Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

Devigeet

पढ़ें लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा | #Video | #Kiran Singh Devigeet Bhakti Song | Bhojpuri Hit Song - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार

लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा: किरण सिंह का पावन देवी गीत परिचय

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह पावन भजन "लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा | #Video | #Kiran Singh Devigeet Bhakti Song | Bhojpuri Hit Song - BhaktiLok" जगत जननी जगदम्बा की असीम कृपा, महिमा और उनके तेजोमय स्वरूप का अत्यंत मनमोहक गान करता है। सनातन संस्कृति और लोक परंपरा में मातृशक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। भोजपुरी लोक संगीत की सुमधुर और सशक्त गायिका किरण सिंह के स्वर में यह देवी गीत माँ के ममतामयी, करुणावान और दुष्टनाशिनी रूप का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करता है। जब चैत्र या शारदीय नवरात्रि के पावन अवसरों पर संपूर्ण वातावरण माँ के जयकारों से गूंज उठता है, तब ऐसे पारंपरिक एवं आधुनिक भावों से परिपूर्ण लोकगीत जन-जन के मन में भक्ति और ऊर्जा का संचार करते हैं। इस गीत में माता के दरबार की भव्यता, लाल ध्वजा की पताका और आकाश में लहराते हुए उनके प्रतीकों का जो वर्णन मिलता है, वह साधक के भीतर श्रद्धा, पराक्रम और आत्मबल को जागृत करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा,
झूमे झुमके मइया तोहरे भवनवा!
निअराइल बा नवरात्रि के दिनवा,
गावे किरण सिंह तोहरे चरननवा!

अंतरा 1:

ऊँचे परबतिया पर मइया तोार बा डेरा,
भक्तन के भीड़ लागल, लागे ना अँधेरा।
नारियल चुनरी लेके आवे सब जनवा,
लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा!
झूमे झुमके मइया तोहरे भवनवा!

अंतरा 2:

सिंहवा सवारी कई के आवेली भवानी,
तीन लोक जाने मइया तोहरी बानी।
दुखवा हरेली मइया राखली लाज रखवालनवा,
लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा!
झूमे झुमके मइया तोहरे भवनवा!

अंतरा 3:

बालक अनाथ जानि शरण में लीहूँ,
भक्ति के खजाना मइया झोली में भरिहूँ।
तोहरे भरोसा बानी सुन लीहूँ बचनवा,
लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा!
झूमे झुमके मइया तोहरे भवनवा!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत का मूल स्वर भगवती के प्रति अनन्य समर्पण, विश्वास और कृतज्ञता का है। गीत के मुखड़े में गायिका किरण सिंह वर्णन करती हैं कि माता के भव्य दरबार में लाल रंग की पवित्र ध्वजा आकाश की ऊंचाइयों को छूते हुए हवा में लहरा रही है। लाल रंग सनातन परंपरा में शौर्य, ऊर्जा, प्रेम और देवी के शक्ति रूप का प्रतीक माना जाता है। जब भक्त माँ के भवन में पहुंचते हैं, तो वहाँ का वातावरण उल्लास और उत्सव से भर जाता है।

पहले अंतरे में माता के निवास स्थान ऊंचे पर्वतों और त्रिकूट पर्वतों की याद दिलाई गई है, जहां माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। नारियल और चुनरी अर्पित करना भारतीय संस्कृति में माता के प्रति सम्मान और आंतरिक समर्पण का प्रतीक है। दूसरे अंतरे में सिंह पर सवार माँ भवानी के त्रैलोक्य व्यापिनी स्वरूप का स्मरण किया गया है। माता अपने शरणागतों के सभी संकटों को हर लेती हैं और उनकी मान-मर्यादा की रक्षा करती हैं। अंतिम अंतरे में साधक एक बच्चे की तरह माँ के सम्मुख अपनी दीनता और संपूर्ण निर्भरता प्रकट करता है, यह कहते हुए कि उसके जीवन की नैया अब पूरी तरह माता के हाथों में है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह देवी गीत केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोक चेतना और लोक संस्कृति के माध्यम से अध्यात्म को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त साधन है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • लोक शैली और आधुनिक संयोजन: पारंपरिक भोजपुरी लोक धुनों को आधुनिक संगीत उपकरणों के साथ ढालकर इसे युवा पीढ़ी के लिए भी आकर्षक बनाया गया है।
  • मातृ शक्ति की वंदना: माता दुर्गा के शक्ति स्वरूप और उनके आशीर्वाद पर अटूट विश्वास को केंद्र में रखा गया है।
  • भक्ति रस प्रधान: इस गीत को सुनते ही श्रोता के मन में माता के प्रति प्रेम और भक्ति का भाव स्वतः जागृत हो जाता है।
  • त्योहारों की जीवंतता: नवरात्रि और विशेष देवी पूजन के अवसरों पर यह गीत वातावरण को पूरी तरह ऊर्जावान बना देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों के श्रवण और गायन का विशेष महत्व होता है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों और विधियों के अनुसार अपनाया जा सकता है:

  • नवरात्रि के नौ दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान प्रातःकाल या संध्याकालीन आरती के समय इसे बजाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • माता की चौकी या जागरण: किसी भी मांगलिक उत्सव, गृह प्रवेश या माता की चौकी के दौरान इस लोकगीत को गाकर माहौल को भक्तिमय बनाया जा सकता है।
  • दैनिक पूजा के समय: घर में दीपक प्रज्वलित करते समय यदि मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा चाहिए, तो इस प्रकार के भजनों का श्रवण अत्यंत लाभकारी होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदि शक्ति जगत जननी माता दुर्गा (भवानी) हैं, जिन्हें वेदों और पुराणों में संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी कहा गया है। दुर्गा सप्तशती और देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की कृपा के बिना सृष्टि का संचालन और जीवों का उद्धार संभव नहीं है। गायिका किरण सिंह ने अपनी सुरीली आवाज के माध्यम से इसी सनातन देवी परंपरा को जीवित रखा है और माता के विभिन्न रूपों जैसे महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की समन्वित शक्ति का गुणगान किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भोजपुरी लोक संगीत जगत में देवी गीतों की एक समृद्ध परंपरा रही है। शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी और किरण सिंह जैसी प्रसिद्ध गायिकाओं ने लोकगीतों के माध्यम से भोजपुरी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई है। "लाल लाल लहरे ध्वजा..." गीत इसी लोक परंपरा की एक बानगी है। इसकी रचना ग्रामीण अंचल के परिवेश, माता के प्रति सहज श्रद्धा और पर्वतीय मंदिरों की यात्रा की स्मृतियों को आधार बनाकर की गई है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी और लोक-संस्कृतनिष्ठ हिंदी के सुंदर समन्वय से रचित है। इसमें 'असमनवा' (आसमान), 'भवनवा' (भवन), 'दिनवा' (दिन), 'चरननवा' (चरणों में) जैसे ठेठ भोजपुरी शब्दों का प्रयोग इसकी मिठास को और बढ़ा देता है। रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग इस गीत को उच्च कोटि की लोक-कविता की श्रेणी में रखता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, यदि माँ पर अटूट विश्वास है, तो हर संकट का समाधान संभव है। माता की लाल ध्वजा इस बात का प्रतीक है कि विजय, पराक्रम और तेज हमेशा सच्चाई और धर्म के पक्ष में रहते हैं। साधक को अहंकार छोड़कर एक बच्चे की भांति शरणागत होना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक संदर्भ
असमनवा आकाश / गगन ऊंचे स्थानों पर लहराती देवी की ध्वजा का प्रतीक
भवनवा माता का दरबार / मंदिर पवित्र धाम जहां देवी का वास है
निअराइल निकट आना / पास आना पर्व या त्योहार के समीप आने का भाव
सिंहावा सवारी सिंह पर विराजमान होना माता दुर्गा का वाहन और उनका शौर्य रूप

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा..." - इस पंक्ति का अर्थ है कि माता के दरबार में जो लाल रंग की पताका फहरा रही है, वह इतनी ऊंची है कि मानो आसमान को छू रही हो। यह लाल रंग देवी की जीवंत ऊर्जा और भक्तों के उत्साह का द्योतक है।

"ऊँचे परबतिया पर मइया तोार बा डेरा..." - अधिकांश शक्तिपीठ ऊंचे पहाड़ों और पर्वतों पर स्थित हैं, जो यह दर्शाते हैं कि उच्च आध्यात्मिक स्थिति प्राप्त करने के लिए साधना के शिखर पर चढ़ना पड़ता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन देवी मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम लाल लाल लहरे ध्वजा ऊँचे असमनवा
गायिका किरण सिंह (Kiran Singh)
संगीत शैली भोजपुरी देवी गीत / लोक भक्ति संगीत
मुख्य आराध्य आदिशक्ति माता दुर्गा / भवानी
भाषा भोजपुरी एवं हिंदी
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, उल्लास और उत्सव
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, देवी जागरण, माता की चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन जगत जननी आदिशक्ति माता दुर्गा (भवानी) को समर्पित है।

इस प्रसिद्ध देवी गीत की गायिका लोकप्रिय भोजपुरी लोक और भक्ति गायिका किरण सिंह हैं।

इस गीत को शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी या किसी भी देवी पूजन के अवसर पर सुनना अत्यंत आनंददायक और शुभ है।

लाल ध्वजा ऊर्जा, शौर्य, विजय और माता के शक्ति स्वरूप का प्रतीक है जो भक्तों के उत्साह को बढ़ाती है।

हाँ, यह एक अत्यंत लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत (Devigeet) है जो लोक शैली में गाया गया है।

नवरात्रि में कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, नियमित आरती और माता को लाल चुनरी व श्रृंगार अर्पित करने का विधान है।

भक्ति संगीत और देवी गीत सुनने से मन को असीम शांति मिलती है, तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ऐसे पावन पारंपरिक भजन और गीत Bhaktilok.in पर lyrics और अर्थ सहित पढ़े और सुने जा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख को प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं, लोक संस्कृति और संगीत के संदर्भों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति भाव और सांस्कृतिक जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत और संगीत संग्रह
  • सनातन धर्म की शक्ति उपासना परंपरा और लोक संस्कृति

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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