Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Sone Ke Kakahi शीतली मईया (Maiya Ke Jagrata)

पढ़ें Sone Ke Kakahi शीतली मईया | Maiya Ke Jagrata | Anu Dubey | Bhojpuri Devi Geet Bhajan 2015 - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पू

देवी गीत एवं भजन

Sone Ke Kakahi शीतली मईया | Maiya Ke Jagrata | Anu Dubey | Bhojpuri Devi Geet Bhajan

प्रस्तुति: भक्तिलोक (Bhaktilok.in) | स्वर: अनु दुबे (Anu Dubey) | एल्बम: मईया के जगराता (Maiya Ke Jagrata) | संगीत लेबल: वेव म्यूजिक (Wave Music)


भोजपुरी लोक संस्कृति और देवी उपासना के पावन प्रांगण में शीतला माता और माँ दुर्गा के प्रति अगाध श्रद्धा व्यक्त करने वाले गीतों का एक विशिष्ट स्थान है। 'सोने के कहाखी शीतली मईया' (Sone Ke Kakahi Shetali Maiya) भजन लोकप्रिय गायिका अनु दुबे की मधुर वाणी में गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत है, जो माँ शीतला के जगराता और पारंपरिक नौहा/सोहर शैली की मिठास को समेटे हुए है। यह भजन न केवल लोक संगीत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि माता शीतला के प्रति शरणागत भाव, आरोग्य प्राप्ति की प्रार्थना और ग्रामीण जनजीवन की सात्विक भक्ति का सजीव चित्रण भी प्रस्तुत करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, इसका गहन भावार्थ, गायन की परंपरा, लोक संगीत में इसका महत्व और माता शीतला की कृपा से जुड़ी आध्यात्मिक बातों का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| सोने के कहाखी शीतली मईया ||

सोने के कहाखी शीतली मईया, चान्दी के टिकुली,
लिलार पर शोभे टिकुली हे मईया...
माई के जगराता में झूमे सारा संसार,
शीतली मईया कहु तूँ स्वीकार हमार पुकार!

निम्बुआ के गछिया शीतली मईया झूला झुलेली,
भक्तन के मनवा के मुराद पुजेली।
हाथ में त्रिशूल साजे, गलवा में हरवा,
दर्शन पाके धन्य भइल सभे कर घरवा।

गावे अनु दुबे मईया के सुघर भजनिया,
सुनके भक्ता के झूमे ला मनरंगिया।
निर्मल जल धइले बानी पूजन के थरिया,
आवा आवा मईया हमरो घरवा नगरिया।

जय हो शीतली मईया! जय हो जगदम्बे!
भक्ति भाव से गूंजे कोना-कोना अनमने!
कल्याण करो मईया सबका संताप हरो,
चरण कमल में हमार जीवन सफल करो।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह लोकगीतनुमा भजन ग्रामीण और पारंपरिक भोजपुरी संस्कृति की गहराई से जुड़ा हुआ है। इसमें भक्त अपनी आराध्य माता शीतला के दिव्य सौंदर्य, उनके श्रृंगार और उनकी महिमा का अत्यंत भावुक और काव्यात्मक वर्णन करता है। भक्त कहता है कि हे शीतली मईया! आपके ललाट पर सोने की कहाखी और चांदी की टिकुली अत्यंत शोभायमान हो रही है। आपका रूप भक्तों के संताप को दूर करने वाला और शीतलता प्रदान करने वाला है।

भजन के अगले चरण में नीम के वृक्ष और शीतला माता के अटूट संबंध का वर्णन मिलता है। जैसा कि सनातन परंपरा में मान्यता है कि माता शीतला का वास नीम के पेड़ में माना जाता है, भक्त गाता है कि "निम्बुआ के गछिया शीतली मईया झूला झुलेली" - अर्थात माता शीतला नीम की डालियों के बीच झूला झूलती हैं और अपने भक्तों के हृदय की सभी मुरादें पूरी करती हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और गले में सुंदर हार उनके शक्ति स्वरूप का बोध कराता है।

अंतिम पंक्तियों में गायिका अनु दुबे और भक्तजन अपने अंतःकरण की शुद्धता का प्रतीक निर्मल जल और पूजा की थाली लेकर माता का आह्वान करते हैं। यह भाव इस बात का प्रतीक है कि भौतिक सुख-सुविधाओं से बढ़कर भक्त का निर्मल प्रेम और सच्ची पुकार ही देवी को प्रसन्न करने का एकमात्र साधन है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

देवी शीतला की उपासना

माता शीतला को चेचक, फोड़े-फुंसी और उष्णता जनित रोगों की निवारक तथा आरोग्यता प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इस भजन के माध्यम से रोगमुक्त जीवन और मानसिक शांति की प्रार्थना की जाती है।

लोक संस्कृति एवं जगराता परंपरा

उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में रात्रि जागरण (जगराता) और देवी गीतों की समृद्ध परंपरा रही है। यह भजन उसी लोक-संस्कृति की जीवंत पहचान है जो हर घर में उत्सव का माहौल बना देती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों और माता के जगराता के अवसरों पर इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है। इसके श्रवण और गायन की विधि इस प्रकार है:

  • नवरात्रि के पावन अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह और संध्या की बेला में माता के दरबार में यह भजन अत्यंत आनंदित करता है।
  • शीतला अष्टमी (बसंत पंचमी / बास्योड़ा): शीतला अष्टमी के पावन पर्व पर जब माता को ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, तब विशेष रूप से शीतला माता के इन गीतों का स्मरण किया जाता है।
  • पारिवारिक अनुष्ठान एवं मुंडन/विवाह: मांगलिक कार्यों और देवी जागरण के समय महिलाएं मिलकर ढोलक और मंजीरे के साथ इस पारंपरिक गीत को गाती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

'मईया के जगराता' एल्बम के अंतर्गत वेव म्यूजिक द्वारा रिलीज़ किया गया यह गीत लोक धुनों पर आधारित है। भोजपुरी संगीत जगत में अनु दुबे ने अपनी सधी हुई और सुरीली आवाज़ से पारंपरिक देवी गीतों को एक नया आयाम दिया है। ग्रामीण अंचल की सोंधी खुशबू को आधुनिक संगीत संयोजन के साथ प्रस्तुत करने का श्रेय इस गीत के रचनाकारों और संगीतकारों को जाता है।

पारंपरिक लोकगीतों की शैली में रची गई यह रचना मौखिक परंपरा से निकलकर आधुनिक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जैसे गाथा, Wynk, सावन और यूट्यूब के माध्यम से घर-घर तक पहुँची है, जिससे आज की युवा पीढ़ी भी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ी हुई है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ सांस्कृतिक एवं पारंपरिक संदर्भ
कहाखी / टिकुली माथे पर लगाने वाला पारंपरिक आभूषण या बिंदी देवी के दिव्य श्रृंगार और सौंदर्य का प्रतीक
शीतली मईया माता शीतला चेचक और उष्णता के रोगों को दूर करने वाली लोक देवी
निम्बुआ के गछिया नीम का वृक्ष माता शीतला का प्रिय निवास स्थान और औषधीय पेड़
जगराता रात्रि जागरण माता की महिमा में रात भर भजन-कीर्तन करना
मुराद मनोकामना / इच्छा भक्तों द्वारा माता से अपनी प्रार्थना पूरी करने की विनती

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ शीतलायै नमः

"वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बरां। मार्मार्जिनीकलशोपेताम् शूर्पालंकृतमस्तकाम्॥"

अर्थात: गधे की सवारी करने वाली, दिगंबरा, हाथ में झाड़ू और कलश धारण किए हुए तथा सिर पर सूप (शूर्प) से अलंकृत भगवती शीतला देवी की मैं वंदना करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

गीत का नाम Sone Ke Kakahi शीतली मईया
एल्बम Maiya Ke Jagrata
गायिका अनु दुबे (Anu Dubey)
संगीत लेबल वेव म्यूजिक (Wave Music)
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri Folk / Devi Geet)
आराध्य देवी माता शीतला / दुर्गा
मुख्य भाव भक्ति, श्रृंगार, आरोग्यता एवं समर्पण
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, जगराता, शीतला अष्टमी, पारिवारिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत की गायिका प्रसिद्ध लोक और भक्ति गायिका अनु दुबे (Anu Dubey) हैं।

यह गीत वेव म्यूजिक द्वारा रिलीज़ किए गए प्रसिद्ध एल्बम 'मईया के जगराता' (Maiya Ke Jagrata) का हिस्सा है।

माता शीतला को आरोग्य, चेचक, खसरा और अन्य उष्णता जनित रोगों की निवारक देवी माना जाता है। उनकी पूजा से परिवार में आरोग्यता और शांति की प्राप्ति होती है।

इस भजन को नवरात्रि, माता के जगराता, शीतला अष्टमी (बास्योड़ा) और किसी भी मांगलिक उत्सव या पारिवारिक अनुष्ठान के दौरान सुना और गाया जा सकता है।

सनातन परंपरा और आयुर्वेद के अनुसार नीम का वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर होता है। धार्मिक मान्यताओं में माता शीतला का वास नीम के पेड़ में माना जाता है और उन्हें नीम के पत्ते व शीतल जल अर्पित किए जाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री लोक संस्कृति, पारंपरिक भोजपुरी देवी गीतों और सनातन धार्मिक मान्यताओं के अध्ययन पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक रुचि और सांस्कृतिक जानकारी को समृद्ध करने के लिए तैयार किया गया है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ

  • वेव म्यूजिक (Wave Music) आधिकारिक ऑडियो रिलीज़ अभिलेखागार।
  • भोजपुरी लोकगाथा और पारंपरिक देवी गीत संग्रह।
  • शीतला माता व्रत एवं स्तोत्र ग्रंथ।
  • पारंपरिक लोक संगीत और जगराता संस्कृति के अध्ययन लेख।

संबंधित भजन एवं लेख

माँ दुर्गा के लोकप्रिय भजन

नवरात्रि और जगराता के अवसरों पर गाए जाने वाले अन्य लोकप्रिय देवी भजनों के बोल और अर्थ।

भोजपुरी भक्ति गीत संग्रह

बिहार और उत्तर प्रदेश की लोक परंपराओं से जुड़े पवित्र पारंपरिक भक्ति गीतों की सूची।

शीतला माता व्रत कथा एवं महत्व

शीतला अष्टमी और बसंत पंचमी पर किए जाने वाले व्रतों की संपूर्ण विधि और पौराणिक कथा।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!