दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
राम नवमी का परिचय एवं महात्म्य
श्री राम नवमी धर्म, सत्य और मर्यादा के सर्वोच्च आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का अवतरण दिवस है। अयोध्या में मध्याह्न काल में प्रभु श्री हरि ने अवतार धारण किया था।
भगवान राम का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए मर्यादा, कर्तव्य, सेवा और सत्य का जीवंत दर्शन है। इस दिन व्रत रखने और रामचरितमानस पाठ से समस्त क्लेश दूर होते हैं।
राम नवमी २०३०: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०३० (विक्रम संवत २०८७) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त खीर से चैत्र शुक्ल नवमी को प्रभु श्री राम का प्राकट्य हुआ। संपूर्ण अयोध्या में आनंद छा गया।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
राम तारक महामंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- मध्याह्न १२:०० बजे प्रभु के जन्म का दर्शन व स्तुति करें।
- भोग में तुलसी दल अनिवार्य रूप से रखें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- बिना तुलसी दल के प्रभु को भोग न लगाएं।