Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

Ek Bhawan Pe Teen Deviyaan with Lyrics

पढ़ें Ek Bhawan Pe Teen Deviyaan with Lyrics | Alka Yagnik | Sonu Nigam | Vaishno Maa Bhajan | Mata Song - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भा

सनातन धर्म में आदिशक्ति की आराधना का विशेष महत्व है। माता वैष्णो देवी के पावन दरबार को समर्पित भजन "एक भवन पे तीन देवियां" (Ek Bhawan Pe Teen Deviyaan) एक ऐसा कालजयी भक्ति गीत है, जो श्रोताओं को सीधे त्रिकुट पर्वत की पवित्र गुफा में ले जाता है। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम और सुरों की मल्लिका अल्का याग्निक की दिव्य आवाजों से सजा यह भजन माता के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इस भजन में माता वैष्णो देवी के उस अलौकिक स्वरूप का वर्णन है, जहां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों देवियां एक ही पिंड रूप में विराजमान हैं। यह गीत केवल एक भजन नहीं है, बल्कि यह साधक के हृदय में श्रद्धा, समर्पण और असीम शांति का संचार करने वाला एक आध्यात्मिक माध्यम है। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़े पौराणिक प्रसंगों का सविस्तार अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

।। एक भवन पे तीन देवियां ।।

(कोरस)
एक भवन पे तीन देवियां, बहती गंगा की धारा।
मैया वैष्णो के भवन पे, बहती गंगा की धारा।
एक भवन पे तीन देवियां, बहती गंगा की धारा।
मैया वैष्णो के भवन पे, बहती गंगा की धारा।

(अंतरा - १)
एक महाकाली, एक महालक्ष्मी, एक महासरस्वती प्यारी।
तीनों के चरणों में झुकती, दुनिया ये सारी।
हो... तीनों के चरणों में झुकती, दुनिया ये सारी।
जिसने भी श्रद्धा से पुकारा, पाया उसका सहारा।
मैया वैष्णो के भवन पे, बहती गंगा की धारा।
एक भवन पे तीन देवियां, बहती गंगा की धारा।

(अंतरा - २)
ऊंचे पर्वत पे मैया ने, अपना डेरा जमाया है।
भक्तों को दर्शन देने को, सुंदर रूप बनाया है।
हो... भक्तों को दर्शन देने को, सुंदर रूप बनाया है।
चमके मुकुट निराला, चमके चम-चम चमकारा।
मैया वैष्णो के भवन पे, बहती गंगा की धारा।
एक भवन पे तीन देवियां, बहती गंगा की धारा।

(अंतरा - ३)
लाल चोला मैया का सोहे, हाथों में त्रिशूल विराजे।
शेर की सवारी करके मैया, दुष्टों का संहार साजे।
हो... शेर की सवारी करके मैया, दुष्टों का संहार साजे।
भक्तों के संकट हरने को, लिया रूप ये न्यारा।
मैया वैष्णो के भवन पे, बहती गंगा की धारा।
एक भवन पे तीन देवियां, बहती गंगा की धारा।

(अंतरा - ४)
द्वार तुम्हारे जो भी आए, खाली हाथ न जाए वो।
मनवांछित फल पाकर मैया, तेरे ही गुण गाए वो।
हो... मनवांछित फल पाकर मैया, तेरे ही गुण गाए वो।
सोनू और अल्का भी गाएं, महिमा का गान तुम्हारा।
मैया वैष्णो के भवन पे, बहती गंगा की धारा।
एक भवन पे तीन देवियां, बहती गंगा की धारा।
मैया वैष्णो के भवन पे, बहती गंगा की धारा।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह भजन माता वैष्णो देवी के दरबार की महिमा का अत्यंत सुंदर और सजीव चित्रण करता है। इसके प्रत्येक अंतरे में गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा हुआ है:

त्रिशक्ति का एकीकरण (म mukhda)

भजन की शुरुआत "एक भवन पे तीन देवियां" से होती है। इसका अर्थ है कि जम्मू के कटरा में स्थित त्रिकुट पर्वत पर माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा में तीन दिव्य शक्तियां—महाकाली (तमोगुण की नियंत्रक और संहारक शक्ति), महालक्ष्मी (रजोगुण की नियंत्रक और ऐश्वर्य प्रदाता शक्ति), और महासरस्वती (सतोगुण की नियंत्रक और ज्ञान प्रदाता शक्ति)—एक साथ पिंडी रूप में विराजमान हैं। "बहती गंगा की धारा" का सांकेतिक अर्थ है कि इस पावन भवन से निरंतर कृपा, करुणा और भक्ति की पवित्र गंगा प्रवाहित हो रही है, जो भक्तों के पापों का नाश करती है।

शरणागति का महत्व (प्रथम अंतरा)

प्रथम अंतरे में कहा गया है कि तीनों देवियां मिलकर संपूर्ण सृष्टि का संचालन करती हैं और पूरी दुनिया उनके चरणों में नतमस्तक होती है। जब कोई भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से माता को पुकारता है, तो माता उसे अपना आश्रय प्रदान करती हैं। यह शरणागति (Surrender) के सिद्धांत को दर्शाता है, जो भक्ति मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण सोपान है।

दिव्य स्वरूप और साधना (द्वितीय अंतरा)

द्वितीय अंतरा माता के ऊंचे पर्वतों पर निवास करने की बात करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से "ऊंचा पर्वत" मानव चेतना के उच्च स्तर (Higher Consciousness) का प्रतीक है। माता का सुंदर रूप और उनका चमकता हुआ मुकुट साधक के भीतर ज्ञान के प्रकाश के उदय को दर्शाता है। जब साधक अपनी साधना में ऊंचाइयों को छूता है, तो उसे माता के इस अलौकिक तेज के दर्शन होते हैं।

दुष्टनाशिनी और रक्षक रूप (तृतीय अंतरा)

तीसरे अंतरे में माता के आयुधों और उनके वाहन का वर्णन है। लाल चोला शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है। त्रिशूल तीनों तापों (आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक कष्टों) के विनाश का सूचक है। सिंह की सवारी यह दर्शाती है कि माता ने उग्र प्रवृत्तियों और अहंकार को अपने नियंत्रण में कर रखा है। वे दुष्टों (आंतरिक विकारों जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह) का संहार कर भक्तों की रक्षा करती हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना "वात्सल्य" और "पूर्ण समर्पण" है। यह गीत हमें यह संदेश देता है कि ईश्वर एक है और उसकी शक्तियां अनंत हैं। जब हम अपने अहंकार को त्यागकर माता के चरणों में आते हैं, तो हमारे जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों (ऊंचे पर्वतों) को पार करके ही हमें परम आनंद और शांति (माता के दर्शन) की प्राप्ति हो सकती है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण कोटि (Category) गीत की जानकारी (Song Details)
गीत का नाम (Song Name) एक भवन पे तीन देवियां (Ek Bhawan Pe Teen Deviyaan)
मुख्य गायक (Singers) सोनू निगम (Sonu Nigam) एवं अल्का याग्निक (Alka Yagnik)
समर्पित देवता (Deity) माता वैष्णो देवी (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती)
गीत की भाषा (Language) हिन्दी (Hindi with Punjabi Devotional Touch)
संगीत शैली (Genre) देवी भजन / भक्ति गीत (Devi Bhajan)
मुख्य विषय (Theme) त्रिशक्ति महिमा और वैष्णो देवी यात्रा का आध्यात्मिक आनंद
उपयुक्त अवसर (Occasion) नवरात्रि, दुर्गा पूजा, मंगलवार और शुक्रवार की पूजा, जगराता

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस भजन को भारतीय संगीत जगत के दो सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी आवाज दी है। सोनू निगम की सुरीली और भावुक आवाज भजन में एक अद्भुत गहराई लाती है, जबकि अल्का याग्निक की मधुर और पवित्र आवाज मातृत्व की करुणा को जीवंत कर देती है। इन दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने इस भजन को केवल एक गीत न रखकर एक ध्यानमयी प्रार्थना बना दिया है। इस भजन का संगीत पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोलक, मंजीरा और बांसुरी के सुंदर संयोजन से तैयार किया गया है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) आध्यात्मिक संदर्भ (Spiritual Context)
भवन (Bhawan) मंदिर या निवास स्थान माता वैष्णो देवी की पवित्र प्राकृतिक गुफा।
तीन देवियां (Teen Deviyaan) महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती सृष्टि की तीन मूलभूत शक्तियां (तम, रज, सत)।
गंगा की धारा (Ganga ki Dhara) पवित्र नदी की धारा कृपा और ज्ञान का अनवरत प्रवाह।
डेरा (Dera) निवास या बसेरा त्रिकुट पर्वत पर माता का स्थायी वास।
चोला (Chola) वस्त्र या पोशाक माता का लाल रंग का दिव्य वस्त्र जो तेज का प्रतीक है।
मनवांछित (Manwanchhit) मन की इच्छा के अनुसार भक्त की सात्विक कामनाओं की पूर्ति।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सांस्कृतिक रूप से, यह भजन भारत की समृद्ध देवी-उपासना की परंपरा को दर्शाता है। देवीभागवत पुराण के अनुसार, जब महिषासुर और अन्य राक्षसों के अत्याचार बढ़ गए थे, तब तीनों देवियों ने अपनी सामूहिक ऊर्जा से एक परम शक्ति को जन्म दिया, जिसे माता वैष्णो देवी या त्रिकुटा कहा गया। यह भजन इसी पौराणिक सत्य को बहुत ही सरल शब्दों में जन-जन तक पहुंचाता है।

आध्यात्मिक रूप से, माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए की जाने वाली कठिन चढ़ाई मनुष्य के जीवन संघर्ष का प्रतीक है। जिस प्रकार भक्त अनेक कठिनाइयों को पार करके भवन तक पहुंचता है और वहां उसे असीम शांति मिलती है, उसी प्रकार मनुष्य भी अपने जीवन के संघर्षों और साधना के माध्यम से अंततः मोक्ष और आत्मज्ञान को प्राप्त करता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • एकता का संदेश: जिस प्रकार तीन अलग-अलग शक्तियां एक ही भवन में मिलकर कार्य करती हैं, उसी प्रकार हमें भी समाज में एकता और सद्भाव के साथ रहना चाहिए।
  • कठिन परिश्रम और धैर्य: ऊंचे पर्वत पर माता का निवास हमें सिखाता है कि जीवन में किसी भी महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए धैर्य और कठिन परिश्रम आवश्यक है।
  • अहंकार का त्याग: माता के चरणों में शीश झुकाना इस बात का प्रतीक है कि हमें अपने ज्ञान, धन और शक्ति के अहंकार को त्यागकर विनम्र बनना चाहिए।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: माता का शेर पर सवार होना और दुष्टों का संहार करना हमें अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को समाप्त करने की प्रेरणा देता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि माता की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:

  • शारदीय और चैत्र नवरात्रि: इन नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान यह भजन घरों और मंदिरों में विशेष रूप से बजाया जाता है।
  • मंगलवार और शुक्रवार: ये दोनों दिन देवी मां की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
  • वैष्णो देवी यात्रा के दौरान: जब भक्त कटरा से भवन की ओर चढ़ाई करते हैं, तब यह भजन उनके भीतर नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है।
  • प्रातः काल की प्रार्थना: सुबह के समय इस भजन को सुनने से मन शांत होता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु (Key Point) संक्षिप्त विवरण (Quick Description)
भजन का शीर्षक एक भवन पे तीन देवियां
गायक जोड़ी सोनू निगम और अल्का याग्निक
मुख्य आराधना स्थल श्री माता वैष्णो देवी श्राइन, कटरा (जम्मू-कश्मीर)
वर्णित देवियां महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती
काव्य रस भक्ति रस और शांत रस
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, तबला, बांसुरी, मंजीरा
आध्यात्मिक संदेश त्रिशक्ति की शरण में जाने से परम कल्याण की प्राप्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न १: "एक भवन पे तीन देवियां" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
उत्तर: इस प्रसिद्ध भजन को भारत के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम और गायिका अल्का याग्निक ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

प्रश्न २: इस भजन में "तीन देवियां" से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इस भजन में "तीन देवियां" से तात्पर्य माता महाकाली, माता महालक्ष्मी और माता महासरस्वती से है, जो वैष्णो देवी की गुफा में तीन पिंडियों के रूप में एक साथ विराजमान हैं।

प्रश्न ३: माता वैष्णो देवी का मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर: माता वैष्णो देवी का विश्वप्रसिद्ध मंदिर भारत के जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के जम्मू संभाग में कटरा के पास त्रिकुट पर्वत पर स्थित है।

प्रश्न ४: "बहती गंगा की धारा" का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ माता के भवन से बहने वाली कृपा, करुणा और भक्ति की अविरल धारा से है, जो भक्तों के जीवन को पवित्र कर देती है। साथ ही, यह मंदिर मार्ग में स्थित पवित्र बाणगंगा नदी की ओर भी संकेत करता है।

प्रश्न ५: यह भजन किस अवसर पर सुनना सबसे उत्तम माना जाता है?
उत्तर: यह भजन नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार, जगराता, माता की चौकी और दैनिक सुबह की पूजा के समय सुनना अत्यंत फलदायी और शांतिदायक माना जाता है।

प्रश्न ६: माता वैष्णो देवी के हाथ में त्रिशूल किसका प्रतीक है?
उत्तर: त्रिशूल मनुष्य के तीन प्रकार के कष्टों—दैहिक, दैविक और भौतिक तापों के विनाश का प्रतीक है।

प्रश्न ७: क्या इस भजन के बोल हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध हैं?
उत्तर: हाँ, यह भजन मुख्य रूप से हिंदी में है, लेकिन इसकी लोकप्रियता के कारण इसके बोल अंग्रेजी लिपि (Transliteration) में भी भक्तों के लिए उपलब्ध हैं।

प्रश्न ८: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य अपनी समस्त चिंताओं और अहंकार को छोड़कर आदिशक्ति की शरण में आता है, तो उसे जीवन के सभी सुख और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस भजन के बोल और इसकी व्याख्या को सनातन धर्म के ग्रंथों, विशेषकर देवीभागवत पुराण और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा दी गई पारंपरिक कथाओं के आलोक में तैयार किया गया है। सोनू निगम और अल्का याग्निक द्वारा गाए गए इस भजन की शब्द-संरचना और इसके पीछे के दार्शनिक अर्थों को बहुत ही सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को न केवल गीत के बोल मिलें, बल्कि वे इसके गहरे आध्यात्मिक महत्व को भी समझ सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: त्रिदेवी (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) के प्राकट्य और उनकी महिमा का प्रसंग।
  • श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB): पवित्र गुफा और तीन पिंडियों के इतिहास एवं महत्व से संबंधित आधिकारिक विवरण।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: भारतीय भक्ति संगीत की मौखिक और लिखित परंपराएं।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

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