kriahna bhajan krishna bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Vo Jo Bhanu Baba Ki Dulari Hai Lyrics (वो जो भानु बाबा की दुलारी है) – Radha Bhajan 2026 | Shyama Ji Hitkari Hai

वो जो भानु बाबा की दुलारी है भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। दृष्टि शर्मा द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय राधा भजन के बोल, अर्थ और भावार्थ देखें | Bhaktilok

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 वो जो भानु बाबा की दुलारी है – बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Vo Jo Bhanu Baba Ki Dulari Hai Lyrics In Hindi) – Radha Bhajan 2026 | Shyama Ji Hitkari Hai

दृष्टि शर्मा कृत || स्वर: दृष्टि शर्मा

📝 भजन विवरण

🎤 गायिका/लेखिका: दृष्टि शर्मा
🏷️ श्रेणी: राधा भजन / श्यामा भजन
📍 भाव: प्रेम, श्रद्धा, समर्पण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

वो जो भानु बाबा की दुलारी है..
बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है
मैं क्यों अपनी परवाह करूं
मेरी श्यामा जू हितकारी है..

॥ अंतरा १ ॥

मेरी लाडो जिनपे रीझ जाए, उनको ही ब्रज में बुलाती है,
उन्हें आंचल में बिठला करके, प्यारी नित नित प्यार लुटाती है..

वो जो श्यामा जी की अटारी है, हमें प्राणों से भी प्यारी है..!!
मैं क्यों अपनी परवाह करूं, मेरी श्यामा जू हितकारी है...

॥ अंतरा २ ॥

करुणा मई श्यामा प्यारी है, अधमों को भी लाड लडाती है..
करुणा मई श्यामा प्यारी है, अधमों को भी लाड लडाती है..
मुझ जैसी कपटी पापी को, प्यारी नित नए लाड लडाती है..
कोई भाव से राधा नाम कहे.. प्यारी ठाकुर से मिलवाती है..
वो जो भानु बाबा की दुलारी है..
बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है

॥ अंतरा ३ ॥

अब एक ही आस मेरे मन की, मेरा हर अंग राधा नाम कहे
दिन रैन हीं नाम भजूं प्यारी, और नित ही दर्शन होता रहे
जब दृष्टि पड़ी तेरी चौखट पे.., सब सुध बुध तो पे वरी है..
वो जो भानु बाबा की दुलारी है..
बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है

वो जो भानु बाबा की दुलारी है..
बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है
मैं क्यों अपनी परवाह करूं
मेरी श्यामा जू हितकारी है..

✍️ गीतकार एवं गायिका :- दृष्टि शर्मा

Lyrics & Singer: Drishti Sharma

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "वो जो भानु बाबा की दुलारी है" राधा रानी (श्यामा जी) की महिमा का गान है। भानु बाबा (राजा वृषभानु) की दुलारी बेटी राधा रानी अत्यंत सुंदर और प्यारी हैं। भक्त कहता है कि जब श्यामा जू उसकी हितकारी हैं, तो वह अपनी परवाह क्यों करे?

"मेरी लाडो जिनपे रीझ जाए, उनको ही ब्रज में बुलाती है" – राधा रानी जिस पर भी प्रसन्न होती हैं, उन्हें ब्रज में बुला लेती हैं और अपने आंचल में बिठाकर नित नए प्यार से लुटाती हैं। श्यामा जी की अटारी (महल) भक्त को प्राणों से भी प्यारी है।

"करुणा मई श्यामा प्यारी है, अधमों को भी लाड लडाती है" – श्यामा जी करुणा से भरी हुई हैं, वे नीच से नीच (अधम) लोगों को भी लाड-प्यार करती हैं। भक्त स्वयं को कपटी और पापी बताते हुए कहता है कि फिर भी प्यारी उसे नित नए लाड लडाती हैं।

"कोई भाव से राधा नाम कहे.. प्यारी ठाकुर से मिलवाती है" – जो कोई भी सच्चे भाव से राधा नाम का स्मरण करता है, प्यारी राधा उसे ठाकुर जी (कृष्ण) से मिलवा देती हैं। यह राधा नाम की महिमा को दर्शाता है।

"अब एक ही आस मेरे मन की, मेरा हर अंग राधा नाम कहे" – भक्त की एक ही अभिलाषा है कि उसका हर अंग राधा नाम का जाप करे, दिन-रात वह नाम का भजन करे और नित्य दर्शन होते रहें। जब उसकी दृष्टि राधा रानी की चौखट पर पड़ती है, उसकी सारी सुध-बुध समाप्त हो जाती है।

🔍 राधा भजन का विशेष महत्त्व

भानु बाबा की दुलारी: राधा रानी को राजा वृषभानु की पुत्री होने के कारण "भानु बाबा की दुलारी" कहा गया है। यह उनके पारिवारिक गौरव और उनके पिता के प्रेम को दर्शाता है।

श्यामा जू हितकारी: "मैं क्यों अपनी परवाह करूं, मेरी श्यामा जू हितकारी है" – यह पंक्ति भक्त के पूर्ण विश्वास को दर्शाती है। जब राधा रानी स्वयं उसके कल्याण के लिए हैं, तो वह अपनी चिंता क्यों करे? यह समर्पण की पराकाष्ठा है।

अधमों पर कृपा: "अधमों को भी लाड लडाती है" – राधा रानी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे नीच से नीच व्यक्ति पर भी कृपा करती हैं। वे भेदभाव नहीं करतीं। भक्त स्वयं को कपटी और पापी बताकर इसी कृपा का पात्र बनना चाहता है।

राधा नाम की महिमा: "कोई भाव से राधा नाम कहे.. प्यारी ठाकुर से मिलवाती है" – यह बताता है कि राधा नाम ही कृष्ण तक पहुँचने का सबसे सरल मार्ग है। राधा जी अपने भक्तों को स्वयं कृष्ण से मिलवाती हैं।

दृष्टि शर्मा की रचना: यह भजन दृष्टि शर्मा द्वारा लिखा और गाया गया है। उन्होंने अपने नाम "दृष्टि" को भजन में इस प्रकार पिरोया है कि जब दृष्टि राधा की चौखट पर पड़ती है, सब सुध-बुध समाप्त हो जाती है।

💖 राधा नाम का महत्व

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि राधा रानी की कृपा से ही कृष्ण की प्राप्ति होती है। वे करुणामई हैं और सबको अपनाती हैं। यदि राधा जी हितकारी हैं, तो भक्त को किसी बात की चिंता नहीं होनी चाहिए। बस निरंतर राधा नाम का जाप और उनके दर्शन की लालसा ही सच्ची भक्ति है।

✨ समर्पण की भावना

वो जो भानु बाबा की दुलारी है केवल एक भजन नहीं, बल्कि राधा रानी के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम की अभिव्यक्ति है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अपनी परवाह छोड़कर केवल प्रभु की इच्छा पर निर्भर रहना होता है।

🙏 राधे राधे !! श्री राधा कृष्ण की जय !! वृषभानु दुलारी राधा रानी की जय !!

॥ दृष्टि शर्मा कृत राधा भजन ॥
॥ मैं क्यों अपनी परवाह करूं, मेरी श्यामा जू हितकारी है ।।

Lyrics & Singer: Drishti Sharma

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "Vo Jo Bhanu Baba Ki Dulari Hai Lyrics (वो जो भानु बाबा की दुलारी है) – Radha Bhajan 2026 | Shyama Ji Hitkari Hai" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 06 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!