श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) २०२८

१३ अगस्त २०२८, रविवार आराध्य: योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण (लड्डू गोपाल) परम वैष्णव महापर्व आगामी (६८५ दिन शेष)
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जन्माष्टमी का परिचय एवं महात्म्य

श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के सोलह कलाओं से परिपूर्ण पूर्ण पुरुषोत्तम अवतार श्री कृष्ण का जन्मोत्सव है। मध्यरात्रि में प्रभु ने घनघोर वर्षा के बीच मथुरा में अवतार लिया था।

भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव भक्ति, प्रेम और निष्काम कर्मयोग का महोत्सव है। रात्रि १२ बजे लड्डू गोपाल का नाल छेदन, पंचामृत अभिषेक व माखन-मिश्री भोग भक्तों को परमानंद देता है।

शास्त्रोक्त तिथि: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि (रोहिणी नक्षत्र, मध्यरात्रि १२:०० बजे)
व्रत व साधना स्वरूप: दिनभर उपवास, मध्यरात्रि १२:०० बजे जन्मोत्सव, अभिषेक व पंचामृत पारण

जन्माष्टमी २०२८: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त

द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२८ (विक्रम संवत २०८५) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:

प्रातः शुभ पूजा मुहूर्त प्रातः ०६:१५ से पूर्वाह्न ०९:३० बजे तक
अभिजित मुहूर्त पूर्वाह्न ११:५० से दोपहर १२:४० बजे तक
प्रदोष काल मुहूर्त सायं ०६:२० से रात्रि ०८:४० बजे तक
पंचांग सम्मत सुझाव: स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त के अनुसार विभिन्न शहरों में मुहूर्तों में कुछ मिनटों का अंतर संभावित हो सकता है।

संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)

शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:

लड्डू गोपाल की प्रतिमा व झूला
खीरा (नाल छेदन हेतु)
पंचामृत, गंगाजल, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी व मोरपंख मुकुट

चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि

शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

१
चरण १: घर में सुंदर झांकी सजाएं और झूले को फूलों से सुसज्जित करें।
२
चरण २: रात्रि ११:३० बजे लड्डू गोपाल को खीरे के अंदर विराजित कर नाल छेदन करें।
३
चरण ३: ठीक १२:०० बजे शंख में पंचामृत भरकर बालकृष्ण का अभिषेक कराएं और झूला झुलाएं।
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पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास

कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने हेतु भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण मथुरा कारागार में प्रकट हुए और गोकुल पहुंचे।

प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक

श्री कृष्ण महामंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
भावार्थ: मैं भगवान वासुदेव को नमन करता हूँ।

क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)

क्या करें (करणीय कार्य)

  • मध्यरात्रि १२ बजे लड्डू गोपाल का शंख से अभिषेक अवश्य करें।
  • माखन-मिश्री में तुलसी पत्र रखें।

क्या न करें (वर्जित कार्य)

  • मध्यरात्रि १२ बजे से पूर्व अन्न का सेवन न करें।

जन्माष्टमी संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQ)

खीरा माता के गर्भ का प्रतीक है। डंठल काटना नाल छेदन का शास्त्रीय विधान है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।

पर्व संक्षिप्त विवरण

पर्व का नाम: जन्माष्टमी
तारीख (२०२८): १३ अगस्त २०२८, रविवार
आराध्य देव: योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण (लड्डू गोपाल)
पर्व श्रेणी: परम वैष्णव महापर्व
विक्रम संवत: २०८५
शक संवत: १९५०
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