Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

Khesari Lal Yadav का सबसे बड़ा छठ गीत (Chhath Hoi Ghat Par)

पढ़ें Khesari Lal Yadav का सबसे बड़ा छठ गीत | छठ होइ घाट पर | Chhath Puja Geet 2020 | Chhath Hoi Ghat Par का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा

छठ महापर्व लोक-आस्था, शुचिता और प्रकृति संरक्षण का सबसे अनूठा उत्सव है। इस पावन अवसर पर संगीत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और श्रद्धा का संचार करती है। भोजपुरी लोक-संगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले लोकप्रिय कलाकार खेसारी लाल यादव का गीत "छठ होइ घाट पर" (Chhath Hoi Ghat Par) वर्ष 2020 में रिलीज होने के बाद से ही करोड़ों भक्तों के दिलों की धड़कन बना हुआ है। यह गीत न केवल एक संगीतमय प्रस्तुति है, बल्कि यह बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और छठ पूजा के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस कालजयी गीत के बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और छठ महापर्व की महिमा का सांगोपांग विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए
बहंगी घाटा पहुंचाए दा, छठी मइया दरशन देईं
छठ होइ घाट पर, छठी मइया के बरतिया
सभे मिलि गावेली, छठी मइया के गीतिया...

अंतरा 1:

सूप में सजेला ठेकुआ, दउरा में फल-फूल
भोरवे में जाइब घाट, ना करब कवनो भूल
अर्घ्य देवे के बेरिया, सूरज देव के मनाइब
छठी मइया के चरण में, माथा अपना झुकाइब...

अंतरा 2:

खेसारी के पुकार बा, सुन लीं छठी माई
भक्तन के भीड़ बाटे, घाट पर आई जाई
अन्न-धन के भंडार भर दीं, दुखवा सब दूर करीं
छठी मइया के महिमा, जग में मशहूर करीं...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

खेसारी लाल यादव के इस गीत में छठ पूजा की पारंपरिक भावना और आधुनिक संगीत का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। इस गीत के प्रत्येक अंतरे में लोक-संस्कृति की महक और छठी मइया के प्रति अगाध श्रद्धा समाहित है:

मुखड़े का भावार्थ (The Essence of the Refrain)

गीत की शुरुआत पारंपरिक लोक-पंक्ति "कांच ही बांस के बहंगिया..." से होती है। इसका अर्थ है कि नए और कच्चे बांस से बनी बहंगी (कांवर) अत्यंत नाजुक है, जो फलों और प्रसाद के भार से लचक रही है। भक्त प्रार्थना कर रहे हैं कि इस पवित्र बहंगी को सुरक्षित रूप से नदी के घाट तक पहुँचाया जाए ताकि छठी मइया अपने भक्तों को दर्शन दे सकें। गीतकार कहते हैं कि इस वर्ष छठ का पावन व्रत नदी के सुंदर घाट पर संपन्न होगा, जहाँ सभी व्रती और श्रद्धालु मिलकर छठी मइया के पारंपरिक मंगल गीत गा रहे हैं।

प्रथम अंतरे का भावार्थ (The Devotion of Offerings)

प्रथम अंतरे में पूजा की पवित्र सामग्री और विधि का सुंदर वर्णन है। सूप (बांस की टोकरी) में शुद्ध घी और गेहूं से बना पारंपरिक प्रसाद 'ठेकुआ' सजाया गया है, और दउरा (बड़ी टोकरी) विभिन्न प्रकार के मौसमी फलों और फूलों से भरा हुआ है। भक्त संकल्प लेते हैं कि वे ब्रह्ममुहूर्त (भोर) में ही बिना किसी त्रुटि या भूल के नदी के घाट पर पहुँच जाएंगे। जब भगवान सूर्य के उदय होने का समय (अर्घ्य देने की बेरिया) होगा, तब वे जल में खड़े होकर सूर्य देव की आराधना करेंगे और छठी मइया के चरणों में श्रद्धापूर्वक अपना शीश झुकाएंगे।

द्वितीय अंतरे का भावार्थ (The Prayer for Prosperity)

अंतिम अंतरे में कलाकार स्वयं को एक साधारण भक्त के रूप में प्रस्तुत करते हुए छठी मइया से करुण पुकार करते हैं। वे कहते हैं कि हे छठी मैया! आपके घाटों पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी हुई है, आप अपनी कृपा दृष्टि सब पर बनाए रखें। वे प्रार्थना करते हैं कि माँ सभी भक्तों के घरों को अन्न और धन के भंडार से भर दें, उनके जीवन के सभी दुखों और कष्टों का निवारण करें, और अपनी महिमा को संपूर्ण संसार में फैलाएं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

यह गीत मुख्य रूप से 'समर्पण' (Surrender), 'सामूहिकता' (Community Spirit) और 'प्राकृतिक शुद्धता' (Ecological Purity) के संदेश पर आधारित है। छठ पूजा का त्योहार किसी बंद कमरे या मंदिर के गर्भगृह में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे, बहती हुई नदी के तट पर मनाया जाता है। यह गीत इसी प्राकृतिक और सामाजिक समरसता को रेखांकित करता है। इसमें अमीर-गरीब, जाति-पाति के भेद से परे होकर सभी लोगों के एक साथ घाट पर एकत्रित होने और मिलकर उत्सव मनाने की भावना को स्वर दिया गया है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) छठ होइ घाट पर (Chhath Hoi Ghat Par)
मुख्य गायक (Singer) खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav)
गीतकार (Lyricist) पारंपरिक एवं प्यारेलाल यादव 'कवि जी'
संगीतकार (Music Composer) आशीष वर्मा
रिलीज वर्ष (Release Year) 2020
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय (Theme) छठ पूजा भक्ति एवं सूर्योपासना

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत जगत में खेसारी लाल यादव को उनकी ऊर्जावान और भावपूर्ण गायकी के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से उनके द्वारा गाए गए देवी गीत और छठ गीत हर साल त्योहारों के मौसम में धूम मचाते हैं। "छठ होइ घाट पर" गीत में उन्होंने पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक वाद्य यंत्रों के साथ इस प्रकार पिरोया है कि यह युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ता है। प्यारेलाल यादव के सारगर्भित शब्द और आशीष वर्मा के कर्णप्रिय संगीत ने इस गीत को एक कालजयी रचना बना दिया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
बहंगिया (Bahangia) बांस की बनी काँवर जिस पर पूजा का प्रसाद ढोया जाता है।
दउरा (Daura) बांस की बड़ी टोकरी इसमें फल, ठेकुआ और पूजा सामग्री रखी जाती है।
ठेकुआ (Thekua) गेहूं और गुड़ का पारंपरिक पकवान छठ पूजा का सबसे मुख्य और पवित्र प्रसाद।
अर्घ्य (Arghya) सूर्य देव को जल या दूध अर्पित करना अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को नमन करने की क्रिया।
बेरिया (Beria) समय या बेला सुबह या शाम का वह समय जब पूजा की जाती है।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का त्योहार वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस गीत के माध्यम से उसी महत्व को प्रतिध्वनित किया गया है:

  • प्रकृति की वंदना: छठ पूजा में किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य और प्रकृति स्वरूपा छठी मइया (उषा और प्रत्यूषा) की पूजा की जाती है। यह गीत प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
  • शुचिता और नियम: गीत में "ना करब कवनो भूल" पंक्ति व्रतियों द्वारा बरती जाने वाली अत्यंत सावधानी और पवित्रता को दर्शाती है। छठ व्रत में स्वच्छता का स्तर इतना ऊंचा होता है कि अनजाने में भी कोई त्रुटि स्वीकार्य नहीं होती।
  • सामुदायिक समरसता: नदी के घाट पर सभी वर्ग के लोग एक साथ खड़े होकर अर्घ्य देते हैं। यह गीत इसी सामाजिक एकता और समरसता का जीवंत दस्तावेज है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह गीत हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  1. धैर्य और अनुशासन: चार दिवसीय कठिन व्रत हमें जीवन में आत्म-नियंत्रण और अनुशासन सिखाता है।
  2. सादगी और प्राकृतिक जीवन: मिट्टी के चूल्हे, बांस के सूप और प्राकृतिक फलों का उपयोग हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी और शांति सादगी में ही निहित है।
  3. सामूहिक सहयोग: "सभे मिलि गावेली" की भावना हमें सिखाती है कि बड़े कार्यों की सफलता सामूहिक प्रयास और आपसी सहयोग से ही संभव है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि इस गीत को पूरे कार्तिक मास में सुना जाता है, लेकिन छठ पूजा के चार दिनों के दौरान इसका महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है:

  • नहाय-खाय (पहला दिन): इस दिन से ही घरों में यह गीत गूंजने लगता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
  • खरना (दूसरा दिन): शाम को प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती और परिवार के सदस्य इस गीत को गाकर मानसिक शांति का अनुभव करते हैं।
  • संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): जब श्रद्धालु सिर पर दउरा रखकर घाट की ओर प्रस्थान करते हैं, तब यह गीत उनके उत्साह और भक्ति को दोगुना कर देता है।
  • उषा अर्घ्य (चौथा दिन): सुबह के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देते समय इस गीत का गायन मन को असीम ऊर्जा से भर देता है।

यदि आप छठ पूजा की विस्तृत शास्त्रीय विधि और कथा के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारी विशेष प्रस्तुति छठ पूजा व्रत कथा अवश्य पढ़ें। इसके अतिरिक्त, पूजा की संपूर्ण तैयारी के लिए आप छठ पूजा सामग्री सूची का संदर्भ ले सकते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु (Key Points) संक्षिप्त विवरण (Quick Facts)
गीत का शीर्षक छठ होइ घाट पर (Chhath Hoi Ghat Par)
गायक खेसारी लाल यादव
मुख्य पर्व महापर्व छठ (Chhath Puja)
मुख्य देव भगवान भास्कर (सूर्य देव) एवं छठी मइया
गीत का संदेश पारिवारिक सुख, समृद्धि और लोक-आस्था का संरक्षण
उपयुक्त अवसर कार्तिक मास, छठ पूजा उत्सव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय छठ गीत के मुख्य गायक भोजपुरी फिल्म जगत के प्रसिद्ध लोक-कलाकार खेसारी लाल यादव हैं।

यह गीत वर्ष 2020 में रिलीज हुआ था। रिलीज होते ही यह गीत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया और आज भी हर साल छठ पूजा के अवसर पर प्रमुखता से बजाया जाता है।

यह एक पारंपरिक लोक-पंक्ति है। इसका अर्थ है कि नए और कच्चे बांस से बनी टोकरी या काँवर अत्यंत पवित्र और नाजुक होती है, जिसका उपयोग केवल छठी मइया के प्रसाद को ले जाने के लिए किया जाता है।

ठेकुआ गेहूं के आटे, गुड़ और शुद्ध घी से बनाया जाने वाला अत्यंत पवित्र महाप्रसाद है। इसे मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी की आंच पर अत्यंत शुचिता के साथ तैयार किया जाता है।

इस गीत का मधुर और कर्णप्रिय संगीत प्रसिद्ध संगीतकार आशीष वर्मा द्वारा तैयार किया गया है, जिन्होंने पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक रूप दिया है।

कार्तिक मास में छठ पूजा के साथ-साथ गोवर्धन पूजा व्रत कथा और भाई दूज जैसे महत्वपूर्ण त्योहार भी मनाए जाते हैं, जो पारिवारिक संबंधों को मजबूत करते हैं।

नहीं, यह गीत पूरे भारत और विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय (विशेषकर भोजपुरी भाषी समुदाय) के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।

यह गीत हमें सिखाता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है। शुद्ध मन, सादगी और प्रकृति के प्रति समर्पण से ही हम परमात्मा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: इस लेख का संपादन और विश्लेषण भक्तिलोक के विद्वान संपादकीय मंडल द्वारा किया गया है। गीत के बोलों की शुद्धता और उनके सांस्कृतिक संदर्भों को प्रामाणिक स्रोतों और लोक-परंपराओं के आधार पर सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को सटीक और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • बिहार की लोक-संस्कृति और पारंपरिक छठ गीत संग्रह।
  • भविष्य पुराण - सूर्य देव की उपासना और माहात्म्य।
  • भोजपुरी लोक-साहित्य अकादमी के शोध पत्र।

संबंधित लेख

यदि आपको यह लेख पसंद आया हो, तो हमारे निम्नलिखित भक्तिपूर्ण लेखों को भी अवश्य पढ़ें:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!