होली / धुलेंडी (Holi - Festival of Colors) २०२६

०३ मार्च २०२६, मंगलवार आराध्य: भक्त प्रह्लाद, भगवान नृसिंह व राधा-कृष्ण वसंत रंगोत्सव सम्पन्न (२०९ दिन पूर्व)
ADVERTISEMENT
भक्तिलोक प्रायोजित धार्मिक सामग्री विज्ञापन

दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल

पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:

रंगवाली होली का परिचय एवं महात्म्य

होली सनातन संस्कृति का अत्यंत आनंदमयी एवं समरसता का महापर्व है। यह बुराई पर अच्छाई, अहंकार पर भक्ति और नई ऊर्जा के संचार का प्रतीक है।

पहला दिन होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है, जो यह स्मरण कराता है कि प्रभु की अनन्य भक्ति करने वाले प्रह्लाद को अग्नि भी नहीं जला सकी। दूसरे दिन धुलेंडी पर सभी भेदभाव भूलकर अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को गले लगाया जाता है।

शास्त्रोक्त तिथि: फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) एवं चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (रंगवाली धुलेंडी)
व्रत व साधना स्वरूप: होलिका भस्म वंदन, गुलाल अर्पण, परस्पर सौहार्द व सात्विक भोज

रंगवाली होली २०२६: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त

द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२६ (विक्रम संवत २०८३) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:

होलिका दहन मुहूर्त ०२ मार्च २०२६, सायं ०६:२५ से रात्रि ०८:५२ बजे तक
धुलेंडी / रंग उत्सव ०३ मार्च २०२६, सम्पूर्ण दिवस
पंचांग सम्मत सुझाव: स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त के अनुसार विभिन्न शहरों में मुहूर्तों में कुछ मिनटों का अंतर संभावित हो सकता है।

संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)

शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:

कच्चा सूत, गोबर के बड़कूले
रोली, अक्षत, बताशे, कच्चा नारियल
प्राकृतिक अबीर, गुलाल व गुझिया

चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि

शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

१
चरण १: होलिका दहन की पूर्व संध्या पर स्नान कर होलिका स्थल पर जाएं।
२
चरण २: कच्चा सूत होलिका के चारों ओर लपेटें और पूजन कर दहन करें।
३
चरण ३: अगली सुबह होलिका भस्म का तिलक माथे पर लगाएं और राधा-कृष्ण को गुलाल अर्पित करें।
ADVERTISEMENT
भक्तिलोक प्रायोजित धार्मिक सामग्री विज्ञापन

पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास

असुरराज हिरण्यकशिपु की बहन होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता में बैठी। भगवान नारायण की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सकुशल बाहर आ गए।

प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक

होलिका भस्म धारण मंत्र

वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च। अतस्त्वं पाहि मां देवि भूते भूतिप्रदा भव॥
भावार्थ: हे पावन भस्म! आप मुझे समस्त अनिष्टों से बचाएं और ऐश्वर्य प्रदान करें।

क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)

क्या करें (करणीय कार्य)

  • होलिका भस्म का तिलक लगाएं।
  • प्राकृतिक हर्बल रंगों का ही प्रयोग करें।

क्या न करें (वर्जित कार्य)

  • रासायनिक रंगों का प्रयोग न करें।
  • नशे और हुड़दंग से दूर रहें।

रंगवाली होली संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQ)

शास्त्रों के अनुसार भद्रा में होलिका दहन करने से लोक में अमंगल का भय रहता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।

पर्व संक्षिप्त विवरण

पर्व का नाम: रंगवाली होली
तारीख (२०२६): ०३ मार्च २०२६, मंगलवार
आराध्य देव: भक्त प्रह्लाद, भगवान नृसिंह व राधा-कृष्ण
पर्व श्रेणी: वसंत रंगोत्सव
विक्रम संवत: २०८३
शक संवत: १९४८
मित्रों व परिजनों के साथ साझा करें:
ADVERTISEMENT
भक्तिलोक प्रायोजित विज्ञापन