दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
जन्माष्टमी का परिचय एवं महात्म्य
श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के सोलह कलाओं से परिपूर्ण पूर्ण पुरुषोत्तम अवतार श्री कृष्ण का जन्मोत्सव है। मध्यरात्रि में प्रभु ने घनघोर वर्षा के बीच मथुरा में अवतार लिया था।
भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव भक्ति, प्रेम और निष्काम कर्मयोग का महोत्सव है। रात्रि १२ बजे लड्डू गोपाल का नाल छेदन, पंचामृत अभिषेक व माखन-मिश्री भोग भक्तों को परमानंद देता है।
जन्माष्टमी २०२८: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२८ (विक्रम संवत २०८५) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने हेतु भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण मथुरा कारागार में प्रकट हुए और गोकुल पहुंचे।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
श्री कृष्ण महामंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- मध्यरात्रि १२ बजे लड्डू गोपाल का शंख से अभिषेक अवश्य करें।
- माखन-मिश्री में तुलसी पत्र रखें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- मध्यरात्रि १२ बजे से पूर्व अन्न का सेवन न करें।