Krishna Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन भक्ति परंपरा में संत शिरोमणि मीराबाई और बांकेबिहारी श्री कृष्ण के बीच का अनन्य प्रेम, विरह और समर्पण किसी एक युग की सीमा में बंधा नहीं है, बल्कि यह हर युग के जिज्ञासु और साधक के लिए प्रेरणा का स्रोत है। "ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन भजन इन हिंदी लिरिक्स" शीर्षक से यह पावन भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उस अगाध अनुराग और पूर्ण शरणागति (Surrender) का जीवंत दस्तावेज है, जहां भक्त अपनी सुध-बुध खोकर केवल और केवल अपने आराध्य के रंग में रंग जाता है। अनूप जलोटा जी की मधुर और रसीली आवाज में अमर हो चुके इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का परमात्मा से मिलने का वह व्याकुल स्पंदन छुपा हुआ है, जो संसार के सभी बंधनों और दुखों को लीलामय रूप में काट देता है। इस भजन का गायन और श्रवण करने से साधक का अंतर्मन चंचलता से मुक्त होकर एकाग्रता और परमानंद की उस अवस्था को प्राप्त करता है, जिसे योगियों और संतों ने 'सहज समाधि' कहा है। प्रातःकाल की बेला में, संध्या वंदन के समय, अथवा किसी भी सत्संग और एकांत साधना में इस भजन का स्मरण मनुष्य को भौतिकता की अंधी दौड़ से निकालकर भीतर की पवित्र ज्योति से जोड़ देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (Refrain):
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली गोपाल गाने लगीं...
महल छोड़ें, छोड़े सारे खजाने,
मीरा तो प्रीतम के गुण गाने लगीं...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली गोपाल गाने लगीं...


अंतरा 1:
कोइ कहे मीरा को दीवानी, कोइ कहे बावरी,
महल के सुख त्याग के, वो बनी जोगन बावरी।
साँप पिटारा राणा भेजा, हंस के मीरा ने ले ली,
चरणामृत समझ के पीई, मीरा तो हरि गुण गाने लगीं...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली गोपाल गाने लगीं...


अंतरा 2:
विष का कटोरा राणा ने भेजा, अमृत जान के पी लिया,
गिरिधर गोपाल का दर्शन पाकर, जीवन सफल कर लिया।
संतन के संग बैठ-बैठ कर, लोक-लाज सब त्याग दी,
साँवरिया के प्रेम रंग में, मीरा ऐसी डूब गई...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली गोपाल गाने लगीं...


अंतरा 3:
ना किसी का डर न किसी की लाज, मीरा तो भई मगन,
घाघरा पहन के पैरों में घुंघरू, नाचने लगी मगन।
राणा के कुल की मर्यादा, पल में धूल मिला दी,
साँवरिया की दासी बनकर, दुनिया को राह दिखा दी...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली गोपाल गाने लगीं...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस कालजयी भजन का भावार्थ केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि उस उच्च कोटि की प्रेम साधना का व्याख्यान है जहाँ अहंकार का पूरी तरह विसर्जन हो जाता है। मीराबाई जब अपने महलों के सुख-वैरैभव और मेड़ता-चित्तौड़ के राजसी ठाट-बाट को छोड़कर गलियों में 'गोपाल-गोपाल' पुकारने लगती हैं, तो यह संसार के लिए एक विस्मयकारी दृश्य बन जाता है। दुनिया के लोग उन्हें 'बावरी' या 'दीवानी' कहते हैं, क्योंकि सांसारिक लोग भौतिक लाभ और प्रतिष्ठा को ही सब कुछ मानते हैं, जबकि मीरा ने उस अविनाशी तत्व को पा लिया था जिसके आगे संसार की सारी संपत्तियां धूल के समान हैं।

जब राज परिवार के विरोधस्वरूप राणा द्वारा विष का प्याला या सांप भेजा जाता है, तो मीरा के अगाध विश्वास और हरि नाम के प्रभाव से वह विष भी अमृत बन जाता है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जो व्यक्ति पूरी तरह ईश्वर के चरणों में समर्पित हो जाता है, उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। संतों की संगति, लोक-लाज का भय त्यागना और अपने इष्ट के प्रेम में नाच उठना—यह सब इस बात का प्रमाण है कि भगवान को पाने के लिए बाहरी दिखावे की नहीं, बल्कि भीतर की सच्ची तड़प और आंसुओं की आवश्यकता होती है। मीरा का जीवन यह संदेश देता है कि प्रेम ही वह इकलौता मार्ग है जो जीव को शिव (परमात्मा) से मिला सकता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति रस की प्रधानता: यह भजन माधुर्य भाव और दास्य भाव के अनूठे संगम का प्रदर्शन करता है, जहाँ भक्त अपने भगवान को प्रियतम और पति के रूप में देखता है।
  • निर्भयता और दृढ़ संकल्प: मीराबाई के जीवन और इस भजन के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में आने वाली हर बाधा को सच्चे प्रेम के बल पर पार किया जा सकता है।
  • लोक-लाज का त्याग: समाज के संकुचित दायरों और झूठी प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर आत्मिक आनंद में मग्न होने की प्रेरणा यह भजन देता है।
  • अनूप जलोटा की गायकी का प्रभाव: इस भजन को आधुनिक युग में लोकप्रिय बनाने वाले प्रसिद्ध गायक अनूप जलोटा जी की सधी हुई आवाज ने इसे हर घर के पूजा घर और संगीत प्रेमियों की जुबान पर ला दिया है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण करने के लिए किसी कठोर विधि या कर्मकांड की आवश्यकता नहीं होती, किंतु शुद्धता और पवित्र भाव इसका मूल आधार है।

  • उचित समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में (जब मन शांत होता है) अथवा संध्याकालीन आरती के पश्चात इस भजन का स्मरण अत्यंत आनंददायक होता है।
  • स्थान: घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करके अथवा एकांत में आँखें बंद करके मानसिक रूप से भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करते हुए इसे गुनगुनाया जा सकता है।
  • सत्संग और पर्व: जन्माष्टमी, राधारानी जन्मोत्सव, एकादशी व्रत तथा श्री कृष्ण संकीर्तन के आयोजनों में इस भजन का सामूहिक गान वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण (गिरिधर गोपाल) और उनकी अनन्य भक्त संत मीराबाई हैं। मीराबाई का जन्म 16वीं शताब्दी में राजस्थान के मेड़ता के कुड़की गांव में हुआ था। उनका पूरा जीवन श्री कृष्ण की भक्ति को समर्पित था। उन्होंने अपनी रचनाओं (पदों) में भगवान को 'गिरिधर नागर' कहकर संबोधित किया है। उनके जीवन के संघर्ष, राजमहलों का त्याग और साधु-संतों की संगति ने उन्हें भक्तिकाल का एक ऐसा सूर्य बना दिया, जिसकी किरणें आज भी संपूर्ण मानवता को प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखा रही हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन मीराबाई के मूल पदों और राजस्थानी-ब्रज भाषा के लोकगीतों पर आधारित है, जिसे आधुनिक संगीतकारों और गीतकारों ने हिंदी और सुगम संगीत के ढांचे में ढाला है। अनूप जलोटा के एल्बमों के माध्यम से यह भजन घर-घर में प्रसिद्ध हुआ। इसकी पृष्ठभूमि में मीराबाई के वे ऐतिहासिक संस्मरण हैं, जब उन्हें चित्तौड़ के राणा विक्रमादित्य के रोष का सामना करना पड़ा था, क्योंकि राजपरिवार की मर्यादा के विपरीत मीरा साधुओं के बीच उठती-बैठती और नाचती थीं। इन विषम परिस्थितियों में भी मीरा के प्रेम की गहराई कम नहीं हुई, बल्कि और अधिक प्रखर हो उठी।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम जनमानस के हृदय को छूने वाली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रज भाषा के शब्दों की मधुर मिठास घुली हुई है। इसकी काव्य शैली लयात्मक और प्रवाहमयी है। 'लागी लगन', 'हो गई मगन', 'गली-गली गोपाल' जैसे शब्दों की अनुप्रास छटा भजन के सौंदर्य को चार चांद लगाती है। इसे तानसेन, हारमोनियम और ढोलक की थाप पर बहुत ही सुमधुर तरीके से गाया जा सकता है, जो संगीत प्रेमियों के साथ-साथ साधारण भक्तों को भी तुरंत थिरकने और झूमने पर विवश कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • भौतिकता से विरक्ति: संसार के महल और खजाने नश्वर हैं, जबकि ईश्वर का प्रेम शाश्वत और अविनाशी है।
  • दृढ़ निश्चय: अपने मार्ग पर अडिग रहना चाहिए, चाहे दुनिया आपको कितनी भी पागल या दीवानी कहे।
  • विष को अमृत बनाना: जीवन के संकटों और विषैली परिस्थितियों का सामना सकारात्मकता और ईश्वर के नाम के बल पर करना चाहिए।
  • समर्पण का आनंद: जब अहंकार मिट जाता है और परमात्मा के प्रति सच्चा प्रेम जगता है, तब जीवन उत्सव बन जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
लगन प्रेम की धुन, अनुराग ईश्वर प्राप्ति के लिए मन की तीव्र उत्कंठा
मगन प्रसन्न, विभोर, लीन परमानंद की अवस्था जिसमें सुध-बुध न रहे
बावरी दीवानी, पागल संसार की दृष्टि में ईश्वर प्रेम में सुध खो देना
जोगन योगिनी, संन्यासिन राजसी सुख त्यागकर भगवान की साधना में लीन होना
गिरिधर गोवर्धन पर्वत उठाने वाले (श्री कृष्ण) मीरा के एकमात्र आराध्य स्वामी

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन, वो तो गली-गली गोपाल गाने लगीं..."
इस प्रथम पंक्ति का अर्थ है कि मीराबाई के हृदय में श्री कृष्ण के प्रति ऐसा अगाध प्रेम जग गया कि वे अपनी सुध-बुध खोकर आनंद में मगन हो गईं और नगर की गलियों में अपने प्रियतम गोपाल का यश गाने लगीं।

"महल छोड़ें, छोड़े सारे खजाने, मीरा तो प्रीतम के गुण गाने लगीं..."
यहाँ मीरा के त्याग का वर्णन है। उन्होंने राजा-महाराजाओं के महलों के सुख और धन-दौलत को तिनके के समान त्याग दिया और केवल अपने प्रियतम (कृष्ण) के गुणों का गान करने लगीं।

"विष का कटोरा राणा ने भेजा, अमृत जान के पी लिया..."
जब समाज और कुल के लोगों ने विरोध किया, तो राणा ने मारने के लिए विष भेजा, परंतु मीरा ने उसे भगवान का प्रसाद (अमृत) समझकर बिना किसी संकोच के पी लिया और उनका बाल भी बांका नहीं हुआ।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के संदर्भ में श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है, जो अनन्य भक्ति की परिभाषा देता है:

"मच्चिता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्।
कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च॥"

(गीता, अध्याय 10, श्लोक 9) - जिनका मन मुझमें लगा है, प्राण मुझमें समर्पित हैं, जो आपस में मेरी चर्चा करते हुए संतुष्ट होते हैं और आनंदित रहते हैं, वे सदा मुझको ही प्राप्त होते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन (Aisi Lagi Lagan)
प्रमुख आराध्य भगवान श्री कृष्ण (गिरिधर गोपाल)
संत / रचनाकार संत शिरोमणि मीराबाई (पारंपरिक पद)
लोकप्रिय गायक अनूप जलोटा एवं अन्य प्रसिद्ध भजन गायक
भाषा हिंदी / ब्रज / राजस्थानी मिश्रण
भक्ति भाव माधुर्य भाव, अनन्य प्रेम, विरह और समर्पण
शुभ अवसर जन्माष्टमी, सत्संग, एकादशी और दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को भारत के प्रसिद्ध भजन सम्राट श्री अनूप जलोटा जी ने अपनी अनूठी और soulful आवाज में गाकर अमर कर दिया है। इसके अलावा कई अन्य कलाकारों ने भी इसे अपने अंदाज में गाया है।

यह भजन भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त मीराबाई के जीवन, उनके राजसी त्याग और उनके अगाध कृष्ण प्रेम पर आधारित है।

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या वंदन के दौरान अथवा किसी भी धार्मिक सत्संग और राधा कृष्ण भजन संध्या में गाया जा सकता है।

मीराबाई के साधुओं के साथ उठने-बैठने और नाचने से नाराज होकर चित्तौड़ के राणा ने उन्हें दंड देने के लिए विष का प्याला भेजा था, जिसे मीरा ने बांकेबिहारी का प्रसाद समझकर हंसते-हंसते पी लिया था।

इस भजन के शब्द और इसका संगीत मन की चंचलता, तनाव और चिंताओं को दूर करके साधक को एक गहरी आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

हाँ, इसकी धुन बहुत सरल, तालबद्ध और सुगम है, इसलिए हारमोनियम या गिटार पर भजन गाना सीखने वाले शुरुआती लोगों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

भजन का मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर प्राप्ति के लिए सांसारिक मोह-माया और अहंकार का त्याग करके केवल सच्चे प्रेम और समर्पण की आवश्यकता होती है।

हाँ, भक्तजनों की सुविधा के लिए यह भजन देवनागरी हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी (Roman Script) और गुजराती, बंगाली जैसी क्षेत्रीय लिपियों में भी ऑनलाइन उपलब्ध है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन भक्ति परंपरा, मीराबाई के ऐतिहासिक पदों और अनूप जलोटा की भजन शैली के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स, प्रामाणिक भावार्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। सभी तथ्यों और कथाओं को पारंपरिक स्रोतों के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - गीताप्रेस गोरखपुर प्रकाशन।
  • मीराबाई की पदावली - संकलित एवं संपादित लोक साहित्य ग्रंथ।
  • भारतीय संगीत एवं भजन परंपरा - शास्त्रीय संकीर्तन संदर्भ।
  • भक्तिकाल और संत साहित्य के प्रमुख आयाम।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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