hari bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

Subah Subah Le Shiv Ka Naam with Lyrics By Gulshan Kumar,Hariharan I Shiv Mahima

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"सुबह-सुबह ले शिव का नाम" भगवान शिव की आराधना का एक अत्यंत पावन, लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है। गुलशन कुमार द्वारा प्रस्तुत और सुप्रसिद्ध गायक हरिहरन की दिव्य आवाज में सजा यह भजन 'शिव महिमा' एल्बम का एक अनमोल रत्न है। यह भजन न केवल संगीत की दृष्टि से कर्णप्रिय है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी साधक को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर महादेव के स्मरण की प्रेरणा देता है। सनातन परंपरा में सुबह का समय देव-आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है, और जब दिन की शुरुआत देवादिदेव महादेव के नाम से हो, तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार स्वतः ही होने लगता है। यह भजन शिव के साकार और निराकार दोनों रूपों की वंदना करता है और भक्त को सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर परम शांति का अनुभव कराने का मार्ग प्रशस्त करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

सुबह-सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे अपने काम।
जिसने भी शिव का नाम लिया, उसका बेड़ा पार हुआ॥

सुबह-सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे अपने काम।
जिसने भी शिव का नाम लिया, उसका बेड़ा पार हुआ॥
सुबह-सुबह ले शिव का नाम...

शिव की महिमा सबसे न्यारी, शिव की लीला सबसे प्यारी।
जो भी शिव के द्वार पे आया, उसने सब कुछ पाया है॥
सुबह-सुबह ले शिव का नाम...

भस्म रमाये गले में सर्प, डमरू धारी शिव शंकर।
जटा जूट में गंगा धारी, कष्ट मिटाते हैं भारी॥
सुबह-सुबह ले शिव का नाम...

भोले बाबा बड़े दयालु, भक्तों के हैं रखवाले।
दुखियों के दुख दूर करे वो, सबके संकट हरने वाले॥
सुबह-सुबह ले शिव का नाम...

अमृत पीकर देव अमर हैं, विष पीकर शिव नीलकंठ हैं।
सारे जग के पालनहारे, वो ही तो त्रिपुरारी हैं॥
सुबह-सुबह ले शिव का नाम...

भोलेनाथ की पूजा कर लो, मन मंदिर में ध्यान लगा लो।
शिव की भक्ति सच्ची भक्ति, जीवन का उद्धार करेगी॥
सुबह-सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे अपने काम।
जिसने भी शिव का नाम लिया, उसका बेड़ा पार हुआ॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक अंतरा और पंक्ति गहरे आध्यात्मिक संदेश से परिपूर्ण है। यहाँ इसका विस्तृत भावार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है:

मुखड़ा (सुबह-सुबह ले शिव का नाम...): भजन की शुरुआत मनुष्य को सचेत करने से होती है। कवि कहता है कि हे मनुष्य! तू अपने दिन की शुरुआत भगवान शिव के पावन नाम के स्मरण के साथ कर। अपने दैनिक कर्मों को करने से पूर्व ईश्वर का ध्यान करना कर्मयोग की श्रेणी में आता है। जिस भी साधक ने सच्चे मन से महादेव के नाम का आश्रय लिया है, उसका इस संसार रूपी भवसागर से बेड़ा पार हो गया है, अर्थात उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई है।

प्रथम अंतरा (शिव की महिमा सबसे न्यारी...): भगवान शिव की लीलाएं और उनकी महिमा अनंत हैं। वे औघड़दानी हैं, जो बहुत ही अल्प सेवा से प्रसन्न हो जाते हैं। जो भी भक्त पूर्ण समर्पण के साथ उनके द्वार पर आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता। महादेव उसे मनवांछित फल प्रदान करते हैं।

द्वितीय अंतरा (भस्म रमाये गले में सर्प...): इस अंतरे में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का वर्णन है। वे अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं, जो संसार की नश्वरता का प्रतीक है। उनके गले में सर्प सुशोभित हैं, जो काल पर उनके नियंत्रण को दर्शाता है। वे डमरू धारण करने वाले और अपनी जटाओं में पतितपावनी गंगा को स्थान देने वाले हैं। ऐसे कृपालु शिव अपने भक्तों के बड़े से बड़े कष्टों को पल भर में समाप्त कर देते हैं।

तृतीय अंतरा (भोले बाबा बड़े दयालु...): महादेव को 'भोला' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे छल-कपट से रहित, सीधे और अत्यंत दयालु हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। संसार के सभी दुखी और पीड़ित लोग जब उनकी शरण में जाते हैं, तो वे उनके समस्त संकटों का हरण कर लेते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना 'शरणागति' (Surrender) और 'भक्ति' (Devotion) है। यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की भागदौड़ और सांसारिक कार्यों के बीच ईश्वर का स्मरण ही वह धुरी है जो हमें मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करती है। इसका मुख्य संदेश यह है कि कर्म करना आवश्यक है, परंतु कर्म को ईश्वर को समर्पित करके करना ही वास्तविक कर्मयोग है। सुबह के समय शिव का नाम लेने से मन में सात्विक विचारों का उदय होता है, जिससे पूरे दिन कार्य करने की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण क्षेत्र जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) सुबह-सुबह ले शिव का नाम (Subah Subah Le Shiv Ka Naam)
गायक (Singer) हरिहरन (Hariharan)
प्रस्तुतकर्ता (Presenter) गुलशन कुमार (Gulshan Kumar)
एल्बम (Album) शिव महिमा (Shiv Mahima)
भाषा (Language) हिन्दी (Hindi)
मुख्य देव (Deity) भगवान शिव (Lord Shiva)
भक्ति रस (Bhava/Mood) शांत रस, भक्ति रस, समर्पण भाव

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस अमर भजन को जीवंत बनाने में भारत के महान कलाकारों का योगदान रहा है:

  • गुलशन कुमार (टी-सीरीज): उन्होंने भारत के घर-घर में भक्ति संगीत को पहुँचाने का भगीरथ कार्य किया। 'शिव महिमा' एल्बम के माध्यम से उन्होंने शिव भक्ति की एक नई लहर पैदा की।
  • हरिहरन: अपनी मखमली और शास्त्रीय संगीत में रची-बसी आवाज से हरिहरन जी ने इस भजन को गाकर इसे अमर बना दिया। उनकी गायकी में जो ठहराव और भक्ति भाव है, वह सीधे सुनने वाले के हृदय को छू लेता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द सरल अर्थ संदर्भ एवं महत्व
बेड़ा पार भवसागर से मुक्ति / सफलता संसार के दुखों से मुक्ति पाकर मोक्ष प्राप्त करना।
भस्म राख (Vibhuti) शिवजी के शरीर पर सुशोभित होने वाली पवित्र राख, जो वैराग्य का प्रतीक है।
जटा जूट उलझे हुए बाल शिवजी के सिर पर बंधे घने बाल, जिनमें गंगा जी का वास है।
त्रिपुरारी त्रिपुरासुर का वध करने वाले तीन असुरों के नगरों (त्रिपुर) का विनाश करने वाले महादेव।
नीलकंठ नीले कंठ वाले समुद्र मंथन के समय विष पीकर उसे कंठ में रोकने वाले शिव।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भारतीय संस्कृति में सुबह का समय यानी 'ब्रह्ममुहूर्त' अत्यंत पवित्र माना गया है। इस समय वातावरण में सत्व गुण की प्रधानता होती है। "सुबह-सुबह ले शिव का नाम" भजन इसी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सत्य को रेखांकित करता है। भगवान शिव कल्याण के देवता हैं। उनका नाम लेने मात्र से अंतःकरण शुद्ध होता है।

सांस्कृतिक रूप से, यह भजन सावन के महीने, महाशिवरात्रि और प्रत्येक सोमवार को मंदिरों और घरों में गूंजता है। यह भजन पीढ़ियों से शिव भक्तों के दिन की शुरुआत का माध्यम बना हुआ है। इसके श्रवण से मानसिक तनाव दूर होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यदि आप इस भजन के साथ-साथ अन्य शिव स्तुतियों का पाठ करना चाहते हैं, तो आप हमारी वेबसाइट पर श्री शिव चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र भी पढ़ सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के कई महत्वपूर्ण पाठ भी सिखाता है:

  1. कर्म और भक्ति का संतुलन: "कर ले बन्दे अपने काम" पंक्ति दर्शाती है कि हमें अपने कर्तव्यों से भागना नहीं है, बल्कि ईश्वर का नाम लेकर अपने कर्मों को पूरी ईमानदारी से करना है।
  2. वैराग्य और सादगी: शिव का भस्म रमाना और सर्प धारण करना हमें सिखाता है कि बाहरी चकाचौंध के बजाय आंतरिक सादगी और वैराग्य ही जीवन का वास्तविक सत्य है।
  3. परोपकार (विषपान): शिवजी का नीलकंठ स्वरूप हमें सिखाता है कि समाज के कल्याण के लिए कभी-कभी कष्टों और कड़वाहट को हंसते-हंसते पी लेना चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

वैसे तो भगवान शिव का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:

  • दैनिक प्रात:काल पूजा: सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर इस भजन को सुनना दिन को ऊर्जावान बनाता है।
  • महाशिवरात्रि: शिवजी के इस सबसे बड़े पर्व पर इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • श्रावण मास (सावन): सावन के सोमवार को इस भजन को गाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ होता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
भजन का नाम सुबह-सुबह ले शिव का नाम
मुख्य स्वर हरिहरन
संगीत शैली पारंपरिक भक्ति संगीत
मुख्य संदेश ईश्वर स्मरण के साथ दिन की शुरुआत और निष्काम कर्म
संबंधित पाठ श्री रामचरितमानस के शिव प्रसंग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "सुबह-सुबह ले शिव का नाम" भजन के मूल गायक कौन हैं?
उत्तर: इस भजन के मूल गायक सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक हरिहरन हैं, और इसे गुलशन कुमार की 'शिव महिमा' एल्बम में प्रस्तुत किया गया था।

प्रश्न 2: इस भजन को सुबह सुनने का क्या महत्व है?
उत्तर: सुबह का समय सात्विक ऊर्जा से भरपूर होता है। इस समय शिव का नाम लेने से मन शांत होता है, तनाव दूर होता है और पूरे दिन के कार्यों के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

प्रश्न 3: शिवजी को 'नीलकंठ' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को पीकर सृष्टि की रक्षा करने के कारण और उस विष को अपने कंठ में ही रोक लेने के कारण शिवजी का कंठ नीला पड़ गया था, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है।

प्रश्न 4: भजन में "कर ले बन्दे अपने काम" का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि मनुष्य को ईश्वर का नाम लेकर अपने दैनिक कर्तव्यों और कर्मों को पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए। भक्ति कर्म से विमुख होना नहीं सिखाती।

प्रश्न 5: क्या यह भजन सावन के महीने में सुनना विशेष फलदायी है?
उत्तर: हाँ, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान इस भजन का श्रवण और कीर्तन शिव कृपा प्राप्त करने का सुगम मार्ग है।

प्रश्न 6: भगवान शिव के जटा जूट में गंगा का क्या रहस्य है?
उत्तर: गंगा के तीव्र वेग को पृथ्वी पर सीधे गिरने से रोकने के लिए शिवजी ने उन्हें अपनी जटाओं में समेट लिया था, जिससे पृथ्वी की रक्षा हुई। यह उनके परोपकारी स्वरूप को दर्शाता है।

प्रश्न 7: क्या हम इस भजन को घर के मंदिर में बजा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, सुबह की आरती या पूजा के समय इस भजन को बजाना घर के वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाता है।

प्रश्न 8: शिव भक्ति का अंतिम लक्ष्य क्या है?
उत्तर: शिव भक्ति का अंतिम लक्ष्य मन की शांति, आत्म-साक्षात्कार और अंततः मोक्ष (भवसागर से मुक्ति) प्राप्त करना है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "सुबह-सुबह ले शिव का नाम" भजन के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस भजन के माध्यम से भक्त और भगवान के बीच के सरल संबंध को दर्शाया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से शोध और पारंपरिक शिव भक्ति ग्रंथों के आधार पर तैयार की गई है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखी गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता - शिव नाम महिमा)
  • श्रीमद्भागवत महापुराण (समुद्र मंथन प्रसंग)
  • पारंपरिक शिव भजन संग्रह एवं 'शिव महिमा' एल्बम (टी-सीरीज)

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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