Krishna Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

जब तक सांसे चलेंग?? (Ishrat Jahan Hit Bhakti Gana)

इसरत जहाँ द्वारा गाए गए भावपूर्ण भजन 'जब तक सांसे चलेंगी' के बोल, अर्थ और भक्ति भाव को जानें। प्रभु के प्रति समर्पण का यह भजन मन को शांति प्रदान करेगा।

जब तक सांसे चलेंगी || Jab Tak Jeevan Rahega || Ishrat Jahan hit Bhakti Gana

भक्ति की अमूर्त और अगाध धारा में गोता लगाना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। "जब तक सांसे चलेंगी" भजन ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण शरणागति का एक अत्यंत भावपूर्ण और सजीव उदाहरण है। यह प्रसिद्ध भजन साधक के हृदय में प्रभु श्री कृष्ण के प्रति उस परम समर्पण को जागृत करता है, जहाँ भक्त अपने जीवन की प्रत्येक श्वास और धड़कन को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है। सनातन धर्म की सनातन भक्ति परंपरा में 'शरणागति' यानी अपने अहंकार का पूर्ण त्याग कर प्रभु के आश्रित हो जाना, मोक्ष और आत्मानंद का सबसे सरल तथा प्रभावी मार्ग माना गया है। इसरत जहाँ द्वारा स्वरबद्ध और अत्यंत भावुकता के साथ गाया गया यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि यह अंतर्मन के समस्त विकारों को धोकर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। यह उन साधकों और भक्तों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है जो संसार के कुरुक्षेत्र जैसी जटिल परिस्थितियों में कार्य करते हुए भी अपना मन निरंतर बांके बिहारी श्री कृष्ण के चरणों में लीन रखना चाहते हैं। इस लेख में हम इस पावन भजन के शब्द, अर्थ, आध्यात्मिक गहराई और जीवन में इसके महत्व का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे आप श्री कृष्ण भजन की इस दिव्य परंपरा को और अधिक गहराई से समझ सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):

जब तक सांसे चलेंगी, तब तक तेरा नाम लेंगे,
हे कृष्ण कन्हैया, हम तो बस तेरा ही नाम लेंगे।
तू ही मेरी आशा है, तू ही मेरी अभिलाषा है,
तेरे चरणों में ही प्रभु, मेरी हर एक परिभाषा है।
जब तक सांसे चलेंगी, तब तक तेरा नाम लेंगे...

अंतरा 1:

संसार की इन गलियों में, हम भटकते रहे थे पहले,
जब से तूने हाथ पकड़ा, हम संभल गए हैं अब तो भले।
भंवर में फंसी थी नैया मेरी, तूने ही पार लगाई,
तेरी कृपा से ऐ मोहन, हर मुश्किल आसान हुई भाई।
जब तक सांसे चलेंगी, तब तक तेरा नाम लेंगे...

अंतरा 2:

तेरी कृपा की छाया में, जीवन का हर पल बीते,
तेरे प्रेम के सागर में, हम तो बस प्रेम ही जीते।
न कोई चाहत दुनिया की, न कोई लालच मन में है,
बस बसी है मूरत तेरी, इस पावन तन-मन में है।
जब तक सांसे चलेंगी, तब तक तेरा नाम लेंगे...

अंतरा 3:

हे मुरली मनोहर बांके, तेरी बाँसुरी जब बजती है,
सुध-बुध खो बैठती दुनिया, हर आँख प्रफुल्लित होती है।
वृंदावन की कुंज गलिन में, रास रचे भगवान् सदा,
हम भी गाएं गुणगान तेरा, पाकर तेरा वरदान मुदा।
जब तक सांसे चलेंगी, तब तक तेरा नाम लेंगे, हे कृष्ण कन्हैया...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त और भगवान के बीच के अनन्य और पवित्र संबंध को परिभाषित करता है। "जब तक सांसे चलेंगी" पंक्तियों के माध्यम से भक्त यह स्पष्ट कर रहा है कि मानव शरीर की आयु या जीवनकाल का कोई भरोसा नहीं है, परंतु जब तक यह प्राण इस नश्वर देह में विद्यमान हैं, तब तक उसकी जिह्वा पर केवल और केवल भगवान श्री कृष्ण का नाम ही रहेगा। सांसों का चलना जीव के जीवित होने का प्रमाण है, और सांसों के साथ प्रभु का नाम जुड़ जाना जीव के आध्यात्मिक रूप से जागृत होने का प्रमाण है।

भजन के अंतरा भागों में भक्त संसार के मोह-माया जाल का वर्णन करता है। संसार रूपी गलियों में भटकता हुआ मनुष्य जब दुखों और संघर्षों से घिर जाता है, तब उसे कन्हैया का ही संबल प्राप्त होता है। जैसे ही प्रभु अपने भक्त का हाथ पकड़ते हैं, वैसे ही जीवन के सारे संकट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। भक्त कहता है कि उसे संसार की अन्य भौतिक वस्तुओं, यश या वैभव की कोई लालसा नहीं है, उसकी एकमात्र अभिलाषा प्रभु के चरणों की शरण पाना है। यह भाव साधक को अहंकार से मुक्त कर दीनता और करुणा के मार्ग पर अग्रसर करता है। इस संबंध में आप राधा कृष्ण स्टेटस और लघु संदेशों के माध्यम से भी अपने दिन की शुरुआत कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल संगीत या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक उच्च कोटि की आध्यात्मिक साधना है। इसकी मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित हैं:

  • शरणागति का संदेश: यह भजन साधक को ईश्वर के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • सरल और सहज भाषा: आम जनमानस की भाषा में रचित होने के कारण यह सीधे हृदय को स्पर्श करता है।
  • मानसिक शांति और संबल: तनावपूर्ण आधुनिक जीवन में इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
  • कृष्ण भक्ति की पराकाष्ठा: भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप, युवा रूप और मुरली मनोहर स्वरूप का सुंदर समन्वय इसमें झलकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के पूर्ण लाभ के लिए सही समय और उचित मनोभाव का होना आवश्यक है।

  • ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल: सुबह उठकर स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित कर इस भजन को सुनना या गाना मन को पूरे दिन ऊर्जावान रखता है।
  • संध्या वंदन के समय: संध्याकाल में जब घर में दीपक जलाया जाता है, तब इस भजन का श्रवण नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
  • कीर्तन एवं सत्संग: साप्ताहिक सत्संग, एकादशी जागरण या जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर समूह में इस भजन का गान करने से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण और उनकी आह्लादिनी शक्ति श्री राधा रानी हैं। ब्रज संस्कृति के अनुसार, भगवान कृष्ण प्रेम, आनंद और धर्म के प्रतीक हैं। इस भजन को स्वर देने वाली प्रसिद्ध गायिका इसरत जहाँ ने अपनी मधुर और सधी हुई आवाज से इसमें ऐसा भाव भरा है जो सभी संप्रदाय और वर्ग के श्रोताओं को समान रूप से आकर्षित करता है। यह इस बात का प्रमाण है कि सच्ची भक्ति किसी जाति, पंथ या बंधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि यह शुद्ध हृदय की पुकार है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

आधुनिक भक्ति संगीत की श्रृंखला में इस भजन ने श्रोताओं के बीच एक विशेष स्थान बनाया है। इसरत जहाँ द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय ट्रैक ने यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों पर लाखों भक्तों का दिल जीता है। इसकी रचना पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत के हल्के सम्मिश्रण से की गई है, जिससे यह आसानी से सबकी जुबान पर चढ़ जाता है। संगीतकारों ने इसके पीछे की भावना को समझते हुए बांसुरी और मृगदण्ड के हल्की धुनों का प्रयोग किया है जो ब्रज की याद दिलाती हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी और खड़ी बोली का ऐसा सुंदर मिश्रण है जिसमें ब्रजभाषा के कुछ शब्दों की मिठास भी घुली हुई है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। 'प्रेम का सागर', 'सांसों की डोर' और 'चरणों की परिभाषा' जैसे रूपक भजन के साहित्यिक सौंदर्य को अत्यधिक समृद्ध बनाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें जीवन की कई मूल्यवान सीख मिलती हैं:

  • अस्थिरता का बोध: जीवन और सांसें नश्वर हैं, इसलिए इनका सदुपयोग ईश्वर स्मरण में करना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: 'मैं' और 'मेरा' का त्याग कर 'सब कुछ तेरा है हे प्रभु' का भाव अपनाना चाहिए।
  • संकट में धैर्य: कठिन परिस्थितियों में भी भगवान पर अटूट विश्वास रखना चाहिए क्योंकि वही नैया पार लगाते हैं।
  • निसस्वार्थ प्रेम: प्रेम में किसी प्राप्ति की अपेक्षा नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रेम ही अपने आप में साध्य होना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शरणागति पूर्ण समर्पण अपने अस्तित्व को ईश्वर के चरणों में सौंप देना
अभिलाषा तीव्र इच्छा या कामना ईश्वर प्राप्ति की उत्कट इच्छा
भंवर पानी का चक्र / संकट संसार के मोह-माया के दुष्चक्र
मुरली मनोहर बांसुरी बजाने वाले कृष्ण मन को मोहने वाली परम चेतना
मुदा प्रसन्नता / आनंद आध्यात्मिक आनंद की अवस्था

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जब तक सांसे चलेंगी, तब तक तेरा नाम लेंगे..." - इस पंक्ति का अर्थ है कि जब तक शरीर में प्राण हैं, तब तक हमारी वाणी से भगवान का नाम जपना ही एकमात्र कर्म होना चाहिए।

"तू ही मेरी आशा है, तू ही मेरी अभिलाषा है..." - भक्त कहता है कि हे प्रभु! इस संसार में मेरी सारी उम्मीदें आप से ही हैं और मेरी एकमात्र इच्छा आपके दर्शन या आपकी भक्ति पाना है।

"संसार की इन गलियों में, हम भटकते रहे थे पहले..." - अज्ञानतावश मनुष्य जीवनभर भौतिक सुखों के पीछे भटकता रहता है, परंतु जब उसे गुरु या भगवान का सानिध्य मिल जाता है, तब उसकी भटकन समाप्त हो जाती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भगवान श्री कृष्ण की स्तुति में इस पावन श्लोक का स्मरण करना इस भजन के भाव को और अधिक पुष्ट करता है:

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥

अर्थ: वासुदेव नंदन, समस्त पापों को हरने वाले परम आत्मा भगवान श्री कृष्ण को बार-बार नमस्कार है, जो शरणागतों के सभी क्लेशों का नाश करते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जब तक सांसे चलेंगी (Jab Tak Jeevan Rahega)
स्वर / गायिका इसरत जहाँ (Ishrat Jahan)
प्रमुख आराध्य भगवान श्री कृष्ण एवं राधा रानी
संगीत शैली भक्ति गीत / भजन
भाषा हिंदी
प्रमुख भाव शरणागति, अनन्य प्रेम, भक्ति
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, कृष्ण जन्माष्टमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: यह बेहद लोकप्रिय भजन प्रसिद्ध गायिका इसरत जहाँ द्वारा स्वरबद्ध किया गया है, जिसे श्रोताओं ने बहुत सराहा है।

उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और जीवन की प्रत्येक श्वास को प्रभु स्मरण में समर्पित करना है।

उत्तर: हाँ, इस भजन को दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी व्रत, जन्माष्टमी या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान गाया या सुना जा सकता है।

उत्तर: शरणागति का अर्थ है अपने अहंकार का पूर्ण त्याग करके भगवान के आश्रित हो जाना। इसे सनातन परंपरा में मोक्ष का सबसे सुगम मार्ग माना गया है।

उत्तर: निश्चित रूप से। इस प्रकार के मधुर और भावपूर्ण भजनों का श्रवण करने से मन का तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

उत्तर: भगवान कृष्ण का स्मरण व्यक्ति को सहनशील, प्रेमपूर्ण, कर्तव्यनिष्ठ और संकटों से मुकाबला करने की आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।

उत्तर: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्याकाल में शांत चित्त से इस भजन को सुनना अत्यंत आनंददायक और फलदायी होता है।

उत्तर: मुख्य रूप से यह हिंदी और ब्रजसंस्कृति से जुड़े शब्दों में है, जिसे देवनागरी और रोमन (English script) दोनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन भक्ति परंपरा, लोक संगीत और आध्यात्मिक साहित्य के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक प्रामाणिक, शुद्ध और उच्च कोटि की devotional सामग्री पहुंचाना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इस आलेख में भजन के प्रत्येक पक्ष को अत्यंत सूक्ष्मता से समाहित किया गया है ताकि साधक को पूर्ण आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन भक्ति साहित्य एवं श्रीमद्भागवत पुराण के उपदेश
  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं संगीत संकलन
  • भारतीय संगीत परंपरा में शरणागति का दार्शनिक स्वरूप

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो हमारे अन्य पावन लेखों और भजनों को भी अवश्य पढ़ें:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!