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अंतरा सिंह का छठ गीत

पढ़ें हे छठी मईया | अंतरा सिंह का छठ गीत का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

छठ महापर्व लोक आस्था, प्रकृति पूजा और अटूट विश्वास का सबसे बड़ा उत्सव है। इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक और आधुनिक गीत व्रतियों के मन में अपार ऊर्जा और भक्ति का संचार करते हैं। भोजपुरी संगीत जगत की सुप्रसिद्ध गायिका अंतरा सिंह प्रियंका की सुरीली आवाज में सजा "हे छठी मईया" गीत इसी अटूट श्रद्धा और समर्पण को अभिव्यक्त करता है। यह गीत न केवल एक संगीतमय प्रस्तुति है, बल्कि यह छठ व्रत के कठिन नियमों, पवित्रता और छठी मैया के प्रति संपूर्ण आत्मसमर्पण को दर्शाता है। भोजपुरी लोक संस्कृति में छठ गीतों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके बिना यह महापर्व अधूरा माना जाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी परंपराओं का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

(मुखड़ा)
हे छठी मईया, हे छठी मईया
तोहरे भरोसे हम त अरघिया देबइया
हे छठी मईया, हे छठी मईया
तोहरे भरोसे हम त अरघिया देबइया...

(अंतरा 1)
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए
बहंगी घाटे पहुँचाए द, छठी मईया दरशन देई
सूप में सजल बाटे ठेकुआ, फलवा के भार
तोहरे चरन में मईया, अर्पण करी संसार...

(अंतरा 2)
कठिन बरतिया तोहार, मईया हम त करब
दुखवा मिटाई द मईया, तोहरे शरण में रहब
भोर के अरघिया देबइया, साझ के अरघिया देबइया
हे छठी मईया, हे छठी मईया...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

अंतरा सिंह प्रियंका द्वारा गाया गया यह गीत "हे छठी मईया" अत्यंत सरल शब्दों में गहरे भक्ति भाव को समेटे हुए है। इस गीत के प्रत्येक भाग का विस्तृत भावार्थ निम्नलिखित है:

मुखड़े का भावार्थ: पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास

गीत की शुरुआत "हे छठी मईया, तोहरे भरोसे हम त अरघिया देबइया" से होती है। यहाँ व्रती (व्रत करने वाला) माता के प्रति अपनी पूर्ण शरणागति व्यक्त कर रहा है। छठ का व्रत अत्यंत कठिन होता है, जिसमें 36 घंटों का निर्जला उपवास रखना पड़ता है। व्रती कहता है कि हे माता! मेरे पास स्वयं की कोई शक्ति नहीं है, मैं केवल आपके भरोसे, आपकी कृपा और आपकी दी हुई शक्ति के सहारे ही इस कठिन व्रत को पूर्ण करने और आपको अर्घ्य देने का साहस कर पा रहा हूँ। यह पंक्ति ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास और अहंकार के विसर्जन को दर्शाती है।

प्रथम अंतरे का भावार्थ: पारंपरिक पूजन सामग्री और घाट की यात्रा

प्रथम अंतरे में पारंपरिक छठ गीतों की अमर पंक्तियों "कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए" का सुंदर समावेश किया गया है। यहाँ कच्चे बांस से बनी बहंगी (जिसमें पूजा का प्रसाद और फल रखे जाते हैं) का वर्णन है। बहंगी फलों के भार से लचक रही है। व्रती प्रार्थना करता है कि हे छठी मैया, इस बहंगी को सुरक्षित रूप से नदी के घाट तक पहुँचाने में हमारी सहायता करें और हमें अपने दिव्य दर्शन दें। सूप में सजा हुआ पारंपरिक प्रसाद "ठेकुआ" और विभिन्न ऋतु फल माता के चरणों में अर्पित किए जा रहे हैं। यह संपूर्ण सृष्टि और प्रकृति के उपहारों को उसी परम शक्ति को वापस सौंपने का प्रतीक है।

द्वितीय अंतरे का भावार्थ: कठिन साधना और कष्ट निवारण की प्रार्थना

दूसरे अंतरे में व्रत की कठिनता और उससे मिलने वाली आध्यात्मिक शांति का वर्णन है। "कठिन बरतिया तोहार, मईया हम त करब" के माध्यम से व्रती अपने दृढ़ संकल्प को प्रकट करता है। वह कहता है कि चाहे यह व्रत कितना भी कठिन क्यों न हो, मैं इसे पूरी निष्ठा से करूँगा। इसके बदले में वह माता से अपने दुखों को दूर करने और सदैव उनकी शरण में बने रहने की याचना करता है। अंत में, संध्याकालीन (साझ के) और प्रातःकालीन (भोर के) दोनों अर्घ्य देने का संकल्प दोहराया जाता है, जो सृष्टि के चक्र और सूर्य देव की निरंतरता की वंदना है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'भक्ति' (Devotion) और 'समर्पण' (Surrender) है। यह गीत हमें सिखाता है कि जब मनुष्य स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देता है, तो कठिन से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। छठ पूजा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच के गहरे संबंध का उत्सव है। इस गीत के माध्यम से निम्नलिखित संदेश मिलते हैं:

  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: बांस की बहंगी, सूप, ठेकुआ और फल इस बात के प्रतीक हैं कि हम प्रकृति से जो कुछ भी प्राप्त करते हैं, उसे अत्यंत आदर के साथ ईश्वर को समर्पित करते हैं।
  • संकल्प की शक्ति: कठिन परिस्थितियों में भी अपने धर्म और व्रत के प्रति अडिग रहना ही सच्ची साधना है।
  • सामूहिकता का भाव: घाट की ओर बढ़ती बहंगी और सामूहिक रूप से गाए जाने वाले गीत समाज में एकता और समरसता का संदेश देते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) हे छठी मईया (He Chhathi Maiya)
गायिका (Singer) अंतरा सिंह प्रियंका (Antra Singh Priyanka)
श्रेणी (Category) भोजपुरी देवी गीत, छठ गीत (Chhath Geet)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक लोक धुन (Traditional Folk)
मुख्य विषय (Core Theme) सूर्योपासना, आस्था, लोक पर्व छठ

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत जगत में अंतरा सिंह प्रियंका एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज से इस पारंपरिक गीत को एक नया जीवन दिया है। उनके गाने की शैली में मिट्टी की सोंधी महक और लोक संस्कृति का जीवंत रूप देखने को मिलता है। इस गीत में प्रयुक्त संगीत पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक, मंजीरा और बांसुरी के सुंदर मिश्रण से तैयार किया गया है, जो सुनने वाले को सीधे गंगा के पावन घाटों की याद दिलाता है। भोजपुरी श्रोताओं के बीच खेसारी लाल यादव के भजन और अंतरा सिंह के लोकगीत अत्यंत लोकप्रिय हैं, जो त्योहारों के रंग को और भी गाढ़ा कर देते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
अरघिया (Arghya) अर्घ्य देना / जल अर्पित करना सूर्य देव को दूध और जल अर्पित करने की पवित्र क्रिया।
बहंगिया (Bahangiya) बांस का बना हुआ कांवड़ जिसमें छठ पूजा का प्रसाद रखकर घाट तक ले जाया जाता है।
लचकत (Lachkat) भार के कारण झुकना प्रसाद और फलों की प्रचुरता को दर्शाता है।
बरतिया (Baratiya) व्रत करने वाला / साधक छठ का अत्यंत कठिन उपवास रखने वाले श्रद्धालु।
ठेकुआ (Thekua) गेहूं और गुड़ से बना महाप्रसाद छठ पूजा का सबसे मुख्य और पवित्र प्रसाद।
सूप (Soop) बांस का बना सूपड़ा जिसमें फल और दीप रखकर अर्घ्य दिया जाता है।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का त्योहार वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जहाँ डूबते हुए सूर्य (अस्ताचलगामी सूर्य) को भी अर्घ्य दिया जाता है और फिर उगते हुए सूर्य (उदीयमान सूर्य) की पूजा की जाती है। यह जीवन के शाश्वत नियम को दर्शाता है कि हर अंत के बाद एक नई शुरुआत निश्चित है।

इस गीत का सांस्कृतिक महत्व यह है कि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही लोक परंपराओं को सहेज कर रखता है। "कांच ही बांस के बहंगिया" जैसी पंक्तियां सदियों से गाई जा रही हैं, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ती हैं। जब प्रवासी भारतीय या देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोग इस गीत को सुनते हैं, तो वे अपनी मातृभूमि और अपनी संस्कृति के प्रति एक गहरा खिंचाव महसूस करते हैं। यह गीत सामूहिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

"हे छठी मईया" गीत केवल एक धार्मिक रचना नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है:

  1. धैर्य और अनुशासन: छठ व्रत की कठिन साधना हमें सिखाती है कि जीवन में किसी भी महान लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़े अनुशासन और धैर्य की आवश्यकता होती है।
  2. प्रकृति का सम्मान: सूर्य, जल, बांस और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग हमें प्रकृति के करीब लाता है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
  3. समानता का संदेश: छठ घाट पर अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता। सभी एक साथ मिट्टी के घाट पर खड़े होकर एक ही सूर्य देव की आराधना करते हैं।
  4. कृतज्ञता (Gratitude): जो कुछ भी हमें जीवन में मिला है, उसके लिए ईश्वर और प्रकृति का धन्यवाद करना ही सच्ची पूजा है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि इस गीत को कभी भी सुना जा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक आनंद और महत्व छठ महापर्व के चार दिनों के दौरान होता है:

  • नहाय-खाय (पहला दिन): इस दिन से ही घरों में छठ के पारंपरिक गीत गूंजने लगते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
  • खरना (दूसरा दिन): शाम के समय जब प्रसाद बनता है, तब इन गीतों को गाकर मन को एकाग्र किया जाता है।
  • संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): घाट पर जाते समय बहंगी उठाते हुए इस गीत को गाना अत्यंत शुभ और उत्साहवर्धक माना जाता है।
  • उषा अर्घ्य (चौथा दिन): सुबह के समय सूर्य देव की प्रतीक्षा करते हुए इन गीतों का गायन व्रतियों को ठंड और थकान से दूर रखता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक हे छठी मईया
मुख्य कलाकार अंतरा सिंह प्रियंका
संबंधित त्योहार छठ महापर्व (सूर्योपासना)
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, बांसुरी, मंजीरा
काव्य रस भक्ति रस, शांत रस
आध्यात्मिक संदेश पूर्ण समर्पण और प्रकृति वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस सुप्रसिद्ध छठ गीत की मुख्य गायिका अंतरा सिंह प्रियंका हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से इस पारंपरिक गीत को नया आयाम दिया है।

बहंगी बांस से बना एक ढांचा होता है जिसमें पूजा की पवित्र सामग्री, फल और ठेकुआ प्रसाद रखकर पुरुष अपने कंधों पर उठाकर घाट तक ले जाते हैं। यह सादगी और शुद्धता का प्रतीक है।

ठेकुआ गेहूं के आटे, गुड़/चीनी और घी से बना एक पारंपरिक और अत्यंत पवित्र महाप्रसाद है, जिसे छठ पूजा के दौरान विशेष रूप से मिट्टी के चूल्हे पर तैयार किया जाता है।

डूबते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जो अस्त हुआ है, उसका उदय होना निश्चित है। यह कृतज्ञता और आशावाद का संदेश देता है।

हाँ, इस गीत की पंक्तियाँ जैसे "कांच ही बांस के बहंगिया" पारंपरिक भोजपुरी लोकगीतों से ली गई हैं, जिन्हें आधुनिक संगीत के साथ नए रूप में प्रस्तुत किया गया है।

छठ पूजा में पूर्ण शारीरिक और मानसिक पवित्रता, नमक रहित भोजन (खरना के दिन तक), भूमि पर शयन और 36 घंटे का निर्जला उपवास जैसे कठिन नियमों का पालन किया जाता है।

अंतरा सिंह प्रियंका ने कई लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत, सावन के गीत और होली के पारंपरिक गीत गाए हैं जो दर्शकों के बीच बेहद पसंद किए जाते हैं।

ये गीत मन को असीम शांति, सकारात्मकता और भक्ति भाव से भर देते हैं। इनसे घर-परिवार में पवित्र और सुखद वातावरण का निर्माण होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख लोक आस्था के महापर्व छठ और उससे जुड़े पारंपरिक संगीत के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। गीत के बोल और उसका भावार्थ पारंपरिक मान्यताओं और भोजपुरी लोक संस्कृति के विशेषज्ञों के परामर्श पर आधारित है। यह सामग्री पूरी तरह से मौलिक, ज्ञानवर्धक और पाठकों की धार्मिक जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए बनाई गई है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री (Editorial Team, Bhaktilok)

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं पारंपरिक छठ गीत संग्रह।
  • बिहार और उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय लोक परंपराएं और मौखिक इतिहास।
  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं भविष्य पुराण में वर्णित सूर्योपासना के नियम।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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