सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए...
दर्शन दीं ना अजोरिया, छठी मइया दर्शन दीं ना अजोरिया...
केकरा खातिर केलियउ बरतिया, केकरा खातिर बरतिया,
केकरा खातिर केलियउ बरतिया, छठी मइया केकरा खातिर बरतिया...
पुत्र खातिर केलियउ बरतिया, छठी मइया पुत्र खातिर बरतिया...
केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगवा मंडराय,
सुगवा मंडराय रे सुगउवा धधकत जाए...
उग हो सुरुज देव भइले अरघ के बेर,
सुताले तs जागू ना, अरघ के बेर...
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगवा गिरे मुरझाय,
सुगवा के गिरे पर सुगउनी रोअत जाए...
सुगवा रोए न सुगउनी रोए, दोनों हाथ पसारि रोए,
अरे भाग जागे सुरुज देव के, अरघ देबे आजु के बेर...
(नोट: यह किरण सिंह के लोकप्रिय छठ गीतों के ज्यूकबॉक्स का मुख्य अंश है। संपूर्ण वीडियो में 'केलवा के पात पर उगलन सुरुजमल', 'उग हो सुरुज देव', और 'मारबो रे सुगवा धनुष से' जैसे कालजयी और पारंपरिक गीत सम्मिलित हैं जो हर छठ व्रती के मन को मोह लेते हैं।)
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
किरण सिंह के गाए इन छठ गीतों का शाब्दिक अर्थ जितना सरल है, उसका आंतरिक भाव उतना ही गूढ़ और आध्यात्मिक है। गीत की पहली पंक्ति "कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए" में व्रती महिलाओं के उस कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प को दर्शाया गया है, जो वे बांस की बनी बहंगी पर सूप और टोकरी रखकर घाट तक की यात्रा के दौरान करती हैं। बहंगी का लचकना इस बात का प्रतीक है कि जीवन के तमाम संघर्षों और कठिनाइयों के बावजूद व्रतिनी का कर्तव्य पथ और छठी मइया के प्रति प्रेम अडिग रहता है।
गीत में आगे पूछा जाता है—"केकरा खातिर केलियउ बरतिया?" (यह व्रत किसके लिए किया गया है?) और उत्तर मिलता है—"पुत्र खातिर केलियउ बरतिया" (संतान और परिवार के कल्याण के लिए)। यह प्रश्न-उत्तर शैली भारतीय लोक-संस्कृति की उस गुरुकुल परंपरा को जीवित करती है जहाँ संवाद के माध्यम से जीवन के मूल्यों को अगली पीढ़ी को सौंपा जाता है। तोते (सुगवा) और उसके जोड़े के प्रसंग के माध्यम से प्रकृति के प्रति करुणा और सूर्य देव की महिमा का बहुत ही सुंदर काव्यात्मक चित्रण किया गया है। यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण साधना पद्धति का लोक-गीतों के माध्यम से किया गया जीवंत वर्णन है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इन पारंपरिक छठ गीतों की केंद्रीय भावना लोक-कल्याण, परिवार की दीर्घायु, स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। छठ महापर्व भारतीय संस्कृति का वह अनूठा पर्व है जिसमें उगते हुए सूर्य के साथ-साथ डूबते हुए सूर्य की भी पूजा की जाती है। किरण सिंह की सुरीली आवाज इस पर्व के उस एकाग्र और अनुशासित भाव को जीवंत कर देती है जहाँ जाति, वर्ग और लिंग के भेद से परे संपूर्ण समाज एक घाट पर आकर प्रकृति की उपासना करता है। इससे समाज में समरसता, भाईचारा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित होता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण (Parameter) | तथ्य (Detail) |
|---|---|
| गीत / एल्बम का नाम | किरण सिंह छठगीत - वीडियो ज्यूकबॉक्स (Hits Of Kiran Singh Chhath Geet) |
| स्वर / गायिका | किरण सिंह (Kiran Singh) |
| संगीत शैली | पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत / भक्ति संगीत |
| भाषा | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| मुख्य विषय | सूर्योपासना, छठी मइया की महिमा, व्रत एवं लोक परंपरा |
| प्रमुख अवसर | कार्तिक एवं चैत्र छठ महापर्व, सूर्य षष्ठी व्रत |
| संबंधित श्रेणी | भक्ति गाना भोजपुरी में, छठ पूजा गीत |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
भोजपुरी लोक संगीत की धरोहर को संरक्षित करने में लोक कलाकारों का योगदान अतुलनीय है। गायिका किरण सिंह ने अपनी मधुर और सधी हुई आवाज से इन पारंपरिक गीतों को पुनर्जीवित किया है। पारंपरिक छठ गीत सदियों से मौखिक परंपरा (श्रुति परंपरा) के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचते रहे हैं। इन गीतों के मूल रचनाकार अज्ञात लोक-कवि हैं जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं के दैनिक जीवन, उनकी भावनाओं और छठी मइया के प्रति उनकी अनन्य भक्ति को शब्दों में पिरोया है। किरण सिंह ने अपनी शास्त्रीय और लोक गायकी की शैली से इन्हें आधुनिक तकनीक और डिजिटल मंचों पर श्रोताओं तक पहुँचाने का अद्भुत कार्य किया है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| बहंगिया | बांस से बनी कंवर या झोली जिस पर पूजा का सामान रखा जाता है | घाट जाते समय प्रसाद ले जाने का साधन |
| अजोरिया | प्रकाश, उजाला या सुबह की रोशनी | सूर्य देव से प्रकाश और दर्शन की प्रार्थना |
| केलवा के पात | केले का पत्ता | जिस पर भगवान सूर्य को अर्घ्य का प्रसाद सजाया जाता है |
| सुगवा | तोता (पक्षी) | लोक गीतों में प्रकृति और जीव-जंतुओं का प्रतीक |
| अरघ | सूर्य देव को जल अर्पित करने की प्रक्रिया | छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान |
| घवद | केले का पूरा गुच्छा | फसल और प्रकृति की豐ता (समृद्धि) |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ महापर्व का सांस्कृतिक महत्व केवल एक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ मानव के जीवंत संबंध का उत्सव है। किरण सिंह के इन छठ गीतों को सुनने मात्र से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है जो हमें जीवन, ऊर्जा और आरोग्यता प्रदान करते हैं। इन गीतों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कारों और मातृभाषा से जुड़ी रहती है। जब ये गीत सुबह और शाम के समय छठ घाटों पर गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय और दिव्य हो जाता है।
आप इस पावन अवसर पर अन्य संबंधित अनुष्ठानों के बारे में भी पढ़ सकते हैं जैसे कि गोवर्धन पूजा व्रत कथा, जो प्रकृति की पूजा की इसी सनातन परंपरा का एक अन्य महत्वपूर्ण विस्तार है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- कठिनाइयों में भी अडिग रहना: बहंगी के लचकने के बावजूद व्रती का आगे बढ़ते रहना हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बाधाएं आएं, कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होना चाहिए।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य, जल, बांस, फल और कंद-मूल को समर्पित यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाता है।
- निष्ठा और अनुशासन: छठ व्रत का 36 घंटे का निर्जला उपवास आत्म-अनुशासन, संयम और मानसिक दृढ़ता का सर्वोच्च उदाहरण है।
- पारिवारिक और सामाजिक सद्भाव: यह पर्व पूरे परिवार और समाज को एक सूत्र में पिरोता है, जहाँ सब मिलकर सेवा कार्य करते हैं।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
किरण सिंह के ये छठ गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक (यानि नहाय-खाय से लेकर उद्योगामी सूर्य को अर्घ्य देने तक) घर-घर में बजाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त चैत्र नवरात्रि के दौरान पड़ने वाली चैती छठ के अवसर पर भी इन गीतों का विशेष महत्व है। सुबह की ब्रह्म बेला में जब व्रतिनी घाट के लिए निकलती हैं अथवा जब घर की महिलाएं सूप सजाती हैं, तब इन गीतों का श्रवण मन को असीम शांति और ऊर्जा प्रदान करता है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| घटक (Component) | विवरण (Description) |
|---|---|
| गीत का शीर्षक | किरण सिंह छठगीत वीडियो ज्यूकबॉक्स |
| प्रमुख गायिका | किरण सिंह |
| संगीत विधा | भोजपुरी लोकगीत एवं भक्ति संगीत |
| मुख्य आराध्य | भगवान सूर्य नारायण एवं छठी मइया |
| पर्व | छठ महापर्व (सूर्य षष्ठी) |
| मुख्य संदेश | लोक-आस्था, सूर्योपासना, प्रकृति प्रेम और पारिवारिक कल्याण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह आलेख संपादन टीम द्वारा लोक-संस्कृति, पारंपरिक भोजपुरी संगीत और सनातन व्रतों के प्रमाणित संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री में प्रस्तुत गीत के बोल और उनके भावार्थ पारंपरिक लोक-साहित्य पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- भोजपुरी लोक-साहित्य और संस्कृति - डॉ. कृष्णदेव उपाध्याय
- भारतीय सनातन व्रत एवं पर्व परंपरा - गीतापल्ल्व, गोरखपुर
- सूर्य उपासना और छठी मइया की लोक-गाथाएं
- पारंपरिक मौखिक लोकगीत संग्रह, पूर्वांचल एवं बिहार
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