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आरे आरे कोहरा (Pujali Maiya Sagari)

पढ़ें आरे आरे कोहरा - Aare Aare Kohara - Pujali Maiya Sagari - Golu Gold - Bhojpuri Devi Geet 2016 new - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावा

भजन गीत (Devotional Song)

आरे आरे कोहरा - Aare Aare Kohara - Pujali Maiya Sagari - Golu Gold - Bhojpuri Devi Geet 2016 new

"आरे आरे कोहरा - Aare Aare Kohara" भोजपुरी लोक संगीत, शारदीय नवरात्र, चैत्र नवरात्रि तथा लोकआस्था के महापर्व छठ पूजा की पावन संस्कृति का एक अत्यंत मनमोहक और लोकप्रिय संगम है। सुप्रसिद्ध भोजपुरी गायक गोलू गोल्ड (Golu Gold) द्वारा स्वरबद्ध यह देवी गीत माँ आदिशक्ति जगदम्बा के चरणों में समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण रचना है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल की लोक-संस्कृति, माता के प्रति अनन्य समर्पण और विनय का वह जीवंत सेतु है जो जन-जन के हृदय में माँ दुर्गा की महिमा का विस्तार करता है। इसमें निहित भाव 'शरणागत वत्सला' माँ के प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपनी समस्त व्यथाओं को भुलाकर माँ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए आतुर दिखाई देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

आरे आरे कोहरा, पूजली मईया सगरी, आरे आरे कोहरा, पूजली मईया सगरी, मईया के महिमा अपार, दुखवा हरली सगरी... (मुखड़ा) भोर भईल बा माई, तोहार दरसवा पावे खातिर, आरे आरे कोहरा, पूजली मईया सगरी... (अंतरा 1) लाल चुनरिया ओढ़ले माई, सोहे बड़ी प्यारी, भक्तन के कष्ट मिटावे, माई जग से न्यारी, सगरी नगरिया में, जयकारा गूंजे भारी, आरे आरे कोहरा, पूजली मईया सगरी... (अंतरा 2) गोलू गोल्ड के स्वर में, माई के गुण गाई, भक्ति के सागर में, सब कोई डूब जाई, मईया के चरणन में, शीश झुकावे सगरी, आरे आरे कोहरा, पूजली मईया सगरी...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह भोजपुरी देवी गीत अपने सरल शब्दों के माध्यम से बेहद गहरा आध्यात्मिक संदेश और भक्ति का भाव प्रकट करता है। यहाँ इस लोकप्रिय भजन का विस्तृत भावार्थ प्रस्तुत है:

मुखड़ा भाव: गीत की शुरुआत सुबह के समय की पावन बेला से होती है। भक्त माता से कहता है कि हे माई! भोर (सुबह) हो चुकी है और हम केवल आपके दिव्य दर्शन पाने के लिए आतुर हैं। 'कोहरा' और 'सगरी' जैसे लोक शब्दों के प्रयोग से यह स्पष्ट होता है कि पूरा गाँव या समाज मिलकर श्रद्धापूर्वक माँ की पूजा-अर्चना में लीन है। माँ की महिमा अपरंपार है, जो अपने भक्तों के सभी दुखों और संतापों को हर लेती है।

अंतरा 1 भाव: माँ के अलौकिक स्वरूप का वर्णन करते हुए गायक कहता है कि माता ने लाल रंग की चुनरी ओढ़ रखी है, जिसमें उनका रूप अत्यधिक सुंदर और मनमोहक प्रतीत होता है। संसार में माँ जैसी कोई और न्यारी शक्ति नहीं है जो अपने भक्तों के समस्त कष्टों को पल भर में दूर कर दे। संपूर्ण नगर और गाँव में माता के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।

अंतरा 2 भाव: गायक गोलू गोल्ड अपनी कला के माध्यम से माँ का गुणगान कर रहे हैं और श्रोताओं से आह्वान कर रहे हैं कि वे इस भक्ति के सागर में गोता लगाएं। माता के चरणों में संपूर्ण संसार झुकता है और हर भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शीश नमाता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की केंद्रीय भावना 'लोक-समर्पण' और 'सामूहिक आस्था' है। नवरात्रि और लोक पर्वों के दौरान जब पूरा समाज एकजुट होकर देवी की आराधना करता है, तो यह गीत उस उत्सव के उल्लास को द्विगुणित कर देता है। इसमें निहित संदेश यह है कि अहंकार का त्याग कर जब मनुष्य माँ के चरणों में नतमस्तक होता है, तो उसके जीवन के सभी कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

भोजपुरी लोक संगीत परंपरा में इस प्रकार के गीत लोगों को उनकी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि माँ दुर्गा के प्रति निश्छल प्रेम व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। ऐसे प्रेरणादायी गीतों के बारे में अधिक जानने के लिए आप हमारे देवी भजन संग्रह और भोजपुरी भक्ति गानों के विशेष लेखों का अवलोकन कर सकते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) आरे आरे कोहरा (Aare Aare Kohara)
एल्बम / संदर्भ पुजली मईया सगरी (Pujali Maiya Sagari)
स्वर / गायक (Singer) गोलू गोल्ड (Golu Gold)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri / लोक भाषा)
संगीत शैली (Genre) भोजपुरी देवी गीत / लोक भक्ति संगीत
मुख्य विषय (Theme) माता दुर्गा की आराधना, समर्पण और नवरात्रि उत्सव
प्रकाशन वर्ष 2016

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
कोहरा कोहरा / कुष्मांडा या स्थानीय लोक पूजा सामग्री संदर्भ ग्रामीण अंचल में देवी पूजन से जुड़ी पारंपरिक प्रथा
सगरी सारी / संपूर्ण / नगर या गाँव संपूर्ण क्षेत्र या समाज द्वारा सामूहिक पूजा
भोर सुबह / प्रातःकाल पूजा-अर्चना का सबसे उपयुक्त और पावन समय
दरसवा दर्शन माता के अलौकिक रूप को देखने की लालसा
न्यारी सबसे अलग / अद्वितीय माता की महिमा की विशेषता

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भारतीय सनातन संस्कृति में लोकगीतों का स्थान वेदों और पुराणों जितना ही महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि ये सीधे जनसामान्य के हृदय से जुड़े होते हैं। 'आरे आरे कोहरा' जैसे गीत ग्रामीण भारत की उस संस्कृति को उजागर करते हैं जहाँ हर ऋतु परिवर्तन और पर्व पर माता की स्तुति की जाती है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दिनों में जब पूरा वातावरण देवीमय हो जाता है, तब ऐसे गीत हर घर और पंडाल में गूंजते हैं।

यह गीत समाज में भाईचारा, एकता और सामूहिक सहभागिता का संदेश देता है। जब पूरा गाँव मिलकर 'सगरी' रूप में माता की पूजा करता है, तो सामाजिक दूरियां मिट जाती हैं और सब एक ही भक्ति सूत्र में बंध जाते हैं। इसी प्रकार के अन्य पारंपरिक आयोजनों और कथाओं के लिए आप छठ पूजा गीत और नवरात्रि उत्सव विशेष लेख पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्‍न 1: 'आरे आरे कोहरा' गीत के गायक कौन हैं?

उत्तर: इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत के गायक लोकप्रिय कलाकार गोलू गोल्ड (Golu Gold) हैं।

प्रश्‍न 2: यह गीत मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया या सुना जाता है?

उत्तर: यह गीत मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि और देवी पूजा के पावन अवसरों पर विशेष रूप से सुना जाता है।

प्रश्‍न 3: इस गीत में किस भाषा का प्रयोग किया गया है?

उत्तर: इस गीत में ठेठ भोजपुरी लोक भाषा और ग्रामीण शब्दावली का सुंदर प्रयोग किया गया है।

प्रश्‍न 4: 'सगरी' शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: इस संदर्भ में 'सगरी' का अर्थ संपूर्ण, सारी अथवा पूरे समाज/नगर द्वारा सामूहिक रूप से पूजा करने से है।

प्रश्‍न 5: क्या यह गीत पारंपरिक लोक शैली पर आधारित है?

उत्तर: हाँ, यह गीत भोजपुरी लोक संगीत की पारंपरिक शैली और आधुनिक देवी संगीत का एक सुंदर मिश्रण है।

प्रश्‍न 6: इस भजन से भक्तों को क्या संदेश मिलता है?

उत्तर: यह भजन भक्तों को सुबह सवेरे माता के दरबार में हाजिरी लगाने, अहंकार त्यागने और सामूहिक रूप से भक्ति भाव में डूबने की प्रेरणा देता है।

प्रश्‍न 7: इस गीत को कब रिलीज़ किया गया था?

उत्तर: यह गीत वर्ष 2016 के आसपास नए भोजपुरी देवी गीत के रूप में काफी लोकप्रिय हुआ था।

प्रश्‍न 8: ऐसे देवी गीतों से संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: ऐसे गीत हमारी प्राचीन लोक संस्कृति, रीति-रिवाजों और देवी-देवताओं के प्रति आस्था को युवा पीढ़ी तक सुरक्षित रूप से पहुँचाने का कार्य करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस पृष्ठ पर दी गई गीत की लिरिक्स, शब्दार्थ और सांस्कृतिक व्याख्या को पाठकों की सुविधा और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य सनातन लोक संस्कृति और भक्ति संगीत के मौलिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है।

स्रोत एवं संदर्भ

  • पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत और देवी गीत संग्रह
  • भक्ति संगीत प्रकाशन एवं लोककला अभिलेखागार
  • क्षेत्रीय सांस्कृतिक उत्सव एवं नवरात्रि परंपराएं

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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