Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नवरात्री I LAKHBIR SINGH LAKKHA देवी I Best Collection of Devi Bhajans

पढ़ें नवरात्री Special 2019 I LAKHBIR SINGH LAKKHA देवी भजन I Best Collection of Devi Bhajans का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध

नवरात्री Special 2019 I LAKHBIR SINGH LAKKHA देवी भजन I Best Collection of Devi Bhajans - सम्पूर्ण परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

आदिशक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरَس्वती को समर्पित यह अत्यंत पावन भजन संग्रह "नवरात्री Special 2019 I LAKHBIR SINGH LAKKHA देवी भजन I Best Collection of Devi Bhajans" जगत जननी जगदम्बा की असीम कृपा, महिमा और उनके वात्सल्य रूप का अलौकिक गान करता है। सनातन संस्कृति और हिन्दू धर्म में आदिशक्ति को सम्पूर्ण ब्रह्मांड का आदि कारण, ऊर्जा और चेतना का मूल स्त्रोत माना गया है। प्रसिद्ध भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा जी की सुरीली, ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज में गाए गए ये देवी भजन भक्तों के अंतःकरण में भक्ति, श्रद्धा और आत्मबल का संचार करते हैं। नवरात्रि के पावन पर्व पर जब सम्पूर्ण वातावरण माँ दुर्गा के जयकारों से गूंज उठता है, तब लक्खा जी की यह बेस्ट कलेक्शन एल्बम घर-घर में एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह करती है। इस भजन संग्रह के माध्यम से साधक माता के चरणों में अपनी निष्काम भक्ति अर्पित करते हैं और अपने जीवन के समस्त दुखों, संतापों एवं नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाते हैं। यह आलेख आपको इसी अद्भुत भजन संग्रह के सम्पूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन विधि और जीवनोपयोगी संदेशों से परिचित कराएगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूलाधार एवं मुखड़ा:

ओ शेरावाली, पहाड़ो वाली, जोत वाली माता तेरी जय हो!
सच्चे दरबार की जय, ऊँचे पहाड़ो वाली माता तेरी जय हो!
तेरी रहमत का जो दरिया बहे, जो भी डूबे वो पार तरे,
मैया तेरे चरणों की धूल जो पा ले, उसके सारे बिगड़े काम बने!

प्रथम अंतर:

नवरात्रों में स सजता दरबार तुम्हारा, मैया तेरा पावन रूप है न्यारा।
दूर-दूर से तेरे भक्त हैं आते, झोली फैलाकर मन्नत मांगते जाते।
जो कोई सच्चे मन से ध्यान लगाए, माता रानी उसके भवन चली आए।
शेरावाली के दरबार में दुःख कभी टिक न पाए!

द्वितीय अंतर:

लाल चुनरिया माथे पे बिन्दिया, रूप है तेरा ममता का सिंधिया।
हाथ त्रिशूल खप्पर विराजे, असुरन के संहार को मैया साजे।
भक्तों के संकट को पल में टारे, ऐसी दयालु है माँ जगमग सारे।
लखबीर गाये महिमा तुम्हारी, मैया स्वीकारो विनती हमारी!

समापन एवं जयकारा:

बोलो सच्चे दरबार की जय!
छोटे-बड़े सब मिल बोलो, जय माता दी!
सुख शांति रिद्धि सिद्धि दे, जय माता दी!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

लखबीर सिंह लक्खा जी द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय देवी भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और साधक के हृदय को झकझोर देने वाला है। भजन की शुरुआत माँ शेरावाली और पहाड़ो वाली माता के जयकारों के साथ होती है, जो भक्त के भीतर उत्साह और ऊर्जा का संचार करती है। 'तेरी रहमत का जो दरिया बहे' पंक्ति यह दर्शाती है कि आदिशक्ति माँ भवानी की करुणा और कृपा का भंडार असीम है। जिस प्रकार नदी हर प्यासी भूमि को तृप्त करती है, उसी प्रकार देवी की कृपा का प्रवाह हर दुखी और आर्त भक्त के जीवन को संवार देता है।

अंतरों के माध्यम से कवि और गायक यह स्पष्ट करते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में जब पृथ्वी पर माँ का आगमन होता है, तो पूरा संसार उत्सवमय हो जाता है। लाल चुनरिया और माथे पर बिन्दिया धारे हुए माता का यह स्वरूप अत्यंत सौम्य, ममतामयी और करुणामयी है। साथ ही, हाथ में त्रिशूल और खप्पर धारण करने वाला उनका रूप यह संदेश देता है कि माँ जितनी वात्सल्यमयी हैं, उतनी ही दुष्टों और नकारात्मक वृत्तियों का नाश करने वाली भयंकर भी हैं। इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि अहंकार और बुराइयों का त्याग कर जो भी मनुष्य माता के चरणों में शरणागत होता है, माता उसके जीवन के सभी अंधकार दूर कर देती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन संग्रह की मुख्य विशेषता इसकी संगीतमय संरचना, लखबीर सिंह लक्खा की ऊर्जावान गायकी और माता के प्रति अनन्य समर्पण भाव है। देवीभागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) में उल्लेख मिलता है कि कलियुग में नामस्मरण और संकीर्तन ही मोक्ष और शांति का सबसे सरल मार्ग है। नवरात्रों के विशेष अवसर पर इस भजन का श्रवण करने से साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भजन केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह एक जीवित मंत्र की तरह है जो मन के विकारों को धोकर शुद्ध करता है। इसके माध्यम से भक्त श्री दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती पाठ की ऊर्जा का अनुभव अपने घर पर ही कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी भजनों को गाने और सुनने के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 बजे से 6 बजे तक) या संध्या बेला (गोधूलि बेला) का समय सर्वोत्तम माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से सुबह की पूजा और संध्या आरती के समय इस भजन को बजाना या गाना अत्यधिक शुभ फलदायी होता है।

  • स्थान की पवित्रता: पूजा घर या मंदिर के समक्ष स्वच्छ आसन पर बैठकर श्रवण करें।
  • दीप प्रज्ज्वलन: घी या तिल के तेल का दीपक और धूपबत्ती प्रज्वलित कर माता का ध्यान करें।
  • भाव एवं मुद्रा: मन में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण का भाव रखें। ताली बजाकर या तल्लीनता के साथ संकीर्तन करें।
  • व्रत के दौरान: पापमोचनी एकादशी व्रत कथा या नवरात्रि के उपवास के समय इस प्रकार के भजन मानसिक एकाग्रता बढ़ाते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में आदिशक्ति जगदम्बा माँ दुर्गा, माँ महालक्ष्मी और माँ महासरस्वती हैं, जो त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की शक्ति का स्त्रोत हैं। सनातन धर्म में शक्ति उपासना का विशेष स्थान है। इस भजन को अपनी सुरीली आवाज से अमर बनाने वाले गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा जी हैं, जिन्हें भारत और विदेशों में 'भजन सम्राट' के रूप में जाना जाता है। लक्खा जी ने अपनी संपूर्ण जीवन यात्रा में माता रानी और अन्य देवी-देवताओं के अनगिनत लोकप्रिय भजन गाकर करोड़ों भक्तों को भक्ति मार्ग से जोड़ा है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह विशेष भजन संग्रह वर्ष 2019 के नवरात्रों के पावन अवसर पर रिलीज किया गया था। इसकी पृष्ठभूमि में पारंपरिक लोक संगीत और पंजाबी देवी गीतों की मधुरता का अनूठा मिश्रण है। लक्खा जी की मंडली द्वारा रचित इसके बोल अत्यंत सरल, सहज और आम जनमानस की जुबान पर आसानी से चढ़ने वाले हैं। यही कारण है कि यह भजन आज भी देश के हर कोने में दुर्गा पंडालों, माता की चौकी और जागरण कार्यक्रमों में बड़े चाव से सुना और गाया जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी, ब्रज मिश्रित खड़ी बोली और पंजाबी शब्दावली का सुंदर समन्वय है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'ममता का सिंधिया' और 'रहमत का जो दरिया बहे'। काव्य शैली गेय, प्रवाहमयी और संगीतमय है, जो श्रोताओं को तुरंत मंत्रमुग्ध कर लेती है। शब्दों की सरलता के कारण बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इसे आसानी से गा सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: जैसे नदी समुद्र में मिलकर अपनी अलग पहचान मिटा देती है, वैसे ही भक्त को अपना अहंकार छोड़कर माँ के चरणों में समर्पित हो जाना चाहिए।
  • विश्वास की शक्ति: संकट के समय घबराने के बजाय अजेय शक्ति जगदम्बा पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • करुणा और शक्ति का संतुलन: माता का स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में ममता और करुणा के साथ-साथ अन्याय के खिलाफ दृढ़ता और शक्ति का होना भी आवश्यक है।
  • नियमित साधना: जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी ईश्वर स्मरण और संकीर्तन के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक प्रसंग
शेरावाली सिंह (शेर) की सवारी करने वाली माता दुर्गा का प्रतीक, जो प्रकृति और ऊर्जा की स्वामिनी हैं।
रहमत कृपा, दया, आशीर्वाद भक्तों पर ईश्वर की अकारण करुणा का प्रवाह।
खप्पर रणकपाल या अस्त्र विशेष असुरों और नकारात्मक वृत्तियों का संहार करने वाला रूप।
दरबार पवित्र धाम या पावन स्थल जहाँ भक्तों की पुकार सुनी जाती है और न्याय मिलता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "ओ शेरावाली, पहाड़ो वाली, जोत वाली माता तेरी जय हो!"
भावार्थ: गायक सबसे पहले माता के तीनों प्रसिद्ध स्वरूपों का आह्वान करते हैं—जो पर्वतों पर विराजमान हैं (वैष्णो देवी आदि), जो शेर पर सवार होकर शक्ति का प्रदर्शन करती हैं और जिनकी अखंड ज्योति प्रज्वलित कर भक्त पूजा करते हैं। उनकी जय-जयकार से भजन का श्रीगणेश होता है।

पंक्ति: "तेरी रहमत का जो दरिया बहे, जो भी डूबे वो पार तरे।"
भावार्थ: माता की कृपा रूपी नदी इतनी विशाल है कि जो भी मनुष्य इसमें श्रद्धा भाव से गोता लगाता है, वह भवसागर से तर जाता है और उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन देवी मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि संसार के हर कण और हर प्राणी में माँ भगवती की ही शक्ति निवास करती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी विवरण
भजन का नाम नवरात्री Special 2019 I LAKHBIR SINGH LAKKHA देवी भजन
मुख्य गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा जी
ाराध्य देवी आदिशक्ति माता दुर्गा (शेरावाली)
भाषा हिंदी एवं पंजाबी मिश्रित
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, विनय और उत्सव
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध देवी भजन लोकप्रिय भजन सम्राट श्री लखबीर सिंह लक्खा जी द्वारा अपनी मधुर आवाज में गाया गया है।

नवरात्रि के दिनों में, प्रातःकाल पूजा के समय या संध्या आरती के वक्त इस भजन को सुनना सबसे उत्तम माना जाता है।

देवी भजन सुनने से मन शांत होता है, घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, यह भजन माता की चौकी, जागरण और सामूहिक संकीर्तन कार्यक्रमों के लिए अत्यंत लोकप्रिय और उपयुक्त है।

इस भजन की मुख्य आराध्य आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती हैं।

हाँ, लक्खा जी ने माता के अलावा श्री कृष्ण, हनुमान जी और शिव जी के भी हज़ारों प्रसिद्ध भजन गाए हैं।

संगीत और भक्ति का संयोजन मस्तिष्क की तरंगों को शांत करता है, जिससे तनाव कम होता है और सकारात्मकता बढ़ती है।

हाँ, इसके बोल बहुत ही सरल और लयबद्ध हैं, जिन्हें कुछ ही बार सुनने या पढ़ने पर आसानी से याद किया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख को सनातन धर्म की परंपराओं, देवी उपासना के पौराणिक ग्रंथों और लोक संगीत के मानदंडों को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है। सभी पंक्तियों और अर्थों को शुद्ध हिंदी में प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति रस की अनुभूति हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण - महर्षि वेद व्यास रचित
  • मार्कण्डेय पुराण एवं दुर्गा सप्तशती
  • सनातन भक्ति संगीत परंपरा एवं लोक गाथाएं
  • भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा संकीर्तन संग्रह

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!