दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
रंगवाली होली का परिचय एवं महात्म्य
होली सनातन संस्कृति का अत्यंत आनंदमयी एवं समरसता का महापर्व है। यह बुराई पर अच्छाई, अहंकार पर भक्ति और नई ऊर्जा के संचार का प्रतीक है।
पहला दिन होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है, जो यह स्मरण कराता है कि प्रभु की अनन्य भक्ति करने वाले प्रह्लाद को अग्नि भी नहीं जला सकी। दूसरे दिन धुलेंडी पर सभी भेदभाव भूलकर अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को गले लगाया जाता है।
रंगवाली होली २०२९: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२९ (विक्रम संवत २०८६) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
असुरराज हिरण्यकशिपु की बहन होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता में बैठी। भगवान नारायण की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सकुशल बाहर आ गए।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
होलिका भस्म धारण मंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- होलिका भस्म का तिलक लगाएं।
- प्राकृतिक हर्बल रंगों का ही प्रयोग करें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- रासायनिक रंगों का प्रयोग न करें।
- नशे और हुड़दंग से दूर रहें।