Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

छठी मईया खोला ना नज़रिया

पढ़ें छठी मईया खोला ना नज़रिया का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

लोक आस्था के महापर्व का पावन भक्ति गीत

सनातन संस्कृति और लोक परंपराओं में छठी मईया के पावन गीत केवल संगीत या मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर जीवात्मा की परम शक्ति के प्रति अनन्य पुकार, समर्पण और कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक हैं। "छठी मईया खोला ना नज़रिया" लोक आस्था के महापर्व छठ की उस पवित्र बेला का स्मरण कराता है जहाँ व्रती महिलाएं, माताएं और बहनें कठोर उपवास रखकर सूर्य देव और छठी मईया की अराधना करती हैं। यह भजन या लोकगीत उस अगाध श्रद्धा, विरह, विनय और करुणा से ओत-प्रोत है, जिसमें एक भक्त अपनी आराध्य देवी से अपनी झोली भरने और कृपा दृष्टि डालने की प्रार्थना करता है। इस गीत के हर एक शब्द में भोजपुरी अंचल की मिठास, लोक संस्कृति की सुगंध और सूर्योपासना के प्रति अटूट विश्वास समाहित है। इस लेख में हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल, इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व, तथा छठ महापर्व की गहरी दार्शनिक पृष्ठभूमि का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

छठी मईया खोला ना नज़रिया

छठी मईया खोला ना नज़रिया, दरस पियासा मोर मनवा,
आए बटोही तोहरे द्वारे, सुनि लेहु अरजिया हमारो भोरवा।

घाट पर उमड़ल बाटे भारी घटिया, तोहेंके मनावे खातिर लागल बा डगरिया,
केरवा के पात पर उगेलन सुरुज भगवान, छठी मईया खोला ना नज़रिया...

ललकी चुनरिया तोहरे माथे सोहे, सिंदूरवा से भरल बा तोहरे अँगरिया,
दर्शन पाके धन्य भइल भाग हमार, छठी मईया खोला ना नज़रिया...

ससुरा सेs अइली छठी माई घरे-घरे गूंजे तोहरे महिमा के गैनिया,
सुख-संपत्ति दs देहिया आरोग्यता, छठी मईया खोला ना नज़रिया...

घाट से निहारे तोहरे राह सगरी दुनिया, भक्तन के भीड़ बाटे भारी उमरिया,
पूर करs कामना हे दीनानाथ के बहरिया, छठी मईया खोला ना नज़रिया...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकगीत अत्यंत मार्मिक और भावात्मक शैली में रचा गया है। इसमें एक साधिका या भक्त अपनी छठी मईया से विनती कर रहा है कि हे माता! अपनी कृपा दृष्टि (नज़रिया) खोलिए, क्योंकि आपके दर्शन के बिना मेरा मन अत्यंत प्यासा और व्याकुल है। लोक परंपरा के अनुसार, छठ व्रत केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भौतिकता से परे जाकर प्रकृति के सबसे प्रत्यक्ष देवता (सूर्य देव) और उनकी शक्ति (छठी मईया) के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव है। 'केरवा के पात पर उगेलन सुरुज भगवान' पंक्ति इस बात का प्रतीक है कि सनातन संस्कृति में प्रकृति के हर उपादान—चाहे वह केले का पत्ता हो, बांस की टोकरी हो, या जलती हुई दीपशिखा—में परमात्मा का वास माना गया है। गीत के माध्यम से भक्त यह निवेदन करता है कि हे माता! जिस प्रकार आपने इस संसार को जीवन और ऊर्जा दी है, उसी प्रकार हमारे जीवन के अंधकार को भी दूर कीजिए और हमें आरोग्य, संतान सुख एवं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान कीजिए।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का मुख्य केंद्रीय भाव 'विनय', 'शरणागति' और 'प्रकृति प्रेम' है। छठ महापर्व के दौरान गाए जाने वाले ऐसे गीत समाज में अनुशासन, स्वच्छता, पवित्रता और सामूहिक सद्भाव का संदेश देते हैं। गीत का संदेश स्पष्ट है कि मनुष्य चाहे कितनी भी भौतिक उन्नति कर ले, अंततः उसकी सच्ची शांति प्रकृति की गोद में और ईश्वर की कृपा में ही निहित है। कठोर उपवास के दौरान जब व्रती महिलाएं निर्जल रहकर इन गीतों को गाती हैं, तो उनका मानसिक संताप दूर होता है और अंतःकरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह गीत हमें सिखाता है कि निस्वार्थ भाव से की गई प्रार्थना और कठिन साधना कभी निष्फल नहीं होती।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम छठी मईया खोला ना नज़रिया (Chhath Maiya Khola Na Nazariya)
शैली पारंपरिक छठ लोकगीत / भक्ति गीत
भाषा भोजपुरी / लोक भाषा
मुख्य विषय सूर्य उपासना, छठी माता की महिमा, विनय और प्रार्थना
संबंधित पर्व छठी मईया एवं छठ महापर्व
भावना / भाव अनन्य भक्ति, समर्पण, विरह और उल्लास

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

छठी मईया से जुड़े अधिकांश पारंपरिक लोकगीत पीढ़ियों से मौखिक परंपरा (श्रुति परंपरा) के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होते रहे हैं। इन गीतों के मूल रचनाकार सामान्यतः अज्ञात होते हैं, क्योंकि ये लोक-मानस की उपज हैं जिन्हें ग्रामीण महिलाओं और लोक कलाकारों ने अपनी सच्ची श्रद्धा से संजोया है। आधुनिक समय में प्रेम कुमार जैसे कई प्रतिष्ठित लोक कलाकारों और गायकों ने इन पारंपरिक गीतों को अपने स्वरों से सजाकर वैश्विक मंच पर प्रसारित किया है, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक या साहित्यिक संदर्भ
नज़रिया दृष्टि, नजर, कृपा ईश्वर या देवी की दयालु दृष्टि जो साधक के जीवन को बदल देती है
बटोही पथिक, यात्री, मेहमान संसार में जीवन यात्रा कर रहा मनुष्य
केरवा के पात केले का पत्ता छठ पूजा में प्रसाद सजाने और पवित्रता का प्रतीक
सिंदूरवा सिंदूर सौभाग्य, सुहाग और पवित्रता का प्रतीक चिन्ह
आरोग्यता निरोग शरीर, अच्छा स्वास्थ्य छठ व्रत से मिलने वाला प्रमुख वरदान

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पर्व एकमात्र ऐसा महापर्व है जिसमें अस्ताचलगामी (डूबते हुए) और उदयगामी (उगते हुए) दोनों सूर्यों की पूजा की जाती है। यह पर्व जीवन के चक्र—उत्थान और पतन, दोनों अवस्थाओं—में संतुलन और समभाव रखना सिखाता है। "छठी मईया खोला ना नज़रिया" जैसे गीत इस सांस्कृतिक अनुष्ठान को एक भावनात्मक गहराई प्रदान करते हैं। जब नदी के तट पर या तालाब के किनारे हजारों की संख्या में लोग एक स्वर में ऐसे गीत गाते हैं, तो वहां एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह गीत समाज के सभी वर्गों को जाति, भेद और ऊंच-नीच से ऊपर उठकर एक समान भाव से प्रकृति और दिव्यता के सामने झुकना सिखाता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य: छठ व्रत का 36 घंटे का निर्जल उपवास हमें सिखाता है कि जीवन की किसी भी बड़ी प्राप्ति के लिए संयम और अनुशासन आवश्यक है।
  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य, जल, वायु और पृथ्वी के बिना जीवन असंभव है; इनके प्रति कृतज्ञ होना हमारी संस्कृति का मूल आधार है।
  • समर्पण और विनय: अहंकार का त्याग करके ही परमात्मा की कृपा प्राप्त की जा सकती है, जैसा कि इस गीत के प्रत्येक शब्द में झलकता है।
  • सामूहिक सद्भाव: लोकगीत समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं, जिससे आपसी प्रेम और भाईचारा मजबूत होता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले लोक आस्था के महापर्व 'छठी पूजा' के दौरान गाया और सुना जाता है। जब व्रती महिलाएं और उनके परिवारजन खरना के बाद संध्या अर्घ्य और सुबह के अर्घ्य के लिए सूप और दउरा लेकर घाट की ओर प्रस्थान करते हैं, या जब वे नदी तट पर रात्रि जागरण करते हैं, तब इन पारंपरिक गीतों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इसके अतिरिक्त, घरों में मांगलिक कार्यों, पूजा-पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इन गीतों का विशेष स्थान है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

गीत का शीर्षक छठी मईया खोला ना नज़रिया
मुख्य देवता सूर्य देव एवं छठी मईया (माता षष्ठी)
मुख्य गायक / माध्यम पारंपरिक लोक गायिकाएं एवं लोक कलाकार (जैसे प्रेम कुमार आदि)
संस्कृति / क्षेत्र बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं संपूर्ण प्रवासी समाज
पर्व का समय कार्तिक शुक्ल पक्ष, षष्ठी तिथि (छठ पूजा)
मुख्य संदेश कृपा प्राप्ति, आरोग्य, संतान सुख और प्रकृति वंदन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत सनातन संस्कृति के महान लोक पर्व 'छठ पूजा' से संबंधित है, जो मुख्य रूप से सूर्य उपासना और छठी मईया की आराधना को समर्पित है।

छठी मईया को प्रकृति की देवी और भगवान सूर्य की बहन (या शक्ति रूप) माना जाता है। वह संतानों की रक्षा, लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं।

छठ पूजा में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण और छठी माता की पूजा की जाती है। इस पर्व में उगते और डूबते दोनों सूर्यों को अर्घ्य दिया जाता है।

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास की छठ पूजा के दौरान, जब व्रती महिलाएं घाट की यात्रा करती हैं, प्रसाद बनाती हैं या रात्रि जागरण करती हैं, तब गाया जाता है।

छठ महापर्व कुल चार दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है, उसके दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इसका समापन होता है।

मुख्य रूप से यह व्रत कठिन नियमों के कारण महिलाएं रखती हैं, परंतु पुरुष भी मनोकामना पूरी होने पर या परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत के अनुष्ठान और घाट की व्यवस्था में पूर्ण रूप से भाग लेते हैं।

लोकगीत संस्कृति के मौखिक दस्तावेज हैं जो धर्म, अध्यात्म, पारिवारिक मूल्यों और क्षेत्रीय परंपराओं को बिना किसी लिपि के पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखते हैं।

यह सामग्री पारंपरिक लोक साहित्य, सांस्कृतिक शोध और सनातन पर्वों की मान्यताओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार की गई है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख लोक आस्था के महापर्व छठ और उससे जुड़े पारंपरिक गीतों की सांस्कृतिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें भाषा की शुद्धता, प्रामाणिक भावार्थ और पारंपरिक मान्यताओं का पूरा ध्यान रखा गया है। सामग्री पूरी तरह से जन-कल्याण और सांस्कृतिक प्रसार को समर्पित है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन लोक संस्कृति एवं परंपरा आधारित मौखिक ग्रंथ
  • छठी मईया एवं सूर्योपासना के पारंपरिक गीत संकलन
  • भारतीय व्रत एवं पर्व विधान संहिता

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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