दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
वसन्त पञ्चमी का परिचय एवं महात्म्य
वसंत पंचमी प्रकृति के नवरूप और माँ वीणावादिनी सरस्वती के प्राकट्य का पावन पर्व है। इस दिन से वसंत ऋतु का शुभारंभ होता है। समस्त शिक्षार्थियों, संगीतकारों और साधकों के लिए यह दिन विद्या और कला की सिद्धि प्राप्त करने का महापर्व है।
सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी ने जब संसार की रचना की, तब सर्वत्र नीरसता छाई हुई थी। ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़ककर माँ सरस्वती का आह्वान किया। वीणा, पुस्तक, स्फटिक माला और वरमुद्रा धारण किए देवी सरस्वती के प्राकट्य के साथ ही ब्रह्मांड में ध्वनि, संगीत, वाणी और ज्ञान का संचार हुआ।
वसन्त पञ्चमी २०२८: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२८ (विक्रम संवत २०८५) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
ब्रह्मा जी ने जब जीवों का निर्माण किया तो सब मूक और चेतनाशून्य प्रतीत हो रहे थे। ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की आज्ञा से जल छिड़का। तभी एक चतुर्भुजी देवी प्रकट हुईं, जिनके हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक माला थी। देवी ने वीणा के तारों को झंकृत कर संपूर्ण ब्रह्मांड में ज्ञान व वाणी का अमृत घोला।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
सरस्वती वंदना महामंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- पीले या श्वेत रंग के वस्त्र अवश्य धारण करें।
- पुस्तकों व अध्ययन सामग्री का आदरपूर्वक पूजन करें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- पुस्तकों पर पैर न लगाएं।
- काले या गहरे नीले वस्त्र पहनने से बचें।