कर्ण श्रृंगार दाती दास | Karna Shringaar Daati Da I Devi Bhajan SARDOOL SIKANDER Full HD Video Song
प्रकाशित तिथि: 2022-02-15 | श्रेणी: Devi Bhajan / Punjabi Devi Bhajan | संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्री
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के अनंत स्वरूपों को समर्पित यह अनुपम भजन "कर्ण श्रृंगार दाती दास | Karna Shringaar Daati Da" जगत जननी की असीम कृपा, ममता और महिमा का अति सुंदर गान करता है। सनातन परंपरा और उत्तर भारतीय लोक संस्कृति में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। दिवंगत प्रख्यात पंजाबी लोकगायक सरदूल सिकंदर (Sardool Sikander) की रुहानी और गूंजती आवाज में गाया गया यह देवी भजन माँ के दुष्टनाशिनी और कारुणिक दोनों रूपों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करता है। इस भजन का मुख्य भाव शरणागति, पूर्ण समर्पण और माँ के चरणों में अगाध आस्था का है। जब एक साधक सच्चे हृदय से माँ के कर्णों के श्रृंगार और उनके दिव्य रूपों का स्मरण करता है, तो उसके जीवन के समस्त ताप और संताप स्वतः ही दूर हो जाते हैं। यह रचना न केवल कर्णप्रिय है, बल्कि साधक के भीतर आत्मबल, तेज, भक्ति और परम शांति का संचार करती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ मखड़ा (स्थाई) ॥
ऊँचे पहाड़न वालीिये, मेहरां वालीिये, दाती ए...
तेरा कर्ण श्रृंगार सजाया, शेरांवालिये माँ।
भक्तन ने मिल के आज गुण गाया, दातीिए माँ...
तेरा कर्ण श्रृंगार सजाया, शेरांवालिये माँ॥
॥ प्रथम अंतरा ॥
लाल चुनरिया सोहे तेरे अंग में, माँ.
रंग रंगी दुनिया सारे सत्संग में, माँ.
जो भी दर ते तेरे आवे, झोली भर के वो ले जावे.
चरणों में शीश झुकाया, दातीिए माँ...
तेरा कर्ण श्रृंगार सजाया, शेरांवालिये माँ॥
॥ द्वितीय अंतरा ॥
कानों में कुंडल चमके, जगमग ज्योति जले, माँ.
तेरी मूरत मन को भावे, संकट सारे टले, माँ.
दरबार तेरे की शान है न्यारी, महिमा गाए दुनिया सारी.
तूने हर दुःख को मिटाया, दातीिए माँ...
तेरा कर्ण श्रृंगार सजाया, शेरांवालिये माँ॥
॥ समापन अंतरा ॥
सरदूल गाए गुण तेरे, माँ भवानी...
तू ही गंगा, तू ही गीता, तू ही कल्याणी.
चरण कमल का आसरा दीजे, दाती अपना बना के लीजे.
सर पे आशीर्वाद छाया, दातीिए माँ...
तेरा कर्ण श्रृंगार सजाया, शेरांवालिये माँ॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस लोकप्रिय देवी भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और भक्तिरस से परिपूर्ण है। भजन के मखड़े में गायक सरदूल सिकंदर माँ वैष्णो देवी या विभिन्न शक्तिपीठों पर विराजमान आदिशक्ति का आह्वान करते हुए कहते हैं कि ऊँचे पर्वतों पर निवास करने वाली, अपने भक्तों पर निरंतर कृपा बरसाने वाली हे दाती! आज तेरे कानों के आभूषणों (कर्ण श्रृंगार) और संपूर्ण स्वरूप को अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ सजाया गया है। समस्त भक्तों ने मिलकर माँ के यश का गान किया है।
प्रथम अंतरे में माँ के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा गया है कि उनके लाल रंग की पावन चुनरी उनके अंगों पर अत्यंत सुशोभित हो रही है। माँ के सत्संग और दरबार में संपूर्ण संसार रंग गया है। जो भी भक्त दीन-हीन भाव से माँ के दरबार में अपनी अर्जी लेकर आता है, माँ उसकी झोली कभी खाली नहीं लौटने देतीं। उसके सभी कष्ट स्वतः हर लिए जाते हैं।
द्वितीय अंतरे में विशेष रूप से 'कर्ण श्रृंगार' यानी माँ के कानों के कुंडल और उनकी चमकती हुई दिव्य ज्योति का उल्लेख है। माँ का यह रूप साधक के मन को मोह लेता है और उसके जीवन के सभी संकट टल जाते हैं। अंतिम चरणों में गायक ने अपने समर्पण को व्यक्त करते हुए माँ को गंगा, गीता और समस्त कल्याणी शक्तियों का स्रोत बताया है और अपने जीवन को माँ के चरणों में समर्पित करने की प्रार्थना की है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- दिव्य शक्ति की उपासना: यह भजन आदिशक्ति जगदंबा के ममतामयी और स्वरूपवान श्रृंगार का दर्शन कराता है।
- लोक संगीत का स्पर्श: प्रसिद्ध पंजाबी लोकगायक सरदूल सिकंदर की मधुर वाणी इस भजन को आध्यात्मिक ऊंचाइयां प्रदान करती है।
- भक्ति का मार्ग: साधक को अहंकार त्याग कर माँ के चरणों में शरण लेने की प्रेरणा देता है।
- सत्संग और पर्वतीय यात्रा प्रसंग: नवरात्रों और माता के जागरण के समय विशेष रूप से गाए जाने वाला यह एक लोकप्रिय गीत है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
देवी भजनों के श्रवण और गायन का विशेष महत्व सनातन संस्कृति में माना गया है।
- सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त में, संध्याकालीन बेला में, अथवा नवरात्रि के नौ दिनों में इसका पाठ व श्रवण अत्यधिक फलदायी है।
- पूजा स्थल: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर, माँ की प्रतिमा के समक्ष इस भजन को गाकर मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
- जागरण व चौकी: माता के जगराते, चौकी और संकीर्तन कार्यक्रमों में यह भजन वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना देता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की मुख्य आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा (महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का समेकित रूप) हैं। इसके साथ ही, इस अद्भुत रचना को अपनी स्वर लहरियों से अमर बनाने वाले दिवंगत प्रतिष्ठित पंजाबी लोक एवं पार्श्व गायक सरदूल सिकंदर (Sardool Sikander) का नाम भारतीय संगीत जगत में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनकी गायकी में सूफी और भक्ति भाव का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल हिंदी और पंजाबी मिश्रित लोक भाषा (लोक शैली) में रचित है, जिससे आम जनमानस के हृदय तक इसकी गूँज आसानी से पहुँचती है। इसमें रूपक अलंकार और भक्ति रस की प्रधानता है। शब्दों का चयन ऐसा है कि श्रोता स्वतः ही माँ के दरबार की कल्पना में मग्न हो जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
इस भजन के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि मनुष्य को अपने जीवन के हर सुख-दुःख में परम शक्ति (माता) का स्मरण करना चाहिए। अहंकार का त्याग कर शरणागति अपनाने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। माँ की कृपा पाने के लिए निर्मल हृदय और सच्ची श्रद्धा की आवश्यकता होती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| दाती | दाता, वर देने वाली माँ | माता दुर्गा के लिए आदरसूचक संबोधन |
| कर्ण श्रृंगार | कानों का आभूषण / श्रृंगार | माता के कानों के कुंडल और दिव्य सज्जा |
| शेरांवालिये | शेर पर सवारी करने वाली | माता दुर्गा का प्रसिद्ध स्वरूप |
| कल्याणी | कल्याण करने वाली, मंगलकारी | माँ का शुभ और पावन स्वरूप |
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात निम्नलिखित देवी मंत्र का स्मरण करना अत्यधिक श्रेयस्कर होता है:
॥ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके గౌरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | कर्ण श्रृंगार दाती दास (Karna Shringaar Daati Da) |
|---|---|
| मुख्य गायक | सरदूल सिकंदर (Sardool Sikander) |
| आराध्य देवी | आदिशक्ति माता दुर्गा / शेरांवाली |
| भाषा | हिंदी / पंजाबी लोक भाषा |
| भक्ति भाव | समर्पण, शरणागति और उल्लास |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, दैनिक पूजन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "कर्ण श्रृंगार दाती दास" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
उत्तर: इस लोकप्रिय देवी भजन को प्रसिद्ध दिवंगत पंजाबी गायक सरदूल सिकंदर (Sardool Sikander) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।
प्रश्न 2: 'कर्ण श्रृंगार' का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: कर्ण श्रृंगार का अर्थ माता के कानों के सुंदर आभूषणों (कुंडल) और उनके दिव्य स्वरूप की भव्य सजावट से है।
प्रश्न 3: यह भजन किस देवी को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा (शेरांवाली माँ) को समर्पित है।
प्रश्न 4: इस भजन को कब सुनना सबसे अच्छा माना जाता है?
उत्तर: नवरात्रि के दिनों में, माता के जागरण में या प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा के समय इस भजन का श्रवण अत्यंत आनंददायक और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला है।
प्रश्न 5: क्या यह भजन वीडियो फॉर्मेट में भी उपलब्ध है?
उत्तर: हाँ, यह भजन फुल एचडी वीडियो सॉन्ग के रूप में विभिन्न धार्मिक मंचों और यूट्यूब पर उपलब्ध है।
प्रश्न 6: ऐसे भजनों को सुनने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: ऐसे भजनों को सुनने से मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मकता दूर होती है और माता के प्रति भक्ति व विश्वास दृढ़ होता है।
प्रश्न 7: क्या इस भजन को घर पर अकेले में गाया जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल, आप घर पर एकांत में या परिवार के साथ मिलकर माँ के ध्यान के समय इसे गा सकते हैं।
प्रश्न 8: माँ दुर्गा की उपासना से कौन से पुरुषार्थ सिद्ध होते हैं?
उत्तर: सनातन मान्यताओं के अनुसार, माता की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिलोक (Bhaktilok) पर प्रस्तुत यह सामग्री सनातन संस्कृति, लोक संगीत परंपरा और देवी उपासना के शास्त्रीय व पारंपरिक स्रोतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों तक प्रामाणिक एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण जानकारी पहुँचाना है।
स्रोत एवं संदर्भ
- देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
- पारंपरिक लोकगीत एवं पंजाबी देवी भजन संग्रह
- सरदूल सिकंदर संगीत आर्काइव एवं भक्ति रचनाएं
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