Hanuman Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मंगलमूर्ति मारुति नंदन भजन इन हिंदी लिरिक्स

मंगलमूर्ति मारुति नंदन भजन के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित यह पावन संकीर्तन हनुमान भक्तों के लिए विशेष रूप से प्रस्तुत है।

भजन (Bhajan)

यूआरएल स्लग: 2021/09/i-mangalmurti-maruti-nandan-i-hariharan.html | श्रेणियां: Hanuman, Hanuman Bhajan, Hanuman Mantra, Shri Hanuman

कलयुग के जागृत एवं प्रत्यक्ष देवता, संकटमोचन श्री हनुमान जी की महिमा अनंत है। "मंगलमूर्ति मारुति नंदन भजन" साधकों के अंतःकरण में असीम बल, बुद्धि, विद्या और अचल भक्ति का संचार करने वाला एक अत्यंत पावन और ऊर्जावान संकीर्तन है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर छिपे भय, अज्ञान और नकारात्मक ऊर्जा का शमन कर उसमें आत्मगौरव, निर्भीकता और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य समर्पण भाव जागृत करना है। श्री हरिहरन जैसे प्रख्यात एवं दिग्गज गायकों की स्वर लहरियों में सजा यह भजन न केवल कानों को तृप्त करता है, बल्कि मन और मस्तिष्क को पूर्णतः शांत और पवित्र कर देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का अगाध अध्ययन करेंगे, जिससे हर भक्त बजरंगबली की कृपा का सहज अनुभव कर सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

अंजनी नंदन वायु पुत्र, महाबल विक्रमशाली, राम दूत अतुलित बलधामा, संकटमोचन महाबली। मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल हारि, तुम्हरी कृपा सदा बनी रहे, हे पवनसुत मुरारि। लंका दहन कीन्ह पल माहीं, असुरन के मन भय छायो, संजीवनी बूटी ला के, लखन प्राण तुमने बचायो। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, जानकी माता वर दीन्हा, जो भी शरण तुम्हारी आए, उसकाज तुमने सब कीन्हा। महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति विहर सुमति के संगी, कंचन बरन विराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा। हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे, कांधे मुंज जनेऊ साजे, शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन। विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर, प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया। सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा, बिकट रूप धरि लंका जरावा, भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे। लाय सजीवन लखन जियाए, श्री रघुवीर हरषि उर लाए, रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई। सहस बदन तुम्हरो यस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं, सनकादिक ब्रह्मा मुनीसा, नारद सारद सहित असीसा। यम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते, कवि कोविद कहि सके कहाँ ते, तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा। तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना, युग सहस्र योजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानू। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लांघि गए अचरज नाहीं, दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते। राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे, सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना। आपन तेज संहारौ आपै, तीनों लोक हांक तें कांपै, भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै। नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा, संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै। सब पर राम तपस्वी राजा, तिन के काज सकल तुम साजा, और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फल पावै। चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा, साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस वर दीन सीता माता, राम रसायन तुम्हारे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा। तुम्हरे भजन राम को पावै, जन्म जन्म के दुख बिसरावै, अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई। और देवता चित्त न धरै, हनुमत सेइ सर्व सुख करै, संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"मंगलमूर्ति मारुति नंदन भजन" केवल शब्दों की माला नहीं है, अपितु यह महाप्राण हनुमान जी के चरित, उनके पराक्रम और उनके अगाध राम प्रेम का जीवंत दस्तावेज है। इस भजन का प्रत्येक चरण साधक के भीतर आध्यात्मिक जागृति उत्पन्न करता है। भजन के प्रारंभिक भाग में हनुमान जी को 'मंगलमूर्ति' और 'मारुति नंदन' कहकर संबोधित किया गया है, जिसका अर्थ है कि वे अमंगलों का नाश करने वाले और हर प्रकार के शुभ एवं कल्याण के प्रदाता हैं।

भजन में आगे लंका दहन, संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा करने तथा अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के स्वामी होने का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। यह इस सत्य को रेखांकित करता है कि जो भी भक्त सच्चे हृदय से हनुमान जी की शरण में जाता है, उसके जीवन के समस्त संकट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। उन्हें 'राम काज करिबे को आतुर' कहा गया है, जिसका भाव यह है कि प्रभु श्री राम के भक्तों की सहायता करने के लिए बजरंगबली सदैव तत्पर रहते हैं।

इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश यह है कि अहंकार का त्याग कर निष्काम भाव से भगवान की सेवा करने पर मनुष्य सभी भयों से मुक्त हो जाता है। कलयुग में हनुमान जी का नाम ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जो भूत-पिशाच, मानसिक संताप और व्याधियों का नाश कर देता है। इस भजन का निरंतर गायन साधक को मानसिक दृढ़ता, एकाग्रता और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

अष्ट सिद्धि एवं नौ निधि के दाता

माता सीता द्वारा दिए गए वरदान के फलस्वरूप हनुमान जी समस्त सिद्धियों और निधियों के स्वामी हैं। इस भजन के श्रवण और गायन से साधक को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार की समृद्धि की प्राप्ति होती है।

संकटों से मुक्ति और निर्भीकता

"नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा" - यह पंक्ति इस भजन का प्राण है। इसके निरंतर स्मरण से व्यक्ति के जीवन के सभी रोग, भय और मानसिक संताप दूर हो जाते हैं और उसमें सिंह जैसी निर्भीकता आती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन का गायन और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इसे करने के लिए कुछ विशेष नियम और समय निर्धारित हैं जो इसकी प्रभावशीलता को कई गुना बढ़ा देते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातः काल: सुबह स्नान के पश्चात हनुमान जी के विग्रह या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर इस भजन का पाठ या श्रवण करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • मंगलवार एवं शनिवार: हनुमान जी को समर्पित इन दोनों विशेष दिनों पर विशेष रूप से इस भजन का सामूहिक संकीर्तन या व्यक्तिगत पाठ करना कष्टों का निवारण करता है।
  • सुंदरकांड पाठ के उपरांत: सुंदरकांड या हनुमान चालीसा के पाठ के तुरंत बाद इस भजन को गाने से विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
  • सत्संग एवं अनुष्ठान: धार्मिक अनुष्ठानों, जागरण या हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसरों पर यह भजन भक्तों को झूमने और भक्ति में लीन होने के लिए प्रेरित करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु स्वयं भगवान शिव के रुद्रा अवतार, संकटमोचन श्री हनुमान जी हैं। हनुमान जी अजर-अमर हैं और कलयुग में वे पृथ्वी पर जागृत रूप में विराजमान माने गए हैं। उन्हें भगवान श्री राम के परम भक्त, सेवा और समर्पण के सर्वोच्च प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

इस भजन की परंपरा भारतीय संत परंपरा और रामभक्ति शाखा से जुड़ी है। तुलसीदास जी जैसे महान संतों ने हनुमान जी को भगवान राम तक पहुँचने का सुगम मार्ग बताया है। आधुनिक युग में हरिहरन जैसे महान संगीतकारों और गायकों ने अपनी सुमधुर आवाज और शास्त्रीय संगीत की शैली से इस भजन को घर-घर तक पहुँचाया है, जिससे आज की युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ पा रही है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति संगीत के इतिहास में हनुमान भजनों का एक विशिष्ट स्थान रहा है। "मंगलमूर्ति मारुति नंदन" भजन पारंपरिक अवधी और ब्रज भाषा के शब्दों के सुंदर सम्मिश्रण से तैयार किया गया है। इसकी रचना सनातन धर्म के महाकाव्यों—विशेषकर वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस—में वर्णित हनुमान जी के विभिन्न प्रसंगों (जैसे लंका दहन, संजीवनी बूटी, समुद्र पार करना) से प्रेरित होकर की गई है।

इसकी लयबद्ध संरचना और ताल इसे संगीत प्रेमियों और भक्तों दोनों के लिए समान रूप से प्रिय बनाती है। जब इस भजन को पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोलक, मंजीरा, और हारमोनियम के साथ गाया जाता है, तो पूरा वातावरण राममय और भक्तिमय हो जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, प्रवाहमयी और जन-जन के हृदय को छूने वाली हिंदी (खड़ी बोली मिश्रित अवधी) है। इसमें अनुप्रास और रुचक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो इसकी काव्य सौंदर्यता को और बढ़ाते हैं।

साहित्यिक दृष्टि से यह भजन वीर रस और भक्ति रस का अद्भुत संगम है। एक ओर जहाँ हनुमान जी के पराक्रम, लंका दहन और असुर संहार का वर्णन करते समय 'वीर रस' जागृत होता है, वहीं दूसरी ओर प्रभु श्री राम के चरणों में अनन्य प्रेम और समर्पण दर्शाते समय 'भक्ति रस' अपनी पराकाष्ठा पर होता है। यही कारण है कि यह भजन सुनने वाले के भीतर ऊर्जा और शांति दोनों का एक साथ संचार करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन मानव जीवन के लिए कई गहरे दार्शनिक और व्यावहारिक संदेश प्रदान करता है:

  • ✨ निःस्वार्थ सेवा भाव: हनुमान जी ने कभी अपने लिए कुछ नहीं चाहा, उनका संपूर्ण जीवन प्रभु श्री राम और लोक कल्याण को समर्पित था। हमें भी अपने जीवन में सेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • ✨ अत्यंत विनम्रता के साथ अपार शक्ति: दुनिया का सबसे शक्तिशाली होने के बावजूद हनुमान जी अत्यंत विनम्र और शांत हैं। यह सिखाता है कि शक्ति का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, रक्षा और विनम्रता के लिए होना चाहिए।
  • ✨ संकटों में धैर्य: विकट परिस्थितियों में भी घबराए बिना अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहना और ईश्वरीय शक्ति पर अटूट विश्वास रखना ही असली धर्म है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
मंगलमूर्ति कल्याण करने वाले रूप वाले जो दर्शन मात्र से अमंगल दूर करें
मारुति नंदन पवन देव (मारुत) के पुत्र हनुमान जी का एक अन्य नाम
अष्ट सिद्धि नौ निधि आठ प्रकार की सिद्धियां और नौ प्रकार की निधियां माता सीता द्वारा प्रदत्त वरदान
संकटमोचन सभी संकटों को हरने वाले भक्तों के दुखों का नाश करने वाले
जलधि समुद्र लंका जाने हेतु समुद्र लांघने का प्रसंग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"अंजनी नंदन वायु पुत्र, महाबल विक्रमशाली..."
माता अंजनी के लाडले, पवन देव के पुत्र और असीम बल व पराक्रम के स्वामी हनुमान जी को हमारा बारंबार नमन है। आप संकटों का नाश करने वाले महाबली हैं।

"लंका दहन कीन्ह पल माहीं, असुरन के मन भय छायो..."
आपने पल भर में लंका जलाकर राक्षसों के मन में खौफ पैदा कर दिया और संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, जिससे संपूर्ण वानर सेना में हर्ष छा गया।

"अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, जानकी माता वर दीन्हा..."
आपको माता सीता से अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों को देने का वरदान प्राप्त है। जो भी आपकी शरण में आता है, आप उसके समस्त कार्यों को सिद्ध कर देते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ इस भजन के साथ करने से मानसिक एकाग्रता और हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही आप श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ का भी स्मरण कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मंगलमूर्ति मारुति नंदन भजन इन हिंदी लिरिक्स
ाराध्य देव संकटमोचन श्री हनुमान जी
मुख्य गायक श्री हरिहरन एवं अन्य प्रसिद्ध कलाकार
भाषा हिंदी, अवधी मिश्रित
मुख्य विषय भक्ति, शक्ति, संकट निवारण एवं राम सेवा
प्रमुख भाव समर्पण, श्रद्धा, निर्भीकता और विनय
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जन्मोत्सव, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के गायन और श्रवण से मन का भय दूर होता है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। हनुमान जी की कृपा से सभी संकट कट जाते हैं।

इस भजन को प्रातः काल स्नान के पश्चात अथवा मंगलवार और शनिवार की संध्या को हनुमान जी की आरती के समय गाना सबसे उत्तम माना गया है।

हाँ, इसे कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति भाव के साथ अपने घर पर गा सकता है। इसके लिए किसी विशेष अनुष्ठान की अनिवार्यता नहीं है।

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए आप श्री हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ, बजरंग बाण और संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ कर सकते हैं।

मारुति का अर्थ पवन देव होता है और नंदन का अर्थ पुत्र होता है। अतः 'मारुति नंदन' का अर्थ पवनपुत्र हनुमान है।

निश्चित रूप से। श्री हरिहरन या अन्य कलाकारों द्वारा गाए गए इस भजन की धुन और इसके बोल मन को अगाध शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

भजन गाते समय शारीरिक व मानसिक स्वच्छता, शुद्ध उच्चारण तथा हृदय में भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम का भाव होना अत्यंत आवश्यक है।

हाँ, बच्चों को ऐसे ऊर्जावान भजन याद कराने से उनमें अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य, साहस और धार्मिक रुचि का विकास होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका भक्तों की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं और पारंपरिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत की गई है। इसमें प्रयुक्त सभी लिरिक्स और भावार्थ सनातन ग्रंथों और लोक परंपराओं पर आधारित हैं। यदि आप इस भजन से संबंधित कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो कृपया संपर्क करें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • वाल्मीकि रामायण - किष्किंधा एवं सुंदरकांड
  • पारंपरिक हनुमान संकीर्तन एवं भजन संग्रह
  • सनातन धर्म की लोक भजन परंपरा एवं संगीत निर्देशिका

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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