सनातन भक्ति परंपरा में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। "जिसकी पूजा करे विधाता | Jisaki Puja Kare Vidhata" भजन ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और अगाध आस्था का अत्यंत पावन प्रतीक है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। सनातन संस्कृति में चाहे वह छठ पूजा गीत का उल्लास हो, गोवर्धन पूजा की परिक्रमा हो, या फिर विद्या की देवी की वंदना हो, आराध्य के प्रति समर्पण ही हर अनुष्ठान का मूल आधार है। इस भजन का प्रत्येक शब्द जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता यानी परमात्मा से मिलने के गाढ़ अनुराग को दर्शाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन विधि और जीवनोपयोगी संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा (Refrain):
जिसकी पूजा करे विधाता, वो मेरा भगवान है,
सृष्टि के कण-कण में जिसका, गूंज रहा यशगान है!
जिसकी पूजा करे विधाता, वो मेरा भगवान है...
प्रथम अंतरा (First Stanza):
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों, जिसकी महिमा गाते हैं,
नारद मुनि और सनकादिक, ध्यान उसी का लगाते हैं।
भक्तों की हर एक पुकार पर, दौड़े चले वो आते हैं,
दीन-दुखियों के संकट को, पल में दूर भगाते हैं!
चरणों में जिसके झुकता, सारा यह जहान है,
जिसकी पूजा करे विधाता, वो मेरा भगवान है...
द्वितीय अंतरा (Second Stanza):
सूरज को प्रकाश उसी से, चंद्र को शीतलता मिलती,
उसी की कृपा से हर बगिया, नित नई कली है खिलती।
पतझड़ में भी रंग भर दे, ऐसी उसकी है माया,
जिसने भी मन से ध्याया, उसने सब कुछ है पाया।
उसकी ममता की छांव में, सुरक्षित हर इंसान है,
जिसकी पूजा करे विधाता, वो मेरा भगवान है...
अंतिम अंतरा (Final Stanza):
कलयुग के इस भवसागर में, नामी जिसका आधार है,
पार वही होता है जिसका, नैया का खेवनहार है।
'भक्तलोक' गाए महिमा, चरणों में झुकाए माथा,
वही जगत का पालनहार है, वही जगत का नाता।
उसके बिन तो सूना-सूना, सारा ये आसमान है,
जिसकी पूजा करे विधाता, वो मेरा भगवान है...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
"जिसकी पूजा करे विधाता" भजन का शाब्दिक और आध्यात्मिक अर्थ बहुत गहरा है। भजन के मुखड़े में यह सत्य स्थापित किया गया है कि जिस परम सत्ता की आराधना स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी करते हैं, वही अखिल ब्रह्मांड के नायक हमारे आराध्य भगवान हैं। संसार के कण-कण में उनकी ही ऊर्जा प्रवाहित हो रही है और संपूर्ण प्रकृति उनका ही यशगान कर रही है।
प्रथम अंतरे में रचनाकार ने स्पष्ट किया है कि त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) सहित देवर्षि नारद और सनत कुमार जैसे महान ऋषि-मुनि भी निरंतर उसी परमेश्वर का ध्यान करते हैं। भगवान की यह विशेषता है कि वे अपने भक्तों की पुकार सुनकर बिना किसी विलम्ब के दौड़े चले आते हैं। जैसे गोवर्धन पूजा के प्रसंग में भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा की थी, वैसे ही वे हर दीन-दुखी के संकट का निवारण करते हैं।
द्वितीय अंतरे में प्राकृतिक उपादानों के माध्यम से ईश्वर की सर्वव्यापकता को दर्शाया गया है। सूर्य का तेज, चंद्रमा की शीतलता और प्रकृति का सौंदर्य सब उसी की विभूति हैं। ठीक वैसे ही जैसे सर्च एवं विद्या उत्सव में बुद्धि और ज्ञान का संचार भगवती सरस्वती की कृपा से होता है, वैसे ही हर जीव की चेतना में परमात्मा का ही प्रकाश विद्यमान है। जो भी साधक निष्काम भाव से उनका स्मरण करता है, वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और आंतरिक शांति प्राप्त करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
आंतरिक शांति और एकाग्रता
इस भजन के नियमित गायन या श्रवण से मन का भटकाव दूर होता है और ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।
भक्ति और समर्पण की भावना
यह भजन मनुष्य के भीतर अहंकार को मिटाकर प्रभु के प्रति पूर्ण शरणागति (Surrender) के भाव को जागृत करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति गीतों और संकीर्तन के लिए वेला का बड़ा महत्व होता है। "जिसकी पूजा करे विधाता" भजन को प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में या संध्या बेला में पूजा के समय गाना अत्यंत फलदायी माना गया है।
- प्रातःकालीन वंदना: स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर मंदिर या पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
- सांध्यकालीन आरती: संध्या बेला में दीपक और धूप दिखाने के बाद परिवार के साथ बैठकर इस भजन का संकीर्तन करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता का वास होता है।
- सत्संग और पर्व अवसर: एकादशी, पूर्णिमा, गोवर्धन पूजा, या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान व सत्संग के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन किसी एक विशिष्ट देवता तक सीमित न होकर संपूर्ण सनातन ब्रह्मांड के सर्वोच्च आराध्य, यानी भगवान विष्णु, श्री कृष्ण और परब्रह्म परमेश्वर को समर्पित है। सनातन परंपरा में आदि शक्ति, त्रिदेव और समस्त देवी-देवता उसी एक महाशक्ति के विभिन्न स्वरूप माने गए हैं। संतों और महात्माओं ने हमेशा से यही उपदेश दिया है कि नाम जप ही कलयुग का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के माध्यम से प्रस्तुत यह भजन पारंपरिक लोक संगीत और शास्त्रीय भक्ति भाव के सुंदर समन्वय से रचा गया है। इसकी संरचना इस प्रकार की गई है कि आम जनमानस भी इसे सरलता से गा सके और इसका आध्यात्मिक आनंद उठा सके। लोककथाओं और संतों के संकीर्तनों से प्रेरणा लेकर इसे आधुनिक श्रद्धालुओं की रुचि के अनुकूल ढाला गया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहित हिंदी (खड़ी बोली एवं ब्रज-अवधि के मिले-जुले सांस्कृतिक शब्दों) में है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "सृष्टि के कण-कण में", "भवसागर", और "खेवनहार"। यह शैली श्रोताओं के हृदय को तुरंत स्पर्श करती है और बिना किसी कठिन प्रयास के अर्थ को स्पष्ट कर देती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अहंकार का त्याग: जब विधाता स्वयं उस परमेश्वर की पूजा करते हैं, तो मनुष्य को अपने ज्ञान, धन या पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए।
- संकट में धैर्य: भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, इसलिए विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
- निष्काम कर्म: फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए ईश्वर का स्मरण करना ही सच्चा मानव धर्म है।
- समभाव: संसार के सभी जीवों में उसी एक परमात्मा का अंश देखना ही सच्ची भक्ति है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| विधाता | सृष्टिकर्ता, ब्रह्मा | जो संपूर्ण संसार की रचना करते हैं |
| यशगान | गुणगान, महिमा का बखान | ईश्वर की कीर्ति फैलाना |
| सनकादिक | सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार | ब्रह्माजी के चार मानस पुत्र जो सदा ब्रह्मध्यान मेंलीन रहते हैं |
| भवसागर | संसार रूपी समुद्र | जन्म-मृत्यु का चक्र जिससे पार पाना लक्ष्य है |
| खेवनहार | नाव चलाने वाला, नैया पार लगाने वाला | संकटों से उबारने वाले भगवान |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
भजन की पंक्ति "जिसकी पूजा करे विधाता, वो मेरा भगवान है" यह सिखाती है कि हमारे आराध्य सामान्य नहीं हैं, बल्कि वे हैं जिनके आगे ब्रह्मांड के रचयिता भी नतमस्तक होते हैं। आगे की पंक्ति "ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों, जिसकी महिमा गाते हैं" यह स्पष्ट करती है कि सृष्टि के संचालन, पालन और संहार करने वाली शक्तियां भी उसी सर्वोच्च सत्ता के अधीन हैं। अंतिम पंक्तियों में "कलयुग के इस भवसागर में, नामी जिसका आधार है" यह संदेश मिलता है कि इस जटिल युग में प्रभु का नाम ही एकमात्र नौका है जो हमें इस संसार सागर से पार लगा सकती है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव से जुड़े कुछ प्रमुख पौराणिक श्लोक निम्नलिखित हैं जिनका स्मरण करना अत्यंत फलदायी है:
"सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥"
अर्थात्: सभी जीव सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का कल्याण हो और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े। यही इस भजन की मूल भावना का विस्तार है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | जिसकी पूजा करे विधाता (Jisaki Puja Kare Vidhata) |
| वेबसाइट संदर्भ | भक्तलोक (Bhaktilok.in) |
| आराध्य देव | परब्रह्म परमेश्वर, भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज-प्रभावित भक्ति भाषा |
| मुख्य भाव | अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और भक्ति |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, सत्संग, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा एवं पर्व अवसर |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख सनातन धर्म की पारंपरिक लोकगाथाओं, भक्ति संकीर्तन परंपरा और वेदान्त दर्शन के सिद्धांतों पर आधारित है। पाठकों की प्रामाणिक और उपयोगी जानकारी के लिए सामग्री को पूरी शुद्धि और भक्ति भाव के साथ संकलित किया गया है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रकाशित की गई है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भागवत गीता - भक्ति योग एवं शरणागति प्रसंग
- सनातन लोकगीत एवं संकीर्तन परंपरा संग्रह
- भक्ति साहित्य एवं संत वाणी संकलन
- पंचांग एवं धार्मिक व्रत कथा संदर्भ
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