्टिकर्ता और सभी जीवों की माता हैं। 'गौरी के लाडले' का उल्लेख करते हुए, यह भजन भक्तों को प्रेरित करता है कि वे सबसे पहले माता की पूजा करें, क्योंकि हर कार्य की सफलता में माता का आशीर्वाद अनिवार्य है। भजन में कहा गया है कि सर्वजन की हितकारी होने के नाते माता गौरी सभी की भलाई चाहती हैं। यह भाव इस बात पर जोर देता है कि सच्चे भक्त की भक्ति से हर संकट का समाधान हो सकता है। जब हम हरिनाम का गुन गाते हैं, तब हम अपने मन को भगवान में लीन कर लेते हैं और उसी समय सच्चे सुख की प्राप्ति होती है।
भजन में भावार्थ इस बात को स्पष्ट करता है कि माता गौरी हमारे जीवन की सभी अवस्थाओं में साथ हैं। 'सुख में दुख में तेरा सहारा' पंक्ति यह दर्शाती है कि जब जीवन में दुर्दिन आते हैं, तब माता का नाम लेना और उनका स्मरण करना बड़ा सहारा बनता है। भक्त जब माता गौरी का ध्यान करते हैं, तो उनका मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ता है। यह भजन करुणा और प्रेम से भरा हुआ है, जिसमें भक्त की समर्पण की भावना को उजागर किया गया है। यह एक बीच का पुल है जो भक्त को मातृत्व का अनुभव कराता है।
इस भजन का थियोलॉजिकल आयाम भक्ति मार्ग की विशेषता में निहित है। भक्तिभाव से भरे होने पर भक्त अपने आप को माता गौरी की कृपा और आशिष का पात्र मानते हैं। 'जो भक्ति में लीन हो' से स्पष्ट होता है कि Bhakti का मार्ग न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक भी है। इस भक्ति मार्ग में माता का स्नेह और संरक्षण आत्मा को शांति की ओर ले जाता है। इसके माध्यम से भक्त जीवन के सभी पहलुओं को माँ के साथ जोड़कर देखता है, जिसमें दैवीयता और भक्ति का गहरा संबंध है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ यह भजन भारतीय संस्कृति में माता पार्वती के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। पुराणों में माता गौरी की महानता को बताया गया है, जो सभी दुख-दर्द हरने वाली हैं। उनके प्रसन्न होने से भक्तों के सभी संकट समाप्त होते हैं। यह भजन उस श्रद्धा का प्रतीक है जिसमें जैव जगत की हर स्त्री और प्राणी के प्रति मातृत्व का भाव देखा जा सकता है। भजन में मां के नाम का जाप करने से भक्त को अनंत सुख और शांति की प्राप्ति होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्तों को मानसिक शांति, आस्था और आशा की प्राप्ति होती है। यह स्वास्थ्य में सकारात्मकता लाता है और संपूर्ण जीवन को संतुलित बनाता है। इससे समाज में भी भक्ति की भावना और सामंजस्य की स्थापना होती है।
🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन का पाठ करते समय सुबह का समय सर्वोत्तम होता है। भक्ति करते समय एक स्वच्छ स्थान पर बैठें और अपने सामने एक दीया जलाएं। माता गौरी की तस्वीर के समक्ष फूल चढ़ाएं और गंगाजल का छिड़काव करें। ध्यानपूर्वक और मन से अपनी भक्ति अर्पित करें। भजन का पाठ करते समय मन को शांत और श्रद्धा से परिपूर्ण रखें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) क्या यह भजन नियमित रूप से गाना चाहिए?हाँ, इस भजन का नियमित रूप से गाना बहुत लाभकारी है। यह मन को शांति और एकाग्रता देता है और देवी मां की कृपा को आकर्षित करता है।
क्या माता गौरी की पूजा में कोई विशेष सामग्री चाहिए?माता गौरी की पूजा के लिए फूल, मिठाई, और शुद्ध जल का प्रयोग किया जाता है। विशेष रूप से सफेद रंग की चीजें उनकी पूजा में प्रमुख मानी जाती हैं।

इस भजन का पारायण किस समय करना चाहिए?स्वर्णिम समय में, विशेषकर संध्याकाल का समय इस भजन का पाठ करने के लिए उत्तम है। इससे प्रेरणा और शक्ति का संचार होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!