अंकुश राजा और शिल्पी राज का पावन भोजपुरी देवी गीत
भोजपुरी भक्ति संगीत की परंपरा में नवरात्रि और देवी जागरण के पावन अवसरों पर माँ दुर्गा के जयकारों के साथ-साथ पारिवारिक रिश्तों की मिठास और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जावान देवी गीत है - "मेला में घुमा दS जीजा के भाई", जिसे अपनी सुरीली और ओजस्वी आवाज़ से सजाया है लोकप्रिय गायक अंकुश राजा और स्वर कोकिला शिल्पी राज ने। यह गीत केवल एक सामान्य लोकगीत नहीं है, बल्कि शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के दर्शन, मेले की उमंग और ग्रामीण-शहरी परिवेश के उल्लास को व्यक्त करने वाला एक जीवंत सांस्कृतिक दस्तावेज है। इस भजन/गीत में एक ननद और उसके जीजा के भाई (देवर) के बीच के सहज, पवित्र और हास-परिहास से भरे रिश्ते को माँ दुर्गा के दर्शन की लालसा के साथ बहुत ही सुंदर ढंग से पिरोया गया है। जब शारदीय नवरात्रि की षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी या नवमी के दिन पूरे उत्तर भारत और विशेषकर बिहार-उत्तर प्रदेश के गाँवों व शहरों में माता के पंडाल सजते हैं, तब ऐसे गीतों की गूँज हर तरफ सुनाई देती है। यह गीत साधकों और श्रद्धालुओं को माँ के दरबार तक पहुँचने और भक्ति भाव में झूमने के लिए प्रेरित करता है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
स्थायी (मुखड़ा):
नीम के पेड़वा से झूलेली शेरावाली हो,
दर्शन दीता ए मईया, बिगड़ल बना दS खाली हो!
अरे मेला में घुमा दS जीजा के भाई,
दर्शन करा दS मईया के, अरजी बा लागल भाई!
जीजा के भाई, मेला में घुमा दS जीजा के भाई...
अंतरा 1:
लहँगवा नया सिलवले बानी, चुनरी रंगवले बानी लाल,
मईया के दर्शन खातिर, मन भइल बा बेहाल।
अरे भीड़ बहुत बा मेला में, रउवा धनी हाथ धड़ाई,
मेला में घुमा दS जीजा के भाई,
दर्शन करा दS मईया के, अरजी बा लागल भाई!
अंतरा 2:
ससुरा से जब आई बानी, मैहर के धाम,
ओढ़निया पर लिखवले बानी, शेरावाली के नाम।
चलो जल्दी से पंडाल में, अब ना करा दS देरी भाई,
मेला में घुमा दS जीजा के भाई,
दर्शन करा दS मईया के, अरजी बा लागल भाई!
समापन / रिफ्रेन:
जय माता दी बोलs, झूम के नाचs,
मईया के दरबार में आके, दुखवा भगास!
मेला में घुमा दS जीजा के भाई,
अंकुश-शिल्पी के सुरवा पर, झूमे पूरा गाँव-भाई!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत का भावार्थ अत्यंत सरल होने के साथ-साथ लोक संस्कृति की गहरी परतों को समेटे हुए है। गीत में एक नौविवाहिता या परिवार की सदस्य (ननद) अपने जीजा के भाई से आग्रह करती है कि वह उसे नवरात्रि के मेले में घुमाने ले चले और माँ दुर्गा के दर्शन कराए। सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व केवल उपवास और अनुष्ठान का ही नहीं, बल्कि सामाजिक उल्लास और सामूहिक आनंद का भी पर्व है। जब भक्त नए वस्त्र पहनकर माँ के दरबार की ओर बढ़ता है, तो उसके मन में एक बालसुलभ जिद और अपार उत्साह होता है। "लहँगवा नया सिलवले बानी, चुनरी रंगवले बानी लाल" पंक्ति के माध्यम से उस पारंपरिक तैयारी को दर्शाया गया है जो हर सनातनी नारी माँ की आराधना के लिए करती है। यहाँ मेला घूमना केवल भौतिक मनोरंजन नहीं है, बल्कि माता के अलौकिक स्वरूप का दर्शन करने की तीव्र व्याकुलता है। देवर और भाभी का यह संवाद भारतीय पारिवारिक मर्यादा, हँसी-मज़ाक और आपसी स्नेह का सुंदर प्रतीक है, जहाँ हर रिश्ते में भक्ति का रस घुला हुआ है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की मूल भावना उल्लास, भक्ति, पारिवारिक आत्मीयता और देवी के प्रति अनन्य समर्पण है। संगीत के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि भक्ति केवल एकांत में की जाने वाली साधना ही नहीं है, बल्कि उत्सवधर्मी समाज में मिलकर, गाकर और झूमकर भी ईश्वर के प्रति प्रेम व्यक्त किया जा सकता है। माँ दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं, और उनकी आराधना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। इस गीत का संदेश यह है कि सांसारिक उत्तरदायित्वों को निभाते हुए भी जब मनुष्य अपने कुल-परिवार के साथ मिलकर धार्मिक उत्सवों में भाग लेता है, तो समाज में प्रेम और सद्भाव की भावना सुदृढ़ होती है। इसके अतिरिक्त, श्री हनुमान चालीसा और अन्य स्तोत्रों की तरह ही देवी गीतों का गायन भी अंतःकरण को शुद्ध करता है और भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Name) | मेला में घुमा दS जीजा के भाई |
|---|---|
| मुख्य गायक (Singers) | अंकुश राजा (Ankush Raja) एवं शिल्पी राज (Shilpi Raj) |
| शैली (Genre) | भोजपुरी देवी गीत / लोक भक्ति भजन |
| भाषा (Language) | भोजपुरी (हिंदी क्षेत्र की लोक भाषा) |
| विषय (Theme) | शारदीय/चैत्र नवरात्रि, माँ दुर्गा दर्शन, लोक उत्सव |
| संबंधित पावन पर्व | शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, दुर्गा पूजा |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
अंकुश राजा और शिल्पी राज वर्तमान समय में भोजपुरी संगीत जगत के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित कलाकारों में गिने जाते हैं। अंकुश राजा अपनी दमदार और भावपूर्ण गायकी के लिए जाने जाते हैं, वहीं शिल्पी राज की जादुई आवाज़ ने भोजपुरी संगीत प्रेमियों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। इन दोनों की जुगबंदी जब भी किसी देवी गीत या लोक पर्व पर आती है, तो वह श्रोताओं के बीच तुरंत वायरल हो जाती है। इस गीत के माध्यम से उन्होंने पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक संगीत संयोजन के साथ प्रस्तुत किया है, जिससे युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और देवी भक्ति से जुड़ती है। कलाकारों ने अपनी गायकी के जरिए यह साबित कर दिया है कि लोकगीतों के माध्यम से भी धर्म और संस्कृति का प्रसार बहुत प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| पेड़वा | पेड़ (वृक्ष) | नीम के पवित्र पेड़ पर माँ का वास माना जाता है |
| शेरावाली | शेर पर सवार रहने वाली माँ दुर्गा | माता का एक प्रसिद्ध संबोधन |
| लहँगवा | पारंपरिक परिधान (लहंगा) | त्योहार पर पहना जाने वाला नया वस्त्र |
| अरजी | प्रार्थना या निवेदन | माता के दर्शन की तीव्र इच्छा |
| पंडाल | माता के बैठने का अस्थायी दरबार | नवरात्रि में सजाए जाने वाले भव्य पूजा स्थल |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
सनातन संस्कृति में मेलों और उत्सवों का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व रहा है। प्राचीन काल से ही ऋषियों और आचार्यों ने उत्सवधर्मिता को धर्म का एक अंग माना है। नवरात्रि के नौ दिनों में जब पूरा देश माँ जगदम्बा की आराधना में लीन होता है, तो ऐसे गीत सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर जब पंडालों में जाते हैं, तो पीढ़ियों के बीच का अंतर मिटता है और प्रेम बढ़ता है। माँ दुर्गा को जगत जननी माना गया है, और उनकी शरण में जाने मात्र से भक्तों के सारे दुखों का निवारण हो जाता है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि भक्ति में आनंद और उल्लास का भी उतना ही स्थान है जितना कि तप और ध्यान का।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- सामूहिकता और भाईचारा: यह गीत सिखाता है कि पर्व और त्योहार अकेले मनाने की बजाय परिवार और समाज के साथ मिलजुलकर मनाने से उनका आनंद कई गुना बढ़ जाता है।
- भक्ति में उल्लास: भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा केवल रुखे उपवासों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन को सकारात्मकता और उत्सव के साथ जीना भी भक्ति का ही एक रूप है।
- संस्कृति से जुड़ाव: अपनी मातृभाषा और लोक परंपराओं का आदर करना तथा उन्हें जीवित रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।
- शरणागति का भाव: जीवन की भागदौड़ के बीच समय निकालकर ईश्वर के दरबार में हाजिरी लगाना मानसिक शांति प्रदान करता है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
इस प्रकार के ऊर्जावान और भक्तिरस से परिपूर्ण भोजपुरी देवी गीतों को सुनने और गुनगुनाउने के सबसे प्रमुख अवसर निम्नलिखित हैं:
- शारदीय नवरात्रि (आश्विन मास): दुर्गा पूजा के नौ दिनों में सुबह-शाम पंडालों और घरों में।
- चैत्र नवरात्रि (वासंती नवरात्रि): चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में माँ के आगमन पर।
- देवी जागरण एवं चौकी: माता के भक्तों द्वारा आयोजित रात्रि जागरण के कार्यक्रमों में।
- मेला भ्रमण के दौरान: जब श्रद्धालु परिवार के साथ माता के दर्शन के लिए मेलों में जाते हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| गीत का शीर्षक | मेला में घुमा दS जीजा के भाई |
|---|---|
| कलाकार | अंकुश राजा, शिल्पी राज |
| संगीत विधा | भोजपुरी देवी गीत / लोक भजन |
| प्रमुख देवता | माँ दुर्गा (शेरावाली) |
| मुख्य भाव | उल्लास, पारिवारिक स्नेह, दर्शन की लालसा |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, दुर्गा पूजा महोत्सव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह आलेख लोक संस्कृति, भक्ति साहित्य और आधुनिक भोजपुरी संगीत के समन्वय को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। इसमें गीत के शब्दों, उनके अंतर्निहित भावों तथा सांस्कृतिक महत्व को पूरी प्रामाणिकता के साथ विश्लेषित किया गया है ताकि पाठकों को श्रेष्ठ सामग्री मिल सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- भोजपुरी लोक संगीत परंपरा एवं संस्कृति अध्ययन
- शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि अनुष्ठान परंपराएं
- पारंपरिक लोक गीत एवं भजन संग्रह
- सांस्कृतिक एवं धार्मिक उत्सवों के लोक पक्ष पर आधारित लेख
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