Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

निमिया के डार (Nimiya Ke Daar ) - BHojapuri Devi Geet

पढ़ें निमिया के डार (Nimiya Ke Daar ) - BHojapuri Devi Geet - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलो

निमिया के डार (Nimiya Ke Daar) - भोजपुरी देवी गीत का परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

आदिशक्ति जगत जननी माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरسترती को समर्पित यह पवित्र लोकगीत "निमिया के डार (Nimiya Ke Daar) - भोजपुरी देवी गीत" सनातन संस्कृति, लोक परंपरा और भक्ति के अगाध प्रेम का एक उत्कृष्ट संगम है। भोजपुरी अंचल में चैत्र और शारदीय नवरात्र के पावन अवसरों पर नीम के वृक्ष (निमिया के डार) के नीचे आदिशक्ति का आह्वान करने की प्राचीन परंपरा रही है। लोक मान्यताओं के अनुसार, नीम के पेड़ में शीतला माता और दुर्गा जी का वास माना जाता है, जो भक्तों के सभी कष्टों, रोगों और संतापों का नाश करती हैं। यह भजन न केवल स्वर सम्राट पवन सिंह की जादुई आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह हर घर में माता के आगमन की मंगलमय कामना का जीवंत प्रतीक भी है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन देवी गीत के संपूर्ण बोल, इसका गहन भावार्थ, धार्मिक महत्व और इसके श्रवण से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

निमिया के डार मईया झुलेली झुलुवा ओ हो हो...
झुलेली झुलुवा हो झुलेली झुलुवा...
निबिया के डार मईया झुलेली झुलुवा,
झुलुवा झुलेली हो मईया झुलेली झुलुवा!

अंतरा 1:

सोने के खूटिया रूपा के डोरिया,
झुलेली झुलुवा मोरी महारानी गोरिया!
निमिया के पतियवा डोलेला सनसना,
मईया के दरसवा लागे ला सुहाना!
झुलेली झुलुवा हो झुलेली झुलुवा...

अंतरा 2:

भकतिया के भीड़ लागल मंदिरवा में भारी,
दर्शन पाके निहाल भईले नर आउ नारी!
हाथवा में नारियल चुनरिया सोहे लाल,
मईया के चरणवा में झुके संसार बाल-गोपाल!
झुलेली झुलुवा हो झुलेली झुलुवा...

समापन / पल्लवित भाव:

धिया-पुता दी, धन-धान्य भरि भंडार,
चरणन में धइले बानी मईया तोहार द्वार!
गावे 'भक्तिलोक' महिमा अपार, जय माता दी!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत का भावार्थ अत्यंत गूढ़ और लोक-संस्कृति के निकट है। गीत के मुखड़े में यह वर्णन किया गया है कि जगत जननी माता दुर्गा नीम के वृक्ष की डालियों पर झूला झूल रही हैं। सनातन परंपरा में प्रकृति और देवी-देवताओं का अटूट संबंध रहा है। नीम का वृक्ष अपनी औषधीय गुणों के कारण आरोग्‍य का प्रतीक है, और जब माता रानी उसी निमिया के डार पर विराजमान होकर झूला झूलती हैं, तो यह दृश्य संपूर्ण ब्रह्मांड में शीतलता, शांति और आनंद का संचार करता है।

गीत की पंक्तियों में 'सोने के खूटिया रूपा के डोरिया' के माध्यम से माता के झूले की भव्यता का वर्णन किया गया है। इसका आंतरिक अर्थ यह है कि परमपिता परमात्मा और आदिशक्ति की कृपा से जीवन के सभी आयाम स्वर्ण और रजत के समान पवित्र व मूल्यवान बन जाते हैं। नीम के पत्तों की सनसनाहट और ठंडी हवा भक्तों के मन के संतापों को दूर कर देती है। मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़, हाथ में लाल चुनरी और नारियल यह दर्शाते हैं कि जब भक्त पूरी श्रद्धा के साथ माता के दरबार में हाजिरी लगाता है, तो माता उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह भजन साधक के भीतर समर्पण, आनंद और माता के प्रति अगाध प्रेम का भाव जागृत करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भोजपुरी देवी गीत लोक आस्था और शास्त्रीय भक्ति का सुंदर मिश्रण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • प्रकृति के प्रति सम्मान: इस भजन में नीम के वृक्ष (निबिया के डार) को माता का आसन बताकर पर्यावरण और प्रकृति के प्रति हमारी सनातन संस्कृति के आदर भाव को उजागर किया गया है।
  • भोजपुरी लोक संस्कृति का संवर्धन: यह गीत पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति, विवाह उत्सव, मुंडन और विशेषकर नवरात्र के दौरान घर-घर में गूंजने वाला सर्वप्रिय भजन है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा: इसके बोल और संगीत इतने कर्णप्रिय हैं कि इसके श्रवण मात्र से मन में व्याप्त भय, चिंता और नकारात्मकता दूर हो जाती है।
  • सामूहिक भक्ति का प्रतीक: नवरात्र के दिनों में जब माता के पंडालों और घरों में यह गीत बजता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है और लोग सामूहिक रूप से झूम उठते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों को सुनने और गाने के लिए कोई समय-सीमा निश्चित नहीं होती, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इनका श्रवण अत्यधिक फलदायी माना जाता है:

  • नवरात्र के नौ दिन: चैत्र और शारदीय नवरात्र के पावन नौ दिनों में प्रातःकाल और संध्याकालीन आरती के पश्चात इस भजन का श्रवण करना अत्यंत शुभ होता है।
  • माता की चौकी या जागरण: पारिवारिक अनुष्ठानों, माता के jagaran और संतोषी माता या दुर्गा माता की पूजा के समय इस लोकगीत को विशेष रूप से गाया जाता है।
  • मानसिक शांति के लिए: जब भी मन अशांत हो या जीवन में कठिनाइयां आ रही हों, तब एकांत में बैठकर इस भजन को सुनने से भीतर एक नई ऊर्जा और शक्ति का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदिशक्ति माता दुर्गा हैं, जिन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का सम्मिलित स्वरूप माना जाता है। भोजपुरी लोक परंपरा में इन्हें 'मईया', 'भवानी' और 'दुर्गा माता' के रूप में अत्यंत आत्मीयता से पुकारा जाता है। लोक गीतों के माध्यम से आम जनमानस ने देवी को अपनी पुत्री, बहन और रक्षक के रूप में देखा है, जिससे भक्त और भगवान के बीच की दूरी समाप्त होकर एक अटूट पारिवारिक संबंध स्थापित हो जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भोजपुरी संगीत जगत में देवी गीतों की एक समृद्ध परंपरा रही है। इस विशेष गीत को आधुनिक संगीत शैली में स्वर सम्राट पवन सिंह द्वारा अपनी यशस्वी आवाज से सजाया गया है। पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत संयोजन (Music Arrangement) का यह ऐसा मेल है जिसने युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्गों तक सभी को अपनी ओर आकर्षित किया है। यह गीत लोककंठ से निकलकर आज डिजिटल माध्यमों और भक्तिलोक जैसे पावन मंचों के माध्यम से करोड़ों भक्तों के दिलों तक पहुंच चुका है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा ठेठ और मधुर भोजपुरी है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है। इसमें लोक-काव्य की शैली का प्रयोग किया गया है जहां उपमाओं और रूपकों का सहज उपयोग हुआ है जैसे—'सोने के खूटिया रूपा के डोरिया' और 'निमिया के पतियवा डोलेला सनसना'। यह शैली श्रोता को बिना किसी कठिन शब्दावली के तुरंत भावुक और तल्लीन कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि:

  • जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न आएं, माता की शरण में जाने से सभी कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।
  • प्रकृति के हर तत्व में ईश्वर का वास है, इसलिए पेड़-पौधों और पर्यावरण का संरक्षण करना हमारा धार्मिक और नैतिक कर्तव्य है।
  • भक्ति में आडंबर से अधिक निर्मल मन और सच्चे प्रेम की आवश्यकता होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
निमिया के डार नीम का पेड़ / डाली माता दुर्गा का प्रिय वास स्थल
झुलेली झुलुवा झूला झूलना देवी माँ का आनंदित और प्रसन्न स्वरूप
खूटिया / डोरिया खूंटा / रस्सी झूले को बांधने के उपकरण, यहाँ भव्यता का प्रतीक
पतियवा छोटी पत्तियां नीम के कोमल पत्ते जो हवा से हिलते हैं

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"निमिया के डार मईया झुलेली झुलुवा..."
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे माता! आप नीम की डाल पर बनाए गए झूले पर झूल रही हैं और आपके इस स्वरूप के दर्शन पाकर तीनों लोक आनंदित हो रहे हैं।

"सोने के खूटिया रूपा के डोरिया..."
भावार्थ: आपके झूले की खूंटियां सोने की और डोरियां चांदी की बनी हैं, जिन पर आप महारानी के रूप में विराजमान होकर झूला झूल रही हैं।

भजन से जुड़े देवी मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

इस नवार्ण मंत्र के साथ माता दुर्गा के इस भजन का स्मरण करने से साधक को अनंत गुणा पुण्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। आप हमारे अन्य पावन पृष्ठों पर जाकर श्री दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती श्लोक का भी पाठ कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम निमिया के डार (Nimiya Ke Daar)
प्रकार भोजपुरी देवी गीत / लोक भजन
प्रमुख गायक पवन सिंह (Pawan Singh) एवं अन्य लोक कलाकार
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य आराध्य आदिशक्ति माता दुर्गा / भवानी
उपयुक्त अवसर नवरात्र, माता का जागरण, देवी पूजा
मुख्य भाव समर्पण, उल्लास और मातृ-भक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत आदिशक्ति जगत जननी माता दुर्गा (भवानी) को समर्पित है, जिन्हें भोजपुरी अंचल में अत्यंत आत्मीयता से पूजा जाता है।

चैत्र और शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में, माता के जागरण में तथा किसी भी देवी पूजा के अवसर पर इस भजन को विशेष रूप से गाया और सुना जाता है।

सनातन लोक परंपरा में नीम के वृक्ष में माता शीतला और दुर्गा का वास माना जाता है। नीम के औषधीय गुण और शीतलता भक्तों के रोगों और कष्टों का निवारण करते हैं।

यह गीत भोजपुरी के प्रख्यात गायक पवन सिंह की आवाज में अत्यंत लोकप्रिय हुआ है, साथ ही इसे विभिन्न पारंपरिक लोक गायकों द्वारा भी गाया जाता है।

हाँ, आप इसे घर की पूजा, नवरात्र स्थापना या संध्या आरती के समय बजा सकते हैं, जिससे घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और सकारात्मक हो जाता है।

इस गीत का मुख्य संदेश माता के प्रति अगाध प्रेम, प्रकृति के प्रति सम्मान और यह विश्वास है कि माँ अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेती हैं।

हाँ, भोजपुरी में "उधिआ गइल चुनरी", "मईया के झुमका" और "शेरावाली के दरबार" जैसे अनगिनत लोकप्रिय देवी गीत मौजूद हैं।

आप भक्तिलोक के होमपेज या देवी भजन श्रेणी में जाकर विभिन्न प्रकार के शास्त्रीय और लोक देवी भजनों, चालीसा और स्तोत्रों का आनंद ले सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन संस्कृति, लोक संगीत परंपरा और प्रामाणिक धार्मिक साहित्यों के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त बोल और भावार्थ श्रोताओं की आध्यात्मिक संतुष्टि और सांस्कृतिक जुड़ाव को ध्यान में रखकर संकलित किए गए हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को सटीक, उच्च गुणवत्ता वाली और प्रेरणादायक जानकारी प्राप्त हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं मौखिक परंपराएं।
  • सनातन देवी पूजा पद्धति एवं नवरात्र अनुष्ठान ग्रंथ।
  • भोजपुरी संगीत एवं लोक संस्कृति के ऐतिहासिक आयाम।

संबंधित भजन एवं लेख

आप हमारी वेबसाइट पर इन अन्य पावन पृष्ठों को भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!