दीपावली / महालक्ष्मी पूजन (Diwali - Deepawali) २०२६

०८ नवम्बर २०२६, रविवार आराध्य: महालक्ष्मी, प्रथम पूज्य गणेश व कुबेर देव दीपोत्सव महापर्व आगामी (४१ दिन शेष)
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दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल

पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:

दीपावली का परिचय एवं महात्म्य

दीपावली सनातन धर्म का सबसे भव्य, प्रकाशमय एवं ऐश्वर्यशाली पंच-दिवसीय महापर्व है। भगवान श्री राम के अयोध्या आगमन पर दीपमालाएं जलाकर उनका स्वागत किया गया था।

अमावस्या की अंधियारी रात में दीपों की जगमगाहट अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देती है। इस रात्रि को महालक्ष्मी भूलोक में विचरण कर भक्तों को ऐश्वर्य प्रदान करती हैं।

शास्त्रोक्त तिथि: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि (प्रदोष काल)
व्रत व साधना स्वरूप: दीप प्रज्ज्वलन, श्रीयंत्र पूजन, महालक्ष्मी अभिषेक व मिष्ठान्न वितरण

दीपावली २०२६: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त

द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२६ (विक्रम संवत २०८३) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त ०८ नवम्बर सायं ०५:४० से रात्रि ०७:४५ बजे तक
वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) मुहूर्त सायं ०५:४० से सायं ०७:३६ बजे तक
महानिशीथ काल मुहूर्त रात्रि ११:३९ से मध्यरात्रि १२:३१ बजे तक
पंचांग सम्मत सुझाव: स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त के अनुसार विभिन्न शहरों में मुहूर्तों में कुछ मिनटों का अंतर संभावित हो सकता है।

संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)

शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:

लक्ष्मी-गणेश जी की नवीन प्रतिमा
कमल पुष्प, कमलगट्टा माला, पीली कौड़ी, गोमती चक्र
मिट्टी के दीपक, तेल, शुद्ध घी, खील-बताशे

चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि

शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

१
चरण १: पूजा चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश जी को स्थापित करें।
२
चरण २: कलश स्थापना कर पंचामृत से महालक्ष्मी का अभिषेक करें।
३
चरण ३: कमलगट्टा, कौड़ी व सिक्के अर्पित कर श्रीसूक्त व कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
४
चरण ४: घर के प्रत्येक कोने में तेल व घी के दीपक प्रज्ज्वलित करें।
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पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास

समुद्र मंथन में कार्तिक अमावस्या को माँ महालक्ष्मी प्रकट हुई थीं और भगवान राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे थे।

प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक

महालक्ष्मी महामंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
भावार्थ: हे कमल पर विराजमान माँ महालक्ष्मी! मुझ पर प्रसन्न हों और अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।

क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)

क्या करें (करणीय कार्य)

  • लक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में करें।
  • मुख्य द्वार पर अखंड दीपक जलाएं।

क्या न करें (वर्जित कार्य)

  • लक्ष्मी जी की अकेले पूजा न करें, गणेश जी के साथ ही करें।

दीपावली संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQ)

सद्बुद्धि युक्त धन की प्राप्ति हेतु ज्ञान के देवता गणेश और धन की देवी लक्ष्मी की संयुक्त पूजा होती है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।

पर्व संक्षिप्त विवरण

पर्व का नाम: दीपावली
तारीख (२०२६): ०८ नवम्बर २०२६, रविवार
आराध्य देव: महालक्ष्मी, प्रथम पूज्य गणेश व कुबेर देव
पर्व श्रेणी: दीपोत्सव महापर्व
विक्रम संवत: २०८३
शक संवत: १९४८
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