Matarani Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दिल से सुनो इसको आपको गुरु जी के दर्शन हो जायेंगे (Jai Guru Ji Taranhar)

सद्गुरु की असीम कृपा और अनन्य भक्ति से परिपूर्ण भजन 'जय गुरु जी तारणहार' सुनें। गुरु जी के दिव्य दर्शन और आध्यात्मिक शांति के लिए यह पावन भजन पढ़ें।

गुरु भजन | Guru Bhajan

दिल से सुनो इस भजन को आपको गुरु जी के दर्शन हो जायेंगे | Guru Ji Bhajan | Jai Guru Ji Taranhar - BhaktiLok

सद्गुरु की महिमा, उनकी अहेतुत कृपा और उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन की लालसा हर एक साधक और भक्त के हृदय में सर्वोपरी होती है। 'जय गुरु जी तारणहार' जैसे पावन भजन न केवल मन को शांति प्रदान करते हैं, बल्कि भक्त को उसके इष्ट और गुरु के साथ एक आध्यात्मिक तादात्म्य स्थापित करने का मार्ग भी दिखाते हैं। भारतीय संत परंपरा और सनातन संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर यानी साक्षात परब्रह्म का दर्जा दिया गया है। जब कोई भक्त सच्चे प्रेम, विरह और अनन्य समर्पण के साथ गुरु का स्मरण करता है, तो उसके भीतर की आध्यात्मिक आंखें खुलने लगती हैं और उसे बाह्य जगत के साथ-साथ अपने अंतःकरण में भी गुरु के अलौकिक दर्शन होने लगते हैं। यह भजन इसी आंतरिक जागरण, अटूट विश्वास और शरणागति का एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण संकीर्तन है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, इसके गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ, संकीर्तन की विधि और गुरु-भक्ति के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

(मखड़ा / स्थायी) दिल से सुनो इस भजन को आपको गुरु जी के दर्शन हो जायेंगे, तारा हरन, दुख हरन, मेरे गुरुवर के चरण, मन को भाएंगे। जय गुरु जी, जय गुरु जी, जय गुरु जी तारणहार, तेरी शरण में आए जो भी, पा जाता है भव से पार। (अंतरा 1) दुनिया की इन ठोकरों से जो थक कर चूर हुआ है, गुरु चरणों में आके देखो, हर दर्द दूर हुआ है। प्रेम की गंगा बहती यहाँ पर, अमृत का है संचार, दिल से सुनो इस भजन को आपको गुरु जी के दर्शन हो जायेंगे। (अंतरा 2) पलकें बिछा के बैठो प्यारे, राह गुरु की देखो, किस्मत के बन्द दरवाज़े, खुद-ब-खुद ही खोलो। कृपा की दृष्टि जो पड़ जाए, भाग्य बदल जाए यार, जय गुरु जी, जय गुरु जी, जय गुरु जी तारणहार। (अंतरा 3) अंधेरे जीवन में मेरे, जो उजाला कर दे, हर एक जख्म पे मेरे, जो प्यार का मरहम धर दे। ऐसे दयालु सतगुरु को, शत-शत बार प्रणाम, जपते रहो हर पल तुम ही, गुरु जी का पावन नाम। (समापन / रिफ़्रैन) दिल से सुनो इस भजन को आपको गुरु जी के दर्शन हो जायेंगे, जय गुरु जी तaranहार, तेरा सदा रहे उपकार।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में गुरु-भक्ति की पराकाष्ठा और साधक की आर्त पुकार छिपी हुई है। भजन के मुखड़े में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई भक्त एकाग्रचित्त होकर और सच्चे हृदय से इस भजन को सुनता है या गाता है, तो उसे अपने गुरु के सूक्ष्म और स्थूल दर्शन की अनुभूति होने लगती है। सांसारिक दुखों से त्रस्त मनुष्य जब गुरु चरणों का आश्रय लेता है, तो उसके सारे कष्ट स्वतः समाप्त होने लगते हैं।

अन्तरों के माध्यम से रचनाकार यह समझाना चाहता है कि संसार की भागदौड़ और मोह-माया में भटकता हुआ जब इंसान थक जाता है, तब उसे केवल गुरु के सानिध्य में ही वास्तविक शांति मिलती है। 'प्रेम की गंगा' और 'अमृत का संचार' इस बात का प्रतीक है कि गुरु का दरबार किसी भी भेदभाव से परे केवल प्रेम और करुणा का सागर है। तीसरी पंक्ति में पलकें बिछाने और राह देखने की बात कही गई है, जो साधक के अनन्य धैर्य (सबूरी) और प्रतीक्षा को दर्शाती है। जब भक्त का समर्पण पूर्ण हो जाता है, तब गुरु की कृपा दृष्टि से उसके जीवन का कायाकल्प हो जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • परम शांति और मानसिक संबल: इस भजन के श्रवण से तनाव, अवसाद और मानसिक अशांति दूर होती है।
  • गुरु-शिष्य संबंध का प्रगाढ़ीकरण: यह भजन साधक और गुरु के बीच अटूट प्रेम और विश्वास की डोर को मजबूत करता है।
  • नकारात्मकता का नाश: नियमित संकीर्तन से घर की ऊर्जा सकारात्मक और पवित्र बनती है।
  • आत्मिक जागरण: यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि भीतर की चेतना को जाग्रत करने वाला एक आध्यात्मिक मंत्र है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

गुरु भजनों के संकीर्तन के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4:00 बजे से 6:00 बजे) या संध्या बेला का समय अत्यंत उत्तम माना गया है।

  • स्थान की पवित्रता: अपने घर के पूजा स्थल या एकांत शांत कमरे में आसन बिछाकर बैठें।
  • दीपक प्रज्वलन: गुरु जी के चित्र या स्वरूप के सामने घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  • मानसिक एकाग्रता: आँखें बंद करके गुरु के स्वरूप का ध्यान करें और इस भजन को भाव के साथ सुनें या गुनगुनाएं।
  • सामूहिक सत्संग: इस भजन को परिवार के साथ या साप्ताहिक सत्संग के दौरान भी गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

सनातन धर्म में गुरु को प्रत्यक्ष ब्रह्म माना गया है। जैसा कि गुरु स्तोत्रम् में वर्णित है—"गुरुब्रह्मा गुरुविष्णुः गुरुदेवो महेश्वरः"। यह भजन विशेष रूप से उन सभी सिद्ध संतों, गुरुओं और विशेषकर आधुनिक काल में जन-जन की आस्था के केंद्र बने 'गुरु जी' (जैसे छत्तरपुर वाले गुरु जी) की महिमा को समर्पित है। गुरु जी की संगति और उनकी उदी, उनका आशीर्वाद भक्तों के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन लाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रभावमयी हिंदी/ब्रज मिश्रित बोलचाल की है, जिसे आमजन आसानी से समझ और गा सकता है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे "प्रेम की गंगा" और "दुख हरन, तारा हरन"। शैली गीय आत्मक है जो तुरंत हृदय को स्पर्श करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  1. अटूट विश्वास: जीवन की हर परिस्थिति में गुरु पर पूर्ण भरोसा रखना चाहिए।
  2. धैर्य और प्रतीक्षा: आध्यात्मिक मार्ग पर सिद्धि और कृपा के लिए सब्र का होना अनिवार्य है।
  3. निसंकोच शरणागति: अहंकार का त्याग कर गुरु चरणों में समर्पित हो जाना ही मुक्ति का मार्ग है।
  4. मानवता की सेवा: सच्चा शिष्य वही है जो गुरु के उपदेशों को अपने आचरण में उतारे।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
तारणहार पार लगाने वाला / उद्धारकर्ता जो संसार के दुखों से मुक्त करे
सतगुरु सच्चा गुरु / आध्यात्मिक मार्गदर्शक जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए
कृपा दृष्टि दया की नजर / आशीर्वाद जिससे भक्त का भाग्य बदल जाए
समर्पण खुद को पूरी तरह सौंप देना अहंकार का त्याग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"दिल से सुनो इस भजन को आपको गुरु जी के दर्शन हो जायेंगे..."
यहाँ 'दिल से सुनने' का अर्थ केवल कानों से ध्वनि ग्रहण करना नहीं है, बल्कि अंतःकरण की गहराइयों से भाव को आत्मसात करना है। जब एकाग्रता गहरी होती है, तो इष्ट के दर्शन भीतर होने लगते हैं।

"दुनिया की इन ठोकरों से जो थक कर चूर हुआ है..."
यह संसार स्वार्थ और दुखों का आगार है। जब मनुष्य हर ओर से निराश हो जाता है, तब गुरु का द्वार ही एकमात्र शांति का स्थल बनता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

"अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्। तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥"
"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दिल से सुनो इस भजन को आपको गुरु जी के दर्शन हो जायेंगे (Jai Guru Ji Taranhar)
समर्पित इष्ट / संत श्री गुरु महाराज / गुरु जी
संगीत शैली भक्ति संगीत / सत्संग भजन
भाषा सरल हिंदी / ब्रज शैली
मुख्य भाव श्रद्धा, समर्पण, गुरु महिमा और मोक्ष
उपयुक्त अवसर गुरुपूर्णिमा, दैनिक साधना, सत्संग, संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. यह भजन किसे समर्पित है?

यह भजन पूर्ण रूप से सनातन गुरु परंपरा और अपने आराध्य सद्गुरु (गुरु जी) को समर्पित है।

2. क्या इस भजन को घर पर कभी भी गाया जा सकता है?

हाँ, इस पावन भजन को आप किसी भी समय, विशेषकर सुबह या शाम की पूजा के दौरान गा या सुन सकते हैं।

3. गुरु जी के दर्शन पाने के लिए सबसे जरूरी क्या है?

गुरु जी के दर्शन और उनकी कृपा पाने के लिए अटूट विश्वास, निर्मल हृदय और पूर्ण समर्पण का होना सबसे आवश्यक है।

4. क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?

नियमित रूप से इस प्रकार के भजनों का संकीर्तन करने से मन का तनाव दूर होता है और असीम शांति की अनुभूति होती है.

5. गुरु भजन के साथ कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

आप 'ॐ नमः शिवाय गुरुजी' या अपने गुरु द्वारा प्रदत्त गुरु मंत्र का स्मरण कर सकते हैं।

6. क्या यह भजन सत्संग के लिए उपयुक्त है?

हाँ, इसकी लय और भाव सामूहिक सत्संग और संकीर्तन के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।

7. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

यह भजन सिखाता है कि दुखों से घबराने के बजाय गुरु चरणों में आश्रय लेना चाहिए, वही तारणहार हैं।

8. क्या बच्चों को भी यह भजन सुनाना चाहिए?

अवश्य, बच्चों में संस्कार और गुरु-भक्ति की भावना जागृत करने के लिए ऐसे भजन बहुत लाभकारी होते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन परंपरा, भक्ति साहित्य और संतों की वाणियों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रेरणादायी आध्यात्मिक सामग्री उपलब्ध कराना है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन गुरु चरित और संकीर्तन परंपरा
  • श्रीमद्भगवद्गीता एवं उपनिषदों में गुरु-शिष्य संवाद
  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं संत वाणी

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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