श्री राम नवमी (Shri Ram Navami) २०२८

०३ अप्रैल २०२८, सोमवार आराध्य: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम अवतार महापर्व आगामी (५५३ दिन शेष)
ADVERTISEMENT
भक्तिलोक प्रायोजित धार्मिक सामग्री विज्ञापन

दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल

पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:

राम नवमी का परिचय एवं महात्म्य

श्री राम नवमी धर्म, सत्य और मर्यादा के सर्वोच्च आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का अवतरण दिवस है। अयोध्या में मध्याह्न काल में प्रभु श्री हरि ने अवतार धारण किया था।

भगवान राम का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए मर्यादा, कर्तव्य, सेवा और सत्य का जीवंत दर्शन है। इस दिन व्रत रखने और रामचरितमानस पाठ से समस्त क्लेश दूर होते हैं।

शास्त्रोक्त तिथि: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (मध्याह्न १२:०० बजे)
व्रत व साधना स्वरूप: उपवास, रामायण/रामचरितमानस पाठ, पालना झुलाना व सात्विक फलाहार

राम नवमी २०२८: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त

द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२८ (विक्रम संवत २०८५) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:

प्रातः शुभ पूजा मुहूर्त प्रातः ०६:१५ से पूर्वाह्न ०९:३० बजे तक
अभिजित मुहूर्त पूर्वाह्न ११:५० से दोपहर १२:४० बजे तक
प्रदोष काल मुहूर्त सायं ०६:२० से रात्रि ०८:४० बजे तक
पंचांग सम्मत सुझाव: स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त के अनुसार विभिन्न शहरों में मुहूर्तों में कुछ मिनटों का अंतर संभावित हो सकता है।

संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)

शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:

श्री राम दरबार अथवा बाल राम की प्रतिमा व पालना
पंचामृत, गंगाजल, पीला चंदन, तुलसी दल
धनिया पंजीरी व पंचमेवा खीर

चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि

शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

१
चरण १: मध्याह्न काल (१२:०० बजे) से पूर्व बाल राम को पंचामृत से स्नान कराएं।
२
चरण २: ठीक १२:०० बजे "भए प्रगट कृपाला दीनदयाला..." स्तुति गाएं।
३
चरण ३: पालने को प्रेमपूर्वक झुलाएं और धनिया पंजीरी का भोग लगाएं।
ADVERTISEMENT
भक्तिलोक प्रायोजित धार्मिक सामग्री विज्ञापन

पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास

अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त खीर से चैत्र शुक्ल नवमी को प्रभु श्री राम का प्राकट्य हुआ। संपूर्ण अयोध्या में आनंद छा गया।

प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक

राम तारक महामंत्र

श्री राम जय राम जय जय राम। ॐ रां रामाय नमः॥
भावार्थ: कल्याणकारी भगवान श्री राम की सदा जय हो।

क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)

क्या करें (करणीय कार्य)

  • मध्याह्न १२:०० बजे प्रभु के जन्म का दर्शन व स्तुति करें।
  • भोग में तुलसी दल अनिवार्य रूप से रखें।

क्या न करें (वर्जित कार्य)

  • बिना तुलसी दल के प्रभु को भोग न लगाएं।

राम नवमी संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQ)

धनिया शीतलता और आरोग्य का प्रतीक है जो ग्रीष्म ऋतु में शरीर को स्वस्थ रखता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।

पर्व संक्षिप्त विवरण

पर्व का नाम: राम नवमी
तारीख (२०२८): ०३ अप्रैल २०२८, सोमवार
आराध्य देव: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
पर्व श्रेणी: अवतार महापर्व
विक्रम संवत: २०८५
शक संवत: १९५०
मित्रों व परिजनों के साथ साझा करें:
ADVERTISEMENT
भक्तिलोक प्रायोजित विज्ञापन