दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
दीपावली का परिचय एवं महात्म्य
दीपावली सनातन धर्म का सबसे भव्य, प्रकाशमय एवं ऐश्वर्यशाली पंच-दिवसीय महापर्व है। भगवान श्री राम के अयोध्या आगमन पर दीपमालाएं जलाकर उनका स्वागत किया गया था।
अमावस्या की अंधियारी रात में दीपों की जगमगाहट अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देती है। इस रात्रि को महालक्ष्मी भूलोक में विचरण कर भक्तों को ऐश्वर्य प्रदान करती हैं।
दीपावली २०२८: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२८ (विक्रम संवत २०८५) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
समुद्र मंथन में कार्तिक अमावस्या को माँ महालक्ष्मी प्रकट हुई थीं और भगवान राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे थे।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
महालक्ष्मी महामंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- लक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में करें।
- मुख्य द्वार पर अखंड दीपक जलाएं।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- लक्ष्मी जी की अकेले पूजा न करें, गणेश जी के साथ ही करें।