bhakti gana bhojpuri mein मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मनता दिवाली रामा होता आगमन

पढ़ें मनता दिवाली रामा होता आगमन का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"मनता दिवाली रामा होता आगमन" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भोजपुरी राम भजन है, जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के चौदह वर्षों के वनवास के पश्चात अयोध्या लौटने के पावन प्रसंग को जीवंत करता है। यह भजन विशेष रूप से दीपावली के पावन पर्व पर गाया और सुना जाता है। इस गीत में अवधवासियों के हर्ष, उल्लास और अगाध श्रद्धा को पारंपरिक भोजपुरी लोक शैली में पिरोया गया है। जब प्रभु श्री राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ लंका विजय कर अयोध्या लौटते हैं, तो संपूर्ण अवध नगरी दीपों के प्रकाश से जगमगा उठती है। यह भजन भक्त के अंतःकरण में उसी दिव्य आनंद और शरणागति के भाव को जाग्रत करता है, जो त्रेतायुग में अयोध्या के नागरिकों ने अनुभव किया था। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मनता दिवाली रामा होता आगमन ॥

मुखड़ा:
मनता दिवाली रामा होता आगमन,
अवध नगरिया भइल मगन हो।
मनता दिवाली रामा होता आगमन...

अंतरा १:
चौदह बरस प्रभु बन में बितवलन,
रावन मारि सिया वापस ले अइलन।
सजल दुअरिया, सजल बा भवन,
अवध नगरिया भइल मगन हो।
मनता दिवाली रामा होता आगमन...

अंतरा २:
घीव के दिया घरे-घरे जरेला,
अंगना-दुअरिया सब कोई सजेला।
हरषत बाड़े आजु सबके मन,
अवध नगरिया भइल मगन हो।
मनता दिवाली रामा होता आगमन...

अंतरा ३:
लक्ष्मण भैया संग सोहे हनुमान जी,
आरती उतारे सब मिलि जहान जी।
कोमल गावे भजन सुंदर पावन,
अवध नगरिया भइल मगन हो।
मनता दिवाली रामा होता आगमन...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन त्रेतायुग के उस ऐतिहासिक और पावन क्षण का सजीव चित्रण करता है जब भगवान श्री राम अपना वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापस आते हैं। "मनता दिवाली रामा होता आगमन" का अर्थ है कि भगवान राम का आगमन हो रहा है और उनके स्वागत में दीपावली मनाई जा रही है। संपूर्ण अयोध्या नगरी इस पावन अवसर पर आनंद और भक्ति के सागर में सराबोर हो गई है।

भजन के प्रथम भाग में प्रभु राम के चौदह वर्ष के वनवास और लंकापति रावण के वध का उल्लेख है। यह इस बात का प्रतीक है कि जब जीव अपने भीतर के अंधकार (अज्ञान और अहंकार रूपी रावण) का नाश कर देता है, तब उसके हृदय में परमात्मा (राम) का पुनः प्राकट्य होता है। माता सीता, जो भक्ति और शांति का प्रतीक हैं, उनके साथ प्रभु का आगमन जीवन में सुख, समृद्धि और परम शांति लेकर आता है।

भजन के दूसरे भाग में घी के दीये जलाने और घरों को सजाने का वर्णन है। यह केवल बाह्य सजावट नहीं है, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि का प्रतीक है। जब प्रभु का आगमन होता है, तो भक्त का मन-मंदिर स्वतः ही हर्षित और आलोकित हो उठता है। अंतिम भाग में भ्राता लक्ष्मण और परम भक्त हनुमान जी की उपस्थिति का वर्णन है, जो यह दर्शाता है कि प्रभु राम की भक्ति सदैव सेवा, समर्पण और भ्रातृप्रेम के साथ ही पूर्ण होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे सामान्य गीतों से अलग कर एक उच्च कोटि का आध्यात्मिक भजन बनाती हैं:

  • भक्ति और लोक संस्कृति का संगम: यह भजन भोजपुरी लोक धुन पर आधारित है, जो उत्तर भारत के जनमानस के हृदय के अत्यंत निकट है। इसकी सरल भाषा और सुमधुर लय सीधे आत्मा को स्पर्श करती है।
  • शरणागति का संदेश: भजन में भगवान राम के प्रति पूर्ण समर्पण और उनके आगमन पर होने वाले परम आनंद को दर्शाया गया है।
  • अंधकार पर प्रकाश की विजय: यह गीत हमें स्मरण कराता है कि चाहे अंधकार (कठिनाइयां और वनवास) कितना भी लंबा क्यों न हो, अंततः धर्म और सत्य (राम) की ही विजय होती है।
  • पारिवारिक और सामाजिक समरसता: राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान जी का एक साथ होना आदर्श परिवार और समाज की परिकल्पना को सुदृढ़ करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान राम का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस विशिष्ट भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

शुभ अवसर: इस भजन को मुख्य रूप से कार्तिक अमावस्या (दीपावली), राम नवमी, विजयदशमी (दशहरा) और प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है। गृह प्रवेश या किसी भी मांगलिक कार्य के अवसर पर भी इसका गायन किया जा सकता है।

गायन की विधि: शांत और स्वच्छ वातावरण में बैठकर, भगवान राम के चित्र या विग्रह के सम्मुख घी का दीपक प्रज्वलित करें। हाथ में पुष्प लेकर प्रभु का ध्यान करें और पूर्ण श्रद्धा व शुद्ध उच्चारण के साथ इस भजन का गायन करें। सामूहिक संकीर्तन में इस भजन को गाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, जगत जननी माता सीता, भ्राता लक्ष्मण और रामभक्त हनुमान जी को समर्पित है। सनातन परंपरा में भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार माना गया है, जो धर्म की स्थापना के लिए अवतरित हुए थे।

इस भजन की पृष्ठभूमि गोस्वामी तुलसीदास जी के रामचरितमानस और महर्षि वाल्मीकि की रामायण से प्रेरित है। संतों के अनुसार, राम नाम का जप कलयुग में मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और सुगम साधन है। इस भजन के माध्यम से गायिका कोमल पाठक ने आधुनिक युग के श्रोताओं को उसी प्राचीन और पावन चेतना से जोड़ने का सफल प्रयास किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस विशिष्ट भजन की रचना पारंपरिक लोक गीतों की तर्ज पर की गई है। उत्तर भारत, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश में, रामकथा लोक-जीवन का अभिन्न हिस्सा है। वहां हर उत्सव, चाहे वह जन्म हो, विवाह हो या त्योहार, राम और सीता के गीतों के बिना अपूर्ण माना जाता है।

इस भजन की पृष्ठभूमि रामायण के 'उत्तरकांड' से प्रेरित है, जहां भगवान राम के राज्याभिषेक और अयोध्या आगमन का अत्यंत मनोहारी वर्णन मिलता है। जब प्रभु वापस आते हैं, तो भरत जी की व्याकुलता समाप्त होती है और पूरी अयोध्या सोने की लंका की चकाचौंध को भूलकर अपने मिट्टी के घरों को दीपों से सजाती है। यही इस भजन की मूल प्रेरणा है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा मधुर भोजपुरी है, जो अपनी मिठास और आत्मीयता के लिए जानी जाती है। काव्य शैली अत्यंत सरल और गेय (गाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे "नगरिया", "बितवलन", "अइलन", "जरेला" और "सजेला" लोक जीवन की सोंधी सुगंध को बिखेरते हैं।

रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग करते हुए "घीव के दिया" को ज्ञान और भक्ति के प्रकाश के रूप में दर्शाया गया है। इसकी लयबद्धता ऐसी है कि संगीत के बिना भी केवल तालियों की थाप पर इसे सहजता से गाया जा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं कराता, बल्कि जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:

धैर्य और संयम: प्रभु राम ने चौदह वर्ष का लंबा वनवास अत्यंत धैर्य और संयम के साथ व्यतीत किया। यह हमें सिखाता है कि जीवन के कठिन समय में विचलित नहीं होना चाहिए।

कर्तव्यपरायणता: माता सीता और लक्ष्मण जी ने महलों के सुख का त्याग कर प्रभु के साथ वन जाना स्वीकार किया, जो कर्तव्य और प्रेम की पराकाष्ठा है।

अहंकार का अंत निश्चित है: रावण जैसे महाप्रतापी और ज्ञानी राजा का अंत उसके अहंकार के कारण हुआ। अतः हमें सदैव विनम्र रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मनता दिवाली दीपावली मनाई जा रही है हृदय में आनंदोत्सव का प्रतीक
अवध नगरिया अयोध्या नगरी पवित्र अंतःकरण या शुद्ध मन
मगन मग्न या आनंदित होना परमानंद की स्थिति
बन में बितवलन वन में व्यतीत किया साधना और तपस्या का काल
घीव के दिया घी का दीपक ज्ञान और भक्ति का प्रकाश
हरषत हर्षित या प्रसन्न आत्मा की प्रसन्नता

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मनता दिवाली रामा होता आगमन, अवध नगरिया भइल मगन हो।"
जब प्रभु श्री राम का अयोध्या में आगमन हो रहा है, तो उनके स्वागत में पूरी नगरी दीपावली मना रही है। अयोध्या का प्रत्येक नागरिक आनंद में मग्न है और उत्सव मना रहा है।

"चौदह बरस प्रभु बन में बितवलन, रावन मारि सिया वापस ले अइलन।"
प्रभु राम ने अपने पिता के वचनों को निभाने के लिए चौदह वर्ष वन में बिताए। वहां उन्होंने दुष्ट रावण का संहार किया और माता सीता को ससम्मान वापस लेकर लौटे।

"सजल दुअरिया, सजल बा भवन, अवध नगरिया भइल मगन हो।"
प्रभु के स्वागत के लिए अयोध्या के प्रत्येक घर के द्वार और भवन सुंदर फूलों और बंदनवारों से सजाए गए हैं। पूरी नगरी दुल्हन की भांति सजकर तैयार है।

"घीव के दिया घरे-घरे जरेला, अंगना-दुअरिया सब कोई सजेला।"
अंधकार को दूर करने के लिए प्रत्येक घर में शुद्ध घी के दीये जलाए जा रहे हैं। हर कोई अपने आंगन और द्वार को रंगोली और दीपों से सजा रहा है।

"लक्ष्मण भैया संग सोहे हनुमान जी, आरती उतारे सब मिलि जहान जी।"
प्रभु राम के साथ उनके प्रिय भाई लक्ष्मण और परम भक्त हनुमान जी सुशोभित हो रहे हैं। संपूर्ण संसार (अयोध्या के लोग) मिलकर उनकी पावन आरती उतार रहा है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के श्रवण और पठन के साथ भगवान राम के इस परम कल्याणकारी श्लोक का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥

अर्थ: श्री राम, रामभद्र, रामचंद्र, विधाता स्वरूप, रघुनाथ, स्वामी और माता सीता के पति भगवान श्री राम को मैं बारंबार नमस्कार करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मनता दिवाली रामा होता आगमन (Manata Diwali Rama Hota Aagaman)
मुख्य देवी-देवता भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी, हनुमान जी
गायक / कलाकार कोमल पाठक (Komal Pathak)
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य भाव भक्ति, हर्ष, शरणागति, उत्सव भाव
उपयुक्त अवसर दीपावली, राम नवमी, दशहरा, संध्या आरती, पारिवारिक उत्सव
काव्य शैली पारंपरिक लोक गीत / भजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन भगवान श्री राम के १४ वर्ष के वनवास के बाद माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटने और उनके स्वागत में अयोध्यावासियों द्वारा दीपावली मनाने के पावन प्रसंग पर आधारित है।

यह भजन अत्यंत मधुर और सरल भोजपुरी भाषा में गाया गया है, जो उत्तर भारत की पारंपरिक लोक शैली को प्रदर्शित करता है।

दीपावली का त्योहार भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी में ही मनाया जाता है। इस भजन को सुनने से घर में सुख, शांति, समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस सुंदर और पावन भजन को सुप्रसिद्ध लोक गायिका कोमल पाठक ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

आध्यात्मिक दृष्टि से "घी का दीया" अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के प्रकाश को अंतःकरण में जाग्रत करने का प्रतीक है।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय गा सकते हैं। यह मन को शांति प्रदान करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।

यह भजन हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की राह पर चलने वालों की अंततः विजय होती है। कठिनाइयां कितनी भी बड़ी हों, धैर्य रखने से शुभ फल अवश्य मिलता है।

इस भजन के साथ "राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥" या "ॐ रामाय नमः" मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत आता है। इस भजन की प्रामाणिकता और इसके दार्शनिक पहलुओं को सुनिश्चित करने के लिए सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों जैसे वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस का संदर्भ लिया गया है। इस भजन के माध्यम से प्रस्तुत की गई भावनाएं पूरी तरह से पारंपरिक और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुकूल हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण: युद्धकांड (प्रभु श्री राम का अयोध्या प्रत्यावर्तन प्रसंग)।
  • श्रीरामचरितमानस: उत्तरकांड (मंगलाचरण एवं अवध आगमन वर्णन)।
  • पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत संग्रह: उत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध अन्य पावन भजनों और स्तोत्रों का भी आनंद ले सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!