Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ - Samar Singh , Kavita Yadav - New

समर सिंह और कविता यादव का प्रसिद्ध देवी गीत 'सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ' के बोल, अर्थ और महत्व की संदर्भ सहित संपूर्ण जानकारी।

भोजपुरी लोक संस्कृति और सनातन धर्म के पावन संगम से उपजा देवी गीत "सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ" केवल एक पारंपरिक लोकगीत नहीं है, बल्कि यह गृहस्थ जीवन और ईश्वरीय भक्ति के सुंदर समन्वय का जीवंत प्रतीक है। सुप्रसिद्ध लोक गायक समर सिंह और सुरीली गायिका कविता यादव की जुगलबंदी में गाया गया यह गीत शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर संपूर्ण उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के घरों तथा पूजा पंडालों में गूंजता है। इस गीत में एक धर्मपरायण पत्नी अपने पति से बाजार से लौटते समय जगत जननी माँ दुर्गा के चरणों में अर्पित करने के लिए एक सुंदर लाल चुनरी लाने का आग्रह करती है। यह आग्रह केवल एक भौतिक वस्तु की मांग नहीं है, बल्कि यह दांपत्य जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और देवी माँ के प्रति अगाध श्रद्धा को प्रदर्शित करता है। इस लेख के माध्यम से हम इस लोकप्रिय देवी गीत के गहरे आध्यात्मिक अर्थ, इसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, काव्यात्मक सौंदर्य और लोक परंपरा में इसके महत्व का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ

मुखड़ा:
सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ हो, चुनरियाँ लाल रंग के!
अरे सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ हो, चुनरियाँ लाल रंग के!
माई के चढ़ाईब हम तऽ ओढ़ईब गोड़वा दबाईब दिन-रैन हो...
सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ हो, चुनरियाँ लाल रंग के!

अंतरा १:
कलसा धराईब हम तऽ जोतियो जगाईब हो,
नौ दिन उपवास रहि के माई के मनाईब हो!
अरे कलसा धराईब हम तऽ जोतियो जगाईब हो,
नौ दिन उपवास रहि के माई के मनाईब हो!
अछत छिड़कईब हम तऽ फूलवा चढ़ाईब, गोड़वा दबाईब दिन-रैन हो...
सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ हो, चुनरियाँ लाल रंग के!

अंतरा २:
नारियल चुनरिया माई के मनवा भावेला हो,
जेकर जेकर श्रद्धा होला माई के चढ़ावेला हो!
अरे नारियल चुनरिया माई के मनवा भावेला हो,
जेकर जेकर श्रद्धा होला माई के चढ़ावेला हो!
हलुआ बनईब हम तऽ पूड़ी छनवाईब, भोगवा लगाईब दिन-रैन हो...
सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ हो, चुनरियाँ लाल रंग के!

अंतरा ३:
समर कवि जी माई के महिमा गावेले हो,
कवि जी कविता मिल के माई के रिझावेले हो!
अरे समर कवि जी माई के महिमा गावेले हो,
कवि जी कविता मिल के माई के रिझावेले हो!
आरती उतारब हम तऽ शंखवा बजईब, माई के मनाईब दिन-रैन हो...
सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ हो, चुनरियाँ लाल रंग के!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस पावन देवी गीत का भावार्थ अत्यंत सरल, मर्मस्पर्शी और भक्ति रस से सराबोर है। गीत के माध्यम से एक सनातनी नारी अपने पति से कहती है कि हे स्वामी! जब आप बाजार जाएं, तो वहां से लौटते समय माँ दुर्गा के लिए एक सुंदर लाल रंग की चुनरी अवश्य लेकर आइएगा। लाल रंग शक्ति, सौभाग्य और पवित्रता का प्रतीक है। वह कहती है कि मैं इस पावन चुनरी को जगत जननी माँ जगदम्बा के चरणों में अर्पित करूंगी, उन्हें ओढ़ाऊंगी और दिन-रात उनकी सेवा-अर्चना करूंगी।

गीत के पहले अंतरे में नवरात्रि की शास्त्रीय पूजा विधि का लोक रूप में वर्णन है। भक्त नारी कहती है कि वह अपने घर के मंदिर में कलश की स्थापना करेगी, अखंड ज्योति प्रज्वलित करेगी और पूरे नौ दिनों तक निराहार या फलाहार रहकर उपवास रखेगी। वह अक्षत (पवित्र चावल) और ताजे पुष्पों से माँ की पूजा करेगी। यह दर्शाता है कि लोक गीतों में भी वैदिक और पौराणिक पूजा पद्धतियों को कितनी सहजता से संजोया गया है।

दूसरे अंतरे में माँ दुर्गा को प्रिय लगने वाले नैवेद्य और पूजन सामग्री का उल्लेख है। नारियल और लाल चुनरी माँ को अत्यंत प्रिय हैं। जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से इन्हें अर्पित करता है, माँ उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसके साथ ही, वह अपने हाथों से शुद्ध हलवा और पूड़ी का भोग तैयार करने की बात कहती है, जो कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन के समय माँ को अर्पित किया जाने वाला पारंपरिक महाप्रसाद है।

अंतिम अंतरे में गीतकार और गायक माँ की महिमा का गान करते हुए कहते हैं कि वे सभी मिलकर माँ को रिझा रहे हैं। वे माँ की कपूर और घी के दीये से आरती उतारेंगे, शंखनाद करेंगे और दिन-रात माँ की आराधना में लीन रहेंगे। संपूर्ण गीत गृहस्थ जीवन में धर्म के आचरण और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना "दांपत्य भक्ति" (Conjugal Devotion) और "उत्सव भाव" (Festive Joy) है। हिंदू धर्म में पति-पत्नी को एक-दूसरे का सहधर्मी माना गया है, अर्थात धर्म के मार्ग पर दोनों को साथ चलना चाहिए। यहाँ पत्नी अपने पति को सांसारिक कार्यों के साथ-साथ आध्यात्मिक कर्तव्यों की भी याद दिलाती है।

  • समर्पण और श्रद्धा: गीत का प्रत्येक शब्द माँ दुर्गा के प्रति निश्छल प्रेम और श्रद्धा को दर्शाता है।
  • पारिवारिक सामंजस्य: पति द्वारा पूजन सामग्री लाना और पत्नी द्वारा श्रद्धापूर्वक व्रत-पूजन करना, एक सुखी और धार्मिक परिवार की नींव को दर्शाता है।
  • लोक आस्था: यह गीत यह संदेश देता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए कठिन तपस्या की नहीं, बल्कि सरल और शुद्ध हृदय से की गई सेवा की आवश्यकता होती है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु (Parameter) महत्वपूर्ण जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ (Saiyan Bajari Se Lele Aiha Chunariyan)
मुख्य गायक (Singers) समर सिंह (Samar Singh) एवं कविता यादव (Kavita Yadav)
गीत का प्रकार (Genre) भोजपुरी देवी गीत / पारंपरिक भजन (Bhojpuri Devi Geet)
रिलीज का वर्ष (Release Year) 2021
मुख्य विषय (Theme) नवरात्रि पूजा, माँ दुर्गा को चुनरी अर्पण, दांपत्य भक्ति
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri - पूर्वांचली लोक बोली)
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक ढोलक-मंजीरा मिश्रित आधुनिक लोक संगीत

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस गीत को अपनी सुरीली और ऊर्जावान आवाज से सजाने वाले कलाकार भोजपुरी लोक संगीत जगत के जाने-माने नाम हैं:

समर सिंह: समर सिंह अपनी पारंपरिक गायकी और 'देशी' अंदाज के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने भोजपुरी लोकगीतों, विशेषकर चैता, कजरी और देवी गीतों को एक नया आयाम दिया है। उनकी आवाज में मिट्टी की सोंधी महक और लोक संस्कृति का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।

कविता यादव: कविता यादव भोजपुरी की एक अत्यंत प्रतिष्ठित लोक गायिका हैं, जो विशेष रूप से 'धोबिया' और 'पारंपरिक लोक विधाओं' में पारंगत हैं। समर सिंह के साथ उनकी जुगलबंदी हमेशा सुपरहिट रही है। इस गीत में उन्होंने एक आदर्श सनातनी पत्नी के भावों को अपनी आवाज के माध्यम से जीवंत कर दिया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द (Bhojpuri Word) सरल हिंदी अर्थ (Hindi Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
सइयां (Saiyan) पति / स्वामी / जीवनसाथी गृहस्थ जीवन में आदरसूचक संबोधन
बजारी (Bajari) बाजार से / हाट से सामग्री क्रय करने का स्थान
लेले अइहा (Lele Aiha) लेकर आना / लेते आना प्रेमपूर्वक किया गया आग्रह
चुनरियाँ (Chunariyan) चुनरी / ओढ़नी / लाल वस्त्र सौभाग्य और देवी पूजा का मुख्य प्रतीक
कलसा (Kalsa) मंगल कलश नवरात्रि स्थापना का पवित्र घट
अछत (Achat) अक्षत / बिना टूटा हुआ चावल पूजा में प्रयुक्त होने वाला मांगलिक अन्न
भोगवा (Bhogwa) नैवेद्य / प्रसाद देवी माँ को अर्पित किया जाने वाला भोजन

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन धर्म में देवी पूजा के अंतर्गत "चुनरी" अर्पण करने का अत्यंत गहरा आध्यात्मिक महत्व है। देवीभागवत पुराण के अनुसार, लाल रंग आदि शक्ति महालक्ष्मी और माँ दुर्गा का अत्यंत प्रिय रंग है। यह रंग तेज, ऊर्जा, शौर्य और सौभाग्य का प्रतीक है। जब एक विवाहित महिला माँ दुर्गा को लाल चुनरी अर्पित करती है, तो वह अपने सुहाग की रक्षा, परिवार की सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्रार्थना करती है।

सांस्कृतिक दृष्टिकोण से, यह गीत भोजपुरी भाषी समाज की समृद्ध लोक परंपरा को प्रदर्शित करता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में नवरात्रि का त्योहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक उत्सव भी है। इस उत्सव में लोक संगीत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह गीत आधुनिकता के इस दौर में भी हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, अपनी भाषा और अपनी धार्मिक परंपराओं से जोड़े रखने का एक सशक्त माध्यम है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यद्यपि यह एक भक्ति गीत है, परंतु यह हमें व्यावहारिक जीवन के कई महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है:

  1. सहकारिता की भावना (Cooperation): धार्मिक और सामाजिक कार्यों में पति-पत्नी दोनों की समान भागीदारी होनी चाहिए।
  2. शुद्धता और अनुशासन (Purity & Discipline): नौ दिनों के उपवास और नियमपूर्वक पूजा के माध्यम से जीवन में आत्म-नियंत्रण और अनुशासन की सीख मिलती है।
  3. कृतज्ञता का भाव (Gratitude): ईश्वर ने हमें जो कुछ भी दिया है, उसके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए अपनी सामर्थ्य अनुसार उत्तम वस्तुएं (जैसे हलवा-पूड़ी का भोग, नारियल) ईश्वर को अर्पित करनी चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर गाया और सुना जाता है:

  • शारदीय नवरात्रि (Ashwin Navratri): सितंबर-अक्टूबर के महीने में दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में।
  • चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri): मार्च-अप्रैल के महीने में नववर्ष के प्रारंभ पर घरों में कलश स्थापना के समय।
  • पारिवारिक मांगलिक कार्य: मुंडन, विवाह या गृह प्रवेश के समय होने वाले देवी पूजन (मातृका पूजन) के अवसर पर।
  • नित्य सुबह की प्रार्थना: कई घरों में नवरात्रि के दिनों में सुबह की आरती के समय इस गीत को बजाया जाता है जिससे वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक सइयां बजारी से लेले अइहा चुनरियाँ
मुख्य देवी माँ दुर्गा (आदिशक्ति)
गायक जोड़ी समर सिंह और कविता यादव
काव्य रस भक्ति रस, वात्सल्य रस, शांत रस
प्रयुक्त वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, शहनाई, सिंथेसाइज़र
मुख्य संदेश श्रद्धापूर्वक देवी आराधना और सुखी दांपत्य जीवन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत को सुप्रसिद्ध लोक गायक समर सिंह और सुरीली गायिका कविता यादव ने मिलकर गाया है। दोनों की जुगलबंदी को दर्शकों द्वारा बेहद पसंद किया गया है।

इस गीत में 'चुनरी' को माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा, समर्पण और सुहाग के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। लाल रंग की चुनरी माँ को अर्पित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

यह गीत मुख्य रूप से वर्ष में आने वाली दोनों मुख्य नवरात्रियों (चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि) के पावन अवसर पर घरों, मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष रूप से बजाया और गाया जाता है।

गीत में कलश स्थापना (घट स्थापना), अखंड ज्योति प्रज्वलित करना, नौ दिनों का उपवास रखना, अक्षत और पुष्प अर्पित करना, हलवा-पूड़ी का भोग लगाना और शंखनाद के साथ आरती उतारने जैसी पारंपरिक पूजा विधियों का सुंदर वर्णन है।

समर सिंह अपनी गायकी में पारंपरिक भोजपुरी लोक धुनों और ठेठ देसी अंदाज का प्रयोग करते हैं। उनकी आवाज में पूर्वांचल की माटी की सुगंध और लोक संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान झलकता है।

हाँ, इस गीत में वर्णित पूजा सामग्रियां जैसे लाल चुनरी, नारियल, अक्षत, और कलश स्थापना का उल्लेख हमारे पौराणिक ग्रंथों जैसे 'देवीभागवत पुराण' और 'दुर्गा सप्तशती' में मिलता है। यह गीत उन्हीं शास्त्रीय नियमों को सरल लोक भाषा में प्रस्तुत करता है।

इस गीत का संगीत पारंपरिक ढोलक, मंजीरा और शहनाई की धुनों के साथ आधुनिक सिंथेसाइज़र का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देता है और मन में भक्ति का संचार करता है।

यह गीत सिखाता है कि एक आदर्श परिवार में पति और पत्नी दोनों को मिलकर धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करना चाहिए। पति द्वारा पूजन सामग्री लाना और पत्नी द्वारा श्रद्धापूर्वक व्रत रखना दांपत्य जीवन में आपसी सहयोग और प्रेम को बढ़ाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" श्रेणी के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भोजपुरी देवी गीत के साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण किया है। गीत के बोलों को शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि भक्तगण इसका सही उच्चारण कर सकें। इस गीत की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सरलता और आम जनमानस के जीवन से इसका जुड़ाव है। यह गीत आधुनिक युग में भी हमारी लोक कलाओं और धार्मिक आस्थाओं को जीवित रखने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: देवी पूजा में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों (चुनरी, नारियल, कलश) के महत्व का शास्त्रीय संदर्भ।
  • भोजपुरी लोक साहित्य परंपरा: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पारंपरिक देवी गीतों का सांस्कृतिक अध्ययन।
  • भक्तिलोक संपादकीय मंडल: लोक गीतों के आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थों का संकलन एवं संपादन।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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