Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चमकेला घाट छठी माई के

पढ़ें चमकेला घाट छठी माई के का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित पूरे विश्व में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला महापर्व छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, प्रकृति प्रेम और सामूहिक आस्था का अनुपम संगम है। इस महापर्व की आत्मा इसके लोकगीतों में बसती है। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय छठ गीत है "चमकेला घाट छठी माई के", जिसे सुप्रसिद्ध लोक गायक गोलू गोल्ड ने अपने मधुर स्वर से सजाया है। यह गीत छठ घाटों की अलौकिक सुंदरता, स्वच्छता और भक्तों के अटूट विश्वास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। इस लेख के माध्यम से हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics), उसका विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक संदेश, सांस्कृतिक महत्व और इस महापर्व से जुड़ी विभिन्न परंपराओं का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ चमकेला घाट छठी माई के ॥

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
बहंगी लचकत जाए...
चमकेला घाट छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के।
सजल बा दरबार छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के॥

केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाए॥
चमकेला घाट छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के।
सजल बा दरबार छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के॥

नारियल जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
आदित मल के रथिआ सजल बा, घाट पे भीड़ उमड़ जाए॥
चमकेला घाट छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के।
सजल बा दरबार छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के॥

दउरा उठवले आदित मल, घाट की ओर चली जाए।
अरघ देवे सब नर-नारी, छठी माई खुश हो जाए॥
चमकेला घाट छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के।
सजल बा दरबार छठी माई के, चमकेला घाट छठी माई के॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह पारंपरिक और आधुनिक शैली का मिश्रित लोकगीत छठ महापर्व की पावन तैयारियों और घाटों की दिव्यता का वर्णन करता है। गीत की प्रत्येक पंक्ति में प्रकृति के प्रति सम्मान और छठी मैया के प्रति अनन्य समर्पण झलकता है:

प्रथम अंतरा: बहंगी और घाट की शोभा

गीत की शुरुआत "कांच ही बांस के बहंगिया" से होती है, जो छठ पूजा का सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक प्रतीक है। कच्चे बांस से बनी बहंगी (दउरा ले जाने वाला ढांचा) जब भक्त के कंधों पर लचकती है, तो वह उसकी कठिन साधना और समर्पण को दर्शाती है। इसके साथ ही, गंगा या तालाब के किनारे बने घाटों को दीपों और फूलों से सजाया गया है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात छठी मैया का दिव्य दरबार धरती पर उतर आया हो। घाटों की यह चमक केवल भौतिक प्रकाश नहीं, बल्कि भक्तों की आंतरिक श्रद्धा की चमक है।

द्वितीय अंतरा: प्रकृति और पवित्रता का संरक्षण

"केरवा जे फरेला घवद से..." पंक्ति के माध्यम से गीतकार ने पूजा सामग्री की परम पवित्रता को रेखांकित किया है। केले के घौद (गुच्छे) पर जब सुगा (तोता) मंडराता है, तो भक्त उसे सचेत करता है कि यह फल छठी मैया के अर्घ्य के लिए है, इसे जूठा न करें। यह लोकगीत हमें सिखाता है कि ईश्वर को अर्पित की जाने वाली सामग्री पूर्णतः शुद्ध, सात्विक और अछूती होनी चाहिए। यह प्रकृति और वन्यजीवों के साथ मनुष्य के सह-अस्तित्व और मर्यादा को भी दर्शाता है।

तृतीय एवं चतुर्थ अंतरा: सूर्य देव का आगमन और अर्घ्य

गीत के अंतिम भाग में भगवान सूर्य (आदित्य देव) के रथ के सजने और भक्तों द्वारा दउरा (पूजा की टोकरी) उठाकर घाट की ओर प्रस्थान करने का सजीव चित्रण है। जब सभी नर-नारी मिलकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तो संपूर्ण वातावरण "छठी माई की जय" के उद्घोष से गुंजायमान हो उठता है। इस अर्घ्य से छठी मैया अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और दीर्घायु का वरदान देती हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना पूर्ण समर्पण, शुचिता (पवित्रता) और सामुदायिक एकता है। छठ पूजा का यह गीत हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • प्राकृतिक संसाधनों का आदर: बांस, केला, नारियल और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग यह संदेश देता है कि हमारी पूजा पद्धति पूरी तरह से प्रकृति के अनुकूल होनी चाहिए।
  • समानता का भाव: घाट पर राजा और रंक, अमीर और गरीब सभी एक साथ खड़े होकर एक ही सूर्य देव की आराधना करते हैं। यह सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है।
  • कठिन साधना: 36 घंटों का निर्जला व्रत और घाटों की सफाई यह दर्शाती है कि बिना कष्ट सहे और बिना सेवा भाव के ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण श्रेणी (Field) गीत की जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) चमकेला घाट छठी माई के (Chamkela Ghat Chhathi Mai Ke)
मुख्य गायक (Singer) गोलू गोल्ड (Golu Gold)
गीत की भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri - लोक भाषा)
संगीत शैली (Genre) छठ पूजा लोकगीत / भक्ति संगीत (Devotional)
मुख्य विषय (Theme) छठ घाट की सुंदरता, सूर्य देव की आराधना और छठी मैया की महिमा
उपयुक्त अवसर (Occasion) छठ पूजा महापर्व (कार्तिक एवं चैत्र मास)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस लोकप्रिय गीत को भोजपुरी संगीत जगत के जाने-माने गायक गोलू गोल्ड ने गाया है। उनकी अनूठी गायन शैली और ऊंचे सुरों ने इस पारंपरिक गीत को एक नया आयाम दिया है। इस गीत का संगीत पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित है, जिसमें ढोलक, मंजीरा और बांसुरी का सुंदर समन्वय किया गया है। गोलू गोल्ड के भजनों की विशेषता यह होती है कि वे लोक संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहते हुए भी युवा पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
बहंगिया (Bahangiya) बांस का बना हुआ ढांचा कंधे पर रखकर पूजा का दउरा ले जाने के लिए प्रयुक्त।
लचकत (Lachkat) लचकना या झुकना भार के कारण बांस की लकड़ी का लचीलापन दर्शाना।
घवद (Ghavad) फलों का गुच्छा (घौद) केले या नारियल के पेड़ पर लगे प्राकृतिक गुच्छे।
सुगवा (Sugwa) तोता (पक्षीय रूप) लोक कथाओं में पवित्र फल को जूठा करने वाला पात्र।
आदित मल (Aadit Mal) भगवान सूर्य देव सूर्य देव का एक लोक नाम जो तेज और प्रताप का प्रतीक है।
अरघ (Arghya) अर्घ्य / जल अर्पित करना दूध और जल से सूर्य देव को दी जाने वाली अंजलि।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है। इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

घाटों की शुचिता और पर्यावरण संरक्षण

गीत में "चमकेला घाट छठी माई के" पंक्ति इस बात पर जोर देती है कि महापर्व के दौरान नदियों और तालाबों के घाटों को अत्यधिक साफ-सुथरा रखा जाता है। यह सनातन धर्म की उस वैज्ञानिक सोच को दर्शाता है जहां जल स्रोतों की पूजा की जाती है और उन्हें स्वच्छ रखने का संकल्प लिया जाता है।

लोक आस्था और सामूहिक भागीदारी

यह गीत गाते हुए जब महिलाएं और पुरुष घाट की ओर बढ़ते हैं, तो उनके बीच का आपसी मतभेद समाप्त हो जाता है। यह गीत समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। लोकगीतों के माध्यम से ही हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों और संस्कारों से परिचित होती है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

"चमकेला घाट छठी माई के" गीत हमें आधुनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  • अनुशासन और धैर्य: छठ व्रत की कठिन साधना हमें सिखाती है कि जीवन में किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनुशासन और धैर्य अत्यंत आवश्यक हैं।
  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य देव और जल के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। यह गीत हमें प्रकृति के इन अमूल्य उपहारों के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है।
  • सादगी का महत्व: मिट्टी के चूल्हे, बांस के सूप और साधारण फलों से की जाने वाली यह पूजा हमें आडंबरहीन और सादा जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से चार दिवसीय छठ महापर्व के दौरान सुना और गाया जाता है:

  1. नहाय-खाय (प्रथम दिन): इस दिन से ही घरों में छठ के पारंपरिक गीतों की गूंज शुरू हो जाती है।
  2. खरना (द्वितीय दिन): प्रसाद बनाने के समय महिलाएं सामूहिक रूप से इन गीतों का गायन करती हैं।
  3. संध्या अर्घ्य (तृतीय दिन): जब दउरा उठाकर घाट की ओर प्रस्थान किया जाता है, तब यह गीत अत्यंत उत्साह के साथ बजाया जाता है।
  4. उषा अर्घ्य (चतुर्थ दिन): उगते सूर्य को अर्घ्य देने और व्रत के पारण के समय इस गीत का गायन मन को शांति प्रदान करता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक चमकेला घाट छठी माई के
मुख्य देवी-देवता छठी मैया (प्रकृति देवी) एवं सूर्य देव (आदित्य)
गायक गोलू गोल्ड
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, सिंथेसाइज़र
काव्य रस भक्ति रस एवं शांत रस
संबंधित पर्व छठ पूजा (महापर्व)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय छठ गीत के मुख्य गायक भोजपुरी के सुप्रसिद्ध लोक गायक गोलू गोल्ड हैं।

"बहंगिया" या बहंगी बांस की एक लचीली छड़ी होती है, जिसके दोनों सिरों पर टोकरियां (दउरा) बांधी जाती हैं। इसमें छठ पूजा का प्रसाद और फल रखकर पुरुष वर्ग अपने कंधों पर उठाकर घाट तक ले जाते हैं।

लोकगीतों में तोते (सुगा) का प्रसंग पूजा सामग्री की शुद्धता को दर्शाने के लिए आता है। यह चेतावनी देता है कि पूजा के फलों को कोई पक्षी जूठा न करे, क्योंकि छठी मैया को केवल पूर्णतः शुद्ध और पवित्र फल ही अर्पित किए जाते हैं।

सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं जो पृथ्वी पर जीवन के आधार हैं। उन्हें अर्घ्य देकर भक्त उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और अच्छे स्वास्थ्य, तेज तथा दीर्घायु की कामना करते हैं।

यह गीत मधुर भोजपुरी लोक भाषा में रचित है, जो उत्तर भारत के करोड़ों लोगों की मातृभाषा और लोक संस्कृति का मुख्य हिस्सा है।

छठ पूजा का व्रत कुल चार दिनों का होता है, जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल हैं। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।

यद्यपि कार्तिक मास की छठ पूजा मुख्य और बड़ी होती है, लेकिन यह गीत चैत्र मास में आने वाली चैती छठ पूजा के अवसर पर भी समान रूप से श्रद्धा के साथ गाया और सुना जाता है।

इस गीत का मुख्य संदेश सामूहिक स्वच्छता, प्रकृति संरक्षण, शुद्ध अंतःकरण से की गई भक्ति और समाज में समरसता की स्थापना करना है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "चमकेला घाट छठी माई के" गीत के विभिन्न पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। लोकगीत हमारी संस्कृति के संवाहक होते हैं और गोलू गोल्ड का यह गीत आधुनिक पीढ़ी को अपनी समृद्ध लोक परंपराओं से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है। इस सामग्री को तैयार करने में पारंपरिक लोक कथाओं, भोजपुरी साहित्य और छठ महापर्व की शास्त्रीय मान्यताओं का ध्यान रखा गया है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों को प्रामाणिक और ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं भविष्य पुराण (सूर्य देव की उपासना के संदर्भ में)
  • बिहार और उत्तर प्रदेश की पारंपरिक लोक संस्कृति एवं मौखिक लोकगीत परंपरा
  • भोजपुरी लोक संगीत संकलन एवं सांस्कृतिक अध्ययन

संबंधित लेख

छठ पूजा और अन्य पावन पर्वों के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे निम्नलिखित लेखों को अवश्य पढ़ें:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 05 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!