मंगलवार Hey Hanuman | हे हनुमान | Ravish Raja Bhojpuri Bhakti Song | Special Song Tuesday 2021 - BhaktiLok
भक्तिलोक के इस विशेष प्रस्तुति मंच पर आपका स्वागत है। कलयुग के जागृत एवं साक्षात देवता संकटमोचन हनुमान जी की महिमा का गुणगान करती भोजपुरी भक्ति रचना "मंगलवार Hey Hanuman | हे हनुमान" गायक रविश राजा (Ravish Raja) की एक अत्यंत भावपूर्ण और ऊर्जावान प्रस्तुति है। मंगलवार के पावन दिन हनुमान जी की आराधना करने से साधक के जीवन के समस्त संकट, भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा स्वतः समाप्त हो जाती है। यह गीत आधुनिक संगीत शैली और पारंपरिक लोक भावना का एक अनूठा संगम है, जो श्रोता के हृदय में वीर हनुमान के प्रति अगाध प्रेम और अटूट विश्वास जगाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भोजपुरी भजन के संपूर्ण बोल, भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की परंपरा और हनुमान उपासना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे साधक को पूर्ण भक्ति रस की प्राप्ति हो सके।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल भोजपुरी गीत एवं पावन पंक्तियाँ - रविश राजा
स्थाई (मुखड़ा):
मंगलवार Hey Hanuman, हे हनुमान, सुन ली आराजी हमार,
संकट मोचन महावीर तुमको ध्यावे संसार!
हे बजरंगबली, हे पवनसुत, चरणों में झुके सिर यार,
मंगलवार Hey Hanuman, सुन ली आराजी हमार।
अंतरा 1:
बाल समय जब रवि को लीन्हें, तीनों लोक भयभीत किन्हें,
राम काज किन्हें तूने पल में, लंका जार राख किन्हें!
अंजनि के लाल तुम्हारी महिमा, गावे सकल संसार,
मंगलवार Hey Hanuman, सुन ली आराजी हमार।
अंतरा 2:
लक्ष्मण मूर्छित जब भइले, संजीवनी बूटी ले आहिले,
प्राण बचाई प्रभु राम के, संकट सब दूर भगाइले!
रविश राजा गुन गावे तोहरा, महिमा अपरंपार,
मंगलवार Hey Hanuman, सुन ली आराजी हमार।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भोजपुरी भजन हनुमान जी के बाल्यकाल से लेकर प्रभु श्री राम के कार्यों में उनकी अनन्य सहायता तक के महान प्रसंगों का सुंदर स्मरण कराता है। भजन के मुखड़े में गायक रविश राजा पवनसुत हनुमान से करबद्ध प्रार्थना करते हैं कि हे संकटमोचन! मंगलवार के इस पावन पर्व पर हमारी पुकार सुनिए, क्योंकि इस संसार में जो भी आपकी शरण में आता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं।
प्रथम अंतरा में हनुमान जी के सूर्य ग्रहण करने की पौराणिक लीला ("बाल समय रवि भयो लहि तांडव") और माता अंजनी के लाल के रूप में उनके पराक्रम का वर्णन है। लंका दहन के प्रसंग के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि भक्त के जीवन में कैसी भी विकट परिस्थिति क्यों न आवे, भगवान हनुमान की कृपा से रावण रूपी अहंकार और नकारात्मकता का नाश अवश्य होता है।
द्वितीय अंतरा में लक्ष्मण मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी लाने के ऐतिहासिक और प्राण-रक्षक प्रसंग का भावपूर्ण स्मरण किया गया है। यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि हनुमान जी अपने भक्तों के संकटों को हरने के लिए पर्वत जैसी बाधाओं को भी चुटकियों में पार कर लेते हैं। रचनाकार रविश राजा अपनी कला के माध्यम से यही संदेश देते हैं कि कलियुग में हनुमान जी का स्मरण ही सबसे बड़ा संबल है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भोजपुरी भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, ठेठ लोक भाषा की मिठास और हृदय को स्पंदन करने वाली संगीत शैली है। भोजपुरी भाषी क्षेत्रों के साथ-साथ देश-विदेश में बसे हनुमान भक्तों के बीच यह गीत मंगलवार के दिन विशेष रूप से गूंजता है।
- कलयुग के जागृत देवता: हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता तथा कलयुग के अमर देवता के रूप में पूजा जाता है।
- भय मुक्ति: इस भजन के निरंतर श्रवण से मन का अज्ञात भय, चिंता और मानसिक तनाव दूर होता है।
- भोजपुरी संस्कृति में भक्ति: लोकगीतों की शैली में धार्मिक भावों को पिरोकर आम जनमानस तक पहुँचाना इस गीत की सांस्कृतिक विशेषता है।
भक्तजन नियमित रूप से श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ ऐसे ऊर्जावान भजनों का आनंद लेते हैं जिससे पूजा का वातावरण जीवंत हो उठता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत के अधिकाधिक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए उचित समय और विधि का होना आवश्यक है:
- मंगलवार और शनिवार: इन दोनों दिनों में हनुमान जी की विशेष पूजा होती है। प्रातः काल स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण कर इस भजन का श्रवण अत्यंत फलदायी है।
- संध्याकालीन आरती: घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन को बजाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
- यात्रा के समय: किसी भी नए कार्य या लंबी यात्रा पर निकलने से पहले हनुमान जी का स्मरण करते हुए इस गीत को सुनना रक्षक सिद्ध होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र बिंदु भगवान श्री हनुमान हैं, जिन्हें भगवान शिव का रुद्रावतार, केसरी नंदन और पवन पुत्र माना जाता है। हनुमान जी भगवद्भक्ति, ब्रह्मचर्य, सेवा भाव और अटूट निष्ठा के सर्वोच्च प्रतीक हैं। इस रचना के गायक रविश राजा ने अपनी लोक शैली के माध्यम से पारंपरिक संत वाणी और आधुनिक संगीत का सुंदर संयोजन प्रस्तुत किया है। हनुमान जी के साथ-साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम स्तुति का स्मरण भी इस भजन की पृष्ठभूमि में निहित है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
वर्ष 2021 के दौरान रिलीज हुई यह भोजपुरी भक्ति रचना सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काफी लोकप्रिय हुई। रविश राजा की सुरीली और ओजस्वी आवाज ने इस भजन को मंगलवार के विशेष अवसरों पर बजाए जाने वाले शीर्ष भजनों में शामिल कर दिया। लोक धुनों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संगीत के मिश्रण ने युवाओं और वृद्धों दोनों को समान रूप से आकर्षित किया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन ठेठ भोजपुरी और हिंदी के सहज मिश्रण से तैयार किया गया है। लोकभाषा होने के कारण यह सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है। काव्य शैली में तुकबंदी (Rhyming) और अनुप्रास का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे "रवि को लीन्हें - भयभीत किन्हें" और "लइले - आइले"। यह सरल शैली जनसामान्य को बिना किसी कठिन प्रयास के भजन की पंक्तियाँ याद कराने में सहायक है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक मनोरंजक गीत नहीं है, बल्कि जीवन के गहरे सत्यों को सिखाने वाला मार्गदर्शक है:
- संकटों में धैर्य: हनुमान जी के चरित्र से यह सीख मिलती है कि कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आए, धैर्य और प्रभु पर विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए।
- निष्काम सेवा: भगवान राम के प्रति हनुमान जी का समर्पण यह सिखाता है कि जीवन में बिना किसी स्वार्थ के अपने कर्तव्यों का पालन करना ही सच्ची पूजा है।
- आत्मबल और साहस: हनुमान जी का स्मरण मनुष्य के भीतर सोई हुई ऊर्जा और निर्भयता को जागृत करता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| आराजी | प्रार्थना, विनती | भगवान के चरणों में अपनी मनोकामना रखना |
| संकट मोचन | सारे संकटों को हरने वाले | हनुमान जी का प्रसिद्ध विशेषण |
| रवि को लीन्हें | सूर्य को मुख में लेना | बचपन में हनुमान जी द्वारा सूर्य को फल समझकर निगलने की लीला |
| लंका जार | लंका को जलाना | माता सीता की खोज के दौरान रावण की सोने की लंका का दहन |
| संजीवनी बूटी | जीवनदायिनी जड़ी-बूटी | लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए हिमालय से लाया गया पर्वत |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"मंगलवार Hey Hanuman, हे हनुमान, सुन ली आराजी हमार..."
भावार्थ: हे संकटमोचन हनुमान! मंगलवार के इस पावन दिन हम आपके चरणों में अपनी विनती लेकर आए हैं। संसार के सभी जीव आपके आगे अपनी पुकार रखते हैं, कृपया हमारी भी पुकार सुनिए और हमारे दुखों का निवारण कीजिए।
"बाल समय जब रवि को लीन्हें, तीनों लोक भयभीत किन्हें..."
भावार्थ: हे पवनसुत! आपके बाल्यकाल के पराक्रम का स्मरण करते हुए हम नमन करते हैं जब आपने बाल्यकाल में ही सूर्य को फल समझकर पकड़ लिया था और तीनों लोक में आपका अद्भुत तेज फैल गया था।
"लक्ष्मण मूर्छित जब भइले, संजीवनी बूटी ले आहिले..."
भावार्थ: युद्ध के मैदान में जब मेघनाद के प्रहार से श्री लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तब आपने अपनी अपार शक्ति से संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा की थी।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
भजन के साथ-साथ निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण करने से अनंत फलों की प्राप्ति होती है:
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥
इसके अतिरिक्त प्रतिदिन श्री हनुमान जी के 108 नाम का जाप करने से साधक को मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | मंगलवार Hey Hanuman (हे हनुमान) |
|---|---|
| गायक / कलाकार | रविश राजा (Ravish Raja) |
| संगीत शैली | भोजपुरी भक्ति गीत / लोक शैली |
| आराध्य देव | संकटमोचन श्री हनुमान जी |
| मुख्य प्रसंग | लंका दहन, संजीवनी बूटी, बाल लीला |
| रिलीज वर्ष | 2021 |
| शुभ अवसर | मंगलवार व्रत, हनुमान जयंती, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"मंगलवार Hey Hanuman" भजन के गायक कौन हैं?
इस लोकप्रिय भोजपुरी भक्ति गीत के गायक रविश राजा (Ravish Raja) हैं, जिन्होंने अपनी ओजस्वी आवाज में इसे गाया है।
यह भजन किस दिन विशेष रूप से सुनना चाहिए?
यह भजन मंगलवार और शनिवार के पावन दिनों में विशेष रूप से सुनना अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह भजन हनुमान जी की महिमा के माध्यम से मनुष्य के मन से भय को दूर कर अटूट विश्वास और सेवा भाव जगाने का संदेश देता है।
क्या इस भजन को घर में रोज़ाना बजाया जा सकता है?
हाँ, इस भजन को प्रतिदिन प्रातःकाल या संध्या आरती के समय बजाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
हनुमान जी की पूजा में किन चीजों का भोग लगाया जाता है?
हनुमान जी को बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़-चने और पान का भोग अत्यंत प्रिय है।
संकटमोचन नाम क्यों पड़ा?
क्योंकि भगवान हनुमान अपने भक्तों के सभी बड़े से बड़े संकटों को क्षण भर में दूर कर देते हैं, इसलिए उन्हें संकटमोचन कहा जाता है।
इस भजन में किन पौराणिक घटनाओं का जिक्र है?
इसमें हनुमान जी द्वारा बाल्यकाल में सूर्य को निगलने, लंका दहन करने और लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाने की घटनाओं का जिक्र है।
हनुमान जी को किसका अवतार माना जाता है?
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार माने जाते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिलोक पर प्रकाशित यह सामग्री धार्मिक ग्रंथों, पारंपरिक लोक कथाओं और आधुनिक संगीत परंपरा के अध्ययन पर आधारित है। पाठकों को सटीक, प्रामाणिक और भक्तिमय जानकारी प्रदान करने के लिए इस आलेख को विशेष रूप से तैयार किया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री वाल्मीकि रामायण - सुंदरकांड एवं किष्किंधा कांड
- पारंपरिक भोजपुरी भक्ति साहित्य एवं लोकगीत परंपरा
- श्री हनुमान चालीसा एवं संकटमोचन स्तोत्र
- सनातन धर्म की लोक कथाएं एवं भजन संग्रह
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