Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

अंगना लिपईबो ए मईया लिरिक्स ( Angana Lipaibo A Maiya Lyrics in Hindi) - Pawan Singh Chait Navratri Song Devi Geet

पवन सिंह का प्रसिद्ध चैत्र नवरात्रि देवी गीत 'अंगना लिपईबो ए मईया लिरिक्स' हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित भक्तिमय प्रस्तुति।

देवी भजन / लोकगीत

अंगना लिपईबो ए मईया लिरिक्स (Angana Lipaibo A Maiya Lyrics in Hindi) - पवन सिंह चैत्र नवरात्रि गीत

रचनाकार: पारंपरिक लोक शैली | स्वर: स्वर कोकिल पवन सिंह | प्रस्तुति: Bhaktilok.in

सनातन संस्कृति में चैत्र और शारदीय नवरात्रि का पर्व आदिशक्ति माँ दुर्गा की उपासना का सबसे पवित्र और ऊर्जावान काल माना जाता है। इस पावन अवसर पर संपूर्ण भारतवर्ष, विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में देवी गीतों की गूंज सुनाई देती है। भोजपुरी संगीत जगत के सिरमौर और लोकप्रिय गायक पवन सिंह द्वारा गाया गया यह लोकप्रिय चैत्र नवरात्रि देवी गीत "अंगना लिपईबो ए मईया" माँ अम्बे के प्रति एक अनन्य समर्पण, शुचिता और आंतरिक उल्लास का अद्भुत प्रतीक है। इस भजन में उस ग्रामीण और पारंपरिक संस्कृति का सजीव चित्रण किया गया है जहाँ माँ के आगमन से पहले उनके स्वागत के लिए पूरे घर और आंगन को गोबर-मिट्टी से लीपकर पवित्र किया जाता है, जो केवल बाहरी स्वच्छता नहीं बल्कि मन की शुद्धि और भक्ति के उच्च भाव को दर्शाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मखड़ा (Refrain): अंगना लिपईबो ए मईया, अउरी हरियर कईबो दुअरिया, आईहें मईया रानी मोर, खिले मोर फुलवरिया! अंगना लिपईबो ए मईया... अंतरा 1: गोबर मटिया से अंगना लिपाई, गंगा जल छिट के अरघ लगाई। चरण पखारब चरणो के धोई, अइसन भाग्य बड़भागी के होई। लाल चुनरिया सजे दरबार, झूम रही जगमग संसार। आईहें मईया रानी मोर... अंतरा 2: अड़हुल के माला मईया के सोहे, मुखड़ा देख के मनिया मोहे। नारियल चुनरी नारियल पाड़ा, भेट धइले बानी चरणा में आड़ा। दुखिया के दुःख तू हर लीहें, दर्शन देके भाग जगा दीहें। आईहें मईया रानी मोर... अंतरा 3: घर-घर बाजे बधाईया के ढोलक, नाचत गावत झूमे हर बालक। चैत्र के रितु पवन सुहानी, गावत बानी महिमा महारानी। पवन सिंह के अरज सुनीहें, भवसागर से नइया बचीहें। आईहें मईया रानी मोर, खिले मोर फुलवरिया! अंगना लिपईबो ए मईया...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

पवन सिंह द्वारा स्वरबद्ध इस लोकप्रिय चैती देवी गीत का भावार्थ अत्यंत गहरा और लोक-संस्कृति से जुड़ा हुआ है। गीत की हर एक पंक्ति में एक भक्त की अधीरता, माँ के प्रति उसका अगाध प्रेम और उनके स्वागत की भव्य तैयारी स्पष्ट रूप से झलकती है।

प्रथम भाव (स्वागत और पवित्रता): भक्त अपनी माता (आदिशक्ति) से कहता है कि हे मईया! जब आप हमारे घर पधारेंगी, तो मैं आपके स्वागत के लिए अपने आँगन को लीपकर पूरी तरह स्वच्छ और पवित्र कर दूंगा। ग्रामीण परंपरा में गोबर और मिट्टी से आँगन लीपने को सर्वोच्च पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही घर की चौखट और दुआर को भी हर प्रकार से सजाया जाएगा, ताकि जब जगत जननी आएं, तो उनकी दृष्टि पड़ते ही प्रसन्न हो जाएं।

द्वितीय भाव (आंतरिक भक्ति और समर्पण): गीत में आगे भक्त कहता है कि वह गंगा जल छिड़ककर उस स्थान को और अधिक पावन बनाएगा जहाँ माता का आसन लगेगा। वह माता के चरणों को धोने और उनकी वंदना करने का सौभाग्य पाना चाहता है। लाल चुनरी और अड़हुल के फूलों से सजे माँ के दरबार का रूप साधक के मन को मोह लेता है। वह केवल भौतिक पूजा नहीं कर रहा, बल्कि अपनी संपूर्ण आत्मा को माँ के चरणों में समर्पित कर रहा है।

तृतीय भाव (लोक उल्लास और प्रार्थना): चैत्र नवरात्रि के आगमन पर प्रकृति भी खिल उठती है। ठंडी बयार और खेतों की हरियाली के बीच घर-घर में बधाई गीत गूंजते हैं। गायक पवन सिंह अपने गीतों के माध्यम से माता से प्रार्थना करते हैं कि हे महारानी! मेरे इस छोटे से निवेदन को स्वीकार करें और इस भवसागर से हमारी नइया को पार लगाएं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

पारंपरिक लोक शैली का संकलन

यह गीत आधुनिक संगीत के साथ-साथ पारंपरिक लोक धुनों और संस्कारों का एक सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है।

चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व

चैत्र नवरात्रि नवसंवत्सर की शुरुआत और माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का समय है। इस समय ऐसे गीतों के श्रवण से घर में सकारात्मक ऊर्जा और चैतन्य का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के देवी गीतों को सुनने और गाने के लिए कोई सख्त नियम नहीं होते, क्योंकि भक्ति भाव ही सबसे बड़ा माध्यम है। तथापि, निम्नलिखित अवसरों पर इनका विशेष महत्व है:

  • चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि: नौ दिनों तक चलने वाले इन पावन पर्वों पर सुबह और संध्या की पूजा के दौरान।
  • माता की चौकी या जागरण: पारिवारिक आयسن या देवी जागरण के दौरान जब पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।
  • दैनिक पूजा के समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात जब घर की साफ-सफाई की जाती है, तब ऐसे भजन मन को प्रफुल्लित करते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस गीत की मुख्य आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा हैं, जिन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समन्वित रूप माना जाता है। सनातन धर्म में शक्ति उपासना का विशेष स्थान है। देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) में माँ के विभिन्न रूपों और उनकी महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। पवन सिंह ने अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी से इसी शक्ति को लोक-भाषा के माध्यम से घर-घर तक पहुँचाया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह गीत ठेठ भोजपुरी और अंगिका/मैथिली प्रभाव वाली लोक भाषा में रचित है। इसकी काव्य शैली अत्यंत सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है। इसमें अलंकारों की जटिलता के बजाय सीधे शब्दों में जनमानस के मन की बात कही गई है। 'अंगना लिपाईबो', 'हरियर दुअरिया', 'फुलवरिया' जैसे लोक शब्दों का प्रयोग श्रोताओं के भीतर अपने गाँव, मिट्टी और संस्कृति के प्रति एक गहरी अपनेपन की भावना जगाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

भक्ति केवल हाथ जोड़कर खड़े रहने का नाम नहीं है, बल्कि अपने जीवन और परिवेश को पवित्र बनाने का मार्ग है। इस भजन से हमें निम्नलिखित जीवन सीख मिलती हैं:

  1. पवित्रता और स्वच्छता: ईश्वर का वास वहीं होता है जहाँ तन, मन और परिवेश स्वच्छ होता है।
  2. अतिथि सत्कार की संस्कृति: भगवान या माता को अपने घर का अतिविशिष्ट अतिथि मानकर उनके स्वागत की तैयारी करना हमारी महान संस्कृति को दर्शाता है।
  3. भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
    शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
    अंगना घर का आँगन परिवार और हृदय का प्रतीक, जहाँ divine energy का स्वागत होता है।
    लिपईबो गोबर-मिट्टी से लीपना पारंपरिक शुद्धि और पवित्रता का अनुष्ठान।
    फुलवरिया फूलों का बगीचा या वाटिका भक्त का जीवन रूपी बगीचा जिसमें भक्ति के फूल खिलते हैं।
    अड़हुल गुड़हल का लाल फूल माता दुर्गा को अति प्रिय पुष्प, जो ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है।
    भवसागर संસાર रूपी दुखों का सागर जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाने का मार्ग।

    एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

    भजन का नाम अंगना लिपईबो ए मईया (Angana Lipaibo A Maiya)
    आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा / भवानी
    गायक / स्वर पवन सिंह (Pawan Singh)
    संगीत शैली भोजपुरी चैत्र नवरात्रि देवी गीत / लोक भजन
    भाषा भोजपुरी / हिंदी लोक भाषा
    मुख्य भाव उल्लास, स्वागत, शुचिता एवं अनन्य भक्ति
    उपयुक्त अवसर चैत्र नवरात्रि, देवी जागरण, कन्या पूजन

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    उत्तर: इस लोकप्रिय चैत्र नवरात्रि देवी गीत को भोजपुरी के प्रख्यात और लोकप्रिय गायक पवन सिंह ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

    उत्तर: इस भजन का मुख्य विषय चैत्र नवरात्रि के अवसर पर अपने घर और आँगन को पवित्र कर माता दुर्गा का भव्य स्वागत करना और उनकी कृपा प्राप्त करना है।

    उत्तर: चैत्र नवरात्रि हिंदू नवसंवत्सर की शुरुआत का प्रतीक है। इन नौ दिनों में आदिशक्ति माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिससे जीवन में बल, बुद्धि, ऊर्जा और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

    उत्तर: भारतीय ग्रामीण संस्कृति में गोबर और मिट्टी से आँगन लीपना घर की पूर्ण शुद्धि और किसी विशिष्ट मेहमान या देवी-देवता के स्वागत की सबसे पुरानी और पवित्र परंपरा रही है।

    उत्तर: हाँ, इसे माता की चौकी, मंगलवार या शुक्रवार की पूजा, और किसी भी देवी अनुष्ठान के दौरान अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

    उत्तर: माँ दुर्गा को लाल रंग के फूल जैसे अड़हुल (गुड़हल) और कमल का फूल अत्यंत प्रिय हैं।

    उत्तर: इस गीत को सुनकर श्रोता को अपनी संस्कृति से जुड़ाव, मानसिक शांति और माँ के प्रति अगाध भक्ति की अनूठी अनुभूति होती है।

    उत्तर: हाँ, भक्तजनों की सुविधा के लिए Bhaktilok.in पर इसके शुद्ध बोल और भावार्थ हिंदी में उपलब्ध कराए गए हैं ताकि आप आसानी से इसका पाठ कर सकें।

    संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

    Bhaktilok.in पर प्रस्तुत यह सामग्री सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और संगीत प्रेमियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक प्रामाणिक, सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुँचाना है। यदि इस गीत के किसी शब्द या भावार्थ में आपको कोई सुझाव देना हो, तो आप संपर्क कर सकते हैं।

    स्रोत एवं संदर्भ

    • पारंपरिक लोक संगीत एवं भोजपुरी देवी गीत परंपरा
    • देवी भागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती (शास्त्रीय संदर्भ)
    • पवन सिंह ऑफिशियल एल्बम एवं संगीत प्रकाशन

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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