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हे मैया तोहर पुजा करब (Hey Maiya Tohar Puja Karab) - Bansidhar Choudhary

पढ़ें हे मैया तोहर पुजा करब (Hey Maiya Tohar Puja Karab) - Bansidhar Choudhary - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्या

"हे मैया तोहर पुजा करब" (Hey Maiya Tohar Puja Karab) सुप्रसिद्ध लोक गायक बंशीधर चौधरी द्वारा गाया गया एक अत्यंत भावपूर्ण और श्रद्धा से ओत-प्रोत भक्ति गीत है। यह गीत विशेष रूप से मिथिला और भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में देवी उपासना, छठ पूजा और सरस्वती पूजा जैसे पावन अवसरों पर गूँजता है। इस भजन में एक भक्त की सरल और निश्छल भावना व्यक्त की गई है, जहाँ वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार जगत जननी माँ की आराधना करने का संकल्प लेता है। सनातन धर्म में 'मातृभाव' की उपासना को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, और यह गीत उसी वात्सल्य और भक्ति के रस को समाहित किए हुए है। बंशीधर चौधरी की विशिष्ट गायन शैली ने इस गीत को जन-जन का कंठहार बना दिया है, जो न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि हृदय में भक्ति की ज्योति भी प्रज्वलित करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ हे मैया तोहर पुजा करब ॥

हे मैया तोहर पुजा करब, हम तऽ अइली तोहर दुआरि
मैया तोहर पुजा करब, हम तऽ अइली तोहर दुआरि।

लाल-लाल चुनरी मैया तोरा चढ़इबो,
अड़हुल के फूलवा से चरण सजइबो,
मैया तोहर महिमा अपार, हम तऽ अइली तोहर दुआरि।

धूप-दीप और नैवेद्य सजा कऽ,
भक्ति भाव सऽ मन लगा कऽ,
मैया सुनु हमर पुकार, हम तऽ अइली तोहर दुआरि।

बंशीधर तोहर गुणगान गाबय छौ,
सबके कल्याण मैया तू ही करय छौ,
मैया बेड़ा लगा दऽ पार, हम तऽ अइली तोहर दुआरि।

हे मैया तोहर पुजा करब, हम तऽ अइली तोहर दुआरि।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस मधुर भक्ति गीत का भावार्थ अत्यंत गहरा और शरणागति की भावना से परिपूर्ण है। यहाँ प्रत्येक पद की विस्तृत व्याख्या दी गई है:

शरणागति और संकल्प

गीत की शुरुआत में भक्त कहता है, "हे मैया, मैं आपकी पूजा करूँगा, मैं आपके द्वार पर आया हूँ।" यह पंक्ति जीवात्मा की परमात्मा (शक्ति) के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाती है। 'द्वार पर आना' केवल भौतिक उपस्थिति नहीं, बल्कि अहंकार को त्याग कर ईश्वरीय सत्ता के सम्मुख झुकने का प्रतीक है।

श्रृंगार और अर्पण

भक्त माँ को लाल चुनरी चढ़ाने और अड़हुल (गुड़हल) के फूलों से उनके चरणों को सजाने की बात करता है। सनातन परंपरा में लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक है। अड़हुल का फूल माँ दुर्गा और माँ काली को अत्यंत प्रिय है। यहाँ भक्त अपनी श्रद्धा को भौतिक वस्तुओं के माध्यम से व्यक्त कर रहा है, जो उसकी आंतरिक प्रीति का बाह्य स्वरूप है।

भक्ति और प्रार्थना

धूप, दीप और नैवेद्य (प्रसाद) के साथ पूजा की तैयारी का वर्णन है। भक्त कहता है कि वह केवल कर्मकांड नहीं कर रहा, बल्कि 'मन लगाकर' और 'भक्ति भाव' से माँ को पुकार रहा है। यह इस बात पर जोर देता है कि ईश्वर केवल सामग्री से नहीं, बल्कि सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं।

लोक कल्याण और मोक्ष की कामना

अंतिम पदों में गायक बंशीधर चौधरी माँ से प्रार्थना करते हैं कि वे सबका कल्याण करें। 'बेड़ा पार लगाना' संसार रूपी भवसागर से मुक्ति पाने का रूपक है। भक्त माँ से विनती करता है कि इस नश्वर संसार की बाधाओं से उसे मुक्त कर अपनी शरण में ले लें।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'वात्सल्य' और 'अनन्य भक्ति' है। इसमें निम्नलिखित संदेश निहित हैं:

  • सरलता: ईश्वर की प्राप्ति के लिए जटिल मंत्रों की नहीं, बल्कि सरल हृदय की आवश्यकता है।
  • समर्पण: जब भक्त माँ के द्वार पर आता है, तो वह अपनी सभी चिंताओं को माँ के चरणों में छोड़ देता है।
  • सामूहिकता: गीत में 'सबके कल्याण' की बात की गई है, जो सनातन धर्म के 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धांत को पुष्ट करता है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम हे मैया तोहर पुजा करब (Hey Maiya Tohar Puja Karab)
गायक बंशीधर चौधरी (Bansidhar Choudhary)
भाषा मैथिली / भोजपुरी (मिश्रित लोक भाषा)
श्रेणी देवी गीत / भक्ति भजन
मुख्य वाद्ययंत्र ढोलक, हारमोनियम, झांझ
उपयुक्त अवसर छठ पूजा, नवरात्रि, सरस्वती पूजा, मुंडन संस्कार

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

बंशीधर चौधरी उत्तर बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्रों के एक अत्यंत लोकप्रिय लोक गायक हैं। उनकी आवाज में मिट्टी की सोंधी महक और लोक संस्कृति का जीवंत पुट मिलता है। उन्होंने सैकड़ों भक्ति गीत गाए हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों में बहुत पसंद किए जाते हैं। इस गीत में उन्होंने अपनी पारंपरिक गायकी के माध्यम से माँ के प्रति अटूट विश्वास को स्वर दिया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
तोहर आपका / तुम्हारी माँ के लिए संबोधन
अइली आया हूँ / आई हूँ आगमन की क्रिया
दुआरि द्वार / चौखट माँ का मंदिर या दरबार
अड़हुल गुड़हल का फूल देवी पूजा का प्रिय पुष्प
नैवेद्य भोग / प्रसाद पूजा में अर्पित खाद्य सामग्री
बेड़ा नाव / जीवन रूपी नैया संसार सागर से पार उतरने का प्रतीक

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसके गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निहितार्थ हैं:

लोक संस्कृति का संरक्षण

बंशीधर चौधरी जैसे कलाकार अपनी क्षेत्रीय भाषाओं (मैथिली, अंगिका, भोजपुरी) में गीत गाकर लुप्त होती लोक परंपराओं को जीवित रख रहे हैं। यह गीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है।

शक्ति उपासना की परंपरा

भारत के पूर्वी हिस्सों में 'शक्ति' (माँ दुर्गा, काली, सरस्वती) की पूजा का विशेष महत्व है। यह गीत उस प्राचीन परंपरा का आधुनिक संगीतमय विस्तार है। श्री दुर्गा चालीसा की भांति यह गीत भी माँ की स्तुति का एक सरल माध्यम है।

छठ पूजा में प्रासंगिकता

यद्यपि यह एक सामान्य देवी गीत है, लेकिन छठ पूजा के दौरान जब व्रती घाटों पर जाते हैं, तो माँ छठी मैया की आराधना में ऐसे गीतों का गायन वातावरण को भक्तिमय बना देता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • श्रद्धा ही श्रेष्ठ है: पूजा की सामग्री से अधिक महत्वपूर्ण भक्त का भाव है।
  • धैर्य और विश्वास: माँ के द्वार पर आने का अर्थ है कि अब सब कुछ उनके हाथों में है, जो जीवन में धैर्य सिखाता है।
  • परोपकार: अपनी पूजा के साथ-साथ 'सबके कल्याण' की कामना करना एक आदर्श मनुष्य के लक्षण हैं।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

इस गीत को निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जाता है:

  1. नवरात्रि: नौ दिनों की देवी साधना के दौरान मंदिरों और घरों में।
  2. छठ पूजा: खरना और अर्घ्य के समय घाटों पर।
  3. सरस्वती पूजा: शिक्षण संस्थानों और पंडालों में माँ शारदे की वंदना के रूप में।
  4. दैनिक पूजा: कई भक्त अपने दिन की शुरुआत माँ की इस मधुर स्तुति से करते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य विषय देवी भक्ति और शरणागति
प्रमुख भाव समर्पण (Surrender)
गायन शैली लोक संगीत (Folk)
क्षेत्रीय प्रभाव बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, नेपाल
आध्यात्मिक लाभ मानसिक शांति और भक्ति में वृद्धि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भक्ति गीत के गायक बंशीधर चौधरी (Bansidhar Choudhary) हैं।

यह गीत मुख्य रूप से मैथिली और भोजपुरी के मिश्रित लोक स्वरूप में है, जो उत्तर बिहार की पहचान है।

हाँ, यह गीत छठ पूजा, नवरात्रि और किसी भी देवी पूजन के अवसर पर अत्यंत श्रद्धा के साथ सुना जाता है।

अड़हुल (गुड़हल) का फूल शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में इसका विशेष उल्लेख है।

बंशीधर चौधरी ने कई प्रसिद्ध देवी गीत, शिव भजन और छठ गीत गाए हैं जो यूट्यूब और अन्य म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।

इस गीत का मुख्य संदेश निस्वार्थ भक्ति, पूर्ण समर्पण और लोक कल्याण की भावना है।

इसका अर्थ है इस जन्म-मृत्यु के चक्र और सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष प्रदान करना।

जी हाँ, चूँकि यह माँ की आराधना का गीत है, इसे सरस्वती पूजा के दौरान भी भक्ति भाव से गाया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) की संपादकीय टीम द्वारा तैयार किया गया है। गीत के बोल और भावार्थ को लोक परंपराओं और आध्यात्मिक ग्रंथों के संदर्भ में विश्लेषित किया गया है। बंशीधर चौधरी के इस गीत ने आधुनिक समय में लोक भक्ति संगीत को एक नई ऊंचाई दी है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ

  • पारंपरिक मैथिली एवं भोजपुरी लोक साहित्य।
  • बंशीधर चौधरी आधिकारिक डिस्कोग्राफी।
  • सनातन धर्म की शक्ति उपासना परंपरा (देवी भागवत पुराण के संदर्भ)।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

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