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Jai Jai Radha Raman Hari Bol Lyrics (जय जय राधा रमण हरि बोल) – Achyuta Gopi Devi Dasi Bhajan 2026 | Vrindavan Dhama

167 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 जय जय राधा रमण हरि बोल

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Jai Jai Radha Raman Hari Bol Lyrics In Hindi) – Achyuta Gopi Devi Dasi Bhajan 2026 | Vrindavan Dhama

अच्युता गोपी देवी दासी कृत

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: कीर्तन / राधा-कृष्ण भजन
✍️ रचनाकार: अच्युता गोपी देवी दासी
📍 भाव: जप, कीर्तन, आनंद, समर्पण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

जय जय, राधा... ( राधा ) ॥
जय जय, राधा, रमण हरि बोल,
जय जय, राधा, रमण हरि बोल ॥

जय जय, राधा, रमण हरि बोल,
जय जय, राधा, रमण हरि बोल ॥

हरी, बोल... हरी, बोल ॥
जय जय, राधा, रमण हरि बो...ल ॥

॥ अंतरा १ ॥

जय जय, राधा... ( राधा ) ॥
जय जय, राधा, रमण हरि बोल,
जय जय, राधा, रमण हरि बोल ॥

जय जय, राधा, रमण,
जय जय, राधा, रमण ॥

॥ अंतरा २ ॥

जय जय, राधे, जय जय, श्याम,
जय जय, श्री, वृन्दावन धाम ॥

पावन, राधे, तेरो नाम,
पावन श्री, वृन्दावन धाम ॥

जय जय, राधे, जय जय, श्याम,
जय जय, श्री, वृन्दावन धाम ॥

जय जय, राधा, रमण हरि बोल,
जय जय, राधा, रमण हरि बोल ॥

हरी, बोल... हरी, बोल ॥
जय जय, राधा, रमण हरि बोल ॥

✍️ रचनाकार :- अच्युता गोपी देवी दासी

Composer: Achyuta Gopi Devi Dasi

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "जय जय राधा रमण हरि बोल" एक सरल लेकिन अत्यंत भावपूर्ण कीर्तन है। "राधा रमण" कृष्ण का एक नाम है, जिसका अर्थ है राधा के प्रियतम। यह भजन राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है और भक्तों को उनके नाम का जप करने के लिए प्रेरित करता है।

"जय जय राधा रमण हरि बोल" – भक्त बार-बार राधा रमण (कृष्ण) के नाम का जयकारा लगाने और हरि बोलने (हरि का नाम लेने) का आह्वान करता है। यह एक सामूहिक कीर्तन का रूप है जहाँ सभी मिलकर प्रभु के नाम का उच्चारण करते हैं।

"जय जय राधे, जय जय श्याम" – राधा और श्याम (कृष्ण) दोनों की जयकार की जा रही है। यह राधा-कृष्ण की युगल उपासना को दर्शाता है।

"जय जय श्री वृन्दावन धाम" – वृन्दावन धाम की जयकार की जा रही है। वृन्दावन को राधा-कृष्ण की लीलाभूमि के रूप में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

"पावन राधे तेरो नाम, पावन श्री वृन्दावन धाम" – राधा का नाम पवित्र है और वृन्दावन धाम भी पवित्र है। यह राधा नाम और वृन्दावन की पावनता को रेखांकित करता है।

🔍 कीर्तन का विशेष महत्त्व

राधा रमण का अर्थ: "राधा रमण" कृष्ण का एक विशेष नाम है। रमण का अर्थ है प्रियतम या आनंद देने वाला। राधा रमण अर्थात वह जो राधा को आनंद देते हैं या राधा के प्रियतम। यह नाम राधा और कृष्ण के अटूट प्रेम को दर्शाता है।

हरि बोल: "हरि बोल" का अर्थ है हरि (भगवान) का नाम लेना। कीर्तन में बार-बार "हरि बोल" का उच्चारण किया जाता है जो सामूहिक भक्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है।

वृन्दावन धाम की पावनता: वृन्दावन को पृथ्वी का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है क्योंकि यहाँ राधा-कृष्ण ने अपनी लीलाएँ कीं। इस भजन में "पावन श्री वृन्दावन धाम" कहकर इसकी पावनता को स्वीकार किया गया है।

अच्युता गोपी देवी दासी की रचना: यह भजन अच्युता गोपी देवी दासी द्वारा रचित है। "दासी" उपनाम से पता चलता है कि वे स्वयं को भगवान की दासी (सेविका) मानती हैं। उनका यह कीर्तन राधा-कृष्ण भक्ति परंपरा में एक अमूल्य योगदान है।

सामूहिक कीर्तन का महत्व: इस भजन में बार-बार "बोल" शब्द का प्रयोग सामूहिक कीर्तन के महत्व को दर्शाता है। यह सभी को एक साथ प्रभु के नाम का जप करने के लिए प्रेरित करता है।

💖 राधा-कृष्ण की जयकार

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि राधा रमण (कृष्ण) के नाम का जप ही सबसे बड़ा साधन है। राधा और श्याम की जयकार करते हुए, वृन्दावन धाम की पावनता को याद करते हुए, हम अपने जीवन को पवित्र बना सकते हैं। यह कीर्तन हमें सामूहिक भक्ति के आनंद का अनुभव कराता है।

✨ नाम जप की शक्ति

जय जय राधा रमण हरि बोल केवल एक कीर्तन नहीं, बल्कि नाम जप की शक्ति को उजागर करने वाला माध्यम है। यह हमें सिखाता है कि सरलता से, बिना किसी जटिलता के, केवल प्रभु के नाम का जप करके हम आनंद और शांति प्राप्त कर सकते हैं। राधा का नाम पावन है, वृन्दावन धाम पावन है।

🙏 राधे राधे !! जय राधा रमण हरि !! जय श्री वृन्दावन धाम !!

॥ अच्युता गोपी देवी दासी कृत कीर्तन ॥
॥ जय जय राधा रमण हरि बोल, जय जय राधा रमण हरि बोल ।।

रचनाकार: अच्युता गोपी देवी दासी | Composer: Achyuta Gopi Devi Dasi

श्रेणियां: new radha krishna bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

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