2021 - आज छठ पूजा है | Aaj Chhath Puja Hai | New Chhath Puja Song
लोक आस्था के महान पर्व महापर्व छठ की पावन बेला पर संगीत और लोकगीतों का एक विशेष महत्व है। जब गगनभेदी स्वर में ढोल-ढमाकों, बांस के सूप और टोकरी के साथ छठी मइया के लोकगीत गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। वर्ष 2021 के इस विशेष पावन अवसर पर रिलीज हुआ भजन और लोकगीत "आज छठ पूजा है | Aaj Chhath Puja Hai" सूर्य उपासना और छठी मइया के प्रति अटूट आस्था का एक जीवंत दस्तावेज है। इस गीत में न केवल पूर्वांचल की सांस्कृतिक खुशबू र बसी है, बल्कि व्रतियों की उस कठिन साधना, पवित्रता और संकल्प का भी सजीव चित्रण किया गया है जो चार दिनों तक बिना अन्न-जल के पूर्ण निष्ठा के साथ अनुष्ठान करते हैं। यह गीत भक्तों के अंतर्मन को ऊर्जा से भर देता है और उन्हें सीधे प्रकृति के प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण और उनकी शक्ति स्वरूपा षष्ठी माता (छठी मइया) के चरणों से जोड़ता है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Chhath Puja Song Lyrics
(स्थायी / मुखड़ा)
उगहु हे सूरज देव, भईले बिहान,
आज छठ पूजा है, गावे पूरा जहान!
घाटS सजवले बाड़े भक्तन मिलके आज,
सुन लीं छठी मइया, राखिहें हमार लाज!
आज छठ पूजा है, आज छठ पूजा है...
(अंतरा 1)
चार दिन के बरतिया, कठिन जवनिया,
घाटवा पे झूमेSS सारा जगत गवनिया।
दउरा में सजवले केवरा अरुआ के फूल,
भुलइहें ना मइया मोरा भजनवा के मूल!
सुगा सुगा पाखी, देवे अरघिया के आन,
आज छठ पूजा है, गावे पूरा जहान!
(अंतरा 2)
कोशी भराएSSS मइया, मंगल गियावे,
सुख-समृद्धि घरवा में सब कोई पावे।
कार्तिक मास के अँजोरिया के पावन बेरिया,
दर्शन पावे खातिर तरसेSSS नजरिया।
दीनानाथ के महिमा निराली महान,
आज छठ पूजा है, गावे पूरा जहान!
(अंतिम चरण / समापन)
भक्तन के भीड़ बाटे गंगा के तीरे,
खुशिया के लहर बाटे धीरे-धीरे।
गावे 'भक्तलोक' महिमा गावे सब प्राण,
आज छठ पूजा है, गावे पूरा जहान!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह लोकगीत और भजन पूर्वांचल की उस आत्मीय लोकसंस्कृति को समर्पित है जहाँ छठ महापर्व को किसी उत्सव से बढ़कर जीवन का सबसे बड़ा अनुष्ठान माना जाता है। गीत के मुखड़े में कवि और गायक सूर्य देव से आह्वान कर रहे हैं कि हे भगवान सूर्य! अब प्रातः काल हो चुका है, आप अपने स्वर्णमयी किरणों के साथ प्रकट हों क्योंकि आज संपूर्ण ब्रह्मांड में छठ पूजा का महापर्व मनाया जा रहा है। भक्तों ने मिलकर घाटों को सुंदर ढंग से सजाया है और छठी मइया से यही प्रार्थना है कि वे सबकी लाज रखें और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करें।
पहले अंतरे में छठ व्रत के उस कठिन अनुशासन का वर्णन है जो चार दिनों (नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य) तक चलता है। बांस के सउर (दउरा) में सजाए गए ठेकुआ, चावल के लड्डू, नारियल, और ऋतु फल जैसे केला, सिंघाड़ा आदि के साथ जब व्रती घाट की ओर प्रस्थान करते हैं, तो पूरा समाज एकरस हो जाता है। सुकुमारता और पवित्रता का यह संगम प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सर्वोत्तम माध्यम है।
दूसरे अंतरे और समापन में कोशी भरने की परंपरा और कार्तिक शुक्ल षष्ठी की उस संध्या का वर्णन है जब डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि सनातन संस्कृति में केवल उगते हुए सूरज को ही नहीं, बल्कि अस्त होते हुए सूर्य को भी प्रणाम किया जाता है, जो जीवन के चक्र और निरंतरता का द्योतक है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की केंद्रीय भावना प्रकृति प्रेम, सूर्य उपासना, पारिवारिक कल्याण और सामाजिक समरसता है। छठ पर्व किसी जाति, वर्ग या संप्रदाय विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। इस गीत के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, यदि मनुष्य सच्ची निष्ठा, संयम और अनुशासन के साथ अपने कर्म पथ पर अग्रसर रहे, तो भगवान सूर्य और छठी मइया की कृपा से सभी कष्ट स्वतः ही दूर हो जाते हैं। यह गीत हमें हमारी संस्कृति, जड़ों और संस्कारों से जोड़े रखने का कार्य करता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| गीत का शीर्षक | स्पेशल छठ पूजा गीत 2021 - आज छठ पूजा है (Aaj Chhath Puja Hai) |
| संगीत शैली | भोजपुरी लोकगीत / पारंपरिक छठ भक्ति संगीत |
| मुख्य आराध्य | भगवान सूर्य नारायण एवं षष्ठी माता (छठी मइया) |
| भाषा | भोजपुरी / हिंदी मिश्रित लोक भाषा |
| रिलीज वर्ष | अक्टूबर 2021 |
| मुख्य प्रसंग | कार्तिक शुक्ल षष्ठी महापर्व, सूर्य अर्घ्य एवं कोशी पूजन |
| सांस्कृतिक महत्व | पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति का प्रतीक |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ / उपयोग |
|---|---|---|
| उगहु | प्रकट हों / उदित हों | सूर्य देव के उदय होने का आह्वान |
| बरतिया | व्रत / अनुष्ठान | चार दिनों तक चलने वाला छठ का कठिन व्रत |
| दउरा | बांस की बनी टोकरी | पूजा की सामग्री सजाने का पारंपरिक पात्र |
| कोशी भराए | कोशी पूजन उत्सव | छठ घाट या घर पर बांस के पांग से मंडप सजाकर मन्नत पूरी होने पर किया जाने वाला अनुष्ठान |
| अरघिया | अर्घ्य देना | जल और दूध से सूर्य देव को जल अर्पित करना |
| केवरा | एक सुगंधित फूल | पूजा में उपयोग होने वाली पारंपरिक सामग्री |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सूर्य विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का अनूठा संगम है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सूर्य की किरणें हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं और जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से शरीर की ऊर्जा का संतुलन बना रहता है। इस गीत के बोल समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। जब लोग इन गीतों को घाटों पर गाते हैं, तो सामूहिक चेतना जागृत होती है और आपसी प्रेम, भाईचारा तथा सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है।
पारंपरिक रूप से छठ गीत पीढ़ियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होते रहे हैं। डिजिटल युग में 2021 जैसे विशेष वर्षों में आधुनिक संगीत संयोजनों के साथ इन गीतों ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, जिससे विदेशों में बसे प्रवासी भारतीय भी अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- कठिन परिश्रम और संयम: छठ व्रत यह सिखाता है कि बिना दृढ़ संकल्प और अनुशासन के किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: यह पर्व हमें सिखाता है कि हमें सूर्य, जल, वायु और अन्न—इन सभी प्राकृतिक उपादानों का सम्मान करना चाहिए जिनके बिना जीवन असंभव है।
- समानता का संदेश: छठ घाट पर राजा हो या रंक, सभी एक ही पंक्ति में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं, जो ऊंच-नीच के भेद को मिटाता है।
- परिवार और समाज का जुड़ाव: ऐसे लोकगीत और पर्व बिखरे हुए पारिवारिक रिश्तों को पुनः एक सूत्र में पिरोने का काम करते हैं।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह विशेष छठ गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और उससे जुड़े चार दिनों के दौरान यानी नहाय-खाय से लेकर उद्यमी सूर्य को अंतिम अर्घ्य देने तक सुना और गाया जाता है। इसके अतिरिक्त, घरों में सफाई के दौरान, पूजा की सामग्री की खरीदारी करते समय, और छठ घाट की यात्रा के दौरान इस प्रकार के भक्ति गीत वातावरण को पूरी तरह पावन और आनंदमय बना देते हैं। आप अन्य लोकप्रिय छठ पूजा गीत और भजन भी पढ़ और सुन सकते हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| घटक | विवरण |
|---|---|
| गीत का नाम | आज छठ पूजा है (Aaj Chhath Puja Hai) |
| शैली | लोकगीत / छठ स्पेशल भजन |
| मुख्य विषय | सूर्य उपासना, छठी मइया की महिमा और लोक संस्कृति |
| प्रमुख भाव | उल्लास, भक्ति, समर्पण और प्रकृति वंदना |
| उपयुक्त अवसर | छठ महापर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी) |
| क्षेत्रीय परंपरा | बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और वैश्विक प्रवासी समाज |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह आलेख पारंपरिक लोक साहित्य, व्रतोत्सव परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। इसे पाठकों की सुविधा और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ
पूर्वांचल की लोकगीत परंपरा, सूर्य षष्ठी व्रत कथा, सनातन पंचांग संदर्भ तथा लोक आस्था के पारंपरिक स्रोत।
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